NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अफ़ग़ानिस्तान को सताता सीरिया का भूत
मिली रिपोर्टों के मुताबिक अगर सुरक्षा परिदृश्य गंभीर रूप से बिगड़ता है, तो कोई भी रूसी कार्रवाई "सीरिया पर की गई कार्रवाई के समान" हो सकती है, जिसमें हवाई हमले और विशेष सुरक्षा अभियान बलों की तरफ़ से हुई कार्रवाई भी शामिल होगी।
एम. के. भद्रकुमार
09 Aug 2021
Translated by महेश कुमार
डूरंड लाइन पर फेंसिंग का काम लगभग पूरा हो गया है। अफ़ग़ानिस्तान के साथ खैबर सीमा में तैनात पाकिस्तानी सैनिक
डूरंड लाइन पर फेंसिंग का काम लगभग पूरा हो गया है। अफ़ग़ानिस्तान के साथ खैबर सीमा में तैनात पाकिस्तानी सैनिक

सत्ता के गलियारों में अपने लिंसंपर्क के माध्यम से मास्को दैनिक वेदोमोस्ती ने रिपोर्ट किया है कि अफ़ग़ानिस्तान की ओर से हमलों की स्थिति में रूस उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान को "सीमित सैन्य सहायता" देगा, जिसमें हथियारों की आपूर्ति, हवाई समर्थन और विशेष बलों की तैनाती शामिल होगी, लेकिन फिलहाल ऐसी "कोई योजना नहीं है" वह क्षेत्र में प्रमुख जमीनी बलों को तैनात करेगा”।

रूसी रक्षा मंत्रालय के करीबी सूत्रों ने बताया है कि विशेष कार्यवाई सुरक्षा बल "तनाव बढ़ने पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं"। उक्त दैनिक रिपोर्ट एक रक्षा विशेषज्ञ की राय के साथ समाप्त हुई जिसमें उन्होने कहा कि यदि सुरक्षा परिदृश्य गंभीर रूप से बिगड़ जाता है, तो रूसी ऑपरेशन "सीरिया पर की गई कार्यवाई के समान हो सकता है, जिसमें हवाई हमले और विशेष सुरक्षा बालों के मिशन भी शामिल होंगे। जैसा कि सीरिया में हुआ था, इस तरह के ऑपरेशन में बिना निर्देशित युद्ध सामग्री का सीमित उपयोग शामिल होगा जो संभावित शत्रुता की प्रकृति को देखते हुए काफी प्रभावी साबित हो सकता है।”

दरअसल, हाल ही में रूसी सैन्य तैयारियों का गियर बदल गया है। रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर लगभग 2500 सैनिकों के साथ, 5 अगस्त को अफगान सीमा से 20 किमी दूर ताजिकिस्तान के खारब-मैदान अभ्यास रेंज में बड़े पैमाने पर संयुक्त सैनिक अभ्यास शुरू किया है, जो अगली 10 अगस्त तक जारी रहेगा। जैसा कि बताया जा रहा है, इस अभ्यास में 2500 सैनिक शामिल हैं, उनमें से 1800 रूसी सैनिक हैं, और ज्यादातर को ताजिकिस्तान में मौजूद रूस के 201वें सैन्य अड्डे की इकाइयों से लिया गया हैं।

रूस के सेंट्रल मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट के डिप्टी कमांडर लेफ्टिनेंट-जनरल येवगेनी पोप्लाव्स्की ने मीडिया को बताया कि "सैन्य खतरे बढ़ रहे हैं और स्थिति तेजी से तनावपूर्ण और अप्रत्याशित होती जा रही है। संयुक्त अभ्यास हमें संचित युद्ध अनुभव की धुरी को नापने में मदद करेगा, सेना की बेहतरीन कार्यवाई के सर्वोत्तम रूपों कद अपनाने में मदद करेगा और युद्ध के मामले में सामान्य दृष्टिकोण अपनाने में सक्षम बनाएगा।”

इस बीच, अफगान में उपजे हालात की पृष्ठभूमि में पिछले सप्ताह एक समानांतर रूसी-उज़्बेक "सामरिक अभ्यास" भी किया गया था, जो शुक्रवार को अमू दरिया पर उज़्बेक सीमावर्ती शहर तेर्मेज़ के पास समाप्त हुआ था। 

इस सैनिक अभ्यास ने अमू दरिया सीमा पार करने वाले अफ़ग़ानिस्तान से अवैध सशस्त्र समूहों का मुकाबला करने के लिए एक संयुक्त रूसी-उज़्बेक दल बनाने और विशेष अभियानों चलाने का फैंसला किया है।

