NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र : श्राप देने की कला
आज भी हमारे देश में एक से बढ़कर एक साधु साध्वी हैं जो श्राप देने की कला में पारंगत हैं। वे किसी को भी श्राप दे कर उसे स्वर्ग, ओह सॉरी नरक, पहुंचा सकते हैं।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
16 Jun 2019
सांकेतिक तस्वीर
Image Courtesy : News18.com

प्राचीन भारत में एक कला होती थी जिसे श्राप देने की कला कहा जाता था। उस समय यह कला कुछ तपस्वी, मुनियों आदि को ही उपलब्ध होती थी। प्राचीन ग्रंथों में ऐसे बहुत सारे दृष्टांत उपलब्ध हैं, जिनमें ऋषि गण किसी को भी श्राप दे कर उसका अहित कर देते थे। उसके उलट भी एक कला होती थी जिसे वर या वरदान देने की कला कहा जाता था।

ये दोनों कलायें बहुत ही कठिनाई से, लम्बी तपस्या के बाद प्राप्त होती थी। मुनिवर कठिन और लम्बी तपस्या कर अपने इष्टदेव को प्रसन्न किया करते थे। जब इष्टदेव प्रसन्न हो प्रकट होते थे तो तपस्या रत मुनि उनसे फलस्वरूप श्राप देने या वर देने की कला मांग लेते थे। पुराने ग्रंथों में श्राप देने की या वर देने के बहुत से दृष्टांत मिलते हैं। जब भी श्राप दिया जाता था, साथ ही उससे निजात पाने का उपाय भी बता दिया जाता था।

tirchi najar after change new_18.png

यह आवश्यक नहीं होता था कि जिसे श्राप दिया जाये उसकी गलती ही हो। भगवान राम के काल में अहिल्या को श्राप मिला था और वह पत्थर की बन गई थी। उसके श्राप मिलने में उसकी क्या गलती थी यह तो गौतम ऋषि को भी नहीं पता था। पर उन्हें क्रोध आ गया था और वह श्राप दिये बिना शांत नहीं हो सकता था। साथ ही उसकी काट भी बता दी। देवराज इंद्र के छूने के पाप से मिले श्राप के कारण पत्थर बनी अहिल्या, राम के छूने से फिर महिला बन गयी। वह तो भगवान राम की कृपा से राम जी ने वनवास के समय वह रास्ता चुना जिसमें अहिल्या शिला बनी पड़ी थी। अन्यथा अहिल्या अभी तक पड़ी रहती।

महाभारत में भी श्राप और वरदान देने के बहुत से किस्से वर्णित हैं। यहां हम पांडवों की मां कुन्ती को मिले वर की बात करते हैं। कुन्ती को कुंवारेपन में ही महाऋषि दुर्वासा ने वर दिया था। वैसे ऐसा कम ही होता था कि दुर्वासा ऋषि वर दें। वे तो श्राप देने के लिए प्रसिद्ध थे। पर इस बार वर दे दिया। वर भी क्या दिया। जिसका स्मरण करोगी, उससे गर्भवती हो जाओगी। यह वर था या श्राप! खैर जो भी रहा हो, कुन्ती ने अपने कुंवारेपन में ही सूर्य का स्मरण किया और गर्भवती हो गई। उस समय के वर में इतनी शक्ति होती थी कि सिर्फ स्मरण करने भर से गर्भाधान हो जाता था। विवाह के बाद भी कुन्ती ने अपने पति से इसी प्रकार गर्भाधान किया। बाद में उसने अपने को मिले वर को अपनी सौत माद्री को भी ट्रांसफर कर दिया और माद्री भी इसी तरह से दो बार गर्भवती हुई। सारा विज्ञान एक तरफ और वरदान की शक्ति एक तरफ।

परन्तु ऐसा नहीं है कि यह कला काल के गर्त में समा गयी है। आज भी हमारे देश में एक से बढ़कर एक साधु साध्वी हैं जो श्राप देने की कला में पारंगत हैं। वे किसी को भी श्राप दे कर उसे स्वर्ग, ओह सॉरी नरक, पहुंचा सकते हैं। आजकल श्राप देने की शक्ति प्राप्त करने के लिए कठिन तप नहीं करना पड़ता है। आजकल तो कुछ आतंकवादी गतिविधियां कर और मुसलमानों को गाली दे कर यह शक्ति प्राप्त की जा सकती है।

