NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
तूफ़ान से प्रभावित कुशीनगर ज़िले के किसानों को अभी भी पीएमएफ़बीवाई से मुआवज़ा मिलने का इंतज़ार
विष्णुपुरा और खड्डा ब्लॉक में केले की खेती करने वाले किसान बुरी तरह प्रभावित हैं क्योंकि वर्ष 2017 और 2018 में आए तूफ़ान और बारिश ने केले के बागान को पूरी तरह चौपट कर दिया।
गोविंद पटेल, तारिक़ अनवर
20 Mar 2019
तूफ़ान से प्रभावित कुशीनगर ज़िले के किसानों को अभी भी पीएमएफ़बीवाई से मुआवज़ा मिलने का इंतज़ार

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर ज़िले के किसान पिछले दो वर्षों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफ़बीवाई) के तहत फसल बीमा हासिल करने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। कई एकड़ में फैले उनके केले का बागान यहाँ आई बाढ़ के बाद चक्रवाती तूफ़ान से नष्ट हो गया था। इस इलाक़े में मई 2017 और जून 2018 में बाढ़ और तूफ़ान आए थे।

लगभग 80 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से आया चक्रवाती तूफ़ान और बारिश ने पिछले दो वर्षों में पूर्वी उत्तर प्रदेश के इस ज़िले के किसानों को तबाह कर दिया है। ये किसान गन्ने की खेती छोड़कर केले की खेती करने लगे जिसके बारे में वे कहते हैं यह अधिक लाभ देने वाली फसल है।

विष्णुपुरा ब्लॉक में 100 से अधिक गांव और खड्डा ब्लॉक में 40-45 गांव सबसे अधिक प्रभावित हुए क्योंकि केले की खेती इन दोनों ब्लॉकों में बड़े पैमाने पर की जाती है।

पकरी ग्राम के निवासी रामचंद्र कुशवाहा ने स्थानीय साहूकार से ऋण लेकर पिछले दो वर्षों में केले की खेती में 75,000 रुपये और 35,000 रुपये ख़र्च किए थे। लेकिन चक्रवात के बाद हुई बारिश ने उनकी पूरी फसल को नष्ट कर दिया।

न्यूज़क्लिक से बात करने के दौरान उनके चेहरे पर मायूसी साफ़ दिखाई दे रही थी। उन्होंने न्यूज़क्लिक से कहा, “अधिकारी आए और सर्वे किया गया लेकिन अब तक कुछ भी नहीं हुआ है। दोनों फसलें बुरी तरह से नष्ट हो गईं। नतीजतन एक पैसा भी लाभ नहीं हुआ। हमें इस सरकारी योजना का भी कोई लाभ नहीं मिला।”

क़र्ज़ में डूबे किसान रामचंद्र ने कहा कि कोई विकल्प नहीं होने के कारण आवश्यकताओं को पूरा करने और कृषि कार्यों को जारी रखने के लिए उन्हें ज़्यादा पैसे क़र्ज़ लेने पड़े।

पीएमएफ़बीवाई एक फसल बीमा योजना है जिसके तहत अधिकांश प्रीमियम का भुगतान सरकार द्वारा सीधे बीमा कंपनियों को किया जाता है जो बदले में फसल के नुकसान के लिए मुआवज़ा देती हैं।

इसी गांव के किसान योगेंद्र कुशवाहा की तीन बीघा (3,025 वर्ग गज या 5/8 एकड़) ज़मीन पर केले की फसल थी। चक्रवात और बाढ़ ने पूरे बागान को नुकसान पहुँचाया। वे कहते हैं, ''मैंने जो पैसा निवेश किया था वह भी वसूल नहीं हो सका। फ़ायदा तो भूल ही जाइये। मैंने लगभग 5 लाख रुपये का निवेश किया था लेकिन बदले में कुछ भी नहीं मिला। मेरे पास कमाई का कोई दूसरा स्रोत नहीं है।”

