NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
बैकफुट पर IRCTC, कैटरिंग सुपरवाइजर्स को निकालने का निर्णय स्थगित
25 जून को 500 से अधिक कैटरिंग सुपरवाइजर्स को बाहर का रास्ता दिखाने का नोटिस जारी करने वाली भारत सरकार की मिनी रत्न कंपनी आईआरसीटीसी ने आलोचना के बाद अपने अनुबंधकर्मियों को निकालने का फैसला फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
सोनिया यादव
01 Jul 2020
Image Courtesy:  Hindustan Times
Image Courtesy: Hindustan Times

“मौजूदा परिस्थितियों में संशोधित कैटरिंग मॉडल के तहत ऐसा निर्णय लिया गया है कि अनुबंध पर रखे गए कैटरिंग सुपरवाइजर्स की अब जरूरत नहीं है। इन कर्मचारियों को एक महीने का नोटिस जारी किया जा रहा है और इनकी सेवाएं समाप्त की जा रही हैं।”

इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी आईआरसीटीसी ने 25 जून को एक पत्र जारी किया, जिसमें सभी प्रमुख जोन्स कोलकाता, मुंबई, सिकंदराबाद और चेन्नई को अधिसूचित करते हुए लगभग अनुबंध पर काम करने वाले 500 से अधिक कैटरिंग सुपरवाइजर्स को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जैसे ही खबर मीडिया में आई आईआरसीटीसी के इस फैसले की खूब आलोचना हुई, निकाले गए कर्मचारियों ने रेलमंत्री पीयूष गोयल से मदद की गुहार लगाई। जिसके बाद अब कंपनी ने अपने फैसले को स्थगित करने का निर्णय लिया है।

क्या है पूरा मामला?

कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश भर में लगाए गए लॉकडाउन से आईआरसीटीसी की सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं। सभी नियमित यात्री सेवाएं 25 मार्च से निलंबित हैं। इस समय रेलवे केवल श्रमिक स्पेशल रेलगाड़ियों के अलावा 230 विशेष रेलगाड़ियां ही चला रहा है।

ऐसे में कैटरिंग सुपरवाइजर्स का काम जोकि रेलगाड़ियों में भोजन की तैयारी की देखरेख करना, गुणवत्ता की जांच, यात्रियों की शिकायतों का समाधान करना और यह सुनिश्चित करना था कि खाने के लिए तय कीमत से अधिक धनराशि नहीं ली जाए पर प्रतिकूल असर पड़ा है। कोरोना कहर के बीच लगे लॉकडाउन ने इनकी सर्विसेज़ को सीमित कर दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस ने आईआरसीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से छापा है कि लॉकडाउन से आईआरसीटीसी का राजस्व बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

रेलवे अधिकारी के मुताबिक “लॉकडाउन के बाद से आईआरसीटीसी का राजस्व शून्य रहा है। ऐसे में कैटरिंग सुपरवाइजर्स को काम पर रखना मुश्किल था, इन पर कॉरपोरेशन हर महीने 1.25 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इसी के मद्देनज़र इनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं।”

हालांकि 29 जून को जैसे ही ये खबर मीडिया में आई, सरकार की आलोचना होने लगी। लोग सरकार पर कथनी और करनी में फर्क करने का आरोप लगाने लगे। कहा जाने लगा कि कोरोना काल में जहां सरकार निजी कंपनियों को किसी भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकालने की नसीहत और चेतावनी दे रही हैं,  तो वहीं दूसरी तरफ भारत सरकार की मिनी रत्न कंपनी आईआरसीटीसी खुद अपने अनुबंधकर्मियों को निकालने का फरमान जारी कर चुकी है।

इसके बाद आईआरसीटीसी और रेल मंत्रालय दोनों ही बैकफुट पर आ गए। मंगलवार, 30 जून को आईआरसीटीसी के प्रवक्ता ने मीडिया से कहा कि फिलहाल कैटरिंग सुपरवाइजर्स के अनुबंध समाप्त करने के फैसले को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है।

पहले क्या कहा था आईआरसीटीसी ने?

