NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तेलंगाना: टीआरएस शासन में शिक्षा को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया गया
सीएजी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आवंटित राशि को खर्च न करना, आरटीई अधिनियम का उल्लंघन और वंचित वर्गों की उपेक्षा तेलंगाना में टीआरएस सरकार की पहचान है।
पृथ्वीराज रूपावत
01 Nov 2018
Telangana schools

पिछले चार वर्षों में तेलंगाना बेहद महत्वपूर्ण यानी शिक्षा क्षेत्र में निराशाजनक प्रवृत्ति का साक्षी बना है। इस साल की शुरुआत में जारी भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) रिपोर्ट में के चंद्रशेखर राव के तेलंगाना राष्ट्र समिति शासन के अधीन राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कम्पल्सरी एजुकेशन एक्ट, 2009 (आरटीई एक्ट) के कार्यान्वयन न होने और बजट के इस्तेमाल जैसे विभिन्न पहलुओं को चिन्हित किया है।

साल 2014 में चुनाव के अपने घोषणापत्र में टीआरएस पार्टी ने इस क्षेत्र में अन्य वादों के अलावा राज्य में प्राथमिक विद्यालय से स्नातकोत्तर तक निःशुल्क शिक्षा और नए विश्वविद्यालयों की स्थापना का वादा किया था। हालांकि इस दिशा में सरकार द्वारा कोई उपाय नहीं किए गए, राज्य सरकार मौजूदा अनिवार्य प्रावधानों को लागू करने में विफल रही है, क्योंकि नीचे दिए गए विभिन्न शीर्ष शिक्षा की बदतर स्थिति को स्पष्ट करते हैं।

शिक्षा पर व्यय

सीएजी रिपोर्ट में सामने आया है कि साल 2014-17 के दौरान सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों दोनों की तरफ से धन के आवंटन में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है जो कि आरटीई अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण माध्यम है।

जब सामान्य और सामाजिक क्षेत्रों पर कुल व्यय की तुलना की गई तो यह स्पष्ट हुआ कि टीआरएस सरकार ने उच्च शिक्षा और स्कूल शिक्षा विभाग दोनों के लिए शिक्षा पर अपने व्यय को धीरे-धीरे कम कर दिया। साल 2014-15 के दौरान कुल व्यय की तुलना में 16.56 प्रतिशत व्यय शिक्षा पर किया गया था, जबकि साल 2015-16 के दौरान यह घट कर 13.8 प्रतिशत हो गया और साल 2016-17 के दौरान घटकर 12.6 प्रतिशत हो गया।

इसके परिणामस्वरूप राज्य के छात्रों के लाभ के लिए इस महत्वपूर्ण पहल पर अमल नहीं हुआ। इनमें कंप्यूटर की शिक्षा, प्रशिक्षण, अकादमिक समर्थन, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए पहल, सामुदायिक जुटाव, स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों को मुख्यधारा में लाने के लिए विशेष प्रशिक्षण, विस्तारित कार्यक्रम की शिक्षा तथा अनुसंधान मूल्यांकन निगरानी एवं पर्यवेक्षण शामिल थे।

कमज़ोर आधारभूत ढ़ांचा

धन की कमी के परिणामस्वरूप बुनियादी सुविधाओं की बड़ी संख्या अधूरी रही जो राज्य में सरकारी स्कूलों की ख़राब स्थिति को बयां करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार साल 2001-02 से 2016-17 के दौरान स्कूलों के भौतिक आधारभूत संरचना से संबंधित 91,19 9 स्वीकृत सिविल कार्यों में से कुल मिलाकर 21,564 कार्य (लगभग24 प्रतिशत) अपूर्ण रहे, जिनमें से 7,014 कार्य शौचालय और पेयजल से संबंधित हैं। इससे पता चलता है कि ऐसे स्कूलों की एक बड़ी संख्या है जहां बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की कमी है।

सरकारी स्कूलों के बजाय निजी स्कूल रहे पसंदीदा

निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों में दाख़िला कम हुआ। सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में इस अवधि के दौरान दाख़िला 1.12 लाख (7.65प्रतिशत) तक घट गया। दूसरी ओर निजी प्राथमिक विद्यालयों के मामले में इसी अवधि के दौरान दाख़िला 0.61 लाख (3.67 प्रतिशत) बढ़ गया। इसी तरह अपर प्राइमरी स्कूलों के मामले में सरकारी स्कूलों में दाख़िले की संख्या में केवल 2.89 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि प्राइवेट अपर प्राइमरी स्कूलों में 10.09 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि सरकारी अपर प्राइमरी स्कूलों में नामांकन में 0.20 लाख (2.13 प्रतिशत) की कमी आई जबकि निजी अपर प्राइमरी स्कूलों में नामांकन 0.03 लाख (0.38 प्रतिशत) बढ़ गया।

साल 2014-17 की अवधि के दौरान सरकारी (स्थानीय निकायों और सहायता प्राप्त सहित) प्राथमिक विद्यालयों की संख्या में केवल 0.42 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि निजी प्राथमिक विद्यालयों में 12.75 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