यह पूछे जाने पर कि खेती के लिए ख़र्च का इंतज़ाम कैसे कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि कृषि कार्य जारी रहे इसके लिए उन्होंने अपने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर क़र्ज़ लिया था। वे कहते हैं, "हालांकि मैं पहले से ही भारी क़र्ज़ के बोझ में दबा हुआ हूँ तो ऐसे में मुझे केसीसी ऋण की ईएमआई का भुगतान करते रहना पड़ता है। पैदावार हो या नहीं मुझे क़र्ज़ का भुगतान करना पड़ता है।"

हालांकि उनकी फसलों का बीमा पीएमएफ़बीवाई के तहत किया गया था फिर भी उन्हें अभी तक बीमा योजना से एक पैसा भी नहीं मिला है।

 

सुमंत दुबे पिछले चार साल से केले की खेती कर रहे हैं। वे कहते हैं कि फसल बीमा योजना के तहत सूचीबद्ध बीमा कंपनी उनके पंजाब नेशनल बैंक के खाते से प्रीमियम के नाम पर 28,000 रुपये से लेकर 30,000 रुपये तक हर साल निकाल चुकी है। ये सभी कटौतियाँ उनके पासबुक में दर्ज हैं। उनकी फसलों को अप्रत्याशित नुकसान हुआ लेकिन उन्हें अपनी आय को स्थिर रखने के लिए अभी तक वित्तीय सहायता नहीं मिली है जबकि वर्तमान सरकार ने किसानों को वित्तीय सहायता देने का वादा कर रखा है।

वे कहते हैं, “मैंने बैंक प्रबंधक के साथ-साथ ज़िला मजिस्ट्रेट को एक लिखित शिकायत दी थी जिन्होंने मुझे एक बहुराष्ट्रीय बीमा कंपनी बजाज आलियांज़ के संबंधित अधिकारियों से बात करने के लिए कहा था। प्रबंधक ने मुझे आश्वासन दिया कि की गई कटौती को छह महीने के भीतर मेरे खाते में जमा कर दिया जाएगा। जब मैंने छह महीने के बाद पता किया तो मालूम हुआ कि मुझे मामूली राशि मिली है और वह भी केले की फसल के लिए नहीं बल्कि गेहूं और धान की फसलों की पहले की बकाया राशि थी। जब मैंने बैंक मैनेजर से बात की तो उन्होंने कहा कि उन्होंने बीमा कंपनी की सलाह के अनुसार राशि जमा की थी।" उन्होंने कहा कि "सरकार ने अब तक बड़े-बड़े दावे किए हैं लेकिन कभी मदद करने के लिए क़दम नहीं बढ़ाया।"

इन दो ब्लॉक में तबाही, आर्थिक पीड़ा और सरकारी उदासीनता के बारे में बताने के लिए ज़्यादातर किसानों की एक जैसी पीड़ा है। इन किसानों का कहना है कि बहुप्रचारित ये नीतियाँ जुमलेबाज़ी तक सिमट कर रह गई हैं।

खड्डा ब्लॉक के पकरी गांव के निवासी अमित्य कुमार के पास 15 एकड़ में केले का बाग़ था जो चक्रवात और उसके बाद हुई वर्षा में बुरी तरह से नष्ट हो गया। उन्होंने कहा कि "तहसीलदार (राजस्व प्रशासन का एक प्रमुख अधिकारी जो कार्यकारी मजिस्ट्रेट की शक्तियों का इस्तेमाल भी करता है) से लेकर ज़िला मजिस्ट्रेट तक इस नुकसान का आंकलन करने के लिए आए थे लेकिन अभी भी हमें ये मुआवज़ा मिलना बाक़ी है।"

ये पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दावा है कि उनकी सरकार फसल ख़राब होने और नुकसान होने पर भरपाई करती है, उन्होंने कहा, “ऐसे सभी दावे बड़े मंचों से किए जाते हैं लेकिन धरातल पर कोई कार्यान्वयन नहीं होता है। उन्हें यहाँ आना चाहिए और किसानों को इस तरह के खोखले दावे करने से पहले इन समस्याओं को देखना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में तूफ़ान और बाढ़ ने इस ज़िले में 80% केले की फसल को नष्ट कर दिया। उदाहरण के लिए 1,000 में से केवल 100-200 बागान ही इस तबाही से बच सके।

