NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: सबका राम जी करेंगे बेड़ा पार
जब कोई आस नहीं रहती तो राम, तेरा ही सहारा है। वैसे भी जब जनता सरकार से पूछेगी तो सरकार बता तो सकेगी कि कोरोना काल में बीमारी रोकने के लिए भूमि पूजन किया गया। जब युवा रोजगार मांगेंगे तो भी उन्हें मंदिर ही दिखाना है। जब जनता भूख और गरीबी पर प्रश्न करेगी तो मंदिर तो है न।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
09 Aug 2020
modi
फोटो साभार : ट्विटर

पाँच अगस्त को अयोध्या में उच्चतम न्यायालय के समझ में न आने वाले फैसले के बाद राम मंदिर का भूमि पूजन हो गया। बताया जा रहा है कि बहुत ही शुभ मुहूर्त में हुआ है। ऐसे काम शुभ मुहूर्त में ही होने चाहिए। इसीलिए यह कार्य भी बहुत ही शुभ मुहूर्त में हुआ है।

tirchi nazar_5.png

हिन्दू धर्म में, और अब क्योंकि हिन्दू धर्म और देश एक ही बना दिये गए हैं, तो कह सकते हैं कि हमारे देश में, हर शुभ कार्य मुहूर्त देख कर ही किया जाता है। बच्चे के पैदा होने का काम भगवान ने अपने हाथ में लिया हुआ है और मरने का काम भी। बस ये दो काम ऐसे रहे हैं जो बिना मुहूर्त के होते हैं अन्यथा जो भी शुभ कार्य मनुष्य अपने आप करता है, बिना मुहूर्त सुझवाये नहीं करता है। 

बच्चा पैदा होने के बाद उसके सारे समारोह यथा नामकरण संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, मुंडन समरोह आदि सभी किसी ज्ञानी पंडित से शुभ मुहूर्त निकलवा कर ही होते हैं। शादी विवाह से संबंधित सभी कार्यक्रम भी बिना शुभ लग्न के सम्पन्न नहीं होते हैं। कोई भी काम धंधा शुरू करना हो तो फिर शुभ मुहूर्त। यानी पूरी जिंदगी ही मुहूर्त के हिसाब से चलती है। शुभ मुहूर्त निकलवा कर भी, उसी के हिसाब से चलती हुई जिन्दगी कैसी चलती है, सबको पता ही है।

अब तो बच्चा पैदा करने का काम भी लोग मुहूर्त निकलवा कर करने लगे हैं। पंडित जो मुहूर्त निकालता है, उसी समय ऑपरेशन करवा बच्चा पैदा करवा लेते हैं। संभव है कुछ समय बाद लोग मरने का भी मुहूर्त निकलवायें और उसी समय मरना चाहें। कि इस मुहूर्त में मरने से मोक्ष प्राप्त होगा, इस मुहूर्त में मरने से स्वर्ग मिलेगा और इस मुहूर्त में देह त्याग करने से अम्बानी, अडानी, टाटा, बिरला के यहाँ पुनर्जन्म होगा। अस्पताल वालों से कहें कि यह घड़ी अच्छी है, दादाजी का वेंटिलेटर बंद कर दीजिए।

बताया जाता है कि पाँच अगस्त 2020 को दोपहर बारह बज कर चवालीस मिनट और आठ सेकंड से चालीस सेकंड तक बहुत ही शुभ मुहूर्त था। इसीलिए इसी समय रामजन्मभूमि मंदिर का भूमिपूजन हुआ। गुनी पंडित, पंचाग के ज्ञाता बताते हैं कि उस समय बहुत ही उत्तम योग था। भाद्रपद माह शुरू हुआ था। यानी चौमासा चल रहा था। वही चार महीने जिनमें शुभ कार्य निषेध होते हैं। जो लोग मुहूर्त निकाल कर विवाह आदि करते हैं, इस चार मास में ऐसे शुभ कार्य नहीं करते हैं। एक दिन पहले ही पंचक लगे थे यानी पाँच अशुभ दिन। फिर देवता भी सोये हुए थे, देवशयनी एकादशी से देवउठानी एकादशी तक। देश के इस कार्य के लिए इससे अधिक शुभ मुहूर्त और कब निकलता।

लेकिन इन दकियानूसी बातों को मैं नहीं मानता। और न ही देश के कर्ता धर्ता मानते हैं। और तो और वर्तमान प्रगतिशील काल में पंडित, पुजारी, साधू संत, कोई नहीं मानता है, विशेष रूप से जब कोपभाजन का भय हो तब तो हरगिज नहीं। तो इसीलिए भूमिपूजन करा लिया गया। पर ये सब लोग मानवता को तो मानते हैं न या वहाँ भी ‘कुत्ते के पिल्ले’ जैसी बात है। देश में, और देश में ही क्या पूरे विश्व भर में बीमारी फैली हुई है। देश में रोज पचास हजार से अधिक मरीज सामने आ रहे हैं। चालीस हजार के करीब मृत्यु हो गई हैं। देश के गृहमंत्री और प्रधानमंत्री जी के अन्यतम साथी बीमारी के कारण ही अस्पताल में भर्ती हैं। जिस प्रदेश में पूजन हुआ उसी की एक कैबिनेट मंत्री हाल ही में बीमारी के कारण चल बसी हैं। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, प्रदेशाध्यक्ष, विधायक, अफसर, डाक्टर सभी कहीं न कहीं इसी बीमारी से अस्पतालों में भर्ती हैं। बीमारों की कुल संख्या बीस लाख से ऊपर पहुँच चुकी है। यह आपातकाल भी कोई मुहूर्त है पूजन करने का।

