NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
तेलंगाना: उपेक्षित और धमकाए गए आदिवासी एफआरए के दावों के लिए अपने आंदोलन को करेंगे तेज़ 
जनवरी 2017 से लेकर जुलाई 2020 के बीच में तेलंगाना में एफआरए के तहत मात्र 145 नए पोडू भूमि के दावों पर ही भूमि के पट्टों को आवंटित किया गया था। 
पृथ्वीराज रूपावत
12 Feb 2021
तेलंगाना: उपेक्षित और धमकाए गए आदिवासी एफआरए के दावों के लिए अपने आंदोलन को करेंगे तेज़ 

हैदराबाद: पिछले कुछ दिनों से तेलंगाना में एजेंसी/अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय के किसान, वन विभाग के अधिकारियों द्वारा पोडू भूमि पर (आदिवासियों एवं अन्य वनवासियों द्वारा वन्य भूमि पर खेती-बाड़ी करने) वृक्षारोपण को स्थापित करने के प्रयासों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार के दिन जब वन विभाग के अधिकारी भद्राद्री कोथागुडेम जिले के अन्नापुरेडयपल्ली और लक्ष्मीदेवी पल्ली मंडलों में पोडू भूमि को समतल करने में व्यस्त थे तो वामपंथी दलों और सैकड़ों की संख्या में आदिवासियों ने मिलकर इस कदम का विरोध किया।

इसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन मंगलवार के दिन राज्य में महबूबाबाद (वारंगल) जिले के गुडुर मंडल में लाइन थांडा में भी देखने को मिला। उस दौरान जब वन विभाग के अधिकारियों ने विरोध कर रहे आदिवासियों को इलाके से जबरन हटाने की कोशिश की तो बनोथ पार्वती नाम की एक आदिवासी महिला ने कीटनाशक खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। स्थानीय किसानों द्वारा उसे बचाया गया और पास के एक सरकारी अस्पताल में  ले जाया गया था।

खम्मम जिले के सीपीआई(एम) नेता भुक्या वीराभद्रम का आरोप था कि राज्य के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव राज्य में लंबे समय से लंबित पड़े पोडू भूमि के मुद्दे का हल निकाल लेने के अपने चुनावी वायदे को पूरा कर पाने में विफल रहे हैं। वीराभद्रम के अनुसार “आदिवासी संगठनों द्वारा राज्य सरकार से काफी समय से इस बात की मांग की जा रही है कि वह इस मामले को सुलझाने के लिए अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं आदिवासी संगठनों की एक समिति का गठन करें, जिससे कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत आदिवासियों के बीच भूमि के पट्टों के आवंटन के काम को पूरा किया जा सके। लेकिन अधिकारियों द्वारा राज्य में वन क्षेत्र के आधार को बढाने के इरादे से तेलंगाना कु हरिथा हरम योजना के नाम पर खेती के तहत आने वाली भूमि पर जबरन वृक्षारोपण के प्रयास किये जा रहे हैं।”

2015 के बाद से ही हरिथा हरम वृक्षारोपण को लेकर चलाए गए तमाम अभियानों के दौरान आदिवासी किसानों और वन विभाग के बीच में संघर्ष और हिंसा की कई घटनाओं की खबरें देखने को मिली हैं। खम्मम जिले में करेपल्ली, कामेपल्ली जुलूरुपाडू, एनकूर, कोनीजेरला और सत्तूपल्ली मंडलों में आदिवासियों ने वन अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न और जबरन बेदखल करने के खिलाफ अनेकों विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है। 

आदिवासी संगठनों के अनुसार जब अनुसूचित जनजातीय एवं अन्य पारंपरिक वनवासी समुदाय (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 या वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) को अमल में लाया गया था तो उस दौरान तत्कालीन आंध्र प्रदेश राज्य में करीब 25 लाख एकड़ की वन्य भूमि आदिवासियों के हाथ में खेती के तहत पाई गई थी।

जनजातीय मामलों के मंत्रालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2020 के अंत में (अंतिम उपलब्ध डेटा) जहाँ सरकार को तेलंगाना में कुल 1,86,679 दावे प्राप्त हुए थे, जिसमें से (1,83,252) निजी दावे और 3,427 सामुदायिक दावे थे)। लेकिन सिर्फ 93,639 दावों में ही तेलंगाना में भूमि के पट्टे वितरित किये गए थे। 

जनवरी 2017 और जुलाई 2020 के बीच राज्य में एफआरए के तहत सिर्फ 145 नए पोडू भूमि के दावों पर ही भूमि के पट्टे दिए गए थे। 

तेलंगाना गिरिजम संघम के महासचिव आर. श्री राम नाइक के अनुसार “राज्य में हजारों की तादाद में ऐसे आदिवासी हैं जिनके द्वारा वन प्रशासन से मिलने वाले उत्पीड़न और अपने खुद के दयनीय जीवन के हालात जैसी ,तमाम वजहों से राज्य में भूमि के पट्टों के लिए आवेदन करना अभी शेष है। कई मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों ने आदिवासियों के दावों के अनुसार भूमि के पट्टों का आवंटन नहीं किया है।” उन्होंने आगे बताया कि राज्य में आदवासी संगठनों द्वारा इस मुद्दे पर एक गोल-मेज सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है और भूमि पट्टों के वितरण की मांग को लेकर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू होने जा रहे हैं।

