NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तेलंगाना चुनावः आदिवासियों के पोडू कृषि की पुरानी मांग को टीआरएस ने अनदेखा किया
वन अधिकार अधिनियम के बावजूद पोडू अथवा स्थानांतरित कृषि करने को लेकर वन अधिकारियों द्वारा प्रदेश के आदिवासियों को निरंतर धमकी दी जाती है।
पृथ्वीराज रूपावत
04 Dec 2018
telangana

तेलंगाना में 7 दिसंबर को विधानसभा चुनाव होना निर्धारित है। बदराद्री कोठागुडेम ज़िले में डुम्मुगुडेम मंडल के बंडारूगुडेम गांव के लोगों को शक है कि नई सरकार पोडू भूमि का पट्टा उन्हें देगी या नहीं जिस पर कई पीढ़ियों से वे कृषि करते आए हैं।

पोडू कृषि एक प्रकार की स्थानांतरित कृषि है जिसे मुख्य रूप से आदिवासी समुदाय के लोग वन भूमि पर करते हैं।बंडारुगुडेम गांव में लगभग 100 परिवार रहते हैं। ये सभी कोया समुदाय के आदिवासी हैं। इस समाज की 50 वर्षीय कुंजा सितम्मा एक छोटी किसान हैं जिनके पास तीन एकड़ भूमि है। हालांकि उनके पास केवल दो एकड़ भूमि का ही मालिकानाा दस्तावेज़ है।

सितम्मा कहती हैं, "मैं तीसरे एकड़ भूमि का पट्टा पाने का इंतजार कर रही हूं जो पोडू भूमि है।" वह कहती हैं कि उनके पति की मौत 20 वर्ष पहले एक हादसे में हो गई। "इस हादसे के बाद से मैं इस तीन एकड़ भूमि पर खेती कर रही हूं और अपनी दो बेटियों की परवरिश की है।" वह आगे कहती हैं कि उन्होंने वर्ष 2009 में अपने गांव में आयोजित ग्राम सभा में इस भूमि के अधिकार का दावा करते हुए एक याचिका दायर की थी लेकिन अधिकारियों ने मेरे दावे पर अभी ग़ौर नहीं किया है।

अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धारा 4 (3) तथा पारंपरिक वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006, (एफआरए) के अनुसार, अगर वन भूमि इन जनजातियों अधीन है तथा 13 दिसंबर 2005 से पहले उस पर खेती की जा रही थी तो इन्हें 4 हेक्टेयर तक भूमि का अधिकार प्राप्त करने का हक़ है।

बंडारुगुडेम ग्राम के पूर्व सरपंच रमाना कहती हैं, क़ानून के बावजूद वन अधिकारों की मान्यता देने के बजाय डु्म्मुगुडेम मंडल में आदिवासी लोगों को अक्सर पोडू कृषि करने को लेकर धमकी दी जा रही है।

रमाना ने न्यूज़क्लिक से कहा, "अगर कोया समाज को भूमि अधिकार दिया जाता है तो डुम्मुगुडेम में लगभग 5,000 लोग लाभान्वित होंगे। हालांकि सभी दावे और भूमि की सीमाएं स्पष्ट हैं फिर भी मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि संबंधित अधिकारी क्यों अपना काम नहीं कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि डुम्मुगुडेम के लगभग सभी आदिवासी केवल एक एकड़ भूमि के स्वामित्व का अनुरोध कर रहे हैं जो पर वे कई पीढ़ियों से खेती कर रहे हैं।

डुम्मुगुडेम मंडल के बंडारुगुडेम ग्राम में सीतम्मा की पोडू भूमि पर कपास की खेती की गई है।आगामी विधानसभा चुनाव में पोडू की खेती का मामला प्रमुख मुद्दों में से एक बन गया है। जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक़ फरवरी 2017 के आख़िर तक कोया, चेंचस, थोटी, कोलम्स जैसे समुदायों से संबंध रखने वाले आदिवासियों की तरफ से तेलंगाना सरकार को भूमि अधिकार के लिए 1,86, 534 अनुरोध प्राप्त हुए। हालांकि, 7.5 लाख एकड़ भूमि के लिए केवल 94,215 मालिकाना हक़ वितरित किए गए हैं। वहीं दूसरी ओर 80,890 दावों (व्यक्तिगत तथा सामुदायिक दावे) को ख़ारिज कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने वन विभाग के अधिकारियों को जनवरी 2015 में अनुरोध स्वीकार करने से मना कर दिया था। विभिन्न रिपोर्टों में कहा गया है कि अनुरोध की जांच पारदर्शी तरीक़े से नहीं की गई इसलिए अस्वीकृति का दर अधिक है।