पर फिर लगा यही तो मुहूर्त है पूजा करने का, राम मंदिर बनाने का। देश में फैली हुई बीमारी को सरकार रोक नहीं रही है, रोकने की नीयत भी नहीं लगती है। अब बीमारी न्यू नॉर्मल घोषित की जा चुकी है, आदत डालने के लिए कहा जा चुका है। नेता-अभिनेता, महानायक-खलनायक, मंत्री-संत्री, सांसद-विधायक, अमीर-गरीब सभी बीमारी से त्रस्त हैं। और सरकार है कि हाथ पर हाथ रखे बैठी है। जितना कर सकती है, उतना भी नहीं कर रही है। सो पूजन ही कर लिया जाये। जब कोई आस नहीं रहती तो राम, तेरा ही सहारा है। वैसे भी जब जनता सरकार से पूछेगी तो सरकार बता तो सकेगी कि कोरोना काल में बीमारी रोकने के लिए भूमि पूजन किया गया। जनता हो या सरकार, सबका राम जी करेंगे बेड़ा पार।

वैसे भी सरकार के लिए तो यह मुहूर्त बहुत ही शुभ है। पहली बात तो अगर सरकार कोरोना के खत्म होने या फिर कम होने का ही इंतज़ार करने में लग जाये तो फिर न जाने कब तक इंतजार करना पड़ जाये। देवताओं के उठने का या फिर चतुर्मास समाप्त होने की प्रतीक्षा करते तो बिहार के चुनाव हाथ से निकल जायें। वैसे भी यदि मंदिर बनाने के लिए शुभ मुहूर्त की प्रतीक्षा करते रहे तो अगले आम चुनाव से पहले मंदिर बनेगा कैसे। जब जनता बीमारी से इलाज पर जवाब मांगेगी तो उन्हें मंदिर ही तो दिखाना है। जब युवा रोजगार मांगेंगे तो भी उन्हें मंदिर ही दिखाना है। जब जनता भूख और गरीबी पर प्रश्न करेगी तो मंदिर तो है न। जब स्कूल, कालेज और अस्पताल मांगेगी तो भी मंदिर ही तो सामने रखना है। मंदिर सबका बेड़ा पार करेगा। जनता का भी और सरकार का भी।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
ayodhya
jai shree ram
Narendra modi
BJP
RSS

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद

उर्दू पत्रकारिता : 200 सालों का सफ़र और चुनौतियां

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं

तिरछी नज़र: ओमीक्रॉन आला रे...


बाकी खबरें

  • NAND KISHOR GURJER
    रवि शंकर दुबे
    चुनाव आते ही बीजेपी वालों को लोगों के खाने से क्या दिक्कत हो जाती है?
    28 Dec 2021
    ग़ाज़ियाबाद के लोनी से विधायक नंदकिशोर गुर्जर का तानाशाही रवैया एक बार फिर देखने को मिला, जब उन्होंने अपने इलाके की सभी मीट की दुकानें बंद करवा दीं।
  • Azadi Ka Amrit Mahotsav
    डॉ. अमिताभ शुक्ल
    विकास की वर्तमान स्थिति, स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव और आम आदमी की पीड़ा
    28 Dec 2021
    आय की असमानता, भ्रष्टाचार, भीषण ग़रीबी, भुखमरी, कुपोषण के मामले में निरंतर वृद्धि हो रही है ऐसे में दुर्दशा की स्थिति में पहुंचे करोड़ों बदक़िस्मत लोगों के लिए स्वतंत्रता और आज़ादी के अमृत महोत्सव के…
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : नागरिक समाज ने उठाई  ‘मॉबलिंचिंग विरोधी क़ानून’ की नियमावली जल्द बनाने की मांग
    28 Dec 2021
    26 दिसंबर को रांची के डोरंडा के रिसालदार बाबा सभागार में सर्वधर्म संगठनों, नागरिक समाज, एआईपीएफ़ और अवामी इंसाफ़ मंच समेत कई सामाजिक संगठनों ने ‘मॉबलिंचिंग क़ानून और हमारा नज़रिया’ विषय पर नागरिक विमर्श-…
  • west up
    असद शेख़
    विधानसभा चुनाव 2022: पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता के अहम मुद्दे
    28 Dec 2021
    7 करोड़ की आबादी के आंकड़े को पार कर चुका उत्तर प्रदेश का ये पश्चिमी क्षेत्र देश, राज्य की राजनीति से हट कर अपने अलग मुद्दों और समस्याओं को समझता और जानता है जिसमें महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों…
  • Doctors’ Protest
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों पर पुलिस का बल प्रयोग, नाराज़ डॉक्टरों ने काम बंद का किया ऐलान
    28 Dec 2021
    फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बर्बरता का दावा करते हुए इसे चिकित्सा बिरादरी के इतिहास में काला दिन कहा है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License