NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
कोरियाई युद्ध के ख़ात्मे के लिए दक्षिण कोरिया ने बहुपक्षीय समझौते की घोषणा की
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाए इन ने कहा कि 1953 में बराबरी पर खत्म हुए कोरियाई युद्ध में शामिल रहे चारों पक्षों ने सैद्धांतिक तौर पर इस युद्ध के ख़ात्मे पर सहमति दे दी है। यह आगे शांति प्रक्रिया की दिशा में बड़ा क़दम है।
पीपल्स डिस्पैच
14 Dec 2021
South Korea

कोरियाई शांति प्रक्रिया में बड़े घटनाक्रम में, दक्षिण कोरिया, उत्तर कोरिया, चीन और अमेरिका ने कोरियाई युद्ध के खात्मे पर सहमति जता दी है। सोमवार को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाएइन ने घोषणा में कहा कि चारों पक्षों ने युद्ध के खात्मे पर, 1950 में इसकी शुरुआत के 71 साल बाद, सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

चार दिन की ऑस्ट्रेलिया यात्रा पर गए राष्ट्रपति मून जाएइन ने कैनबरा में कहा कि उत्तर कोरिया के प्रति अमेरिका का दुश्मनी भरा रवैया यूं वजहों में से था, जिनके चलते शांति वार्ता पर विराम लग जाता था। उत्तर कोरिया ने शांति समझौतों को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका की "विरोध नीति" के खात्मे, जिसमें एकतरफा प्रतिबंध और अमेरिका के नेतृत्व में की गई घेराबंदी शामिल है", उसके खात्मे की शर्त रखीं। जबकि अमेरिका का कहना है कि पहले से कोई शर्तें तय ना की जाएं।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने कहा,"इसके चलते हम दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया व अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच हुई घोषणा पर बातचीत करने के लिए नहीं बैठ पाए। अब हमें आशा है कि आगे बातचीत शुरू होगी। हम इसके लिए कोशिशें भी कर रहे हैं।"

1953 के बाद से छुटपुट झड़पों को छोड़कर उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच कोई बड़ा सशस्त्र टकराव नहीं हुआ है, लेकिन कोरियाई युद्ध के खात्मे की आधिकारिक घोषणा एक प्रतीकात्मक संकेत है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति का कहना है कि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए इस तरीके की आधिकारिक घोषणा जरूरी थी।

मून जाए इन ने कहा कि "युद्ध समाप्ति की घोषणा ही मात्र आखिरी लक्ष्य नहीं था। हथियारों के आधार पर पिछले 70 साल से टिकी अस्थिर व्यवस्था के खात्मे के साथ साथ यह उत्तर और दक्षिण कोरिया व अमेरिका के बीच बातचीत की शुरुआत का मौका हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा, "यह हमें कोरिया प्रायद्वीप में परमाणु निष्पादन और शांति की प्रक्रिया पर बातचीत की शुरुआत में मदद दे सकता है।"

यह पहली बार नहीं है जब कोरिया युद्ध को खत्म करने के लिए किसी औपचारिक समझौते पर पहुंचा गया हो। 2018 में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के मून जाए इन के बीच सम्मेलन में दोनों पक्षों ने पन्मुंजोम घोषणा का ऐलान किया था, जो युद्ध पर औपचारिक शांति समझौते की दिशा में बेहद अहम द्विपक्षीय समझौता था।

लंबे वक़्त से थमा था मामला

1950 में शुरू हुआ कोरियाई युद्ध तब चालू हुआ था जब उत्तर कोरिया ने किम इल सुंग के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी की सत्ता ने अमेरिका समर्थित "सिंगमन रही" के नेतृत्व वाले दक्षिण कोरिया पर हमला बोल दिया। इसके बाद कम्युनिस्ट विरोधी नरसंहार हुआ, जिसमें 1 लाख से ज्यादा कम्युनिस्टों को मार दिया गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक विवादित मैंडेट के समर्थन के साथ अमेरिका ने समजवादी ताकतों को पीछे धकेलने के लिए कोरिया प्रायद्वीप में हमला बोल दिया।

