NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
ट्रांसजेंडर अधिकार संरक्षण बिल : ट्रांस समुदाय के साथ धोखा
बिल के लोकसभा में पास होने के बाद से इसका देशभर के ट्रांसजेंडर समुदायों द्वारा विरोध हो रहा है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने इस विधेयक को ट्रांसजेंडर व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन बताया है।
नवीन कुमार वर्मा
21 Dec 2018
ट्रांसजेंडर अधिकार संरक्षण बिल के विरोध में प्रेस वार्ता।

सोमवार 17 दिसंबर, को लोकसभा में हंगामे के बीच ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण), 2018 विधेयक पारित हो गया। यह विधेयक ट्रांसजेंडरों के अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण के प्रावधान प्रदान करने का दावा करता है। मगर इस बिल के लोकसभा में पास होने के बाद से इसका देशभर के ट्रांसजेंडर समुदायों द्वारा विरोध हो रहा है।

सरकार का दावा है कि यह बिल ट्रांसजेंडर के अधिकारों को सुरक्षित करेगा वहीं ट्रांसजेंडर समुदाय का मानना है कि यह बिल ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ मोदी सरकार द्वारा किया गया धोखा है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने इस विधेयक को ‘पीछे की ओर लौटने वाला’ और ट्रांसजेंडर व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का ‘हनन’ बताया है।

ट्रांसजेंडर समुदाय ने मंगलवार, 18 दिसंबर, को दिल्ली के महिला प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर लोकसभा में पास हुए वर्तमान विधेयक को अमानवीय बताया। समुदाय का मानना है कि यह विधेयक न सिर्फ ट्रांसजेंडर समुदाय के संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार में समुदाय की भागीदारी को सुनिश्चित नहीं करता है। ट्रांसजेंडर समुदाय ने सरकार से मांग की कि इस विधेयक को बदला जाए।

सुप्रीम कोर्ट के "नालसा" (National Legal Services Authority) फैसले के अंतर्गत ट्रांसजेंडर समुदाय को पुरुष और महिला के बाद "थर्ड जेंडर" के रूप में मान्यता मिली। फैसले में कहा गया कि ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के लिए सरकार एक कानून बनाए। इसी वजह से सरकार ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण), बिल का पहला ड्राफ्ट 2014 में बनाया, जिसमें ट्रांसजेंडर समुदाय द्वारा कुछ कमियां बताई गयी जिनको दूर करने के लिए समुदाय के साथ कई दौर की मुलाकात के बाद 27 संशोधन के साथ ट्रांसजेंडर  व्यक्ति (अधिकार संरक्षण), 2018 विधेयक सोमवार को संसद में पेश किया गया।

ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े कार्यकर्ता और वैज्ञानिक बिट्टू का कहना है कि "सरकार ने इस बिल में ट्रांसजेंडर समुदाय द्वारा दिए गए एक भी सुझाव को नहीं माना है और जिन 27 संशोधनों की बात सरकार कर रही हैं वह संशोधन बेहद हास्यास्पद हैं। सरकार ने संशोधन के नाम पर पुराने विधेयक की केवल तारीखें और साल बदलें हैं।" 

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण), 2018 विधेयक को ऊपरी तौर पर देखने से यह एक संपूर्ण विधेयक लगता है जो ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया ज्ञात होता है; परन्तु ध्यान से पढ़ने पर समझ में आता है की यह उद्देश्य के बिलकुल उलट काम करता है।

नए बिल के अनुसार ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपनी ट्रांस अधिकारों के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ेगी। इससे पहले नाल्सा जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि जेंडर से जु़ड़ी पहचान किसी भी व्यक्ति के अंदर से आ सकती है। 

ये सर्टिफिकेट डीएम जारी करेगा। एक स्क्रीनिंग कमेटी डीएम को हर व्यक्ति के लिए रिकमेंडेशन जारी करेगी। कमेटी में एक मेडिकल ऑफिसर, सायक्लॉजिस्ट, सरकारी अफसर और एक ट्रांसजेंडर शामिल होगा। समुदाय के लोगों का कहना है कि अपनी शारीरिक लैंगिक पहचान के लिए किसी तरह के सर्टिफिकेट लेना किसी भी व्यक्ति के लिए अपने आप में अपमानित करने वाली बात है। 

ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े कार्यकर्ता और वैज्ञानिक बिट्टू ने भी कहा कि "जिस तरह से विधेयक में मेडिकल जांच और सर्टिफिकेट की बात कही गई है वह भयावह है। ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति डॉक्टर और अस्पतालों की सोच भी संकीर्ण होती है, जिस वजह से समुदाय को अस्पतालों में शोषण का सामना करना पड़ता है।"

इसके साथ ही बिल में दो और समस्याएं हैं। ट्रांसजेंडर व्यक्ति से पैसे मंगवाना, आम जगहों पर आने-जाने से रोकना अपराध माना जाएगा। इनमें से किसी भी अपराध या ट्रांसजेंडर के साथ यौनशोषण, बलात्कार या किसी तरह की हिंसा करने पर 2 साल तक की सजा होगी। आपको बता दें कि किसी भी व्यक्ति के साथ यौनशोषण करने पर कम से कम 7 सात साल की सज़ा होती है। सवाल उठता है कि एक देश, एक संविधान होने के बाद एक ही अपराध के लिए अलग-अलग लिंग के आधार पर अलग-अलग सज़ा क्यों? क्या सरकार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अन्य लोगों की तुलना में 'कमतर' समझती है? 

मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण किया जिसमें बताया गया कि ट्रांसजेंडर समुदाय के 92 फीसदी लोगों का आर्थिक बहिष्कार किया जाता है। उन्हें आजीविका और जीवनयापन के मौलिक अधिकारों से वंचित रखा जाता है। नौकरियों से बाहर रखे जाने के कारण उन्हें मजबूरन भीख मांगने और वैश्यावृत्ति जैसे काम करने पड़ते हैं परंतु विधेयक में पैसे मांगने को अपराध घोषित कर दिया गया है जिसके लिए 10 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। इससे आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार झेल  रहे समुदाय की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी।

वैज्ञानिक बिट्टू का कहना है कि "बिल में कहीं भी समुदाय को रोजगार सुरक्षा के बारें में नहीं बताया गया है न ही किसी तरह के आरक्षण की बात कही गयी है। उल्टा ट्रांसजेंडर समुदाय के जीवनयापन करने के सभी स्रोत्रों को सरकार गैर कानूनी बता रही है।"

नेशनल अलायन्स ऑफ़ पीपलस मूवमेंट्स (NAPM) और तेलंगाना हिजड़ा ट्रांसजेंडर समिति के कार्यकर्ता, मीरा संघमित्रा ने न्यूज़क्लिक को बातचीत में बताया कि "केंद्र सरकार को ट्रांसजेंडर समुदाय की कोई परवाह नहीं है जिसका पता इस बिल को देखकर लगता है। यह बिल ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों का हनन करता है।"

मीरा संघमित्रा ने आगे कहा कि "यह विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय को दो हिस्सों में बांटता है, जबकि वास्तविकता इससे कोसों दूर है। इसी वजह से समुदाय के सभी लोग देश के राष्ट्रपति से गुहार लगाते हैं कि इस विधेयक को कानून बनने से रोकें।"

ट्रांसजेंडर समुदाय की प्रतिनिधि और वकील तृप्ति टंडन, ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा कि "संसदीय प्रक्रिया पर यदि नज़र डालें तो पता चलता है कि जब किसी विषय पर एक बिल एक सदन में पास हो जाता है तो उस विषय पर कोई अन्य बिल संसद में तबतक पेश नहीं किया जा सकता जबतक उस बिल पर कोई अंतिम निर्णय नहीं आ जाता। मगर सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण), 2018 संसद में पेश कर संसदीय प्रक्रिया का हनन हुआ है, क्योंकि राज्यसभा सांसद तिरूच्चि शिवा द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों के लिए तैयार विधेयक पहले ही पास हो चुका है जिसका संसद के निचले सदन में पेश होना बाकी है। इस तरह सरकार ने संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है।" आपको बता दें राज्यसभा सांसद तिरूच्चि शिवा द्वारा तैयार विधेयक बेहद प्रगतिशील है जिसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए आरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण बातों का जिक्र है।

ट्रांसजेंडर समुदाय की मांग है कि पार्लियामेंट्री स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष ट्रांसजेंडर समुदाय द्वारा रखी गयी सभी मांगों को बिल में शामिल किया जाए।

transgender rights bill
transgender rights
Modi government
loksabha

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

ज्ञानवापी विवाद, मोदी सरकार के 8 साल और कांग्रेस का दामन छोड़ते नेता


बाकी खबरें

  • kisan
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुजफ्फरनगर किसान महापंचायत: यहाँ से हक़ की लड़ाई और बुलंद होगी
    05 Sep 2021
    संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आज 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में हुई किसान महापंचायत को जोरदार समर्थन मिला।लाखों की तादाद में किसान कल से ही अलग-अलग राज्यों से मुजफ्फरनगर पहुँच गये हैं। संयुक्त किसान…
  • मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत: किसान की खरी-खरी, योगी-मोदी के ख़िलाफ़ बजा बिगुल
    भाषा सिंह
    मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत: किसान की खरी-खरी, योगी-मोदी के ख़िलाफ़ बजा बिगुल
    05 Sep 2021
    बात बोलेगी: क्या है किसानों के मन में, क्या हुआ महापंचायत में ख़ास, क्या रहा मुज़फ़्फ़रनगर शहर का हाल। बता रहीं हैं वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह
  • विश्वास और आस्था की विविधता ख़त्म करने का राजनीतिक मॉडल
    शंभूनाथ शुक्ल
    विश्वास और आस्था की विविधता ख़त्म करने का राजनीतिक मॉडल
    05 Sep 2021
    राज करने के आधुनिक बहुसंख्यकवाद सिद्धांत में अचानक किसी समुदाय को अल्पसंख्यक बता कर उसे भयभीत कर दिया जाता है। और यह भय उसे लोकतांत्रिक राजनीति में उसकी वाजिब जगह नहीं लेने देता।
  • शिक्षक दिवस: शिक्षा पर हमले और तेज़ किए जा रहे हैं
    न्यूज़क्लिक टीम
    शिक्षक दिवस: शिक्षा पर हमले और तेज़ किए जा रहे हैं
    05 Sep 2021
    शिक्षक दिवस के मौके पर न्यूज़क्लिक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी की आभा देव हबीब से शिक्षा के मौजूदा हालात, उसपर जारी हमले और चल रहे संघर्षों पर बातचीत की।
  • गौरी लंकेश
    मुकुल सरल
    गौरी लंकेश : आँखें बंद कर जीने से तो अच्छा है आँखें खोलकर मर जाना
    05 Sep 2021
    “ख़बर : गौरी लंकेश ने आँखें दान कीं/ क्या ख़ूब!/ अब क्या होगा/ हत्यारे पहचाने जाएंगे? नहीं, कभी नहीं/ क्योंकि वे कभी छिपे ही नहीं थे…”।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License