NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
भारत
राजनीति
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है…
दिल्ली में ढाई महीने से चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर जो हमले किए गए हैं, जिस तरह की दर्दनाक हिंसा हुई है, इस माहौल में हमें पाकिस्तानी शायरा ज़ेहरा निगाह की यह नज़्म पढ़नी चाहिए।
न्यूज़क्लिक डेस्क
26 Feb 2020
सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है
Image Courtesy: दानिश सिद्दीक़ी

दिल्ली में ढाई महीने से नागरिकता संशोधन क़ानून-एनआरसी-एनपीआर को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी थे। लेकिन शनिवार की रात से उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा शुरू हो गई। इस हिंसा में जान, माल-ओ-असबाब के साथ-साथ जज़्बातों का भी क़त्ल किया गया है। अब यह हिंसा सीएए के इर्द-गिर्द भी नहीं दिखती है, ऐसा लगता है जैसे यह सिर्फ़ नफ़रत है जो बंदूकों-लाठीयों के साथ सड़कों पर मौत का खेल खेल रही है।

ऐसे माहौल में हम सब को ज़ेहरा निगाह की यह नज़्म पढ़नी चाहिए जिसमें वो कहती हैं, कि जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है; लिहाज़ा यह एक अपील भी हैं हमारे शहर में अपना जंगलों का ही कोई क़ानून नाफ़िज़ कर दिया जाए।

सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है 

                                                                                                 - ज़ेहरा निगाह

सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है

सुना है शेर का जब पेट भर जाए तो वो हमला नहीं करता

दरख़्तों की घनी छाँव में जा कर लेट जाता है

 

हवा के तेज़ झोंके जब दरख़्तों को हिलाते हैं

तो मैना अपने बच्चे छोड़ कर

कव्वे के अंडों को परों से थाम लेती है

सुना है घोंसले से कोई बच्चा गिर पड़े तो सारा जंगल जाग जाता है

 

सुना है जब किसी नद्दी के पानी में

बए के घोंसले का गंदुमी साया लरज़ता है

तो नद्दी की रुपहली मछलियाँ उस को पड़ोसी मान लेती हैं

 

कभी तूफ़ान आ जाए, कोई पुल टूट जाए तो

किसी लकड़ी के तख़्ते पर

गिलहरी, साँप, बकरी और चीता साथ होते हैं

 

सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है

ख़ुदावंदा! जलील ओ मो'तबर! दाना ओ बीना! मुंसिफ़ ओ अकबर!

मिरे इस शहर में अब जंगलों ही का कोई क़ानून नाफ़िज़ कर!

सुना है जंगलों का भी कोई दस्तूर होता है...

CAA Protests
CAA protest violence
north east delhi violence
religious attacks
Religious riots

Related Stories


बाकी खबरें

  • पत्रकारिता में दोहरे मापदंड क्यों!
    शंभूनाथ शुक्ल
    पत्रकारिता में दोहरे मापदंड क्यों!
    13 Oct 2021
    मीडिया लखीमपुर घटना पर आशीष की गिरफ़्तारी को लेकर इतना व्यग्र नहीं दिखा, जितना कि आर्यन की ज़मानत न होने देने के लिए।
  • nitish
    पुष्यमित्र
    परीक्षकों पर सवाल उठाने की परंपरा सही नहीं है नीतीश जी!
    13 Oct 2021
    पिछले दिनों नीति आयोग ने देश के विभिन्न जिलास्तरीय अस्पतालों की कार्यक्षमता को लेकर एक रैंकिंग जारी की थी। इस रैंकिंग में बिहार सबसे पीछे है, यहां प्रति एक लाख की आबादी पर सिर्फ 6 बेड हैं। जबकि…
  • कश्मीर
    एजाज़ अशरफ़
    कुछ सरकारी नीतियों ने कश्मीर में पंडित-मुस्लिम संबंधों को तोड़ दिया है : संजय टिक्कू
    13 Oct 2021
    कश्मीरी पंडित नेता का कहना है कि जब कश्मीर में किसी हिंदू की हत्या की जाती है, तो सभी कश्मीरी मुसलमानों को इसकी निंदा करनी चाहिए, वैसे ही जैसे कि सभी हिंदुओं को भारत में कहीं भी मुसलमानों की हत्या की…
  • lakhimpur
    सरोजिनी बिष्ट
    लखीमपुर हत्याकांड: जब तक मंत्री की बर्ख़ास्तगी नहीं तब तक आंदोलन चलता रहेगा
    13 Oct 2021
    तिकोनिया में हुई श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न जिलों के किसान नेताओं को शहीदों के अस्थि कलश सौंपे गए। तय किया गया कि विसर्जन से पहले अस्थि कलश को लेकर पूरे उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में…
  • BHU Protest
    विजय विनीत
    गरमाने लगा बनारस: किसान आंदोलन के समर्थक छात्रों के खिलाफ FIR, सिंधोरा थाने पर प्रदर्शन
    13 Oct 2021
    वाराणसी पुलिस ने आंदोलनकारियों को मौन जुलूस निकालने से रोकने के लिए कई किसान नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया। भारी नाकाबंदी के बावजूद बीएचयू के वह छात्र भी लंका गेट पर मौन जुलूस निकालने पहुंच गए, जिनके…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License