NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तलवारें, सीडी और पेन ड्राइव: बिहार के 9 ज़िलों में दंगे कैसे करवाए गये
सूत्रों का कहना है कि लोगों को राज्य के बाहर से बुलाया गया और हथियारों और भड़काऊ सामग्री को स्वतंत्र रूप से वितरित किया गया था |
तारिक़ अनवर
02 Apr 2018
Bihar

बिहार के 38 जिलों में से 9 में फैले में हुए सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं "बिल्कुल भी अचानक हुईं घटना नहीं" थीं, बल्क़ि "राजनीतिक लाभ" हासिल करने के लिए "पूर्व नियोजित" और "निर्मित" थे। इस योजना के बारे में वो लोग, जो कि स्थिति पर बारीकी से निगरानी कर रहे थे,उन्होंने पहले ही प्रशासन को इसके बारे में कुछ जानकरी दी थी की कुछ लोग सांस्कृतिक माहौल को ख़राब करने कि कोशिश कर रहे हैं | इसकी चेतावनी दी थी परन्तु इसे रोकने के लिए इन चेतावनियों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई थी।

सूत्रों ने बताया कि उत्तेजक गीतों वाली सीडी और पेन ड्राइव को राम नवमी के समय पर वितरित किया गया है, इसके अलावा नई तलवारें, लाठी और हॉकी स्टिक भी वितरित किये गये थे ।

नौ जिलों - भागलपुर, मुंगेर, समस्तीपुर, सिवान, गया, औरंगाबाद, कौमुर, नवादा और नालंदा में राम नवमी जुलूस के बाद हुए सांप्रदायिक दंगों में एक व्यक्ति की मौत हो गई और करीब 65 लोग घायल हो गए। इन दंगों के सिलसिले में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनमें से करीब एक दर्जन से अधिक भाजपा कार्यकर्ता हैं, जिसमें दो वरिष्ठ नेताओं मोहन पटवा और दिनेश कुमार झा शामिल हैं। प्राथमिक संदिग्धों में से एक - अश्विनी कुमार चौबे जो केंद्र में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री है उनके बेटे अरजित शाश्वत भी इसमें शामिल हैं।

"यह पूर्व नियोजित था और इसका उद्देश्य सांप्रदायिक लाइनों पर समाज को ध्रुवीकरण करना था। पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के लोग जुलूस में भाग लेने के लिए बुलाए गए थे (भगवान राम के जन्मदिन को चिन्हित करते हुए) और हिंसा करने के लिए । राज्य के पुलिस के दो उच्च पद के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर न्यूज़क्लिक को बताया कि नए और आम चेहरों को विभिन्न जिलों में देखा गया था, जिसने  जुलूस का नेतृत्व किया गया और लोगों को हिंसा करने के लिए उकसाया ।

उनमें से एक ने कहा, "शुक्र है, स्थानीय लोगों ने साजिश को समझा और हिंसा में हिस्सा नहीं लिया। अगर उनकी भागीदारी हुई होती , तो स्थिति हमारे कल्पना से परे होती”|

पुलिस के कुछ खामियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि प्रशासन जहां सतर्क थे, वहां तनाव पैदा करने का प्रयास या तो नाकाम कर दिया गया या नियंत्रित किया गया। "जांच चल रही है, अपराधी बख्शे नहीं जाएंगे। उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा”, अधिकारी ने कहा।

न्यूज़क्लिक के दो वरिष्ठ पत्रकारों ने भी बात कि ,उनसे भी यहीं कहा, "यह एक पूर्व-नियोजित आक्रमण था" और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को  "पहले से ही इस बात कि अच्छी तरह से जानकारी" थी  कि राज्य में शांति को बाधित करने के लिए एक साजिश रची जा रही है। बिग लाइवसीटीज के संपादक, अनुभवी पत्रकार ज्ञानेश्वर ने कहा, "इसलिए, उन्होंने (मुख्यमंत्री) ने बिहार दिवस समारोह के दौरान लोगों को गुमराह करने के लिए एक अपील की थी।