नाइक के अनुसार “ज्यादातर मामलों में वन अधिकारियों ने आदिवासियों के खिलाफ यह घोषणा कर झूठे मामले दर्ज किये हैं कि उन्होंने 31 दिसंबर, 2005 (आदिवासियों के लिए भूमि के पट्टों के आवंटन की अंतिम तिथि) के बाद जाकर वन भूमि पर अपना कब्जा जमाया हुआ है। हालांकि वास्तविक स्वामित्व का पता लगाने के लिए प्रशासन को ग्राम सभाओं का रुख करना चाहिए था। कई आदिवासी परिवारों के लिए तो पोडू भूमि ही उनके पूर्वजों से विरासत में हासिल एकमात्र संपत्ति के तौर पर है। यदि उनसे उनकी जमीनों को जबरन छीन लिया जाता है, तो इससे उनकी रोजी-रोटी पर ही भारी संकट खड़ा हो जाने वाला है।”

इस बारे में वीराभद्रम का कहना था कि “केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से जानबूझकर ऐसे प्रयास किये जा रहे हैं जिससे कि एफआरए या अन्य कानून जो आदिवासी अधिकारों को मंजूरी देते हैं, को ईमानदारी से लागू न किया जाए। मिसाल के तौर पर यदि सरकार चाहे तो हरिथा हरम वृक्षारोपण अभियान को खाली पड़ी सरकारी जमीनों, बंदोबस्ती वाली भूमि और अन्य जमीनों पर स्थापित कर सकती है। लेकिन अगर उन्होंने कॉर्पोरेट हितों का पोषण करने के लिए आदिवासियों की पोडू भूमि को खाली कराने की योजना बना रखी है तो ऐसे में वंचित समुदायों के पास अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।” 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

Telangana: Ignored and Threated, Adivasis to Intensify Stir for FRA Claims

fra
Forest Rights
Podu Lands
Telangana
tribal rights
Telangana Forest Department
Haritha Haram
Khammam

Related Stories

कोरबा : रोज़गार की मांग को लेकर एक माह से भू-विस्थापितों का धरना जारी

तेलुगु राज्यों में श्रमिकों और किसानों का संयुक्त विरोध प्रदर्शनों से पहले व्यापक अभियान

2020 : नए साल में तेज़ होगा साझा संघर्ष

मज़दूर अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ़ हज़ारो निर्माण मज़दूरों का दिल्ली में प्रदर्शन

पुरी : पुलिसकर्मी ने किया महिला से दुराचार, आधी आबादी किससे लगाए सुरक्षा की गुहार!

टीएसआरटीसी कर्मचारियों की मौतों की ज़िम्मेदार कौन?

दिल्ली में आदिवासियों ने दी मोदी सरकार को 'आखिरी' चेतावनी

तेलंगाना: टीएसआरटीसी हड़ताल का 10वां दिन, सरकार अपनी ज़िद पर अड़ी, अब तक 6 मौते

सुप्रीम कोर्ट ने आरे में पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक, तेलंगाना के क़रीब 50 हज़ार कर्मचारियों के भविष्य,ईक्वाडोर में पुलिसिया दमन जारी और अन्य 

तेलंगाना में सड़क परिवहन निगम कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए, बस सेवा बाधित होने से यात्री परेशान


बाकी खबरें

  • rakeh tikait
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार
    11 Feb 2022
    पहले चरण के मतदान की रपटों से साफ़ है कि साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण वोटिंग पैटर्न का निर्धारक तत्व नहीं रहा, बल्कि किसान-आंदोलन और मोदी-योगी का दमन, कुशासन, बेरोजगारी, महंगाई ही गेम-चेंजर रहे।
  • BJP
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: भाजपा के घोषणा पत्र में लव-लैंड जिहाद का मुद्दा तो कांग्रेस में सत्ता से दूर रहने की टीस
    11 Feb 2022
    “बीजेपी के घोषणा पत्र का मुख्य आकर्षण कथित लव जिहाद और लैंड जिहाद है। इसी पर उन्हें वोटों का ध्रुवीकरण करना है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घोषणा पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया में लव-लैड जिहाद को…
  • LIC
    वी. श्रीधर
    LIC आईपीओ: सोने की मुर्गी कौड़ी के भाव लगाना
    11 Feb 2022
    जैसा कि मोदी सरकार एलआईसी के आईपीओ को लांच करने की तैयारी में लगी है, जो कि भारत में निजीकरण की अब तक की सबसे बड़ी कवायद है। ऐसे में आशंका है कि इस बेशक़ीमती संस्थान की कीमत को इसके वास्तविक मूल्य से…
  • china olampic
    चार्ल्स जू
    कैसे चीन पश्चिम के लिए ओलंपिक दैत्य बना
    11 Feb 2022
    ओलंपिक का इतिहास, चीन और वैश्विक दक्षिण के संघर्ष को बताता है। यह संघर्ष अमेरिका और दूसरे साम्राज्यवादी देशों द्वारा उन्हें और उनके तंत्र को वैक्लपिक तंत्र की मान्यता देने के बारे में था। 
  • Uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : जंगली जानवरों से मुश्किल में किसान, सरकार से भारी नाराज़गी
    11 Feb 2022
    पूरे राज्य के किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, मंडी, बढ़ती खेती लागत के साथ ही पहाड़ों में जंगली जानवरों का प्रकोप और लगातार बंजर होती खेती की ज़मीन जैसे तमाम मुद्दे लिए अहम हैं, जिन्हें इस सरकार ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License