भारी वित्तीय नुकसान का सामना करने वाले कई किसानों ने या तो केले की खेती छोड़ दी या उनमें से कुछ किसान अन्य फसल की खेती करने लगे। उन्होंने कहा, "आमदनी के मामले में हम कई साल पीछे चले गए हैं।"

तूफ़ान और बाढ़ के कारण सुजान अली की फसल का लगभग 75% हिस्सा नष्ट हो गया। वे कहते हैं, “लेखपाल (उत्तर प्रदेश में एक प्रणाली जो गांव के राजस्व खाते और भूमि के रिकॉर्ड रखती है) ने मुझे आश्वासन दिया कि मुझे सरकार से मुआवज़ा मिलेगा। हम उनकी बातों के सच होने का इंतज़ार कर रहे हैं। मैंने जो 2 लाख रुपये निवेश किया था उसे गंवा दिया लेकिन अब तक न तो सरकार और न ही बीमा कंपनी ने एक भी पैसा दिया।"

इसी गांव के एक किसान लोरिक गोंड की भी पूरी फसल नष्ट हो गई और नुकसान के दो साल बाद भी बीमा का इंतज़ार कर रहे हैं। वे कहते हैं, “यहाँ आने वाले सभी सरकारी अधिकारियों ने सिर्फ़ बयान ही दिया है कि हमें सरकार से पैसा मिल जाएगा। मैंने लगभग 1.5 लाख रुपये का निवेश करके 2 बीघा ज़मीन पर केले के पेड़ लगाए थे। मैंने बैंकों से और स्थानीय ऋणदाताओं से क़र्ज़ लिया है। ज़िंदगी किसी तरह चल रही है।”

'रफ़ाल से बड़ा घोटाला है एनडीए की फसल बीमा योजना'

अगर वरिष्ठ पत्रकार और किसानों के मुद्दे पर मुखर वक्ता पी साईनाथ की बात मान ली जाए तो किसानों के लिए मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की फसल बीमा योजना रफ़ाल घोटाले से भी बड़ा घोटाला है।
देश में कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दे और उसके समाधान के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले साल नवंबर महीने में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम किसान स्वराज सम्मेलन को संबोधित करते हुए साईनाथ ने कहा “वर्तमान सरकार की नीतियाँ किसान-विरोधी हैं। प्रधानमंत्री बीमा फसल योजना रफ़ाल घोटाले से भी बड़ा घोटाला है। रिलायंस, एस्सार जैसे चयनित कॉरपोरेट्स को फसल बीमा प्रदान करने का काम दिया गया है।”

महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए साईनाथ ने कहा, “लगभग 2.80 लाख किसानों ने अपने खेतों में सोया की फसल बोई थी। एक ज़िले में किसानों ने 19.2 करोड़ रुपये का प्रिमियम जमा किया, राज्य सरकारों और केंद्र सरकार ने 77-77 करोड़ रुपये का भुगतान किया जो कुल राशि 173 करोड़ रुपये हुई। इस राशि का भुगतान रिलायंस बीमा को किया गया। पूरी फसल चौपट हो गई और बीमा कंपनी ने इन मांगों का भुगतान किया। रिलायंस ने एक ज़िले में सिर्फ़ 30 करोड़ रुपये का भुगतान किया जिससे उसे एक पैसे का निवेश किए बिना कुल 143 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। अब इस राशि को उन सभी ज़िलों में गुणा करें जिन्हें यह दिया गया है।”

उनका यह आरोप आंकड़ों के आधार पर है। ऐसा लगता है कि यह बीमा कंपनियों के लिए उपहार के रूप में बदल गया है जबकि किसान मुआवज़े के निपटान में देरी, अस्वीकृति और मामूली क्षतिपूर्ति से बेहद नाराज़ हैं।

