NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तीन तलाक़ विधेयक: कांग्रेस अधिक सावधानी क्यों बरत रही है?
पार्टी 2018 के आगामी विधानसभा चुनावों और 2019 के आम चुनावों से पहले 'अल्पसंख्यक तुष्टीकरण' का दोषी होना नहीं चाहती है।
तारिक़ अनवर
30 Dec 2017
तीन तलाक़
न्यूज़क्लिक फोटो : नितेश कुमार

अपने "सॉफ्ट हिंदुत्व" दृष्टिकोण को बनाए रखने के लिए कांग्रेस 28 दिसंबर को लोकसभा में तीन तलाक़ विधेयक पर बहस करते हुए बहुत ज़्यादा सावधान रही। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2017, जो 'तलाक़-ए-बिद्दत' या त्वरित तलाक़ की प्रथा को आपराधिक बनाता है, को  इसके बाद निचले सदन अर्थात लोकसभा से पारित कर दिया गया।

सबसे पुरानी पार्टी के कई सांसदों ने सदन कार्य की विधायी सूची में विवादास्पद बिल को पेश करने पर विरोध करते हुए एक नोटिस दिया था, लेकिन उनमें से कोई भी अपने विरोध की आवाज़ नहीं उठा सकता क्योंकि - अगर सूत्रों पर विश्वास करें तो - "उन्हें पार्टी हाईकमान से आगे जाने को नहीं कहा गया।"

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला को संसद के बाहर इस मुद्दे पर बोलने का काम सौंपा गया था। अपने बयान में बचाव करते हुए कहा कि पार्टी इस विधेयक का विरोध नहीं करती है,लेकिन मुस्लिम महिलाओं के कल्याण के लिए इसे मज़बूत करने की माँग कर रही थी।

वास्तव में लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी यही बात दोहरायी। उन्होंने कहा कि "स्थायी समिति को बिल भेज दें। सभी पार्टी के लोग वहाँ मौजूद होंगे। कुछ समय दें, विधेयक पर विस्तृत परामर्श लेने की ज़रूरत है। हम सभी इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन कुछ समस्याएँ निश्चित ही हैं जिन्हें स्थायी समिति में सुधारा जाना चाहिए या सुधारा सकता है, हम एक साथ बैठ सकते हैं और समयबद्ध तरीके से निबटा सकते हैं।"

राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि ये पार्टी काफी सतर्क दिखाई देती हैं क्योंकि यह अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी - बीजेपी - को अगले साल कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अल्पसंख्यक तुष्टीकरण का सहारा देने का आरोप लगाने का कोई मौका नहीं देना चाहती है।

समीक्षकों ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि "कांग्रेस जानती है कि राजीव गाँधी सरकार के इस्लामिक कट्टरता के दबाव के कारण शाह बानो मामले में एक धर्मनिरपेक्ष आदेश उच्चतम न्यायालय के फैसले को उलट कर पाया था और मुस्लिम महिला (तलाक़ पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986 को पारित कर दिया था, जो अदालत के इस फ़ैसले को कमज़ोर कर दिया और मुस्लिम महिलाओं को तलाक़ के बाद ईद्दत या 90 दिनों की अवधि के लिए गुज़ारा भत्ता का अधिकार दिया। परिणामस्वरूप बीजेपी और अन्य क्षेत्रीय पार्टियाँ वफादार कांग्रेस मतदाताओं के बड़े हिस्से को अपनी ओर करने में सक्षम हो गई।"

वे कहते हैं कि गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गाँधी का लगातार मंदिर का दौरा एक "बुद्धिमत्तापूर्ण योजना" का हिस्सा था। उन्होंने आगे कहा कि "सॉफ्ट हिंदुत्व को अपनाने की एक छवि बनाने की कवायद है, जो कांग्रेस अन्य चुनावों में भी खासकर कर्नाटक और 2018 में अन्य राज्यों में इसे आगे बढ़ना चाहती है।"