यह पूछे जाने पर कि क्या मुख्यमंत्री - जो राज्य के गृह मंत्री भी हैं - की ऐसी जानकारी हो सकती है, जो कुछ ऐसा हो सकता है, उन्होनें ऐसा होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाए, उन्होंने कहा, "मैं यह विश्वास के साथ कह सकता हूं कि नीतीश कुमार इस तथ्य के कारण ऐसा नहीं करना चाहते थे क्योकिं इस तरह की हिंसा उनकी छवि को खराब करती है और आगामी लोकसभा चुनावों में उनकी पार्टी (जनता दल युनाइटेड) को नुकसान पहुंचाऐगी हैं | यह भाजपा (जो बिहार सरकार के गठबंधन कि साझेदार है) है, जो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लाभों का आनंद उठाएगा और इसलिए इनके नेताओं ने सक्रिय रूप से राज्य में माहौल को बिगड़ने में भाग लिया। "

अपने आरोपों को स्थापित करने के लिए उन्होंने कहा कि राज्य में राम नवमी के अवसर पर संगठित जुलूस की कोई परंपरा नहीं थी।

"बाद में, त्योहार पूरी तरह से राजनीतिकरण किया गया है और ताकत के प्रदर्शन के रूप में मनाया जा रहा है। राजनीतिक संरक्षण और भगवा संगठनों के समर्थन के साथ, बड़ी संख्या में लोग - तलवारें और अन्य हथियारों से लैस होते हैं   - मुस्लिम एकाग्रता क्षेत्रों में प्रवेश करने के लिए मजबूर करते हैं और उत्तेजक नारे लगाते हैं। हैरानी की बात है, हमने ऐसी घटनाओं में भाजपा नेताओं की सक्रिय भागीदारी देखी है। हमने औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह को यह कहते सुना कि 'एक कार्रवाई की प्रतिक्रिया है' (26 मार्च को, जिसके बाद सांप्रदायिक हिंसा हुई)। उन्होंने हिंसा को उकसाया”, उन्होंने कहा कि "यह किस तरह की संस्कृति है और हम एक समाज के रूप में कहां हैं?"

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के कई उप-खंडो में सीडी और पेन ड्राइव के साथ तलवारें बांटी जा रही थीं, जिसमें आपत्तिजनक गाने थे। उन्होंने दावा किया कि उनके कब्ज़े में इस तरह का एक पेन ड्राइव है जिसमें में आपत्तिजनक गीत 'टोपी पहाणी वाले को भी, जय श्री राम कहान होगा' है।

उन्होंने कहा, "हम भी हिंदू हैं हम राम नवमी के पहले तलवारें खरीदने के लिए कभी नहीं गए हैं। जहां इतनी बड़ी संख्या में तलवारें और अन्य हथियार कहाँ से लाए गए थे? मेरे पास जानकारी है कि उन्हें योजनाबद्ध तरीके से बाहर से लाया गया, एकत्रित किया गया और वितरित किया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुझे बताया कि राम नवमी के अवसर पर इस साल बेचेगए तलवारों की संख्या पिछले 10 सालों से पूरे जिले में नहीं बेची गई थी। प्रशासन को यह भी जांचना चाहिए”|

उन्होंने निष्कर्षत: कहा , “दशहरा, सरस्वती पूजा आदि जैसे त्यौहारों के लिए, सार्वजनिक दान से धन एकत्र किया जाता है। लेकिन इस मामले में, कोई भी राम नवमी जुलूसों को संगठित करने के लिए दान नही मांग रहा था । किसने इस कार्यक्रम को वित्त पोषित किया है और वह कहां से आया है? यह जांच की जानी चाहिए" ।

एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र दीक्षित ने न्यूज़क्लिक को बताया, "यदि आप सभी बिंदुओं को जोड़ते हैं, तो आप निष्कर्ष निकालेंगे कि निहित हितो द्वारा डिजाइन किए गए दंगों की योजना बनाई गई थी। बिहार को शांतिपूर्ण माहौल के कारण इस बार चुपचाप चुना गया था। यूपी अस्थिर है, एक छोटी आक्रमकता एक बड़ी आग बन जाता | यह उसके पीछे के लोगों को उजागर करता है |कम-से-कम हिंसा पौदा करकें, एक विशेष पार्टी बिहार से बड़ी संख्या में सीटों को सुनिश्चित करने के लिए समाज को ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहा है | जहां सार्वजनिक भावनाएं विपक्षी पार्टी – राष्ट्रीय जनता दल के पक्ष में दिख रही हैं |

जद(यू) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि भाजपा सांप्रदायिक हिंसा की प्रयोगशाला के रूप में बिहार का उपयोग करना चाहती है। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "यह केवल एकमात्र उपकरण है जो वे चुनाव जीतने के लिए उपयोग करते हैं"।

पूछने पर मुख्यमंत्री क्यों चुप हैं, उन्मादी नेताओं ने कहा, "अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि नीतीश कुमार हमारे पास आए हैं, हम गठबंधन के लिए उनके पास नहीं गए थे। हमने पिछले 10 वर्षों से भाजपा के साथ गठबंधन किया था, इस तथ्य के बावजूद हम धर्मनिरपेक्षता पर कभी समझौता नहीं करते। इस बार, वो अमित शाह और मोदी के शब्दों का निर्देशन करते हैं |  वे राज्य में सत्तारूढ़ हैं पर वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं | वह अधिकतम क्या कर सकते है , “वह केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को फोन करेंगे और स्थिति शांत करने की अपील करेंगे”|

Bihar
communal violence
BJP
Narendra modi
Uttar pradesh

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है


बाकी खबरें

  • Ayodhya
    रवि शंकर दुबे
    अयोध्या : 10 हज़ार से ज़्यादा मंदिर, मगर एक भी ढंग का अस्पताल नहीं
    24 Jan 2022
    दरअसल अयोध्या को जिस तरह से दुनिया के सामने पेश किया जा रहा है वो सच नहीं है। यहां लोगों के पास ख़ुश होने के लिए मंदिर के अलावा कोई दूसरा ज़रिया नहीं है। अस्पताल से लेकर स्कूल तक सबकी हालत ख़राब है।
  • BHU
    विजय विनीत
    EXCLUSIVE: ‘भूत-विद्या’ के बाद अब ‘हिंदू-स्टडीज़’ कोर्स, फिर सवालों के घेरे में आया बीएचयू
    24 Jan 2022
    किसी भी राष्ट्र को आगे ले जाने के लिए धर्म की नहीं, विज्ञान और संविधान की जरूरत पड़ती है। बेहतर होता बीएचयू में आधुनिक पद्धति के नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाते। हमारा पड़ोसी देश चीन बिजली की मुश्किलों से…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: एक वीरता पुरस्कार तो ग़रीब जनता का भी बनता है
    24 Jan 2022
    बेरोज़गारी, महंगाई और कोविड आदि की मार सहने के बाद भी भारत की आम जनता ज़िंदा है और मुस्कुरा कर पांच राज्यों में फिर मतदान की लाइन में लगने जा रही है, तो एक वीरता पुरस्कार तो उसका भी बनता है...बनता है…
  • genocide
    पार्थ एस घोष
    घर वापसी से नरसंहार तक भारत का सफ़र
    24 Jan 2022
    भारत में अब मुस्लिम विरोधी उन्माद चरम पर है। 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से इसमें लगातार वृद्धि हुई है।
  • bulli bai
    डॉ. राजू पाण्डेय
    नफ़रत का डिजिटलीकरण
    24 Jan 2022
    सुल्ली डील्स, बुल्ली बाई, क्लबहाउस और अब ट्रैड्स के ज़रिये अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने का काम लगातार सोशल मीडिया पर हो रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License