आईआरसीटीसी के अधिकारियों के अनुसार रेलवे को जब भी जरूरत होगी, व्यापक स्तर पर सुपरवाइजर्स को काम पर रखा जाएगा लेकिन तब तक उनका काम रेलवे के इन हाउस स्टाफ को सौंपा जा रहा है।

आईआरसीटीसी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एमपी मल्ल का कहना था कि मार्च से ही ट्रेनों का संचालन बंद हैं। ऐसे में हमने अनुबंधित स्टाफ की सेवाएं अचानक से समाप्त नहीं की है। अनुबंध की सभी शर्तों का पालन किया गया है।

एमपी मल्ल ने मीडिया को बताया था, “हमने ऐसे समय में अनुबंध खत्म करने का  फैसला लिया है, जब इंडस्ट्री धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है ताकि इन्हें कहीं और रोजगार ढूंढने में दिक्कत न हो।’

आईआरसीटीसी के प्रवक्ता सिद्धार्थ सिंह ने कहा था कि हम मामले पर पुनर्विचार कर रहे हैं। हम विचार कर रहे हैं कि क्या इस निर्णय पर दोबारा विचार हो सकता है। इस संबंध में कुछ कदम उठाए जाएंगे।

कर्मचारियों ने क्या किया?

आईआरसीटीसी द्वारा निलंबित कर्मचारियों ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से हस्तक्षेप की गुहार लगाते हुए सोशल मीडिया के जरिये उन तक अपनी बात पहुंचाई।

अरुण कुमार नाम के एक ट्विटर यूज़र ने ट्वीट किया, “पीयूष गोयल सर, मैं कैटरिंग सुपरवाइजर्स के रूप में काम कर रहा हूं लेकिन दुर्भाग्य से अब आईआरसीटीसी ने पूरे देश में भारी मात्रा में सभी सुपर्वाइजर्सज़ की नौकरी समाप्त करने का फैसला किया है, ऐसे में हम बेरोजगार हो जाएंगे जबकि  हमारा परिवार हम पर निर्भर है। कृपया हमारी मदद करें, हम सब आपके आभारी होंगे।

एक अन्य कर्मचारी सरबजीत दास ने लिखा, “मैं आईआरसीटीसी का कर्मचारी हूं। अब जब आईआरसीटीसी  ने 540 हॉस्पिटैलिटी सुपरवाइजर की सेवा को समाप्त कर दिया है तो ऐसे में हमें नई नौकरी तलाशनी होगी। लेकिन इस महामारी की स्थिति में हमें नौकरी देगा कौन?

कई होटल मैनेजमेंट ग्रैजुएट्स जो आईआरसीटीसी के दक्षिण जोन में कार्यरत थे उन्होंने न्यूज़क्लिक को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें इस टर्मिनेशन की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। 25 जून के एक पत्र के माध्यम से ये जानकारी सामने आई है। अब जब सभी सेवाएं समाप्त करने का कारण पूछ रहे हैं तो बस कॉरपोरेट ऑफिस के आदेशों का पालन हो रहा है ये कह दिया जा रहा है।

कई कर्मचारियों ने ये भी बताया कि उन्हें दो साल के अनुबंध पर रखा गया था। लेकिन समय पूर्व ही अब इसे टर्मिनेट कर दिया गया है।

कर्मचारियों ने आईआरसीटीसी को इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है, जिसमें कहा गया है कि इस महामारी की विकट परिस्थियों के दौरान कम से कम पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स जो सरकार के स्वामित्व में आती हैं, उन्हें रोज़गार सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए, जिससे निज़ी क्षेत्र की कंपनियों के लिए एक नैतिक आदर्श स्थापित हो सके और अर्थव्यवस्था में भी स्थिरता बनी रहे।

निष्कासित कर्मचारियों का ये भी कहना है कि वे 5-15% कम सैलरी पर काम करने को भी तैयार हैं लेकिन उनकी अपील है की उनकी सेवाओं को समाप्त नहीं किया जाए।

