NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तेलंगाना चुनाव : सभी सरकारों ने दिया बीड़ी श्रमिकों को धोखा
यूनियन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि केसीआर सरकार ने बीड़ी कंपनी के मालिकों के हितों का समर्थन करते हुए बीड़ी श्रमिकों के अधिकारों की उपेक्षा करने की परंपरा को जारी रखा है।
पृथ्वीराज रूपावत
01 Dec 2018
Translated by महेश कुमार
Beedi workers, Telangana

तेलंगाना में बीड़ी श्रमिकों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि मज़दूरों के कई संघर्षों के बावजूद सरकारों ने जो वादे किए वे कभी पूरे नहीं हुए। जैसे-जैसे 7 दिसंबर के विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, सभी पार्टियों के विधायक उम्मीदवार बीड़ी क्षेत्र पर नजर गड़ाए हुए हैं। लेकिन दुखद वास्तविकता यह है कि आज बीडी मज़दूरों की औसत आय प्रति 1000 बीड़ी 173 रुपये प्रतिदिन (एक कार्य दिवस) है और 2014 से 2018 तक 26 दिनों के कार्य दिवसों की संख्या में 10-12 कार्य दिवसों की कमी आ गई है।

तेलंगाना में, बीड़ी क्षेत्र 16 जिलों में 45 विधानसभा क्षेत्र में फैला हुआ है। राज्य में लगभग सात लाख बीड़ी श्रमिक हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं।

तेलंगाना बीड़ी और सिगरेट मज़दूर यूनियन जो सीआईटीयू से संबद्ध युनियन है, के महासचिव एस राम ने कहा, "बीड़ी मज़दूरों ने तेलंगाना राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है लेकिन तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के चंद्रशेखर राव (केसीआर) के तहत सरकार ने पूरी तरह से कर्मचारियों को धोखा दिया है।"

न्यूज़क्लिक के साथ बात करते हुए राम ने कहा: "तेलंगाना एक अलग राज्य बनने के बाद, बीड़ी मज़दूरों के जीवन में कोई बदलाव नहीं आया है, बल्कि स्थिति ओर खराब हुई है। सत्ता में आने से पहले, के चंद्रशेखर राव ने मज़दूरों के कल्याण के लिए उपयुक्त सरकारी आदेश (जीओ) लाने का वादा किया था। जब टीआरएस सत्ता में आयी, सरकार ने मौजूदा जीओ 41 को भी लागू नहीं किया, और पिछली कांग्रेस सरकार की तरह अपनी मज़दूर विरोधी प्रवृत्ति को बरकरार रखा। "

देश में निर्धारित उद्योगों में से एक होने के नाते, राज्य सरकारों को जीओ जारी करने और इस क्षेत्र में सभी श्रेणी के मज़दूरों की न्यूनतम मजदूरी तय करने के फैसले के लिए दायित्व बनता है। पूर्व आंध्र प्रदेश में, दिसंबर 2010 में, लाखों बीड़ी मज़दूरों ने संयुक्त संघर्ष कार्य समिति का गठन किया था और राज्य भर में बीडी उत्पादन को रोकने के लिए 32 दिनों के लिए हड़ताल की थी। नतीजतन, 2011 में, तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एक जीओ जारी किया था। जी.ओ. 41 के अनुसार, प्रति 1000 बीड़ी प्रति मज़दूर का न्यूनतम वेतन 258 रुपये होना था। शायद बीड़ी निर्माताओं को लुभाने के लिए, जीओ में दर को कम रखा गया था।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस जी.ओ. के कार्यान्वयन के साथ, श्रमिकों के मूल अधिकारों पर हमला किया जा रहा है, जबकि बीडी कंपनी के मालिकों का लाभ करोड़ों में हैं। वर्तमान में, तेलंगाना में 72 बीड़ी कारखाने हैं। कुछ प्रमुख कारखानों में लंगार, टेलीफोन, चरबाई वारंगल, करीमनगर, सिरिसिला और आदिलाबाद जिलों में स्थित हैं। औसतन, तेलंगाना में प्रति दिन लगभग 100 करोड़ बीड़ी का उत्पादन होता है।

 

Beedi workers protest.jpg

(सितंबर, 2016 में कामरेड्डी, तेलंगाना में सैकड़ों महिला बीड़ी श्रमिकों ने विरोध सभा का आयोजन किया था।)

