NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
झूठी शपथ से अच्छा है कि संविधान से सेक्युलर शब्द ही हटा दिया जाए!
सोशलिस्ट और सेक्युलर (समाजवादी और पंथनिरपेक्ष या धर्मनिरपेक्ष), इन्हीं दो शब्दों के कारण ही हमारे सांसदों को संविधान की झूठी सौगंध खानी पड़ती है...। डॉ. द्रोण का व्यंग्य स्तंभ ‘तिरछी नज़र’
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
15 Dec 2019
constitution of india

हमारे नेता जब सांसद बनते हैं तो संविधान की शपथ ग्रहण करते हैं। हम सब लोग जानते हैं, कसमें झूठी ही खाई जाती हैं। लेकिन संविधान बनाने वाले लोग शायद मूड में थे, या फिर उन्हें अंदाजा ही नहीं था कि सांसद भी झूठी शपथ लेनी शुरू कर देंगे। इसीलिए उन्होंने सांसदों को संविधान की शपथ ग्रहण करवाना शुरू कर दिया। अब पद तो कोई छोड़ नहीं सकता, सो सांसदों ने झूठी शपथ लेनी शुरू कर दी और मंत्री तक बन गये। उस झूठी शपथ लेने से कुछ नेताओं को तो झूठ बोलने की आदत ही पड़ गई। जब भी बोलते हैं, झूठ ही बोलते हैं। बार बार बोलते हैं, हर बार बोलते हैं, लेकिन झूठ ही बोलते हैं।
logo tirchhi nazar_9.PNG
जो लोग संविधान की झूठी सौगंध खाते हैं, वो इसलिए कि उनकी निगाह में हमारे संविधान में दो शब्द सबसे खराब हैं सोशलिस्ट और सेक्युलर (समाजवादी और पंथनिरपेक्ष या धर्मनिरपेक्ष)। इन्हीं दो शब्दों के कारण ही उन्हें संविधान की झूठी सौगंध खानी पड़ती है। अब इन दो शब्दों को जरूर ही बदला जाना चाहिए।

देश की प्रगति में जो भी रुकावट हैं, इन्हीं शब्दों की के कारण हैं। विशेष रूप से सेक्युलर (पंथनिरपेक्ष या धर्मनिरपेक्ष) शब्द से। यह सरकार जो भी प्रगतिशील कदम उठाना चाहती है, यह सेक्युलर शब्द उसके आड़े आ जाता है। कहा जाता है कि सरकार का यह कदम संविधान की सेक्युलर अवधारणा के विरूद्ध है। यही एक शब्द है जो देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने से भी रोक रहा है। ऐसा शब्द जो पूरी सरकार की नीतियों के आड़े आ जाये, उसे तो संविधान से उड़ा ही देना चाहिए।

हमारे मोदी जी की फितरत है कि वे घर में घुस कर मारते हैं। ऐसा मैं नहीं कह रहा हूँ, मोदी जी ने स्वयं ही बालाकोट के समय कहा था। अब अगर हमारे मोदी जी अपनी पर आ गये तो यह सेक्युलर शब्द न सिर्फ भारत के संविधान से निकाला जायेगा अपितु विश्व के सभी शब्दकोशों से भी निकल जायेगा। सारे सेक्युलर लोगों को पीने को पानी भी नहीं मिलेगा। मोदी जी के खौफ से उन्हें विश्व के किसी भी देश में शरण तक भी नहीं नसीब होगी।

दूसरा बेकार का शब्द है सोशलिस्ट यानी समाजवादी। यह शब्द इतना दकियानूसी है कि हमें आगे बढ़ने ही नहीं देता है। देश में जो प्रगति नहीं हो पा रही है सिर्फ समाजवाद की बेड़ियों के कारण ही नहीं हो पा रही है। इस समाजवाद के कारण ही सरकार खर्च करती है तो गरीब लोगों के कल्याण के लिए, जैसे कि अमीरों को तो कल्याण की जरूरत ही नहीं है। इस समाजवाद की वजह से ही सरकार को गरीब लोगों की चिंता करनी पड़ती है, गरीब किसानों को सब्सिडी देनी पड़ती है।

