NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
त्रिपुराः "लोकतंत्र की बहाली और नौकरियों की मांग" को लेकर युवाओं ने निकाली रैली
16 सितंबर को डेमोक्रेटिक यूथ फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया और ट्राइबल यूथ फ़ेडरेशन के बैनर तले ये रैली निकाली गई।
दित्सा भट्टाचार्या
18 Sep 2019
त्रिपुरा

पश्चिम बंगाल में युवाओं की रैली के बाद त्रिपुरा में युवाओं ने 16 सितंबर यानी सोमवार को डेमोक्रेटिक यूथ फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (डीवाईएफ़आई) और ट्राइबल यूथ फ़ेडरेशन (टीआईएफ़) के बैनर तले एक बड़ी रैली निकाली। ये रैली राज्य में लोकतंत्र की बहाली और युवाओं के लिए रोज़गार की मांग को लेकर निकाली गई। इस रैली में हज़ारों कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने हिस्सा लिया।

न्यूज़़क्लिक से बात करते हुए, डीवाईएफ़आई के प्रदेश अध्यक्ष पलाश भौमिक ने कहा, “हम मांग करते हैं कि बीजेपी की सत्तावादी सरकार राज्य में लोकतांत्रिक माहौल को बहाल करे। त्रिपुरा में पिछले 18 महीनों में विपक्षी नेताओं और समर्थकों पर बड़े पैमाने पर हमला करके लोकतंत्र को आघात पहुंचाया गया है।”

ये युवा रैली इसलिए भी अहम है क्योंकि यह पहला ऐसा मौक़ा है जब राज्य में वर्ष 2018 के विधानसभा चुनावों में वाम मोर्चा सरकार की हार के बाद से वाम समर्थित संगठनों द्वारा निकाली गई विरोध रैली में भारी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा (आईपीएफ़टी) ने चुनाव में भारी संख्या में सीट जीतकर सरकार बनाई। तब से राज्य में वाम नेताओं और वाम मोर्चा के समर्थकों पर बड़ी संख्या में हमले हुए हैं ताकि आम लोग लेफ़्ट फ्रंट को अपना समर्थन करने में हिचकिचाएं।

भौमिक ने कहा, “चुनाव जीतने से पहले बीजेपी ने अपने विज़न डॉक्यूमेंट में कहा था कि वे अपनी सरकार के पहले साल में 50,000 नौकरियां सृजन करेंगे। हालांकि, पार्टी द्वारा किए गए अन्य सभी वादों की तरह यह भी फ़र्ज़ी था।” डीवाईएफ़आई के प्रदेश सचिव नबारुण देब ने कहा, “विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी द्वारा 50,000 नौकरियां सृजन करने जैसे कई वादे किए गए थे लेकिन अब तक एक भी नौकरी सृजित नहीं की गई है।"

डीवाईएफ़आई और टीवाईएफ़ ने वर्तमान सरकार द्वारा राज्य में निजीकरण के लिए उठाए जा रहे क़दमों की निंदा की है। देब ने कहा, “चुनाव से पहले बीजेपी के शीर्ष नेताओं द्वारा किए गए वादों के विपरीत बीजेपी सरकार के कार्य हैं। कल्याणकारी क़दम जैसे सोशल पेंशन और मनरेगा मज़दूरी आदि में बढ़ोतरी करने के बजाय बीजेपी सरकार ने ईंधन पर सेस लगाया और सभी प्रकार भर्ती पर रोक लगा दिया।” इन दोनों संगठनों के नेताओं ने लोगों के अधिकार की सुरक्षा के लिए अन्य आंदोलनों को शुरू करने की भी धमकी दी है।