दिलचस्प बात यह है कि रूस के केंद्रीय सैन्य क्षेत्र के कमांडर मिखाइल टेप्लिंस्की ने मीडिया को बताया कि, "यह सैनिक अभ्यास सीरिया में रूसी सेना द्वारा अवैध सशस्त्र समूहों को रोकने के लिए चलाए गए अभियान के अनुभव पर आधारित है।"

दोनों देशों से भाग लेने वाले सैनिकों की संख्या लगभग 1500 है, जो विशेष वाहनों और विमानों से लैस थे, जिन्होंने हवाई टोही विमानों के जरिए बड़े सशस्त्र समूहों को सीमा पार करने से रोका है। गौरतलब बात यह है कि रूस के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ आर्मी जनरल वालेरी गेरासिमोव ने अभ्यास का जायज़ा लेने के लिए टर्मेज़ का दौरा किया था।

उज्बेकिस्तान की अफ़ग़ानिस्तान के साथ 144 किमी की सीमा है जो तुर्कमेनिस्तान से शुरू होकर अमू दरिया से होते हुए ताजिकिस्तान तक जाती है। इसकी तुलना में, ताजिकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान सीमा की लंबाई 1,357 किमी है और यह पश्चिम में उज्बेकिस्तान से होते हुए  पूर्व में चीन के साथ ट्रिपपॉइंट तक जाती है, और यह लगभग पूरी तरह से अमू दरिया, प्यांज और पामीर नदियों से होते हुए वखान गलियारे तक जाती है। 

ताजिक-अफगान सीमा की रक्षा करना बहुत कठिन काम है क्योंकि पूरा इलाका एक पहाड़ी इलाका है। रूसी-उज़्बेक-ताजिक सैनिक अभ्यास विशेष सैनिक समूहों के गठन की परिकल्पना से जुड़ा है, जो अपने दम पर या मशीनीकृत पैदल सेना और टोही, कवच, तोपखाने और अन्य इकाइयों के लड़ाकू बलों के साथ काम कर सकते हैं, जिसमें रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक युद्ध दल और वायु रक्षा, यूएवी, संचार और गार्ड इकाइयाँ आदि शामिल हैं।  

इस अभ्यास ने दुश्मन के इलाके में ऑपरेशन को बेहतर बनाया है, जिसमें फील्ड इकाइयों को रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा और दुश्मन की टोही करने वाली तकनीक को मोबाइल कमांड सेंटर से मार्गदर्शन और स्मार्ट हथियारों, अटैक ड्रोन आदि के इस्तेमाल का मार्गदर्शन मिल रहा है। 

रूसी मूल्यांकन को माने तो, बाइडेन प्रशासन अफ़ग़ानिस्तान में एक खुली सैन्य उपस्थिति दर्ज़ करने और सीरिया में एक हाइब्रिड युद्ध शुरू करने का युद्धाभ्यास कर रहा है। अमेरिका के भूराजनीतिक इरादों को लेकर मॉस्को को गहरा संदेह है।

रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने हाल ही में अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि: "मैं यहां एक बात कह सकता हूं, और यह काफी तार्किक बात है: यदि आप मूल रूप से बाड़ के पीछे खड़े हैं तो आप पीछे क्यों हट रहे हैं, और आप उसमें मौजूद झरोकों से झांक कर देखने की कोशिश कर रहे कि वहाँ चल क्या रहा है? फिर पीछे क्यों हट रहे हो? ताकि सेमा पर बने रहो? जवाब स्पष्ट है: कि आप मध्य एशियाई क्षेत्र में जड़ें जमाने का प्रयास कर रहे है…” 

आखिर "बड़ी तस्वीर" है क्या? अफ़ग़ानिस्तान में चल रहा गृहयुद्ध जल्द ही या थोड़ा बाद में इन क्षेत्रों पर प्रभाव डालेगा। इससे बेशक, बहुत खून-खराबा होगा और असहाय नागरिकों को बड़े पैमाने पर आंतरिक विस्थापन का शिकार होना पड़ेगा।   

