NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तीर्थयात्री नहीं संघ के गुंडों ने किया था मंदिर पर कब्जा : सुरेंद्रन
पुलिस अधीक्षक प्रतीश कुमार ने मीडिया को बताया कि रात 10 बजे मंदिर बंद होने के बाद उन लोगों को मंदिर परिसर खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
19 Nov 2018
sabrimala mandir

"मंदिर परिसर में बीती रात आरएसएस के गुंडों ने कब्जा जमा लिया था। पुलिस ने उनसे वापस जाने के लिए कहा, क्योंकि वहां रुकना कानून के खिलाफ था। लेकिन उन लोगों ने इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।" यह कहना है कि केरल के देवासवम (मंदिर) मामलों के मंत्री कदकंपल्ली सुरेंद्रन का।

दरअसल सबरीमाला में बीती रात 70 से अधिक लोगों को मंदिर परिसर में लागू निषेधाज्ञा का पालन न करने पर गिरफ्तार किया गया। बीजेपी और अन्य कट्टरवादी संगठनों ने इसका विरोध किया है और केरल में कुछ जगह विरोध प्रदर्शन किए। तिरुवनंतपुरम में प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के निवास के पास एकत्र होकर नारे लगाए।  

केंद्रीय मंत्री के.जे. अल्फोंस ने भी इस कार्रवाई के लिए राज्य सरकार की आलोचना की है।

रविवार देर रात से तनाव उस समय और बढ़ गया, जब सबरीमाला और उसके आसपास लागू निषेधाज्ञा के बावजूद 200 से अधिक लोगों जो खुद को तीर्थयात्री कह रहे थे, ने परिसर खाली नहीं किया। पुलिस के मुताबिक अनुरोध किए जाने के बाद भी जब वे नहीं हटे तो पुलिस को कार्रवाई करने और जबरन उन्हें निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस दौरान 72 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। 

केंद्रीय मंत्री अल्फोंस ने सबरीमाला निकलने से पहले निकक्कल में गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना करते हुए सोमवार को मीडिया से कहा, "मैं यह समझ नहीं पा रहा कि केरल पुलिस ने निषेधाज्ञा क्यों लागू की है। यह चीजों को संभालने का तरीका नहीं है। सबरीमाला के तीर्थयात्री कट्टरपंथी नहीं हैं। आप यहां बल प्रयोग नहीं कर सकते।" 

केरल के देवासवम (मंदिर) मामलों के मंत्री कदकंपल्ली सुरेंद्रन ने आरोपों पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया में कहा कि वे तीर्थयात्री नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के गुंडे थे, जो भगवान अयप्पा मंदिर पर कब्जा जमाए हुए थे। इसके साथ ही उन्होंने इस कार्रवाई का समर्थन किया।

सुरेंद्रन ने कहा, "मैं उनके (अल्फोंस) जैसा तो नहीं हूं, जो एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे, फिर हमारे साथ विधायक बनें और उसके बाद केंद्रीय मंत्री, मैं एक साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता हूं। लेकिन उन्हें तथ्यों को बिना जाने ऐसा नहीं बोलना चाहिए था।"

वहीं, अल्फोंस ने कहा है कि वह यह पता करेंगे कि केंद्र से मिले 100 करोड़ रुपये की राहत राशि का राज्य में किस तरह इस्तेमाल किया गया है।

सुरेंद्रन ने कहा, "यह सच है कि केंद्र ने सबरीमाला में विभिन्न योजनाओं के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि दी थी और इसका इस्तेमाल करने की समयसीमा जुलाई 2019 है।"

सुरेंद्रन ने कहा, "सितंबर में आई अचानक बाढ़ के कारण यहां हो रहा करीब 19 करोड़ रुपये की लागत वाला काम बर्बाद हो गया था।" 

सुरेंद्रन ने पुलिस कार्रवाई पर कहा, "मंदिर परिसर में बीती रात आरएसएस के गुंडों ने कब्जा जमा लिया था। पुलिस ने उनसे वापस जाने के लिए कहा, क्योंकि वहां रुकना कानून के खिलाफ था। लेकिन उन लोगों ने इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।"

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष पी.एस.श्रीधरन पिल्लई ने मीडिया से कहा कि सबरीमाला में बीती रात क्या हुआ, इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए। 

पुलिस अधीक्षक प्रतीश कुमार ने मीडिया को बताया कि रात 10 बजे मंदिर बंद होने के बाद उन लोगों को मंदिर परिसर खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। 

मंदिर को शुक्रवार शाम पांच बजे दो महीनों के लिए खोला गया है। 

28 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद से यह इलाका हिंदूवादी संगठनों के विरोध प्रदर्शन का ठिकाना बन गया है। अदालत ने अपने फैसले में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी, जबकि पहले 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं थी।
सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह अपने पूर्व आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था। कट्टरवादी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए 10 से 50  साल उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दे रहे हैं और हिंसा पर उतारू हैं।

(कुछ इनपुट आईएएनएस)

sabrimala temple issue
Kerala
lord ayyappa swamy
BJP-RSS

Related Stories

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

भारत में सामाजिक सुधार और महिलाओं का बौद्धिक विद्रोह

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीरपुरी में अतिक्रमण रोधी अभियान पर रोक लगाई, कोर्ट के आदेश के साथ बृंदा करात ने बुल्डोज़र रोके

अब राज ठाकरे के जरिये ‘लाउडस्पीकर’ की राजनीति

जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान


बाकी खबरें

  • govt employee
    अनिल जैन
    निजीकरण की आंच में झुलस रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सबक़ है यह किसान आंदोलन
    28 Nov 2021
    किसानों की यह जीत रेलवे, दूरसंचार, बैंक, बीमा आदि तमाम सार्वजनिक और संगठित क्षेत्र के उन कामगार संगठनों के लिए एक शानदार नज़ीर और सबक़ है, जो प्रतिरोध की भाषा तो खूब बोलते हैं लेकिन कॉरपोरेट से लड़ने…
  • poverty
    अजय कुमार
    ग़रीबी के आंकड़ों में उत्तर भारतीय राज्यों का हाल बेहाल, केरल बना मॉडल प्रदेश
    28 Nov 2021
    मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के मुताबिक केरल के अलावा भारत का और कोई दूसरा राज्य नहीं है, जहां की बहुआयामी गरीबी 1% से कम हो। 
  • kisan andolan
    शंभूनाथ शुक्ल
    हड़ताल-आंदोलन की धार कुंद नहीं पड़ी
    28 Nov 2021
    एक ज़माने में मज़दूर-किसान यदि धरने पर बैठ जाते थे तो सत्ता झुकती थी। पर पिछले चार दशकों से लोग यह सब भूल चुके थे।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    संवैधानिक मानववाद या कारपोरेट-हिन्दुत्ववाद और यूपी में 'अपराध-राज'!
    27 Nov 2021
    संविधान दिवस के मौके पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपो की खूब बौछार हुई. क्या सच है-संविधानवाद और परिवारवाद का? क्या भारत की सरकारें सचमुच संविधान के विचार और संदेश के हिसाब से…
  • crypto
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या Crypto पर अंकुश ज़रूरी है?
    27 Nov 2021
    मोदी सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर अंकुश लगा रही हैI लेकिन आखिर यह क्रिप्टोकरेंसी है क्या? क्या यह देश में मुद्रा की जगह ले सकती है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License