बीड़ी श्रमिकों के लिए जीवन निर्वाह के लिए पेंशन

जीओ 41 के कार्यान्वयन की मांग करते हुए बीड़ी मज़दूरों ने टी.आर.एस. सरकार के जून 2014 में आने के बाद  तीन दिन की हड़ताल सहित कई विरोध प्रदर्शन किए हैं।

जीओ के तहत मज़दूरों को सुरक्षा प्रदान करने के बजाय, 2015 में मुख्यमंत्री केसीआर ने बीडी मज़दूरों को 1,000 रुपये का मासिक निर्वाह भत्ता (जीवन ब्रुथी) को गड़बड़ाने की कोशिश की, और उसके भुग्तान के साथ  कई शर्तें लगा दी। जबकि, यह वादा श्रमिकों के लंबे संघर्ष के बाद ही लागू किया गया था।

राम ने कहा "सरकार की स्थिति ऐसी है कि राज्य भर में कुल सात लाख मज़दूरों में से, अभी तक केवल 1,56,000 कर्मचारी इस भत्ता योजना के लाभार्थियों बनने में सक्षम हुए हैं। यदि परिवार में चार बीड़ी श्रमिक हैं, तो यह भत्ता केवल एक को मिल रहा है। इसके अलावा, यदि परिवार का सदस्य वृद्धावस्था पेंशन या विधवा पेंशन का लाभार्थी है, तो उस कर्मचारी को भत्ता नहीं मिलेगा।" उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में श्रमिकों के बीच संकट गहरा गया है और कई बीड़ी श्रमिकों ने आत्महत्या भी की है।

इस साल की शुरुआत में, यह बताया गया था कि कामरेड्डी जिले के चिन्ना मल्लारेड्डी गांव की निवासी वसीता ने आत्महत्या कर ली थी, क्योंकि सरकारी अधिकारियों ने उनके भत्ते पर तब रोक लगा दी थी जब उन्हें पता चला कि उनके परिवार में दो सदस्य (उनके पति जो बीड़ी मजदूर हैं ) उसी योजना के तहत लाभार्थियों थे।

राम ने तर्क दिया कि टीआरएस सरकार भी बीडी श्रमिकों को पहचान पत्र प्रदान करने में असफल रही है, जिसके बग़ैर श्रमिक कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा लाभ जैसे अन्य मूल अधिकारों का लाभ नहीं उठा सकते है। बीड़ी श्रमिकों को पहचान पत्रों को बांटने का अधिकार कंपनियों के साथ निहित है और लगभग 50 प्रतिशत श्रमिकों को बीड़ी श्रमिकों के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है क्योंकि कंपनियों ने उन्हें पहचान पत्र प्रदान नहीं किए हैं।

निजामाबाद जिले के वेल्लपुर गांव की निवासी सविता ने न्यूजक्लिक को बताया कि टीआरएस सरकार ने मज़दूरों की तुलना में कंपनियों के हितों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया था। सविता ने बताया"मैं पिछले 10 सालों से बीड़ी बना रही हूं और पिछले दिसंबर में मुझे अपना पहचान पत्र बीडी मज़दूर के रूप में मिला। पिछले चार सालों में, वेल्लपुर में हमारे सहकर्मी उम्मीद कर रहे थे कि केसीआर बीड़ी श्रमिकों के लिए उपयुक्त जीओ तैयार करेगी, लेकिन हमें धोखा दिया गया है।" उन्होंने कहा कि बीड़ी कंपनी हर साल केवल 3-4 पहचान पत्र जारी करती है और उसके गांव में सैकड़ों श्रमिक अभी भी पहचान पत्रों की प्रतीक्षा कर रहे हैं ताकि वे इसके कारण स्वास्थ्य लाभ उठा सकें।

Beedi.jpg

स्वास्थ्य का मुद्दा

बीड़ी क्षेत्र के साथ एक और मुद्दा यह है कि यह मुख्य रूप से स्वास्थ्य को नुकसान करने (रोग पैदा करने) वाला उद्योग है। बीड़ी श्रमिक अन्य बीमारियों के अलावा तपेदिक, कैंसर, अल्सर से ग्रस्त हो जाते हैं। राम ने कहा “राज्य में कोई बीड़ी बनाने वाला कारखाना शौचालय, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान नहीं करता है, हालांकि इसे केंद्रीय और राज्य कानूनों द्वारा अनिवार्य बनाया गया है। यह महिला श्रमिकों को अपने घरों से काम करने के लिए प्रेरित करता है।"

