NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तेलंगाना चुनावः टीआरएस और कांग्रेस नीत गठबंधन ने महिला और ओबीसी की नुमाइंदगी को नज़रअंदाज़ किया
सीपीआई(एम) के अगुवाई वाले बहुजन वाम मोर्चा ने इस विधानसभा चुनावों में एक ट्रांसवुमैन और 55 ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट दिया।
पृथ्वीराज रूपावत
20 Nov 2018
Telangana elections

विधानसभा चुनावों के प्रचार के लिए अब तीन सप्ताह से भी कम समय बचा है। तेलंगाना के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने आख़िरकार चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की अपनी आख़िरी सूची की घोषणा कर दी है। लेकिन इस राज्य में अल्पसंख्यकों और महिलाओं के प्रतिनिधित्व को नज़रअंदाज़ किया गया है जो के चंद्रशेखर राव के तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) या कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन द्वारा सीटों के बटवारे से परिलक्षित होता है।

हालांकि सीपीआई(एम) के अगुवाई वाली बहुजन वाम मोर्चा (बीएलएफ) ने चुनावों लड़ने के लिए लगभग 50 प्रतिशत पिछड़े जाति के उम्मीदवारों को टिकट देकर एक उदाहरण स्थापित किया और एक ट्रांसवुमैन उम्मीदवार को मैदान में उतारा जो देश के इतिहास में पहली बार हुआ है।

ट्रांस-जेंडर के अधिकार के लिए काम करने वाले एम चंद्रमुखी गोशामहल विधानसभा क्षेत्र से बीएलएफ का प्रतिनिधित्व कर रहे है। चंद्रमुखी को टीआरएस उम्मीदवार प्रेम सिंह राठौड़ और अपने विवादास्पद सांप्रदायिक बयान के लिए जाने मौजूदा विधायक और बीजेपी उम्मीदवार राजा सिंह के ख़िलाफ़ खड़ा किया गया है।

टीआरएस और प्रजाकुटामी द्वारा पिछड़ी जाति के उम्मीदवार को अपर्याप्त प्रतिनिधित्व

6 सितंबर को राज्य विधानसभा भंग होने के बाद टीआरएस ने फौरन अपना चुनाव अभियान शुरू कर दिया और उसी दिन उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची की घोषणा की। तब से टीआरएस पार्टी के नेता उनका समर्थन हासिल करने के लिए कई जाति के नेताओं से मुलाक़ात में व्यस्त रहे। रिपोर्ट के अनुसार गजवेल में जो कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव का निर्वाचन क्षेत्र है यहाँ अक्टूबर महीने में टीआरएस नेताओं ने यादव और पद्माशली समुदाय (दोनों ओबीसी समुदाय हैं) के लोगों के साथ दो अलग-अलग बैठकें की थीं। दूसरी तरफ टीआरएस पार्टी ने दिसंबर महीने में होने वाले चुनावों के लिए 30 से कम ओबीसी उम्मीदवारों का चयन किया है। पार्टी ने वेलामास, रेड्डी और खम्मास सहित ऊंची जातियों के उम्मीदवारों के लिए 50 प्रतिशत से ज्यादा सीटों को छोड़ दिया।

इसी तरह का मामला प्रजकुटामी के साथ है। इस गठबंधन में कांग्रेस शामिल है जो 94 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, वहीं तेलुगू देशम पार्टी 14,प्रोफेसर कोडनडराम की नई तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) पार्टी 8 और सीपीआई 3 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। 94 सीटों में से कांग्रेस ने केवल21 ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट दिया जबकि रेड्डी समुदाय के 33 उम्मीदवारों खड़ा किया है।

सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही बीजेपी ने 30 से कम ओबीसी उम्मीदवार को टिकट दिया है।

मिरयालागुडा निर्वाचन क्षेत्र

राज्य में स्व घोषित ओबीसी नेता आर कृष्णय्या ने आख़िरकार मिरयालागुडा निर्वाचन क्षेत्र के लिए कांग्रेस से अपना परचा भरा है। साल 2014 के विधानसभा चुनाव में टीडीपी के टिकट पर कास्ट लीडर कृष्णय्या विधायक (एलबी नगर निर्वाचन क्षेत्र से) बने। चूंकि राज्य में चुनावी मौसम शुरू हो गया है ऐसे में कृष्णय्या सुर्खियों में थे क्योंकि वे कांग्रेस और बीएलएफ समेत सभी प्रमुख दलों से मुलाकात कर रहे थें। पहले उन्होंने घोषणा की कि वह बहुजन वाम मोर्चा की तरफ से चुनाव लड़ेंगे लेकिन 18 नवंबर की शाम को वे कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्हें मिरयालागुडा में सीपीआई(एम) के उम्मीदवार जुलाकांती रंगरेड्डी और टीआरएस उम्मीदवार एन भास्कर राव के ख़िलाफ़ खड़ा किया गया है।