तेलंगाना में 26,904 वर्ग किमी वन भूमि है जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24% है। अधिकांश वन क्षेत्र पूर्ववर्ती ज़िले खम्मम, वारंगल, आदिलाबाद और महबूबनगर में स्थित हैं।

राज्य में लगभग 31.78 लाख अनुसूचित जनजाति के लोग हैं जो कुल जनसंख्या का लगभग 9% है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ सुनवाई के बिना अनुरोधकर्ता के दावों को अक्सर उप-मंडल या ज़िला स्तर पर ख़ारिज कर दिया जाता है जो एफआरए नियमों का उल्लंघन है। अधिकारी अक्सर क़ानून द्वारा स्वीकार्य अन्य साक्ष्यों को ख़ारिज करते हुए प्रमाण विषयक सबूत मांगते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्सर अधिकारी दावेदारों के दावों को अस्वीकार करने से संबंधित सूचना नहीं देते हैं।

पोडू भूमि से बेदख़ली

पोडो भूमि से आदिवासियों के अवैध बेदख़ली को लेकर कई मामला हैदराबाद उच्च न्यायालय में लंबित है। रिपोर्ट के अनुसार, वन अधिकारियों ने बद्रादी कोटागुडेम ज़िले के पिनापाका और चंद्रूगोंडा मंडल में 1,300 एकड़ भूमि के क़ब्ज़े से आदिवासियों को बेदख़ल करने की धमकी दी है।

विधानसभा को भंग करने से कुछ महीने पहले टीआरएस सरकार ने रयथू बंधु नाम से एक निवेश सहायता योजना शुरू की थी जिसके तहत प्रति फसल के मौसम में 4,000 रुपए प्रति एकड़ के वितरण की व्यवस्था है। हालांकि, इस योजना में पोडू भूमि से जुड़े किसान शामिल नहीं हैं।

हाल ही में आदिवासी समाज के लोगों ने वाम दलों के साथ मिलकर पोडू कृषि को इस योजना में शामिल करने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया है।

रयथू स्वराज्य वेदिका के कार्यकर्ता कोंडल ने न्यूज़क्लिक से कहा कि "टीआरएस सरकार ने कृषि के रूप में पोडू कृषि को कभी नहीं माना। हमने रयथू बंधु योजना में पोडू कृषि को शामिल करने की मांग को लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन किया है लेकिन इसे नहीं माना गया। अब चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री केसीआर पोडू भूमि का मुद्दा उठा रहे हैं और इसे रयथू बंधु में शामिल करने की बात कर रहे हैं। लोग उनके तानाशाही शासन को अभी नहीं भूले हैं।"

बद्राचलम निर्वाचन क्षेत्र

नवगठित बदाद्री कोटागुडेम ज़िले में स्थित बद्राचलम एसटी आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र है। चुनाव आयोग के अनुसार यहां 1,25,552 मतदाता हैं जिनमें 61,449 पुरुष, 64,091 महिलाएं तथा 12 ट्रांसजेंडर हैं। ये निर्वाचन क्षेत्र भद्रचलम (मंदिरों का शहर) के साथ डुम्मुगुडेम, वाजिद, वेंकटपुरम और चेरला मंडल तक फैला है। लगभग 51% एसटी मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में पोडू कृषि का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

वर्ष 2014 में सीपीआई (एम) के उम्मीदवार सुन्नम रजइया बद्रचलम से विधायक निर्वाचित हुए थें। सीतम्मा ने कहा, "जब भी आदिवासी किसी समस्या का सामना करते थे तो विधायक सुन्नम रजइया हमेशा मौजूद होते थें।"

सीपीआई (एम) के अगुवाई वाली बहुजन वाम मोर्चा बद्राचलम निर्वाचन क्षेत्र को फिर से हासिल करने के लिए चुनावी मैदान में है। इस बार पार्टी ने मीडियम बाबूराव को मैदान में उतारा है। बद्राचलम के पूर्व लोकसभा सांसद बाबूराव ने कहा कि केवल वाम दल ही कमज़ोर वर्ग के लोगों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है। बाबूराव को टीआरएस उम्मीदवार टेल्लम वेंकट राव, कांग्रेस उम्मीदवार पोडम वीरय्या और बीजेपी उम्मीदवार कुंज सत्यवती के ख़िलाफ़ उतारा गया है।