बीड़ी उद्योग मानव श्रम पर पूरी तरह से निर्भर है और बीड़ी बनाने में कोई तकनीक शामिल नहीं है। आने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान, जबकि टीआरएस सरकार बीड़ी श्रमिकों के लिए मासिक भत्ता बढ़ाने के लिए 2,000 रुपये का वादा कर रही है, कांग्रेस के नेतृत्व वाले प्रजकुट्टामी भी इसका आश्वासन दे रहे हैं और सीपीआई (एम) बहुजन वाम मोर्चा बीड़ी क्षेत्र समेत सभी क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए 18,000 रुपये प्रति माह की न्यूनतम मजदूरी की घोषणा कर रहे हैं।

तेलंगाना सीआईटीयू (सीटू) की उपाध्यक्ष सुधा भास्कर ने कहा कि बीड़ी श्रमिकों को कम से कम 350 रुपये प्रति 1000 बीड़ी की मज़दूरी मिलनी चाहिए। यहां तक कि यदि श्रमिकों को प्रति माह 2,000 रुपये भत्ते का भुगतान किया जाता है, तो यह प्रतिवर्ष 24,000 रुपये होगा। सुधा भास्कर ने न्यूज़क्लिक को बताया कि मजदूरों की उम्मीद है कि वे वैध न्यूनतम मजदूरी और उनके अधिकारों को मान्यता देंगे।

Beedi workers in Telangana
Telangana elections 2018
Assembly elections 2018
TRS
TRS GOVT
K CHANDRSHEKHAR RAO
CITU
minimum wage

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम

रोहतक : मारुति सुज़ुकी के केंद्र में लगी आग, दो कर्मियों की मौत


बाकी खबरें

  • यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 16 सीटों का हुआ नुक़सान
    एम.ओबैद
    यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान
    11 Mar 2022
    वर्ष 2017 के चुनाव नतीजों की तुलना में इस बार भाजपा को पहले दो चरणों में 18 सीटों का नुकसान हुआ है। पिछली बार उसने 91 सीट हासिल की थीं जबकि इस बार उसे 73 सीटें ही मिल पाई हैं।
  • election results
    न्यूज़क्लिक टीम
    BJP से हार के बाद बढ़ी Akhilesh और Priyanka की चुनौती !
    11 Mar 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में आज Abhisar Sharma चर्चा कर रहे हैं Uttar Pradesh में फिर से BJP की सरकार बनने और साथ ही बात कर रहे हैं अखिलेश यादव और प्रियंका गाँधी वाड्रा की। 2024 के चुनाव…
  • mayawati
    कृष्ण सिंह
    यूपी के नए राजनीतिक परिदृश्य में बसपा की बहुजन राजनीति का हाशिये पर चले जाना
    11 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक दल के पराजित होने या फिर उसके वोट प्रतिशत में बड़ी गिरावट आने का अर्थ यह नहीं होता है कि हम तुरंत उसकी राजनीतिक मृत्यु की घोषणा कर दें। लेकिन इसके साथ यह प्रश्न भी उतनी ही मज़बूती के…
  • pakistan
    जस्टिन पॉडुर  
    पाकिस्तान किस प्रकार से बलूचिस्तान में शांति के लिए पहले-विकास की राह को तलाश सकता है
    11 Mar 2022
    राष्ट्र को एकजुट रखने के लिए पाकिस्तान की कोशिश के संघर्ष के केंद्र में अपनाई जा रही आतंकवाद विरोधी मॉडल की विफलता है।
  • zelsenky
    एम के भद्रकुमार
    ज़ेलेंस्की ने बाइडेन के रूस पर युद्ध को बकवास बताया
    11 Mar 2022
    वाशिंगटन को जो रणनीतिक हार का सामना करना पड़ा है, वह दुनिया भर में अमेरिकी प्रतिष्ठा को कम करेगा, उसके ट्रान्साटलांटिक-नेतृत्व को कमजोर करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License