NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
घटना-दुर्घटना
भारत
राजनीति
तेलंगाना में 10 महिला मनरेगा मजदूरों की मौत, सरकार पर सवाल
नरेगा संघर्ष मोर्चा ने इस घटना के लिए सरकारी अधिकारियों की उदासीनता और मज़दूरों के लिए कार्य स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध न कराने को जिम्मेदार ठहराया है। मोर्चा ने इस घटना की न्यायिक जांच की मांग करते हुए प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजे देने की मांग की है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Apr 2019
Telangana tragedy
Image Courtesy: Scroll.in

तेलंगाना के वाई तिप्पागुट्टा (Y.Tippagutta) में हुए एक हादसे में 10 महिला मनरेगा मजदूरों की कार्यस्थल पे ही मौत हो गयी। यह घटना  नारायणपेट जिले में मरिकाल मंडल के तेलेरू पंचायत की है। नरेगा संघर्ष मोर्चा ने इस घटना के लिए सरकारी अधिकारियों की उदासीनता और मज़दूरों के लिए कार्य स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध न कराने को जिम्मेदार ठहराया है। मोर्चा ने इस घटना की न्यायिक जांच की मांग करते हुए प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजे देने की मांग की है।

बताया जाता है कि बुधवार सुबह, 30 मनरेगा मजदूर एक छोटी पहाड़ी के नीचे छाया में आराम कर रहे थे, जब यह दु:खद घटना घटी। ढीली मिट्टी और बोल्डर गिरने से 10 महिला मजदूर जिंदा दफन हो गईं और 6 अन्य घायल हो गए। ये सभी मनरेगा के तहत ट्रेंच कटिंग योजना पर काम कर रहे थे। चिलचिलाती गर्मी और धूप से थक कर मजदूरों के इस समूह ने कुछ देर के लिए पहाड़ी के नीचे आराम करने का फैसला किया था।
पहाड़ी के एक हिस्से को कुछ सालों पहले जेसीबी से उकेरा गया था, अक्सर मनरेगा मजदूर  काम के बीच में विश्राम लेने के लिए इस स्थान का उपयोग करते है, क्योंकि उनके लिए थोड़े से भी आराम के लिए कोई उपयुक्त जगह नहीं है। इस वजह से मजदूर ऐसे खतरनाक स्थानों में आराम करने के लिए मजबूर हो जाते है।

तेलंगाना में, वर्षों से उपाधि हमी फोन रेडियो, दलित बहुजन  मोर्चे और अनेक नागरिक संगठन यह  मांग कर रहे हैं कि छाया के लिए प्लास्टिक की शीट के बदले कपड़े का शामियाना प्रदान किया जाए जिससे सुरक्षित तंबू बना लिया जा सके। प्लास्टिक की शीट से उल्टा गर्मी बढ़ जाती है और इस लिए मजदूर गर्मी के समय  में इनका उपयोग करने से हिचकते हैं। यह  उल्लेखनीय है कि सभी कार्य स्थलों पर प्लास्टिक की शीट भी उपलब्ध नहीं कराई जाती है।

मनरेगा मजदूरों को बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा के बिना काम करवाया जाता है जो कि मजदूरों के अधिकार तथा मानवाधिकार का उल्लंघन है।

नरेगा संघर्ष मोर्चा ने इस  घटना की न्यायिक जांच की मांग की है और प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 लाख रुपये का मुआवजे  देने  की भी मांग की है। इसके अतिरिक्त, मजदूरों के परिवारों को  नरेगा कानून के खंड -2 की धारा -26 और सम्बंधित राज्य अधिसूचना के तहत उल्लेखित लाभ भी तुरंत देने की मांग की गई है।

नरेगा संघर्ष मोर्चा यह भी मांग करता है कि प्रत्येक कार्यस्थल पर कपड़े का टेंट उपलब्ध कराया जाए और कार्य स्थल सुविधाओं के निरीक्षण के लिए सौ प्रतिशत ऑडिट तुरंत सुनिश्चित किया जाए। मोर्चा ने राज्य प्रशासन से दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।

