NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तेल कीमतों के दाम बढ़ने के खिलाफ भारत बंद को मिला ज़बरदस्त समर्थन
तेल की कीमतों के आसमान छूने के बावजूद प्रधानमंत्री ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। आज बंद को लेकर विपक्षी दलों की इस एकता ने दिखाया है कि 2019 के चुनावों में बीजेपी की राह आसान नहीं होने वाली है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Sep 2018
left parties

देश भर में तेल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ सोमवार को विपक्षी पार्टियों का भारत बंद रहा। भारत बंद का आह्वान पहले वामपंथी दलों द्वारा किया गया था और बाद में कांग्रेस और अन्य पार्टियों ने भी इसका समर्थन किया। देशभर में इसका असर देखा गया। 

सात वामपंथी पार्टियाँ जिसमें सी.पी.एम., सीपीआई ,आर एस पी , फॉवर्ड ब्लॉक, सीपीआई (एमएल), सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ़ इंडिया (कम्युनिस्ट ) और कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी ऑफ़ इंडिया शामिल थीं ने तेल के बढ़ते दामों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किये। पार्टियों का विरोध तेल के बढ़ते दामों के आलावा , रुपये के गिरते मूल्य, महँगाई और दूसरे कई और मुद्दों के खिलाफ था। इस मुद्दे पर सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा "हम सबको ज़बरदस्त तरीके से विरोध करना चाहिए जिससे नरेंद्र मोदी सरकार तेल पर लगे करों को कम करे।"

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की शुरुवात कांग्रेस द्वारा दिल्ली के राम लीला मैदान से की गयी।  यहां हुई सभा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि विपक्षी पार्टियाँ बीजेपी को हराने के लिए साथ आ रही हैं। पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि "मोदी सरकार ने कई ऐसे काम किये हैं जो देश हित में नहीं हैं। इस सरकार को बदलने का समय जल्द आने वाला है।" कांग्रेस के आलावा इस सम्मलेन में राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के शरद पवार ,लोकतान्त्रिक जनता दल नेता शरद यादव और बाकी नेता भी मौजूद थे जिन्होंने बीजेपी के खिलाफ जम कर बोला। इस रैली में आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और राजद के नेता मनोज झा भी मौजूद रहे। 
दूसरी तरफ वामपंथी पार्टियों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर बढ़ती महंगाई के लिए मोदी सरकार पर हमला बोला। यहां सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और सीपीआई से राज्यसभा सांसद डी राजा को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। 

पिछले कुछ हफ़्तों से देश भर में तेल की कीमतें आसमान छू रहीं हैं , जिससे आम जनता की जेब पर सीधा  असर पड़ रहा है। इसी वजह से बंद का अच्छा खासा प्रभाव देखने को मिला। न्यूज़क्लिक से बात करते हुए सीपीएम की पोलित ब्यूरो सदस्य सुभाषिनी अली ने कहा कि "विपक्षी पार्टियों द्वारा किये जा रहे विरोध प्रदर्शन और जुलूस दिखाते हैं कि लोगों में सरकार के प्रति कितना गुस्सा है।"फिलहाल लखनऊ में मौजूद सुभाषिनी का कहना था "लोग अब तांगे पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं , इससे यह संदेश जाता है कि बीजेपी के राज में लोग वाहनों में घूमने का खर्च नहीं उठा सकते। " 
सीपीआई-एमएल की कविता कृष्णन का भी कहना है कि देश भर में बंद का असर देखकर लगता है कि यह एक कामयाब बंद रहा है। ओड़िसा और कर्नाटक की सरकारों ने बंद का पूरा समर्थन किया है और वहाँ काम काज पूरी तरह बंद रहा। केरल में माकपा के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार ने बंद का पूरा समर्थन किया जिससे राज्य में बंद का सबसे ज़्यादा असर देखा गया। केरल के आलावा राजस्थान,आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी बंद का खासा असर रहा। जगह-जगह बाजार बंद रहे। स्कूल-कॉलेज भी नहीं खुले। निजी और सरकारी बसों के आलावा  ऑटो रिक्शा भी सड़क पर दिखाई नहीं दिए। 