ये योजना वर्ष 2016 में शुरू हुई। अब तक चार सीज़न बीत चुके हैं और वित्तीय लेनदेन से बीमा कंपनियों की आय पहले तीन सीज़न में वर्ष 2016 के खरीफ़ (शरद ऋतु की फसलें जो मानसून में बोई जाती हैं और शरद ऋतु में काट ली जाती हैं), 2016-17 की रबी (सर्दियों में बोई जाती हैं और वसंत ऋतु में काट ली जाती हैं) और 2017 की खरीफ़ से लगभग 16,000 करोड़ रुपये होने का पता चलता है। 2017-18 सीज़न की रबी के मुआवजे का निपटान अभी भी पूरा नहीं हुआ है।

दूसरे शब्दों में ये योजना वास्तव में किसानों के पैसे और सरकारी धन को बीमा कंपनियों के ख़ज़ाने को भर रही है जबकि ये योजना उन किसानों को बेहद ज़रूरी मुआवजा प्रदान करने की बात कर रही है जिनकी फसल ख़राब मौसम के चलते नष्ट हो गई है।

Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana
PMFSBY
Khushinagar
Banana Crop
UP Government
UP Cyclone
Crop Damage

Related Stories

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

यूपी चुनावः प्रचार और भाषणों में स्थानीय मुद्दों को नहीं मिल रही जगह, भाजपा वोटर भी नाराज़

यूपीः धान ख़रीद को लेकर किसानों से घमासान के बाद हड़ताल पर गए क्रय केंद्र प्रभारी

ग्राउंड रिपोर्ट: जेवर एयरपोर्ट: उचित मुआवज़े के लिए भटक रहे ज़मीन देने वाले किसान

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान कृषि कानूनों का क्यों विरोध कर रहे हैं ?

यूपी : गन्ना किसानों का सरकार पर हल्लाबोल, पूछा- कहां हैं अच्छे दिन?

रुक नहीं रही सफाईकर्मियों की मौत, हापुड़ में तीन ने जान गंवाईं


बाकी खबरें

  • Sitaram Yechury
    संदीप चक्रवर्ती
    स्वतंत्रता दिवस को कमज़ोर करने एवं हिंदू राष्ट्र को नए सिरे से आगे बढ़ाने की संघ परिवार की योजना को विफल करें: येचुरी 
    25 Feb 2022
    माकपा महासचिव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार का “फोकस 5 अगस्त को देश की वास्तविक स्वतंत्रता की तारीख के रूप में बढ़ावा देने पर है।"  
  • russia ukrain
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन पर रूस के हमले से जुड़ा अहम घटनाक्रम
    25 Feb 2022
    यूरोपीय संघ रूस पर और आर्थिक एवं वित्तीय प्रतिबंध लगाने को सहमत। तो वहीं संयुक्त राष्ट्र ने यूक्रेन में मानवीय सहायता के लिए दो करोड़ डॉलर देने की घोषणा की।
  • ASHA Workers
    अनिल अंशुमन
    बिहार : आशा वर्कर्स 11 मार्च को विधानसभा के बाहर करेंगी प्रदर्शन
    25 Feb 2022
    आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिहार सरकार हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने में भी टाल मटोल कर रही है। कार्यकर्ताओं ने ‘भूखे रहकर अब और नहीं करेंगी बेगारी’ का ऐलान किया है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 13 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 302 मरीज़ों की मौत
    25 Feb 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 94 हज़ार 345 हो गयी है।
  • up elections
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : अयोध्या के प्रस्तावित  सौंदर्यीकरण में छोटे व्यापारियों की नहीं है कोई जगह
    25 Feb 2022
    अयोध्या के व्यापारियों ने आरोप लगाया है कि प्रस्तावित लेआउट के परिणामस्वरूप दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़े पैमाने पर ध्वस्त या उन दुकानों का ज़्यादातर हिस्सा तोड़ दिया जाएगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License