NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
प.बंगाल में घृणा की राजनीति के प्रतिरोध में बना फ़ासिस्ट विरोधी फ़ोरम  
इस साल होने वाले  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले ध्रुवीकरण की प्रक्रिया तेज़ हो गई है, ऐसे में बुद्धिजीवियों, सांस्कृतिक और राजनीतिक कर्ताओं के समूह सूबे में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए एकजुट हो रहे हैं। 
संदीप चक्रवर्ती
08 Jan 2021
प.बंगाल में घृणा की राजनीति के प्रतिरोध में बना फ़ासिस्ट विरोधी फ़ोरम  
प्रतीकात्मक तस्वीर।  सौजन्य :  PTI

कोलकाता :  अगले कुछ महीनों में पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। इसके पहले, सूबे में जानबूझ कर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ा जा रहा है। इन घटनाओं से चिंतित वामपंथी रुझान के बुद्धिजीवी उसका प्रतिरोध करने के लिए एक साथ जुटने लगे हैं। वे सब मिलकर ‘फासिस्ट’ विरोधी लेखकों और कलाकारों’ के संघ को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं, जिनकी 1940 के तात्कालीन बंगाल राज्य में फासीवादी और संप्रदाय विरोधी ताकतों से लोहा लेने की एक शानदार विरासत रही है। 

कोलकाता में अगले 10 जनवरी को आयोजित एक सम्मेलन में इस फोरम का गठन किया जाएगा।  इसका मकसद विधानसभा चुनावों के पहले राज्य में फैलाई जा रही घृणा की राजनीति को रोकना है। 

नाटककार कौशिक सेन,  पबित्र सरकार,  लेखक मनोरंजन व्यापारी,  थिएटरकर्मी जयराज भट्टाचार्य, मिरातुन नाहर,  कवि मदाक्रांता सेन आदि इसके उद्घाटन कार्यक्रम में अपने विचार रखेंगे। प्रख्यात इतिहासकार और समाज विज्ञानी सोहनलाल दत्ता गुप्ता सम्मेलन में उद्घाटन भाषण देंगे। 

प्रसिद्ध भाषाविज्ञानी (जापान के स्टेट ऑर्डर ऑफ मेरिट ‘राइजिंग ऑर्डर ऑफ द सन’ के विजेता) और रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर पबित्र सरकार ने इस फोरम के बारे में न्यूज़ क्लिक को बताया कि मुल्कराज आनंद जैसे ख्यातिलब्ध लेखकों ने प्रगतिशील लेखक संघ का शुभारंभ किया था और दूसरे विश्व युद्ध के पहले, जब हिटलर अपने शिखर पर था, भारत में फासीवाद विरोधी लेखकों और कलाकारों के एक संघ की बुनियाद रखी गई थी। 

संयोग से, फासीवाद विरोधी फोरम की तरफ से 1941 में सोमेन्द्रनाथ टैगोर के साथ ज्योति बसु (एक वामपंथी नेता, जो बाद में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी बने)  भी  विश्व कवि रवींद्रनाथ टैगोर से आशीर्वाद लेने गए थे। इस संदर्भ में, 1946 में ढाका में भड़के दंगों को याद किया जा सकता है, जिसमें साहित्यिक बिरादरी से शहीद होने वाले सोमेन चंदा पहले रचनाधर्मी थे। उनकी हत्या उस समय कर दी गई थी, जब वे ढाका में फासीवाद विरोधी लेखकों और कलाकारों के फोरम की तरफ से सम्मेलन का आयोजन कर रहे थे। 

मौजूदा परिस्थितियों में अब जबकि फोरम पुन: सक्रिय हो रहा है तो सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, कलाकारों और लेखकों के बीच व्यापक एकता बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने कहा कि उन सभी व्यक्तियों में, “फासीवाद विरोधी प्रतिबद्धता और लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक सिद्धांतों में अडिग विश्वास”, इस फोरम की एकता की बुनियाद होगी। सरकार ने आगे कहा, “उस दिन (10 जनवरी को उद्घाटन के मौके पर) फासीवादी सत्ताधारी पार्टी ( मतलब भाजपा) और पश्चिम बंगाल में  दखल बनाने के उसके प्रयास पर विचार-विमर्श किया जाएगा।”

