NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
तमिलनाडू बिजली बोर्ड के कर्मचारी आय वृद्धि की माँग को लेकर हड़ताल की तैयारी में
सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियनज़ (सीटू) के नेतृत्त्व में 10 मज़दूर संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने मज़दूरों के मुद्दों के प्रति सरकार के रवैये के खिलाफ़ इस हड़ताल का आह्वान किया है I
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Feb 2018
TNEB
Image Courtesy: Business Line

तमिलनाडू बिजली बोर्ड (TNEB) की कर्मचारी यूनियनों ने 16 फरवरी की हड़ताल की घोषणा की है I यह हड़ताल इसलिए की जा रही है क्योंकि मैनेजमेंट ने दिसम्बर 2016 से लंबित आय समझौते को अब तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है I सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियनज़ (सीटू) के नेतृत्त्व में 10 मज़दूर संगठनों के संयुक्त मोर्चे ने मज़दूरों के मुद्दों के प्रति सरकार के रवैये के खिलाफ़ इस हड़ताल का आह्वान किया है I

सीटू के एसएस सुब्रमणियन ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बतया कि, “मौजूदा वेज रिवीजन सेटलमेंट सिर्फ 30 नवम्बर 2016 तक ही लागू था I 1 दिसम्बर 2016 से वेज रिवीजन लम्बित है और मज़दूर संगठन लगातार यह माँग उठा रहे हैं I अक्टूबर 2017 से पहले इस मुद्दे पर कोई ऐसी बातचीत नहीं हुई जिससे कोई समाधान निकल सके I सरकार के अड़ियल रवैये को देखते हुए मज़दूर संगठनों ने एक बहुत बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जिसमें 10,000 कर्मचारियों ने शिरक़त की I इस दबाव के चले सरकार ने 16 अक्टूबर 2017 और 23 अक्टूबर 2017 को मज़दूर संगठनों और कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया I”

सुब्रमणियन ने यह भी कहा कि, “अक्टूबर 2017 में हुई मुलाक़ातों में सरकार लगभग मान गयी थी कि आय में वृद्धि 2.57 गुना होगी I हालांकि मुख्यमंत्री और बिजली मंत्री ने माँगें मान ली थीं लेकिन वित्त मंत्री ने प्रस्ताव को रोक दिया I”

इसके साथ ही सुब्रमणियन ने यह भी बताया कि, “मज़दूर संगठनों ने 23 जनवरी 2018 को एक विरोध प्रदर्शन करने का फ़ैसला किया था I लेकिन, हड़ताल से एक दिन पहले यानी 22 जनवरी को सरकारी अधिकारियों और यूनियन के प्रतिनिधियों के बीच बात हुई और यह राय बनी कि 12 फरवरी 2018 से पहले आय वृद्धि के इस मामले को सुलझा दिया जायेगा I अब वे (सरकार) बिना वजह मामले को लटका रहे हैं और स्वीकार की जा चुकी माँगों को मानने से पीछे हट रहे हैंI”

इसी दौरान 31 जनवरी 2018 को सरकार ने नियमित कर्मचारियों के लिए 2,500 रु. प्रतिमाह और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए 1,250 रु. प्रतिमाह के रूप में अंतरिम राहत की घोषणा की है जो अक्टूबर 2017 से मिलेगी I यूनियनों के हड़ताल पर जाने के निर्णय को समझाते हुए सुब्रमणियन ने कहा कि अचानक अंतरिम राहत लागू किये जाने की वजह से मज़दूर और मज़दूर संगठन का शक़ बढ़ता जा रहा है I

इस समय लगभग 83,000 कर्मचारी और अफ़सर TNEB तथा यूनियनों से जुड़े हुए हैं I

TNEB
CITU
वेज रिवीजन
कर्मचारी हड़ताल

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

मुंडका अग्निकांड: लापता लोगों के परिजन अनिश्चतता से व्याकुल, अपनों की तलाश में भटक रहे हैं दर-बदर

तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है

LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम

रोहतक : मारुति सुज़ुकी के केंद्र में लगी आग, दो कर्मियों की मौत

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी


बाकी खबरें

  • punjab
    भाषा सिंह
    पंजाब चुनावः परदे के पीछे के खेल पर चर्चा
    19 Feb 2022
    पंजाब में जिस तरह से चुनावी लड़ाई फंसी है वह अपने-आप में कई ज़ाहिर और गुप्त समझौतों की आशंका को बलवती कर रही है। पंजाब विधानसभा चुनावों में इतने दांव चले जाएंगे, इसका अंदाजा—कॉरपोरेट मीडिया घरानों…
  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License