NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तारीगामी ने देश के सामने रखा कश्मीर का सच! कहा- 'धीमी मौत' मर रहे हैं कश्मीरी
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी के साथ पूर्व विधायक तारीगामी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार कहती है कि वहां एक भी गोली नहीं चली, हालात सामान्य हैं। फिर वहां के लोगों के नागरिक अधिकारों और सेवाओं को अवरुद्ध क्यों किया गया है?
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
17 Sep 2019
Tarigami and yechuri

नयी दिल्ली: जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 ख़त्म करने और उसके संवैधानिक दर्जे में बदलाव के पांच अगस्त के मोदी सरकार फ़ैसले के करीब 43 दिन बाद कश्मीर का सच, कश्मीर का दु:ख-दर्द 'आधिकारिक तौर' पर देश के सामने आया। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता और जम्मू कश्मीर से चार बार के विधायक रहे मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने आज, मंगलवार को दिल्ली में प्रेस के सामने कश्मीर का 'सच' सुनाया।

यूसुफ तारीगामी ने जम्मू कश्मीर के हालात सामान्य होने के केन्द्र सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कश्मीर परेशानी में है और वहां लोग ‘‘ धीमी मौत’’ मर रहे हैं।

माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी के साथ तारीगामी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार कहती है कि वहां एक भी गोली नहीं चली, हालात सामान्य हैं। फिर वहां के लोगों के नागरिक अधिकारों और सेवाओं को अवरुद्ध क्यों किया गया है? उन्होंने स्थिति की गंभीरता पर सवाल उठाते हुये कहा कि सरकार किसी अन्य इलाके में टेलीफोन और इंटरनेट सहित अन्य नागरिक सुविधायें बंद करके यह देख ले कि ऐसा करने से कैसे हालात हो जाते हैं?

तारीगामी ने कहा कि कश्मीर में संचार सेवायें और नागरिक सुविधायें अवरुद्ध होने के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और कारोबार सहित सामान्य जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। वहां की मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुये वह भावुक हो गये। उन्होंने कहा , ‘‘ कश्मीर परेशानी में है , वहां लोग धीरे धीरे मर रहे हैं। हमारी हुकूमत से अपील है कि हम जीना चाहते हैं। सरकार हम कश्मीरियों की भी आवाज को सुने, हमें भी जिंदा रहने का मौका मिलना चाहिये।’’

उन्होंने मोदी सरकार की कश्मीर नीति पर सवाल उठाते हुये कहा कि लोगों को जेल में डालकर , उन्हें प्रताड़ित कर , संचार सेवायें रोक कर और सामान्य जनजीवन प्रभावित कर , क्या सरकार कश्मीर के लोगों का विश्वास जीत पायेगी।

जम्मू कश्मीर विधानसभा के चार बार सदस्य रहे तारीगामी ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में उन्होंने आतंक और हिंसा का सबसे बुरा दौर देखा है, जिसमें उन्हें अपने परिवार और मित्रों को खोना पड़ा, लेकिन उस दौर में भी वह इतने व्यथित नहीं हुये थे जितने आज के हालात को देखकर वह व्यथित हैं।

जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को केन्द्र सरकार द्वारा पांच अगस्त को निष्प्रभावी बनाने और राज्य को दो केन्द्र शासित क्षेत्रों में बांटने के बाद तारीगामी को भी अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ घर में नजरबंद कर दिया गया था। येचुरी ने उच्चतम न्यायालय से तारीगामी की खराब सेहत का हवाला देकर उन्हें इलाज के लिये दिल्ली आने की अनुमति मांगी थी। अदालत की अनुमति से इलाज के लिये दिल्ली पहुंचे तारीगामी को उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को अपनी सेहत के मुताबिक कभी भी कश्मीर वापस जाने की इजाजत दी है।

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारुक़ अब्दुल्ला की गिरफ्तारी के बारे में तारीगामी ने कहा, ‘‘ फ़ारुक़ अब्दुल्ला और अन्य नेता आतंकवादी नहीं हैं। मैं भी विदेशी नहीं हूं। मैंने बहुत कीमत चुकाई है और ऐसा करके मैंने किसी पर एहसान नहीं किया है, यह मेरा फ़र्ज़ था जिसे मैंने निभाया और मुझे इस पर नाज़ है। लेकिन आज मेरा यह सवाल है कि हमें भी साथ लेकर चलो। हम और कुछ नहीं मांग रहे हैं।’’
विरोधी दल के नेताओं द्वारा पाकिस्तान की हिमायत करने के सत्तापक्ष के आरोपों के जवाब में तारीगामी ने कहा , ‘‘ सरहद पार से लोग तालियां बजा कर कह रहे हैं, मरहबा दिल्ली वालो, जो हम न कर पाये वो आप कर रहे हैं। फ़ारूक़ अब्दुल्ला को घर में कैद करना, कमाल की सियासत है। मैं देशवासियों की अदालत में यह कहना चाहता हूं कि जो आज कश्मीर में हो रहा है वह मुल्क के हित में नहीं हो रहा है।’’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

yousuf tarigami
Jammu and Kashmir
CPM
Sitaram yechury
modi sarkar
Article 370
kashmiri awaam
Farooq Abdullah
mehbooba mufti

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा

ईडी ने फ़ारूक़ अब्दुल्ला को धनशोधन मामले में पूछताछ के लिए तलब किया

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद

क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?


बाकी खबरें

  • tourism sector
    भाषा
    कोरोना के बाद से पर्यटन क्षेत्र में 2.15 करोड़ लोगों को रोज़गार का नुकसान हुआ : सरकार
    15 Mar 2022
    पर्यटन मंत्री ने बताया कि सरकार ने पर्यटन पर महामारी के प्रभावों को लेकर एक अध्ययन कराया है और इस अध्ययन के अनुसार, पहली लहर में 1.45 करोड़ लोगों को रोजगार का नुकसान उठाना पड़ा जबकि दूसरी लहर में 52…
  • election commission of India
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली नगर निगम चुनाव टाले जाने पर विपक्ष ने बीजेपी और चुनाव आयोग से किया सवाल
    15 Mar 2022
    दिल्ली चुनाव आयोग ने दिल्ली नगर निगम चुनावो को टालने का मन बना लिया है। दिल्ली चुनावो की घोषणा उत्तर प्रदेश और बाकी अन्य राज्यों के चुनावी नतीजों से पहले 9 मार्च को होनी थी लेकिन आयोग ने इसे बिल्कुल…
  • hijab
    सीमा आज़ाद
    त्वरित टिप्पणी: हिजाब पर कर्नाटक हाईकोर्ट का फ़ैसला सभी धर्मों की औरतों के ख़िलाफ़ है
    15 Mar 2022
    इस बात को दरअसल इस तरीके से पढ़ना चाहिए कि "हर धार्मिक रीति का पालन करना औरतों का अनिवार्य धर्म है। यदि वह नहीं है तभी उस रीति से औरतों को आज़ादी मिल सकती है, वरना नहीं। "
  • skm
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा
    15 Mar 2022
    एसकेएम ने फ़ैसला लिया है कि अगले महीने 11 से 17 अप्रैल के बीच एमएसपी की क़ानूनी गारंटी सप्ताह मना कर राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरूआत की जाएगी। 
  • Karnataka High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिजाब  मामला: हिजाब इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने खारिज की याचिका
    15 Mar 2022
    अदालत ने अपना फ़ैसला सुनते हुए यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों में यूनिफ़ॉर्म की व्यवस्था क़ानूनी तौर पर जायज़ है और इसे संविधान के तहत दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कहा जा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License