सऊदी सरकार का दैनिक अख़बार, अशरक अल-अवसात ने हाल ही में सीरियाई संघर्ष का विश्लेषण किया है: " वर्तमान में रूसी सैन्य दृष्टिकोण का मानना है कि मानव संसाधनों की कमी, आर्थिक संकट और विदेशी सेनाओं के हस्तक्षेप के कारण सीरियाई सेना देश के सभी हिस्सों को नियंत्रित करने में असमर्थ रही हैं। इसलिए, "अस्थायी समाधान" प्रभाव के पड़ोसी क्षेत्रों में निहित है: जिसमें, उत्तर-पश्चिम में तुर्की के साथ एक समझौता होना, उत्तर-पूर्व में अमेरिका के साथ एक समझौता, दक्षिण-पश्चिम में फ्री सीरियन आर्मी में पूर्व सेनानियों के साथ एक सम्झौता और सरकारी बलों के साथ एक समझौता, मध्य-पश्चिमी क्षेत्रों में रूस और ईरान के साथ सम्झौता", कुछ ऐसे कदम हैं जिससे सीरिया में युद्ध थमा है।  

सीरिया के चित्र में थोड़ा फेरबदल करके देखे तो बदला चित्र दिखाएगा कि निकट भविष्य में अफगान की तस्वीर कैसी नज़र आएगी:राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में अफगान सरकार का नियंत्रण सिकुड़ रहा है। ओह, अफ़ग़ानिस्तान या सीरिया जैसे देश, हालांकि प्राचीन संस्कृतियां हैं, लगता जो हाल ही में पैदा हुए हैं।

अप्रत्याशित रूप से, पाकिस्तान अपनी सीमा खोलने और अफगान शरणार्थियों को अंदर जाने देने के अमेरिकी दबाव का विरोध कर रहा है। मेरे विचार से, तालिबान वास्तव में दक्षिण-पूर्वी में  चमन स्थित सीमा क्रॉसिंग को बंद करने की पहल करके पाकिस्तान पर एक बड़ा उपकार कर रहा है, जिस सीमा को तालिबान ने पिछले महीने अफगान बलों से छिन कर कब्जा कर लिया था। 

पाकिस्तान ने 2,611 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा पर 90 प्रतिशत बाड़ लगाने का काम पूरा कर लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉर्डर बैरियर में चेन-लिंक फेंस के दो सेट होते हैं, जो 2 मीटर की की लंबाई पर अलग हो जाते हैं, जो कंसर्टिना वायर कॉइल से भरा होता है। डबल बाड़ लगभग 4 मीटर ऊंची है। सीमा पर किसी भी गतिविधि पर नजर रखने के लिए सेना ने निगरानी कैमरे लगाए हैं।

समान रूप से देखा जाए तो रूस और मध्य एशियाई राष्ट्र जब तक सुरक्षित हैं तब तक कि कुंदुज़ और तखर तालिबान के नियंत्रण में रहते हैं। फिर से, तालिबान के पश्चिम में निम्रोद पर कब्जा करने से, ईरान की सीमा भी सुरक्षित रहेगी। तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसियों को ऐसा आश्वासन दिया है।

इस मामले में भारत एकमात्र अपवाद है। अफ़ग़ानिस्तान एक बड़ा देश है और अब समय आ गया है कि भारतीय विश्लेषक जो 'हमेशा के लिए' चलने वाले युद्ध चलाने की बात करते रहते  हैं उन्हे युद्ध के संभावित विघटन पर विचार करना चाहिए। रूस ने चेतावनी दी है कि बड़े पैमाने की शत्रुता और लंबे समय तक गृहयुद्ध के बढ़ने का जोखिम है और जो एक "कठोर वास्तविकता बन गई है।" यदि गृह युद्ध के हालात बढ़ते हैं, तो अफ़ग़ानिस्तान के टुकड़े होना तय है।

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Spectre of Syria Haunts Afghanistan

Afghanistan
Russian defence ministry
Troops
Sergey Shoigu

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी

तालिबान को सत्ता संभाले 200 से ज़्यादा दिन लेकिन लड़कियों को नहीं मिल पा रही शिक्षा

रूस पर बाइडेन के युद्ध की एशियाई दोष रेखाएं

काबुल में आगे बढ़ने को लेकर चीन की कूटनीति

तालिबान के आने के बाद अफ़ग़ान सिनेमा का भविष्य क्या है?

अफ़ग़ानिस्तान हो या यूक्रेन, युद्ध से क्या हासिल है अमेरिका को

बाइडेन का पहला साल : क्या कुछ बुनियादी अंतर आया?

सीमांत गांधी की पुण्यतिथि पर विशेष: सभी रूढ़िवादिता को तोड़ती उनकी दिलेरी की याद में 

अफ़ग़ानिस्तान में सिविल सोसाइटी और अधिकार समूहों ने प्रोफ़ेसर फ़ैज़ुल्ला जलाल की रिहाई की मांग की


बाकी खबरें

  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License