कैटरिंग सुपरवाइजर्स के अनुसार उन्होंने आईआरसीटीसी के प्रभाव और राजस्व को बढ़ाने में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। "कार्यस्थल पर शैक्षणिक, योग्य, कुशल और अनुभवी सुपरवाइजर्स द्वारा लाई गई चमकदार और बोधगम्य सुधारों ने आईआरसीटीसी के व्यवसाय को अनुकूल रूप से प्रभावित किया है"।

गौरतलब है कि आईआरसीटीसी ने 2018 में लगभग 560 कैटरिंग सुपरवाइजर्स को रेलगाड़ियों में ठेकेदारों द्वारा परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए नियुक्त किया था।

सुपरवाइजर्स के अनुसार उन्हें केवल खराब परफॉर्मेंस के आधार पर ही एक महीने के नोटिस पर निकाला जा सकता है। लेकिन उनका कहना है कि उनकी परफॉर्मेंस बिल्कुल भी खराब नहीं है। ऐसे समय में जब कई रेलवे कर्मचारी घर पर थे, उन्होंने श्रमिक विशेष ट्रेनों में खाना बांटा है और चौबीस घंटे काम किया है। आखिर अब किस आधार पर उन्हें निकाला जा रहा है।

IRCTC
indian railways
job loss
piyush goyal
Railway Catering and Tourism Corporation
catering supervisors

Related Stories

ट्रेन में वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली छूट बहाल करें रेल मंत्री: भाकपा नेता विश्वम

केंद्र का विदेशी कोयला खरीद अभियान यानी जनता पर पड़ेगा महंगी बिजली का भार

कोयले की किल्लत और बिजली कटौती : संकट की असल वजह क्या है?

रेलवे में 3 लाख हैं रिक्तियां और भर्तियों पर लगा है ब्रेक

भारतीय रेल के निजीकरण का तमाशा

निजी ट्रेनें चलने से पहले पार्किंग और किराए में छूट जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं!

एमएसएमई नीति के नए मसौदे में कुछ भी नया या महत्वपूर्ण नहीं!

भारत में नौकरी संकट जितना दिखता है उससे अधिक भयावह है!

अब उद्योगपति भी "देशद्रोही"?

रेलवे के निजीकरण के ख़िलाफ़ रेल कर्मियों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन कल!


बाकी खबरें

  • aicctu
    मधुलिका
    इंडियन टेलिफ़ोन इंडस्ट्री : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ख़राब नियोक्ताओं की चिर-परिचित कहानी
    22 Feb 2022
    महामारी ने इन कर्मचारियों की दिक़्क़तों को कई गुना तक बढ़ा दिया है।
  • hum bharat ke log
    डॉ. लेनिन रघुवंशी
    एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता
    22 Feb 2022
    सभी 'टूटे हुए लोगों' और प्रगतिशील लोगों, की एकता दण्डहीनता की संस्कृति व वंचितिकरण के ख़िलाफ़ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगा, जो इस प्रणाली से लाभ उठाते…
  • MGNREGA
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ग्रामीण संकट को देखते हुए भारतीय कॉरपोरेट का मनरेगा में भारी धन आवंटन का आह्वान 
    22 Feb 2022
    ऐसा करते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र ने सरकार को औद्योगिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर आने की उसकी उम्मीद के खिलाफ आगाह किया है क्योंकि खपत की मांग में कमी से उद्योग की क्षमता निष्क्रिय पड़ी हुई है। 
  • Ethiopia
    मारिया गर्थ
    इथियोपिया 30 साल में सबसे ख़राब सूखे से जूझ रहा है
    22 Feb 2022
    इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 70 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है क्योंकि लगातार तीसरी बार बरसात न होने की वजह से देहाती समुदाय तबाही झेल रहे हैं।
  • Pinarayi Vijayan
    भाषा
    किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन
    22 Feb 2022
    विजयन ने राज्य विधानसभा में कहा, ‘‘केरल विभिन्न क्षेत्रों में कहीं आगे है और राज्य ने जो वृद्धि हासिल की है वह अद्वितीय है। उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक हितों के साथ की गयी अनुचित टिप्पणियों के तौर पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License