अभी हाल ही में, बराकपोर में नाटककार चंदन सेन की अध्यक्षता में एक अन्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इसमें  शामिल हुए अनेक सांस्कृतिक व्यक्तियों ने नई दिल्ली की सीमाओं पर कड़ाके की ठंड में प्रदर्शन कर रहे हजारों किसानों का खुलकर समर्थन किया था। इस कार्यक्रम को कौशिक सेन जैसे संस्कृतिकर्मी और सीपीआई (एम) के कुछ नेताओं ने भी संबोधित किया था। 

इस बीच, धुर वामपंथी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को भारत सभा हाल में—नो वोट टू  बीजेपी—अभियान का शुभारंभ किया था, जो ‘बंगाल अगेंस्ट फासिस्ट आरएसएस-बीजेपी’ के बैनर तले एकजुट हुए।  इन लोगों ने बंगाल की जनता से आह्वान किया है कि वे अगले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वोट न दें। 

फोरम की तरफ से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि “इसके अधिकतर कार्यकर्ता नक्सली और गैर नक्सली मूल के हैं, जिन्होंने लॉकडाउन के पहले नरेंद्र मोदी-अमित शाह की सत्ता की तरफ नागरिकता के मसले को साम्प्रदायिकता के रूप देने वाले -सीएए-एनआरसी-एनपीआर-के खिलाफ आयोजित नागरिकों के सम्मेलन में भाग लिय़ा था।  इसके पहले कि देर हो जाए, वे उस जनसंवेग को आगामी विधानसभा चुनाव में भी बनाए रखना चाहते हैं।”

इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Steps on to Revive ‘Anti-Fascist’ Forum to Resist Hate Politics in West Bengal

Anti-Fascist Writers Artists
Bengal Intellectuals
West Bengal Assembly Election
Fascism
communal politics
BJP
Antifa

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन संकट, भारतीय छात्र और मानवीय सहायता
    01 Mar 2022
    यूक्रेन में संकट बढ़ता जा रहा है। यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने मंगलवार को छात्रों सहित सभी भारतीयों को उपलब्ध ट्रेन या किसी अन्य माध्यम से आज तत्काल कीव छोड़ने का सुझाव दिया है।
  • Satellites
    संदीपन तालुकदार
    चीन के री-डिज़ाइंड Long March-8 ने एक बार में 22 सेटेलाइट को ऑर्बिट में भेजा
    01 Mar 2022
    Long March-8 रॉकेट चीन की लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी की अकादमी में बना दूसरा रॉकेट है।
  • Earth's climate system
    उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: अब न चेते तो कोई मोहलत नहीं मिलेगी
    01 Mar 2022
    आईपीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में साफ़ कहा है कि जलवायु परिवर्तन से आर्थिक दरार गहरी होगी, असमानता में इजाफ़ा होगा और ग़रीबी बढ़ेगी। खाने-पीने की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ेंगे और श्रम व व्यापार का बाजार…
  • nehru modi
    डॉ. राजू पाण्डेय
    प्रधानमंत्रियों के चुनावी भाषण: नेहरू से लेकर मोदी तक, किस स्तर पर आई भारतीय राजनीति 
    01 Mar 2022
    चुनाव प्रचार के 'न्यू लो' को पाताल की गहराइयों तक पहुंचता देखकर व्यथित था। अचानक जिज्ञासा हुई कि जाना जाए स्वतंत्रता बाद के हमारे पहले आम चुनावों में प्रचार का स्तर कैसा था और तबके प्रधानमंत्री अपनी…
  • रवि शंकर दुबे
    पूर्वांचल की जंग: यहां बाहुबलियों के इर्द-गिर्द ही घूमती है सत्ता!
    01 Mar 2022
    यूपी में सत्ता किसी के पास भी हो लेकिन तूती तो बाहुबलियों की ही बोलती है, और पूर्वांचल के ज्यादातर क्षेत्रों में उनका और उनके रिश्तेदारों का ही दबदबा रहता है। फिर चाहे वो जेल में हों या फिर जेल के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License