पढ़ाई के बीच में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों में एससी/एसटी की संख्या अधिक

कक्षा 1 में साल 2007-08 और साल 2008-09 के दौरान दाख़िल बच्चों को क्रमश: साल 2014-15 और साल 2015-16 के दौरान कक्षा आठवीं(अपर प्राइमरी लेवल) तक पढ़ाई जारी रखना चाहिए था। हालांकि, सीएजी ने पाया कि इस स्तर पर पढ़ाई के बीच में स्कूल छोड़ने वाले कुल बच्चों का प्रतिशत 28.93 प्रतिशत (लड़कियां) से लेकर 31.93 प्रतिशत (लड़के) तक है। इनमें अनुसूचित जनजातियों के छात्रों का दर 52.89 प्रतिशत(लड़के) और 54.81 प्रतिशत (लड़कियां) था। वहीं अनुसूचित जाति के छात्रों का दर 32.58 प्रतिशत (लड़के) और 31.38 प्रतिशत (लड़कियां) था।

तेलंगाना सरकार आरटीई अधिनियम के तहत बाल निगरानी प्रणाली (सीएमएस-चाइल्ड मॉनिटरिंग सिस्टम) भी स्थापित नहीं कर पाई है जो एक अनिवार्य नियम है। सीएमएस के बिना सरकार न केवल स्कूलों में बच्चों की शैक्षिक प्रगति की निगरानी में कमी कर रही है बल्कि उनकी रखवाली,विकास और प्रवास की निगरानी में भी कमी कर रही है।

निजी ग़ैर सहायता प्राप्त स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण

पहले के मौजूदा सरकारी आदेशों और आरटीई नियमों के प्रावधानों के बावजूद राज्य सरकार कमज़ोर वर्गों तथा वंचित समूहों के बच्चों के लिए 25प्रतिशत आरक्षण लागू करने में विफल रही। हालांकि सरकार इस श्रेणी के तहत दाख़िल बच्चों के लिए शुल्क की प्रतिपूर्ति करने के लिए बाध्य है, 2014-17 के दौरान यह पाया गया कि सरकार ने इस श्रेणी के लिए कोई व्यय नहीं किया। आरटीई का यह महत्वपूर्ण प्रावधान बिहार, छत्तीसगढ़,दिल्ली, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तराखंड में लागू किया जा रहा है।

ज़ाहिर है टीआरएस सरकार द्वारा पालन की जाने वाली नीतियां सरकार की तरफ से गंभीर लापरवाही उजागर करती है जो विशेष रूप से हाशिए पर मौजूद वर्गों के छात्रों को प्रभावित करती है।

Telangana
TRS
education
schools
CAG report

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

जौनपुर: कालेज प्रबंधक पर प्रोफ़ेसर को जूते से पीटने का आरोप, लीपापोती में जुटी पुलिस

बच्चे नहीं, शिक्षकों का मूल्यांकन करें तो पता चलेगा शिक्षा का स्तर

विशेष: क्यों प्रासंगिक हैं आज राजा राममोहन रॉय

‘तेलंगाना की जनता बदलाव चाहती है’… हिंसा नहीं

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप


बाकी खबरें

  • protest
    न्यूज़क्लिक टीम
    दक्षिणी गुजरात में सिंचाई परियोजना के लिए आदिवासियों का विस्थापन
    22 May 2022
    गुजरात के दक्षिणी हिस्से वलसाड, नवसारी, डांग जिलों में बहुत से लोग विस्थापन के भय में जी रहे हैं। विवादास्पद पार-तापी-नर्मदा नदी लिंक परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। लेकिन इसे पूरी तरह से…
  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: 2047 की बात है
    22 May 2022
    अब सुनते हैं कि जीएसटी काउंसिल ने सरकार जी के बढ़ते हुए खर्चों को देखते हुए सांस लेने पर भी जीएसटी लगाने का सुझाव दिया है।
  • विजय विनीत
    बनारस में ये हैं इंसानियत की भाषा सिखाने वाले मज़हबी मरकज़
    22 May 2022
    बनारस का संकटमोचन मंदिर ऐसा धार्मिक स्थल है जो गंगा-जमुनी तहज़ीब को जिंदा रखने के लिए हमेशा नई गाथा लिखता रहा है। सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल पेश करने वाले इस मंदिर में हर साल गीत-संगीत की…
  • संजय रॉय
    महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 
    22 May 2022
    पेट्रोलियम उत्पादों पर हर प्रकार के केंद्रीय उपकरों को हटा देने और सरकार के इस कथन को खारिज करने यही सबसे उचित समय है कि अमीरों की तुलना में गरीबों को उच्चतर कीमतों से कम नुकसान होता है।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 
    21 May 2022
    अठारह घंटे से बढ़ाकर अब से दिन में बीस-बीस घंटा लगाएंगेे, तब कहीं जाकर 2025 में मोदी जी नये इंडिया का उद्ïघाटन कर पाएंगे। तब तक महंगाई, बेकारी वगैरह का शोर मचाकर, जो इस साधना में बाधा डालते पाए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License