अभी हाल में ही सांसद बनी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को तो श्राप देने में इतनी महारत हासिल है कि वे हेमंत करकरे को भी श्राप देकर मार सकती हैं। और उधर दूसरी ओर पुनर्निवाचित सांसद साक्षी महाराज हैं, जिन्होंने हारने की स्थिति में अपने इलाके के सभी वोटरों को श्राप देने की धमकी दे डाली थी। वह तो मोदी जी और चुनाव आयोग की कृपा से वह जीत गये अन्यथा उन्नाव चुनाव क्षेत्र के सारे वोटरों को श्राप झेलना पड़ता। इसके अतिरिक्त अवश्य ही और भी ऐसे सांसद,  एम एल ए आदि होंगे जिनमें श्राप देने की प्रतिभा होगी।

पर हमारे प्रधानमंत्री हैं, आजकल जगह जगह जा कर पाकिस्तान की, आतंकवाद की भत्सर्ना करते हैं। पहले भी मोहम्मद मसूद अजहर को सुरक्षा परिषद से विश्व आतंकवादी घोषित करवाने के लिए चीन की खुशामद करते रहे। अरे, साध्वी प्रज्ञा से कहा होता, वे श्राप दे मोहम्मद मसूद को वहीं का वहीं भस्म कर देतीं। न रहता बांस और न बजती बांसुरी। न बचता मसूद न सुरक्षा परिषद में पापड़ बेलने पड़ते।

अंतिम सलाहः प्रधानमंत्री जी को मेरी सलाह है कि विश्व नेताओं के सामने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जी की श्राप देने की कला का प्रदर्शन करवा दें। सभी, इमरान तो क्या, पुतिन, डोनाल्ड और शी जिनपिंग भी, सभी कांपते कांपते भारत के चरणों में झुक जायेंगे।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
dron sharma
Curse
Cursed
Pragya Singh Thakur
sadhvi pragya thakur
hemant karkare
sakshi maharaj
Narendra modi

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...

तिरछी नज़र: ...चुनाव आला रे

चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू

कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या
    19 Mar 2022
    कुछ दिनों में यूपी की सत्ता पर बीजेपी की योगी सरकार दूसरी बार काबिज़ होगी। ऐसे में बीते कार्यकाल में 'बेहतर कानून व्यवस्था' के नाम पर सबसे ज्यादा नाकामी का आरोप झेल चुकी बीजेपी के लिए इसे लेकर एक बार…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 
    19 Mar 2022
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी ट्रेड यूनियन जुट गए हैं। देश भर में इन संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठकों का सिलसिला जारी है।
  • रवि कौशल
    पंजाब: शपथ के बाद की वे चुनौतियाँ जिनसे लड़ना नए मुख्यमंत्री के लिए मुश्किल भी और ज़रूरी भी
    19 Mar 2022
    आप के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने बढ़ते क़र्ज़ से लेकर राजस्व-रिसाव को रोकने, रेत खनन माफ़िया पर लगाम कसने और मादक पदार्थो के ख़तरे से निबटने जैसी कई विकट चुनौतियां हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    अल्ज़ाइमर बीमारी : कॉग्निटिव डिक्लाइन लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी का प्रमुख संकेतक है
    19 Mar 2022
    आम तौर पर अल्ज़ाइमर बीमारी के मरीज़ों की लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी 3-12 सालों तक रहती है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    स्लोवेनिया : स्वास्थ्य कर्मचारी वेतन वृद्धि और समान अधिकारों के लिए कर रहे संघर्ष
    19 Mar 2022
    16 फ़रवरी को स्लोवेनिया के क़रीब 50,000 स्वास्थ्य कर्मचारी काम करने की ख़राब स्थिति, कम वेतन, पुराने नियम और समझौते के उल्लंघन के ख़िलाफ़ हड़ताल पर चले गए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License