NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र : सवाल पूछने की आज़ादी
अब तानाशाही तो है नहीं कि हम सरकार से प्रश्न भी न पूछ सकें। अब अगर बैकडोर से चुपचाप तानाशाही आ भी चुकी है तो बता तो दो ज़रा। हम सरकार से प्रश्न नहीं पूछेंगे।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
25 Aug 2019
सांकेतिक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार

बाक़ी आज़ादियां चाहे सरकार गटर में डाल दे पर एक आज़ादी तो बरकरार रहनी ही चाहिए। वह आज़ादी है प्रश्न पूछने की आज़ादी। प्रजातंत्र में, लोकतंत्र में, जनता को सरकार से प्रश्न पूछने की आज़ादी अवश्य ही होनी चाहिए। अब तानाशाही तो है नहीं कि हम सरकार से प्रश्न भी न पूछ सकें। अब अगर बैकडोर से चुपचाप तानाशाही आ भी चुकी है तो बता तो दो ज़रा। हम सरकार से प्रश्न नहीं पूछेंगे।

यह जो आज़ादी है, सरकार से प्रश्न पूछने की भी, हमारे स्वतंत्रता सैनानियों ने, उस समय के नेताओं ने बडी़ मुश्किल से, कुर्बानियों से हासिल की थी। पर बीच के तीन साल में (इमरजेंसी के) और अब पिछले पांच साल से यह आज़ादी भी गुम होती जा रही है। 

tirchi najar after change new_29.png

यह जो प्रश्न पूछने की आज़ादी है मुझे डर है कि यह आज़ादी अब स्कूलों-कालेजों में भी बची है या नहीं। आप वहां भी प्रश्न पूछ सकते हैं या नहीं। पहले तो अध्यापक छात्रों से और छात्र अध्यापक से भी प्रश्न पूछ सकते थे। पर अब कहीं वहां भी तो ऐसा तो नहीं हो गया है कि अध्यापक किसी छात्र से कठिन सा प्रश्न पूछें और छात्र जवाब दे दे "भारत माता की जय", तो अध्यापक अब क्या करे। अध्यापक का सिर नीचा और छात्र का ऊपर। अध्यापक न तो छात्र को बैंच पर खडा होने के लिए कह सकता है और न कक्षा से बाहर निकल जाने के लिए। अध्यापक यदि छात्र को सज़ा दे तो अध्यापक देशद्रोही। हमारे ज़माने में तो अध्यापक पिटाई भी खूब करते थे पर अब पिटाई स्कूलों में बंद हो कर सड़कों पर आ गयी है। सड़क पर आप किसी को भी भारत माता की जय, जय श्री राम, गौरक्षा आदि जैसे किसी भी बहाने से पीट सकते हैं।

पर शिक्षा संस्थानों में तो प्रश्न पूछने की आज़ादी तो अंग्रेजों के शासन में भी थी। हमारे नेताओं ने जो आज़ादी प्राप्त की थी उसमें यह खासियत थी कि आप शासक से भी प्रश्न पूछ सकते हैं। आप सरकार से पूछ सकते हैं कि यह पेट्रोल-डीज़ल क्यों महंगा हो गया है। आप सरकार से पूछ सकते हैं कि हमें नौकरी क्यों नहीं मिल रही है। आप सरकार से पूछ सकते हैं कि यह ऑटो सेक्टर में, और बाक़ी जगह भी मंदी क्यों है। हैरत है, सिर्फ़ पांच रुपये के बिस्किट की बिक्री भी घट गई है। आप यह भी पूछ सकते हैं कि किसानों की आत्महत्याओं में कमी क्यों नहीं हो रही है। 

पर प्रश्न पूछने के अधिकार के साथ ही आ गया चुप रहने का अधिकार। इस अधिकार के लिए कोई आंदोलन नहीं किया गया है, यह तो स्वतः प्राप्त होने वाला अधिकार है। पिछले पांच साल में पूछने की आज़ादी को समाप्त करने के साथ साथ सरकार ने चुप रहने का अधिकार भी प्राप्त कर लिया है। आप कुछ भी पूछिये, सरकार चुप ही रहती है। जनता के द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों पर, मौन रहने वाले प्रधानमंत्री के मुकाबले ज्यादा बोलने वाले प्रधानमंत्री कहीं ज्यादा चुप रहते हैं।