1953 में बराबरी पर तब युद्ध हुआ, जब संयुक्त राष्ट्र संघ कमांड (जिनका ज़्यादातर नेतृत्व अमेरिका के हाथ में था) उत्तर कोरिया और चीन के बीच युद्ध विराम पर सहमति बनी। दक्षिण कोरिया ने इस पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया। क्योंकि उसकी मंशा ताकत के जरिए कोरिया को एक करने की थी।

चीन और उत्तर कोरिया ने तो 1954 में ही शांति समझौते की अपील की थी। लेकिन अमेरिका के विरोधी रवैए, फिर दक्षिण कोरिया में "रही तानाशाही" के कम्युनिस्ट विरोधी रवैए और उसके बाद तीसरे और चौथे गणराज्य के दौरा आई तानाशाही के चलते तकनीकी तौर पर यह युद्ध जारी रहा, जिसके चलते कोरिया प्रायद्वीप में शांति प्रक्रिया लंबित रही।

2018 में शुरू हुई हालिया शांति वार्ता की शुरुआत राष्ट्रपति मून जाए इन ने की थी। लेकिन 2019 में डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच हुए सम्मेलन के बाद यह भी थम गई थी। क्योंकि उस सम्मेलन में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। फिर आगे अमेरिका ने उत्तर कोरिया पर और भी कठोर प्रतिबंध लगाए, जिनके चलते शांति प्रक्रिया थम गई, जबकि दोनों कोरियाई देशों के बीच अच्छी प्रगति हो चुकी थी।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

South Korea declares multilateral agreement to end Korean War

Kim Jong-un
Korean peace process
Korean War
Moon Jae In
US sanctions on North Korea

Related Stories

गुटनिरपेक्ष आंदोलन और नेहरू का सैद्धांतिक रुख़: II

क्या अमेरिका को अनदेखा करने में कामयाब होंगे दोनों कोरिया?

उत्तर कोरिया केवल अपनी ज्ञात परमाणु परीक्षण स्थल को खारिज करना शुरू करेगा

Kim Jong-un परमाणु निशस्त्रीकरण के लिए प्रतिबद्ध, क्या यूएस राह बनाएगा?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर
    30 Apr 2022
    मुज़फ़्फ़रपुर में सरकारी केंद्रों पर गेहूं ख़रीद शुरू हुए दस दिन होने को हैं लेकिन अब तक सिर्फ़ चार किसानों से ही उपज की ख़रीद हुई है। ऐसे में बिचौलिये किसानों की मजबूरी का फ़ायदा उठा रहे है।
  • श्रुति एमडी
    तमिलनाडु: ग्राम सभाओं को अब साल में 6 बार करनी होंगी बैठकें, कार्यकर्ताओं ने की जागरूकता की मांग 
    30 Apr 2022
    प्रदेश के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 22 अप्रैल 2022 को विधानसभा में घोषणा की कि ग्रामसभाओं की बैठक गणतंत्र दिवस, श्रम दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती के अलावा, विश्व जल दिवस और स्थानीय शासन…
  • समीना खान
    लखनऊ: महंगाई और बेरोज़गारी से ईद का रंग फीका, बाज़ार में भीड़ लेकिन ख़रीदारी कम
    30 Apr 2022
    बेरोज़गारी से लोगों की आर्थिक स्थिति काफी कमज़ोर हुई है। ऐसे में ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि ईद के मौक़े से कम से कम वे अपने बच्चों को कम कीमत का ही सही नया कपड़ा दिला सकें और खाने पीने की चीज़ ख़रीद…
  • अजय कुमार
    पाम ऑयल पर प्रतिबंध की वजह से महंगाई का बवंडर आने वाला है
    30 Apr 2022
    पाम ऑयल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं। मार्च 2021 में ब्रांडेड पाम ऑयल की क़ीमत 14 हजार इंडोनेशियन रुपये प्रति लीटर पाम ऑयल से क़ीमतें बढ़कर मार्च 2022 में 22 हजार रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गईं।
  • रौनक छाबड़ा
    LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम
    30 Apr 2022
    कर्मचारियों के संगठन ने एलआईसी के मूल्य को कम करने पर भी चिंता ज़ाहिर की। उनके मुताबिक़ यह एलआईसी के पॉलिसी धारकों और देश के नागरिकों के भरोसे का गंभीर उल्लंघन है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License