NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
त्रिपुराः जीत के बाद BJP के सहयोगी दल IPFT ने अलग 'त्वीपरालैंड' राज्य की मांग दोहराई
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव जीतने के लिए बीजेपी ने अलगाववादी पार्टी से किया गठबंधन
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
06 Mar 2018
bjp vs left

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के नतीजे की घोषणा को बस दो-तीन दिन ही हुए है। इस चुनाव में बीजेपी-आईपीएफटी गठबंधन ने जीत हासिल की। गठबंधन की ये जीत ख़तरनाक साबित हो सकती है क्योंकि बीजेपी की सहयोगी पार्टी आईपीएफटी के प्रमुख नरेश चंद्र देबबर्मा ने त्रिपुरा राज्य से अलग एक आदिवासी राज्य 'त्वीपरालैंड'की मांग फिर से दोहराई है। नरेश ने इस विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के अगले दिन अगरतल्ला में प्रेस कांफ्रेंस की और मांग करते हुए कहा कि राज्य का नया मुख्यमंत्री आदिवासी होना चाहिए।

आईपीएफटी वर्षों से त्रिपुरा से कुछ क्षेत्र अलग कर एक आदिवासी राज्य बनाने को लेकर लड़ाई लड़ रही है। इसने अक्सर हिंसक आंदोलनों का सहारा लिया और बंगालियों के ख़िलाफ़ बयानबाजी की। इसका संपर्क सीमा पार से संचालित सशस्त्र अलगाववादियों से भी है। फिर भी, इस विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने खुलेआम समर्थन मांगा और इसके साथ गठबंधन किया।

पिछले साल जुलाई में इसने अलग राज्य की मांग को लेकर राज्य के एकमात्र राष्ट्रीय राजमार्ग की नाकेबंदी कर दी। त्रिप्रुरा का यह अकेला राजमार्ग है जो देश के अन्य हिस्सों से राज्य को जोड़ता है। इसके बाद आईपीएफटी के नेताओं को दिल्ली बुलाया गया यहां वे वरिष्ठ सरकारी पदाधिकारियों से मिले और इन पदाधिकारियों से आश्वासन मिलने के बाद देबबर्मा ने नाकेबंदी ख़त्म की।

इससे साबित होता है कि राष्ट्रवाद और देशभक्ति का कसम खाने वाली बीजेपी का तालमेल वैसे संगठन से है जो न सिर्फ अलग राज्य की मांग कर रहा है बल्कि उसके तार राष्ट्र-विरोधी ताक़तों से जुड़े हैं। पिछले वर्ष के अंत तक दोनों पार्टियों के बीच मामला क़रीब-क़रीब तय हो गया था।

बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आईपीएफटी को आश्वासन दिया था कि वह आदिवासियों के मुद्दों पर विचार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करेगी। त्रिपुरा चुनावों के लिए इसे बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में भी शामिल किया था। आईपीएफटी ने आश्वासन के बाद अपनी तरफ से इसलिए बातचीत कि की चुनाव के बाद मांग पर विचार किया जाएगा।

इसी मुद्दे पर आईपीएफटी ने अपना पूरा चुनाव अभियान चलाया।

3 मार्च को चुनाव के नतीजे की घोषणा के तुरंत बाद देबबर्मा ने द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि "हमारे पास प्रचार का एकमात्र एजेंडा था - एक अलग राज्य की मांग। यहां तक कि सरकार का हिस्सा होते हुए हम इस मांग को जारी रखेंगे। जहां तक वास्तविकता है, हम इस मांग को और तेज़ करेंगे।"

दूसरी तरफ बीजेपी ने अपने प्रचार में अपने सहयोगी दल के इस मुद्दे को अनदेखा कर दिया। पूरी तरह जानते हुए कि उसकी सहयोगी पार्टी राज्य विभाजन के मुद्दे पर वोट मांग रही थी फिर भी बीजेपी ने कहा कि वह राज्य के विभाजन के पक्ष में नहीं था।

अब जबकि चुनाव ख़त्म हो गया है और गठबंधन की जीत हो गई है तो ऐसे में क़र्ज़ लौटाने का समय आ गया है। अलग त्वीपरालैंड के लिए लड़ाई को लेकर ही आईपीएफटी का अस्तित्व बचा हुआ है। यह विभिन्न अलगाववादी सशस्त्र समूहों को सक्रिय होने के लिए एक नया अवसर भी देगा। सत्ता में होने के कारण विरोध करने वालों के ख़िलाफ़ अलगाववादियों को हिंसात्मक होने के लिए प्रेरित किया जाएगा - ख़ासकर वाम के ख़िलाफ़। पहले से ही वाम श्रमिकों पर हमले की ख़बरें आ चुकी है।

इस तरह- यह फिर अराजकता और हिंसा के अंधेरे दौर में वापस आ गया है।

BJP
BJP-IPFT
Left politics
CPIM
Tripura

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • समीना खान
    हिजाब बनाम परचम: मजाज़ साहब के नाम खुली चिट्ठी
    12 Apr 2022
    यहां मसला ये है कि आंचल, घूंघट, हिजाब, नक़ाब हो या बिकनी, हमेशा से पगड़ी के फ़ैसले इन सब पर भारी रहे हैं। इसलिए अब हमें आपके नज़रिए में ज़रा सा बदलाव चाहिए। जी! इस बार हमें आंचल भी चाहिए और आज़ादी भी…
  • ज़ाहिद खान
    सफ़दर भविष्य में भी प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे
    12 Apr 2022
    12 अप्रैल, सफ़दर हाशमी जयंती और ‘राष्ट्रीय नुक्कड़ नाटक दिवस’ पर विशेष।
  • jnu
    न्यूज़क्लिक टीम
    ‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र
    11 Apr 2022
    जेएनयू में रविवार को हुई हिंसा के बाद विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र अपना विरोध जताने के लिए दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुँचे जहाँ उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया. छात्रों की बड़ी माँग थी कि पुलिस…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNU में अब नॉन वेज को लेकर विवाद? ऐसे बनोगे विश्वगुरु ?
    11 Apr 2022
    न्यूज़चक्र के आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा JNU में हुए ABVP द्वारा राम नवमी के दिन मांसाहारी खाना खाने पर छात्रों की पिटाई की खबर पर चर्चा कर रहे हैं और वह भारत में तेज़ी से बढ़ रहे…
  • मुकुंद झा
    जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए
    11 Apr 2022
    घटना के विरोध में दिल्ली भर के छात्र सड़क पर उतरे। छात्र, पुलिस मुख्यालय पर विरोध जताने के लिए एकत्रित हुए परन्तु पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को अस्थायी हिरासत में ले लिया और चाणक्यपुरी, संसद मार्ग…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License