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी वर्ष 2019 में होने वाले आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए सरकार से किसी तरह की लड़ाई करना नहीं चाहती है ताकि उसके एजेंडा को नुकसान पहुँचे।"और इसलिए असम में सिलचर के एक युवा कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव को तीन तलाक़ चर्चा में शामिल होने के लिए कहा गया था।"

उन्होंने उन महिलाओं की प्रशंसा करते हुए अपने वक्तव्य की शुरूआत की जिन्होंने "त्वरित तीन तलाक़ प्रथा" के ख़िलाफ़ साहस जुटाया। उन्होंने तलाक़ प्रक्रिया से गुज़र रही महिलाओं के मुआवज़े का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ये विधेयक त्वरित तीन तलाक़ को आपराधिक बनाता है लेकिन "अगर कोई पति जेल जाता है, तो मुआवज़ा कौन देगा?"

उन्होंने पूछा कि "क्या सरकार मुआवज़े का इंतजार करने वाली तलाक़शुदा महिलाओं को गुज़ारा भत्ता देने के लिए कोष बनाएगी?"

तीन तलाक़
Congress
Muslim Women (Protection of Rights of Marriage) Bill 2017

Related Stories

हार्दिक पटेल भाजपा में शामिल, कहा प्रधानमंत्री का छोटा सिपाही बनकर काम करूंगा

राज्यसभा सांसद बनने के लिए मीडिया टाइकून बन रहे हैं मोहरा!

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

राज्यसभा चुनाव: टिकट बंटवारे में दिग्गजों की ‘तपस्या’ ज़ाया, क़रीबियों पर विश्वास

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

केरल उप-चुनाव: एलडीएफ़ की नज़र 100वीं सीट पर, यूडीएफ़ के लिए चुनौती 

कांग्रेस के चिंतन शिविर का क्या असर रहा? 3 मुख्य नेताओं ने छोड़ा पार्टी का साथ

‘आप’ के मंत्री को बर्ख़ास्त करने से पंजाब में मचा हड़कंप

15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा चुनाव; कैसे चुने जाते हैं सांसद, यहां समझिए...


बाकी खबरें

  • अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर : रणनीतिक ज़ोजिला टनल के 2024 तक रक्षा मंत्रालय के इस्तेमाल के लिए तैयार होने की संभावना
    30 Mar 2022
    प्रोजेक्ट हैंडलर्स के मुताबिक़, ज़ोजिला टनल सहित पांचों टनल का काम सर्दियों के दौरान तेज़ किया गया है। यह रूट तय समय से एक साल पहले सितंबर 2025 में ही इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाएगा।
  • SC
    भाषा
    उच्चतम न्यायालय में चार अप्रैल से प्रत्यक्ष रूप से होगी सुनवाई
    30 Mar 2022
    शीर्ष अदालत में बुधवार को मामलों पर सुनवाई शुरू होने से पहले प्रधान न्यायाधीश ने यह घोषणा की।
  • Cartoonclick
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: चुनाव ख़तम-खेल शुरू...
    30 Mar 2022
    कहावत है कि ‘खेल ख़तम-पैसा हज़म’, लेकिन राजनीति के संदर्भ में इसे यूं भी कहा जा सकता है कि ‘चुनाव ख़तम-खेल शुरू...’ जी हां, तभी तो पांच राज्यों में चुनाव ख़त्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दामों में आग
  • sabarmati ashram
    तुषार गांधी
    मैंने क्यों साबरमती आश्रम को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है?
    30 Mar 2022
    साबरमती आश्रम महज़ बापू और बा का स्मारक ही नहीं है, बल्कि यह आज़ादी को लेकर किये गए हमारे अनूठे अहिंसक जनांदोलन, यानी सत्याग्रह का भी एक स्मारक है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,233 नए मामले, 31 मरीज़ों की मौत
    30 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 14 हज़ार 704 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License