NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र : एनआरसी और मैं
भारत में किसी भी काम के होने के दो सर्वमान्य तरीक़े हैं। पहला कानूनी तरीका और दूसरा, ‘दूसरा’ तरीका। और यह दूसरा तरीका कानूनी तरीक़े से भी अधिक असरदार है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
08 Sep 2019
NRC
प्रतीकात्मक तस्वीर, साभार : newindianexpress

असम में एनआरसी की लिस्ट जारी कर दी गई है। 31 अगस्त की मध्य रात्रि को यह लिस्ट जारी कर दी गई। 19 लाख से अधिक लोगों के नाम उसमें से गायब हैं। उनमें हिन्दू भी हैं और मुसलमान भी। गरीब अधिक हैं, पर कोई कोई अमीर भी है।

भारत में किसी भी काम के होने के दो सर्वमान्य तरीक़े हैं। पहला कानूनी तरीका और दूसरा, ‘दूसरा’ तरीका। कानूनी तरीके का मतलब है कि आप, जैसे इस एनआरसी के मामले को ही लें तो, वे सारे कागजात जमा करा दें, जो आपसे मांगे गये हों। हो सकता है कि आप साठ साल के हों और आपसे आपका जन्म प्रमाणपत्र मांगा जाये। लेकिन आप तो घर में ही किसी दाई द्वारा पैदा किये गये थे और आपका जन्म प्रमाणपत्र आपके मां-बाप ने बनवाया ही नहीं था। उन दिनों गांव-देहात में ये जन्म प्रमाणपत्र बनवाता भी कौन था। आज भी कहां सब लोग बनवाते हैं।  

यह भी हो सकता है कि आपके घर में खाने के लाले पड़े हैं लेकिन आपसे कहा जाये कि आप अपने या अपने पूर्वजों के नाम से 1971 से पहले खरीदी गई ज़मीन के कागज़ात दिखायें।

आप निरक्षर हैं, गरीब हैं, स्कूल कभी गये नहीं हैं। पर अब आपसे कहा जा सकता है कि अपनी जन्म तिथि का और इस बात का प्रमाण देने के लिए कि आप असम में ही पढ़े लिखे हैं, स्कूल लीविंग प्रमाण पत्र दीजिए। ऐसे ही आपसे कुछ भी ऐसा मांगा जा सकता है जो  अपनी गरीबी, बेचारी या लाचारी के कारण आपके पास न हो।

हो सकता है आपके पास कभी आपका जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, जमीन की रजिस्ट्री के कागजात रहे भी हों पर लाचारी यह है कि वे बाढ़ में बह गए हों। ये बाढ़ असम में आती भी बहुत है।

वैसे हमारे देश में किसी भी काम को करवाने का एक दूसरा तरीका भी है। और यह तरीका कानूनी तरीक़े से भी अधिक असरदार है। इस तरीक़े में उन सब कागजात की आवश्यकता नहीं होती है, जिन्हें आपसे मांगा जा रहा है। इस तरीक़े में अपनी एप्लिकेशन के साथ कुछ रंगीन कागज़ भी संलग्न करने पड़ते हैं। आठ नवंबर दो हजार सोलह से पहले वे सभी कागज़ सिर्फ हरे रंग के होते थे। अब गुलाबी, हरे, संतरी, नीले, सभी रंगों के होते हैं। उन कागजों को सरकार ही छापती है इसलिए सरकारी कामों को करवाने के लिए वे बहुत ही उपयोगी होते हैं। ये कागज़ बहुत ही करामाती होते हैं और किसी भी काम को, यहां तक कि बिगड़े हुए काम को भी, बना देते हैं। उम्मीद है असम में भी समर्थ लोगों ने अन्य कागजों के साथ इन रंगीन कागजों का भी उपयोग किया होगा। हालांकि इस तरीक़े के उपयोग की शिकायतें अभी मिली नहीं हैं, पर वे शिकायतें मिलती तभी हैं जब रंगीन कागजों का उपयोग होने पर भी काम न हो। इस बेईमानी में ईमानदारी हो तो कोई शिकायत नहीं करता।

असम में एनआरसी के बनाने में बनाने वालों ने बहुत ही एहतियात से काम किया है। जिसके फलस्वरूप एक विधायक भी लिस्ट से बाहर है। एक ऐसे फौजी और उनका परिवार भी लिस्ट में नहीं है जिसने करगिल युद्ध में भाग लिया था। गोया कि कम से कम एक बांग्लादेशी करगिल युद्ध में भारत की ओर से पाकिस्तानी सेना से लोहा ले रहा था। एक भूतपूर्व राष्ट्रपति के रिश्तेदार भी लिस्ट से बाहर हैं। फखरूद्दीन अली अहमद जी को अगर जन्नत नसीब न हुई होती तो वे स्वयं एनआरसी की लिस्ट में अपना और अपनी बेगम का नाम ढूंढ बेदम हो रहे होते। हम भी गर्व से सारे विश्व में घोषणा कर रहे होते कि देखो हमने एक बांग्लादेशी को राष्ट्रपति बना दिया। यह वसुधैव कुटुम्बकम का सबसे बढ़िया उदाहरण होता।

असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) तैयार करनेवाले अधिकारियों ने सूची तैयार करने में बहुत ही होशियारी बरती है। ऐसा लगता है कि कई जगह तो जासूसों की सेवा भी ली गई है। जैसे कई जगह मां-बाप शामिल हैं और चार में से पहला, दूसरा और चौथा बच्चा भी। लेकिन तीसरा बच्चा नहीं। जासूसों ने एनआरसी के अधिकारियों को ख़बर दी होगी कि महिला तीसरा बच्चा पैदा करने बंगलादेश चली गयी थी। ऐसा हिन्दू महिलाओं के साथ भी हुआ है। ऐसा तो सुना जाता रहा है कि धनाढ्य परिवारों की महिलायें डिलीवरी के लिए इंग्लैंड या अन्य विकसित देशों में चली जाती हैं, पर गरीब महिलाएं भी ऐसा कर सकती हैं, यह असम में, एनआरसी लिस्ट जारी होने के बाद ही पता चला है।

हालांकि एनआरसी का यह काम सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उसी की निगरानी में हो रहा है पर उसमें विसंगतियां भी बहुत हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस सूची के सार्वजनिक होने के बाद जो इसके पक्ष में थे वे भी विपक्ष में हो गये हैं। जो इसके बहाने से डींगें हांक रहे थे, कि इसको बांग्लादेश भेज देंगे, उसको बांग्लादेश भेज देंगे, उन सबकी बोलती बंद हो गई है। छप्पन इंच की तोंद वाले भी शांत बैठे हैं। सोच रहे हैं कि  इस लिस्ट में से बाहर हुए हिन्दुओं को अंदर (लिस्ट के, डिटेंशन कैम्प के अंदर नहीं) कैसे किया जाये।

पर मैं तो तबसे अधिक चिंतित हूँ जबसे दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी जी ने कहा है कि दिल्ली में भी एनआरसी लागू किया जाये। मैं ढूंढ ढूंढ कर थक गया पर मुझे न अपने दिवंगत माता पिता का कोई सर्टिफिकेट मिल रहा है और न ही अपना 1971 से पहले का कुछ। दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र है तो सही पर वह भी 1971 के बाद का है। पर एक भरोसा बचा है, गुलाबी, हरे, संतरी और नीले कागजों पर। जहां तक संभव हुआ, वे रंगीन कागज़ मुझे और मेरे परिवार को बांग्लादेश भेजे जाने से बचा ही लेंगे।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

NRC
NRC Process
NRC Assam
tirchi nazar
Political satire

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!

तिरछी नज़र: विश्व गुरु को हंसना-हंसाना नहीं चाहिए


बाकी खबरें

  • fertilizer
    तारिक अनवर
    उप्र चुनाव: उर्वरकों की कमी, एमएसपी पर 'खोखला' वादा घटा सकता है भाजपा का जनाधार
    04 Feb 2022
    राज्य के कई जिलों के किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा संचालित केंद्रों पर डीएपी और उर्वरकों की "बनावटी" की कमी की वजह से इन्हें कालाबाजार से उच्च दरों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा 5 लाख के पार
    04 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,49,394 नए मामले सामने आए और 1,072 मरीज़ों की मौत हुई है। देश में कोरोना से अब तक 5 लाख 55 लोगों की मौत हो चुकी है।
  • SKM
    रौनक छाबड़ा
    यूपी चुनाव से पहले एसकेएम की मतदाताओं से अपील: 'चुनाव में बीजेपी को सबक़ सिखायें'
    04 Feb 2022
    एसकेएम ने गुरुवार को अपने 'मिशन यूपी' अभियान को फिर से शुरू करने का ऐलान करते हुए कहा कि 57 किसान संगठनों ने मतदाताओं से आगामी यूपी चुनावों में भाजपा को वोट नहीं देने का आग्रह किया है।
  • unemployment
    अजय कुमार
    क्या बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ने से बेरोज़गारी दूर हो जाएगी?
    03 Feb 2022
    बजट में पूंजीगत खर्चा बढ़ जाने से क्या बेरोज़गारी का अंत हो जाएगा या ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही बात कह रही है?
  • farmers SKM
    रवि कौशल
    कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा
    03 Feb 2022
    मोर्चा ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बार भी किसानों की आय को दुगुना किये जाने का उल्लेख नहीं किया है क्योंकि कई वर्षों के बाद भी वे इस परिणाम को हासिल कर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License