बिहार में भी बंद का काफी असर देखने को मिला। बिहार में वामपंथी पार्टियों ने एक  बड़ा जुलूस निकाला और जन अधिकार पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर कई ट्रेनें रोकीं। बिहार में कई जगह हिंसा और आगज़नी की घटनाएं भी देखने को मिली , कई जगह गाड़ियों के शीशे फोड़े गए और कई जगह बसों को जलाया गया। हिंसा की खबरें गुजरात के बरूच और महाराष्ट्र के पुणे शहर से भी आईं। एम एन एस ने कार्यकर्ताओं ने पुणे में बसों में तोड़ फोड़ की और भरुच में प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाये।
बंद और प्रदर्शन के दौरान अरुणाचल प्रदेश में कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया जिसमें महिला कांग्रेस और यूथ कांग्रेस के नेता शामिल थे। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में वामपंथी दलों द्वारा एक बड़ी रैली निकली गयी। इसके आलावा सीपीएम के 50 कार्यकर्ताओं को भी गुजरात में गिरफ्तार किया गया जिसमें केंद्रीय कमेटी सदस्य अरुण मेहता भी शामिल थे। 
इस बंद के व्यापक असर को देखते हुए केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि" सबके पास विरोध करने का अधिकार है लेकिन आज हो क्या रहा है ? पेट्रोल पंप और बसें जलाई जा रही हैं जिससे आम जनता की जान खतरें में डाली जा रही है। बिहार के जहानाबाद में एक एम्बुलेंस प्रदर्शन में फंस गयी थी जिससे एक बच्चे की मौत हो गयी। इसका ज़िम्मेदार कौन है ?" लेकिन बाद में आयी खबरों के अनुसार जहानाबाद में उस 2 साल की बच्ची की मौत प्रदर्शन में फंसने की वजह से नहीं हुई थी।

 
आपको बता दें कि आज सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में रुपये का मूल्य और भी गिर गया, आज डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 72. 50 हो गयी है। इससे आम जनता के जीवन पर सीधा असर पड़ा है। तेल की कीमतों के आसमान छूने के बावजूद प्रधानमंत्री ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी है। आज बंद को लेकर विपक्षी दलों की इस एकता ने दिखाया है कि 2019 के चुनावों में बीजेपी की राह आसान नहीं होने वाली है।

Bharat band
left parties
BJP
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • अनिल सिन्हा
    उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!
    12 Mar 2022
    हालात के समग्र विश्लेषण की जगह सरलीकरण का सहारा लेकर हम उत्तर प्रदेश में 2024 के पूर्वाभ्यास को नहीं समझ सकते हैं।
  • uttarakhand
    एम.ओबैद
    उत्तराखंडः 5 सीटें ऐसी जिन पर 1 हज़ार से कम वोटों से हुई हार-जीत
    12 Mar 2022
    प्रदेश की पांच ऐसी सीटें हैं जहां एक हज़ार से कम वोटों के अंतर से प्रत्याशियों की जीत-हार का फ़ैसला हुआ। आइए जानते हैं कि कौन सी हैं ये सीटें—
  • ITI
    सौरव कुमार
    बेंगलुरु: बर्ख़ास्तगी के विरोध में ITI कर्मचारियों का धरना जारी, 100 दिन पार 
    12 Mar 2022
    एक फैक्ट-फाइंडिंग पैनल के मुतबिक, पहली कोविड-19 लहर के बाद ही आईटीआई ने ठेके पर कार्यरत श्रमिकों को ‘कुशल’ से ‘अकुशल’ की श्रेणी में पदावनत कर दिया था।
  • Caste in UP elections
    अजय कुमार
    CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
    12 Mar 2022
    सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
  • app based wokers
    संदीप चक्रवर्ती
    पश्चिम बंगाल: डिलीवरी बॉयज का शोषण करती ऐप कंपनियां, सरकारी हस्तक्षेप की ज़रूरत 
    12 Mar 2022
    "हम चाहते हैं कि हमारे वास्तविक नियोक्ता, फ्लिपकार्ट या ई-कार्ट हमें नियुक्ति पत्र दें और हर महीने के लिए हमारा एक निश्चित भुगतान तय किया जाए। सरकार ने जैसा ओला और उबर के मामले में हस्तक्षेप किया,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License