सोमवार को हुई इस विशाल रैली में हज़ारों युवा लाल और सफ़ेद झंडे के साथ त्रिपुरा की सड़कों पर आ गए जिससे सड़कें अवरुद्ध हो गई। शहर में हुए इस रैली के चलते पैदल चलने वाले लोग और वाहन सभी थम गए। रैली में शामिल लोग नारे लगाते हुए राज्य सरकार को तुरंत अपने चुनावी वादों को पूरा करने की मांग की। संगठनों के नेताओं ने कहा है कि अगर सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करती है तो वे सरकार से अपने वादों को पूरा करने या सत्ता से बाहर होने को लेकर मजबूर करने के लिए बड़ा आंदोलन करेंगे।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस तरह की रैली हाल के वर्षों में नहीं देखी गई। ये रैली विशेष रूप से एक ऐसी पार्टी से निकाली गई जिसके बारे में माना जाता था कि पिछले दो साल से अधिक समय से ये राज्य में अपना आधार लगातार खो रहा था और काफ़ी हद तक ये माना जाता था कि यह समाप्त होने की कगार पर है।

DYFI
SFI
TYF
Tribal Youth Federation
CPIM
Youth Rally in Tripura
Tripura
unemployment
Communist Party of India Marxist
Left Front in Tripura

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

‘जेएनयू छात्रों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं, पुलिस फ़ौरन कार्रवाई करे’ बोले DU, AUD के छात्र

जेएनयू हिंसा: प्रदर्शनकारियों ने कहा- कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या खाना चाहिए

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें

नोएडा : प्राइवेट कोचिंग सेंटर पर ठगी का आरोप, सीटू-डीवाईएफ़आई ने किया प्रदर्शन

बिहार बजट सत्र: विधानसभा में उठा शिक्षकों और अन्य सरकारी पदों पर भर्ती का मामला 


बाकी खबरें

  • बारिश के पानी से मोदी का बनारस बेहाल
    विजय विनीत
    बारिश के पानी से मोदी का बनारस बेहाल
    20 Jun 2021
    अरबों रुपये खर्च करने के बावजूद पुराने मर्ज़ का इलाज नहीं कर पाए काशी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।
  • हे राम
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    हे राम से श्री राम और हाय राम तक
    20 Jun 2021
    आज सभी त्रस्त हैं और हाय राम, हाय राम का जाप कर रहे हैं। कोई कोरोना की वजह से हाय राम कर रहा है तो कोई महंगाई की वजह से। कोई अत्याचार से त्रस्त है तो कोई भ्रष्टाचार से हाय राम बोल रहा है।
  • UAPA के सेक्शन 43(5) (D) की ख़ामियां उजागर कर दिल्ली हाईकोर्ट ने कमाल कर दिया!
    अजय कुमार
    UAPA के सेक्शन 43(5) (D) की ख़ामियां उजागर कर दिल्ली हाईकोर्ट ने कमाल कर दिया!
    20 Jun 2021
    अगर किसी व्यक्ति को यूएपीए कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। तो यूएपीए की धारा 43 (5) (D) डी के मुताबिक उसे ज़मानत नहीं मिलेगी। केवल पुलिस का पक्ष सुना जाएगा। अगर प्रथम दृष्टया पुलिस के पक्ष से…
  • स्केटर गर्ल
    रचना अग्रवाल
    स्केटर गर्ल : दलित लड़की की अपने सपनों को पूरा करने की कहानी
    20 Jun 2021
    फिल्म स्केटर लड़की की कहानी किसी मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी या टेनिस खिलाड़ी की बायोपिक न होकर एक छोटी सी बच्ची की मानसिक स्थिति पर है जिसकी समझ में यह नहीं आता कि ऊंची जाति और नीची जाति में क्या फर्क है…
  • मोदी-राज में गिरफ्तारियों का सच और इमर्जेंसी में प्रो. रघुवंश की गिरफ्तारी-रिहाई का किस्सा
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी-राज में गिरफ्तारियों का सच और इमर्जेंसी में प्रो. रघुवंश की गिरफ्तारी-रिहाई का किस्सा
    19 Jun 2021
    सत्ता और सत्ताधारियों से असहमत होना क्या गुनाह है? अगर लोकतंत्र में यह गुनाह नहीं, लोगों का अधिकार है तो नताशा नरवाल, देवांगना, आसिफ इकबाल, उमर ख़ालिद, पत्रकार सिद्दीक कप्पन, गौतम नवलखा, लेखक आनंद…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License