पूरे देश में मनरेगा मजदूर बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा के बिना ही  कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार उन लाखों ग्रामीण मजदूरों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने में बार-बार विफल रही है। हर रोज अपनी जान जोखिम में डालकर प्रतिकूल परिस्थितियों में मजदूर काम कर रहे हैं। इस गंभीर घटना ने फिर से प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर किया है। यह घटना सरकारी विफलता को दिखाती है जो मेहनतकाश मजदूरों के मुद्दों की हमेशा उपेक्षा करती है।
नरेगा संघर्ष मोर्चा ने राज्य और केंद्र सरकार दोनों की कार्यशैली को गैर जिम्मेदार बताते हुए उसकी कड़ी निंदा की है। मोर्चा के मुताबिक मनरेगा मजदूरों को बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स (BOCW) एक्ट के तहत  अलग अलग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेने का हक़दार बनाया जाना चाहिए। इससे करोड़ों मनरेगा मजदूर लाभान्वित होंगे।

सबसे महत्वपूर्ण है कि इस तरह के गंभीर दुर्घटना दोहराई नहीं जाए। इसके लिए नरेगा संघर्ष मोर्चा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि मनरेगा मजदूरों  की सुरक्षा और संरक्षण के लिए ज़ल्द से ज़ल्द  न्यूनतम मानक  मानदंड निर्धारित किए जाएं।

Telangana
Telangana tragedy
MGNREGA
10 women MGNREGA workers killed
K. Chandrashekar Rao
KCR

Related Stories

रघुवंश बाबू का जाना राजनीति से एक प्रतीक के जाने की तरह है

क्या है तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी और पुलिस कमिश्नर सज्जनार का इतिहास!

डेली राउंडअप : पतंजलि ज़मीन घोटाला, तेलंगाना में छात्रों की आत्महत्या


बाकी खबरें

  • Nishads
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: आजीविका के संकट के बीच, निषाद इस बार किस पार्टी पर भरोसा जताएंगे?
    07 Mar 2022
    निषाद समुदाय का कहना है कि उनके लोगों को अब मछली पकड़ने और रेत खनन के ठेके नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी पारंपरिक आजीविका के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है।
  • Nitish Kumar
    शशि शेखर
    मणिपुर के बहाने: आख़िर नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स क्या है...
    07 Mar 2022
    यूपी के संभावित परिणाम और मणिपुर में गठबंधन तोड़ कर चुनावी मैदान में हुई लड़ाई को एक साथ मिला दे तो बहुत हद तक इस बात के संकेत मिलते है कि नीतीश कुमार एक बार फिर अपने निर्णय से लोगों को चौंका सकते हैं।
  • Sonbhadra District
    तारिक अनवर
    यूपी चुनाव: सोनभद्र के गांवों में घातक मलेरिया से 40 से ज़्यादा लोगों की मौत, मगर यहां के चुनाव में स्वास्थ्य सेवा कोई मुद्दा नहीं
    07 Mar 2022
    हाल ही में हुई इन मौतों और बेबसी की यह गाथा भी सरकार की अंतरात्मा को नहीं झकझोर पा रही है।
  • Russia Ukraine war
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: जेलेंस्की ने कहा रूस पर लगे प्रतिबंध पर्याप्त नहीं, पुतिन बोले रूस की मांगें पूरी होने तक मिलट्री ऑपरेशन जारी रहेगा
    07 Mar 2022
    एक तरफ रूस पर कड़े होते प्रतिबंधों के बीच नेटफ्लिक्स और अमेरिकन एक्सप्रेस ने रूस-बेलारूस में अपनी सेवाएं निलंबित कीं। दूसरी तरफ यूरोपीय संघ (ईयू) के नेता चार्ल्स मिशेल ने कहा कि यूक्रेन के हवाई…
  • International Women's Day
    नाइश हसन
    जंग और महिला दिवस : कुछ और कंफ़र्ट वुमेन सुनाएंगी अपनी दास्तान...
    07 Mar 2022
    जब भी जंग लड़ी जाती है हमेशा दो जंगें एक साथ लड़ी जाती है, एक किसी मुल्क की सरहद पर और दूसरी औरत की छाती पर। दोनो ही जंगें अपने गहरे निशान छोड़ जाती हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License