मिरयालागुडा के सीपीआई (एम) उम्मीदवार रंगरेड्डी को उम्मीद है कि राज्य में ग़रीब, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कांग्रेस गठबंधन और टीआरएस के मुकाबले बीएलएफ को प्राथमिकता देंगे। उन्होंने कहा: "जैसा कि पहले घोषिणा किया गया था,बीएलएफ चुनाव लड़ने वाले 55 ओबीसी उम्मीदवारों के साथ सबसे समावेशी गठबंधन है। बीएलएफ का मुख्य एजेंडा सामाजिक न्याय और उत्पीड़ित लोगों को शक्ति प्रदान करना है।" उन्होंने कहा कि मिरयालागुडा क्षेत्र से कृष्णय्या के उम्मीदवारी की अचानक हुआ घोषणा से कांग्रेस को नुकसान होगा जो ओबीसी समुदायों को लुभाने की कोशिश कर रही है।

तेलंगाना में लगभग 53 प्रतिशत ओबीसी समुदाय की आबादी है। राजनीतिक टिप्पणीकार तर्क दे रहे हैं कि आगामी चुनावों में इन समुदायों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। दूसरी तरफ, इस दौड़ में सभी प्रमुख दलों ने एससी और एसटी उम्मीदवारों को केवल उन निर्वाचन क्षेत्रों में जगह दिया जो चुनाव आयोग द्वारा आरक्षित हैं।

महिला की नुमाइंदगी बदतर

टीआरएस सरकार की एक और बड़ी आलोचना यह हुई है कि विधानसभा में टीआरएस की छह महिला विधायकों के बावजूद पार्टी के कैबिनेट में एक भी महिला मंत्री नहीं थीं। टीआरएस पार्टी ने इन चुनावों में कुल 119 सीटों में से केवल चार महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतार कर महिलाओं की संख्या को कम किया है।

विडंबना यह है कि 119 निर्वाचन क्षेत्रों में से 55 में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं की तुलना में अधिक है।

यही हाल अन्य दलों का है। कुल 94 उम्मीदवारों में कांग्रेस ने केवल 11 महिलाओं को टिकट दिया है। बीएलएफ और बीजेपी में प्रत्येक ने 11महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया है वहीं टीडीपी, टीजेएस और सीपीआई ने एक-एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है

Telangana
Telangana elections 2018
TRS
K. Chandrashekhar Rao

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

‘तेलंगाना की जनता बदलाव चाहती है’… हिंसा नहीं

2022 तय कर सकता है कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का भविष्य

तेलंगाना की पहली सुपर थर्मल पावर परियोजना को हरी झंडी देने में अहम मुद्दों की अनदेखी?

कोविड-19: लॉकडाउन की मार से बुरी तरह से बेहाल ओला-उबर चालकों ने वित्तीय सहायता की मांग की है 

यूनियन ने कहा यूपी में चुनाव ड्यूटी पर 1621 की मौत, तेलंगाना में किसानों का प्रदर्शन और अन्य ख़बरें

लोकसभा, विधानसभा उप चुनावों का क्या रहा परिणाम  

कोविड-19 : अस्पतालों में भारी भीड़ों से तेलुगू सरकारें ख़ौफ़ में 

तेलंगाना: नागार्जुन सागर उपचुनाव में टीआरएस का पलड़ा भारी


बाकी खबरें

  • न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    संतूर के शहंशाह पंडित शिवकुमार शर्मा का मुंबई में निधन
    10 May 2022
    पंडित शिवकुमार शर्मा 13 वर्ष की उम्र में ही संतूर बजाना शुरू कर दिया था। इन्होंने अपना पहला कार्यक्रम बंबई में 1955 में किया था। शिवकुमार शर्मा की माता जी श्रीमती उमा दत्त शर्मा स्वयं एक शास्त्रीय…
  • न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    ग़ाज़ीपुर के ज़हूराबाद में सुभासपा के मुखिया ओमप्रकाश राजभर पर हमला!, शोक संतप्त परिवार से गए थे मिलने
    10 May 2022
    ओमप्रकाश राजभर ने तत्काल एडीजी लॉ एंड ऑर्डर के अलावा पुलिस कंट्रोल रूम, गाजीपुर के एसपी, एसओ को इस घटना की जानकारी दी है। हमले संबंध में उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया। उन्होंने कहा है कि भाजपा के…
  • कामरान यूसुफ़, सुहैल भट्ट
    जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती
    10 May 2022
    आम आदमी पार्टी ने भगवा पार्टी के निराश समर्थकों तक अपनी पहुँच बनाने के लिए जम्मू में भाजपा की शासन संबंधी विफलताओं का इस्तेमाल किया है।
  • संदीप चक्रवर्ती
    मछली पालन करने वालों के सामने पश्चिम बंगाल में आजीविका छिनने का डर - AIFFWF
    10 May 2022
    AIFFWF ने अपनी संगठनात्मक रिपोर्ट में छोटे स्तर पर मछली आखेटन करने वाले 2250 परिवारों के 10,187 एकड़ की झील से विस्थापित होने की घटना का जिक्र भी किया है।
  • राज कुमार
    जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप
    10 May 2022
    सम्मेलन में वक्ताओं ने उन तबकों की आज़ादी का दावा रखा जिन्हें इंसान तक नहीं माना जाता और जिन्हें बिल्कुल अनदेखा करके आज़ादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। उन तबकों की स्थिति सामने रखी जिन तक आज़ादी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License