एफआरए तैयार करने वाली संयुक्त संसदीय समिति के एक सदस्य बाबू राव ने न्यूज़़क्लिक को बताया, "टीआरएस सरकार पोडू कृषि में शामिल आदिवासियों की समस्या दूर करने में विफल रही है। तेलंगाना में पोडू कृषि की समस्या फैली हुई है और सीपीआई (एम) हमेशा आदिवासियों के साथ खड़ी रही है।"

Telangana
Podu Cultivation
Telangana elections 2018
Adivasis
Bahujan Left Front

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

‘तेलंगाना की जनता बदलाव चाहती है’… हिंसा नहीं

हसदेव बचाने के लिए आदिवासियों ने निकाला 300 किलोमीटर का मार्च

तेलंगाना की पहली सुपर थर्मल पावर परियोजना को हरी झंडी देने में अहम मुद्दों की अनदेखी?

कोविड-19: लॉकडाउन की मार से बुरी तरह से बेहाल ओला-उबर चालकों ने वित्तीय सहायता की मांग की है 

यूनियन ने कहा यूपी में चुनाव ड्यूटी पर 1621 की मौत, तेलंगाना में किसानों का प्रदर्शन और अन्य ख़बरें

कोविड-19 : अस्पतालों में भारी भीड़ों से तेलुगू सरकारें ख़ौफ़ में 

आंध्र प्रदेश : नए हवाई अड्डे को अनुमति दिए जाने के क्रम में स्थानीय मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया गया

तेलंगाना: उपेक्षित और धमकाए गए आदिवासी एफआरए के दावों के लिए अपने आंदोलन को करेंगे तेज़ 

तेलंगाना: केंद्र की मज़दूर और किसान विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ सीटू का जन जागरण अभियान!


बाकी खबरें

  • ganguli and kohli
    लेस्ली ज़ेवियर
    कोहली बनाम गांगुली: दक्षिण अफ्रीका के जोख़िम भरे दौरे के पहले बीसीसीआई के लिए अनुकूल भटकाव
    19 Dec 2021
    दक्षिण अफ्रीका जाने के ठीक पहले सौरव गांगुली बनाम विराट कोहली की टसल हमारी टीवी पर तैर रही है। यह टसल जितनी वास्तविक है, यह इस तथ्य पर पर्दा डालने के लिए भी मुफ़ीद है कि भारतीय टीम ऐसे देश का दौरा कर…
  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू
    19 Dec 2021
    सरकार जी उतनी गंभीरता, उतना दिमाग सरकार चलाने में नहीं लगाते हैं जितना पूजा-पाठ करने में लगाते हैं। यह पूजा-पाठ चुनाव से पहले तो और भी अधिक बढ़ जाता है। बिल्कुल ठीक उसी तरह, जिस तरह से किसी ऐसे छात्र…
  • teni
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : जयपुर में मौका चूके राहुल, टेनी को कब तक बचाएगी भाजपा और अन्य ख़बरें
    19 Dec 2021
    सवाल है कि अजय मिश्र को कैसे बचाया जाएगा? क्या एसआईटी की रिपोर्ट के बाद भी उनका इस्तीफा नहीं होगा और उन पर मुकदमा नहीं चलेगा?
  • amit shah
    अजय कुमार
    अमित शाह का एक और जुमला: पिछले 7 सालों में नहीं हुआ कोई भ्रष्टाचार!
    19 Dec 2021
    यह भ्रष्टाचार ही भारत के नसों में इतनी गहराई से समा चुका है जिसकी वजह से देश का गृह मंत्री मीडिया के सामने खुल्लम-खुल्ला कह सकता है कि पिछले 7 सालों में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
  • A Critique of Capitalism’s Obscene Wealth
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    पूंजीवाद की अश्लील-अमीरी : एक आलोचना
    19 Dec 2021
    पूंजीवादी दुनिया में लगभग हर जगह ग़ैर-अमीर ही सबसे ज़्यादा कर चुकाते हैं और अश्लील-अमीरों की कर चोरी के कारण सार्वजनिक सेवाओं में होने वाली कटौतियों की मार बर्दाश्त करते रहते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License