अब सरकार चुप रहती है तो जनता ने ही जवाब देने का काम सम्हाल लिया है, भक्त जनता ने। मतलब सवाल भी जनता का और जवाब भी जनता का। पर आजकल सवाल करनेवाली जनता कम है और जवाब देने वाली ज्यादा। आप प्रश्न पूछें कि पेट्रोल के दाम क्यों बढ रहे हैं, सरकार चुप है पर भक्त जनता को जवाब पता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की कीमतें बेकाबू हैं इसीलिए पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं। आपका प्रश्न है कि नौकरियां क्यों नहीं है, सरकार के पास उत्तर नहीं है पर भक्तों के पास है, वहां सियाचिन में जवान मर रहे हैं और इसे नौकरी की पड़ी है। आप पूछो कि किसान आत्महत्या क्यों कर रहे हैं तो सरकार भले ही बगलें झांके, भक्त जनता के पास जवाब है, किसान खेती के कारण नहीं, प्रेम में असफलता के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आई मंदी का जवाब सरकार द्वारा वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है। मात्र पांच रुपये के बिस्किट के पैकेट की बिक्री में कमी, मंदी के कारण नहीं, लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के कारण पैक्ड फूड का बहिष्कार करना है। आम लोगों के पास पैसे की कमी का प्रश्न उठाओ तो जनता स्वयं ही सवाल कर देती है कि अगर पैसे की कमी है तो फिल्में क्यों हिट हो रही हैं, रेस्तरां में इतनी भीड़ क्यों है, मॉल क्यों भरे भरे नज़र आते हैं।

सबसे अधिक प्रश्न स्कूलों-कालेजों में परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। मैं तो इस बात से परेशान हूँ कि यदि परीक्षा में कोई छात्र प्रश्नों के उत्तर में उत्तर पुस्तिका में मात्र भारत माता की जय, जय श्री राम, वंदेमातरम, गाय माता, तीन तलाक, धारा 370, आर्टिकल 35 आदि आदि लिख आये तो परीक्षक उसे पास करेगा या फेल करके देशद्रोही बनेगा। 

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Political satire
FREEDOM
freedom of expression
Freedom to ask questions
Narendra modi
BJP-RSS

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

अब राज ठाकरे के जरिये ‘लाउडस्पीकर’ की राजनीति

जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक


बाकी खबरें

  • ukraine russia
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूक्रेन पर रूसी हमला जारी, क्या निकलेगी शांति की राह, चिली-कोलंबिया ने ली लाल करवट
    15 Mar 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में, वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने यूक्रेन पर रूसी हमले के 20वें दिन शांति के आसार को टटोला न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के साथ। इसके अलावा, चर्चा की दो लातिन…
  • citu
    न्यूज़क्लिक टीम
    स्कीम वर्कर्स संसद मार्च: लड़ाई मूलभूत अधिकारों के लिए है
    15 Mar 2022
    CITU के आह्वान पर आज सैकड़ों की संख्या में स्कीम वर्कर्स ने संसद मार्च किया और स्मृति ईरानी से मुलाकात की. आखिर क्या है उनकी मांग? क्यों आंदोलनरत हैं स्कीम वर्कर्स ? पेश है न्यूज़क्लिक की ग्राउंड…
  • yogi
    रवि शंकर दुबे
    चुनाव तो जीत गई, मगर क्या पिछले वादे निभाएगी भाजपा?
    15 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भले ही भाजपा ने जीत लिया हो लेकिन मुद्दे जस के तस खड़े हैं। ऐसे में भाजपा की नई सरकार के सामने लोकसभा 2024 के लिए तमाम चुनौतियां होने वाली हैं।
  • मुकुल सरल
    कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते
    15 Mar 2022
    क्या आप कश्मीर में पंडितों के नरसंहार के लिए, उनके पलायन के लिए मुसलमानों को ज़िम्मेदार नहीं मानते—पड़ोसी ने गोली की तरह सवाल दागा।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः खेग्रामस व मनरेगा मज़दूर सभा का मांगों को लेकर पटना में प्रदर्शन
    15 Mar 2022
    "बिहार में मनरेगा मजदूरी मार्केट दर से काफी कम है। मनरेगा में सौ दिनों के काम की बात है और सम्मानजनक पैसा भी नहीं मिलता है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License