हम टैक्स पेयर्स का गाढ़ी कमाई से कमाया पैसा समाजवाद के कारण ही गरीबों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर खर्च करना पड़ता है। और यह सब क्यों। क्योंकि संविधान में एक शब्द है सोशलिस्ट। इस शब्द को हटा डालो। सेक्युलर को हटाने के बाद अगला कदम यही होना चाहिये।

सरकार को चाहिए कि देश के संविधान से सोशलिस्ट शब्द को हटाकर कैपिटलिस्ट शब्द लगा दे। मतलब कि पूंजीवादी। यानी हमारा देश समाज (आदमी) से अधिक पूंजी का सम्मान करे। गरीब से अधिक अमीर को चाहे। देश में जो भी पॉलिसी बने अमीरों के पक्ष में बने। होता तो यह आज भी है पर तब संवैधानिक रूप से हो सकेगा। तब कॉरपोरेट टैक्स कम करने के लिए हमें अधिक नौकरियां पैदा होने का बहाना भी नहीं बनाना पड़ेगा। हम बेखौफ हो अमीरों के कर्ज माफ कर सकेंगे। तब अमीरों की मदद करने और गरीबों का कचूमर निकालने का अधिकार हमें हमारा संविधान ही दे देगा।

जब हमारी विकासोन्मुखी सरकार कोई भी कदम अपनी जनता के भले के लिए उठाना चाहती है तो यह जो संविधान है वह आड़े आ जाता है। सभी कहने लगते हैं कि यह तो संविधान विरोधी है। अब चाहे वो अनुच्छेद 370 समाप्त करना हो या एनआरसी हो या फिर इसी सप्ताह संसद में पास किया गया नागरिकता (संशोधन) कानून। सभी को संविधान विरोधी बताया जाता है। क्यों, इन्हीं दो शब्दों के कारण।

यह संविधान लागू हुए आगामी छब्बीस जनवरी को सत्तर साल हो जायेंगे। आजकल देश में पैदा हुए किसी भी व्यक्ति की औसत आयु सत्तर साल ही है, सन् पचास में तो चालीस साल भी नहीं थी। सन् पचास में पैदा हुआ कोई भी अब मरने की कगार पर होगा। इसलिए अब समय आ गया है कि इस संविधान को बदल दिया जाये। इस जवान और राष्ट्र भक्त सरकार को चाहिए कि इस बूढ़े संविधान को मार कर नया संविधान बनाये।

मोदी जी हैं तो मुमकिन है। वे और अमित शाह अपना कोई भी बिल राज्य सभा से भी साम-दाम, दंड-भेद, येन-केन-प्रकरेण, डरा धमका कर, कुछ भी कर पास करवा लेते हैं। मोदी-अमित जोड़ी जोड़-तोड़ से इस समाजवादी पंथनिरपेक्ष संविधान को बदल कर नया, नवीनतम पूंजीवादी, हिन्दू संविधान लागू कर सकती है। बार बार की चिल्लपों की बजाय देश एक ही झटके में हिन्दू राष्ट्र बन जाये तो सांसदो को संविधान की झूठी कसम न खानी पड़े।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
Freedom of silence
Constitution of India
Secularism
Socialist
Religion Politics
Hindutva
RSS
BJP
Narendra modi
Amit Shah
Article 370
hindu-muslim

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा


बाकी खबरें

  • mamta banerjee
    भाषा
    तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में चारों नगर निगमों में भारी जीत हासिल की
    15 Feb 2022
    तृणमूल कांग्रेस ने बिधाननगर, चंदरनगर और आसनसोल नगरनिगमों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है तथा सिलीगुड़ी में माकपा से सत्ता छीन ली।
  • hijab
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    हिजाब विवादः समाज सुधार बनाम सांप्रदायिकता
    15 Feb 2022
    ब्रिटेन में सिखों को पगड़ी पहनने की आज़ादी दी गई है और अब औरतें भी उसी तरह हिजाब पहनने की आज़ादी मांग रही हैं। फ्रांस में बुरके पर जो पाबंदी लगाई गई उसके बाद वहां महिलाएं (मुस्लिम) मुख्यधारा से गायब…
  • water shortage
    शिरीष खरे
    जलसंकट की ओर बढ़ते पंजाब में, पानी क्यों नहीं है चुनावी मुद्दा?
    15 Feb 2022
    इन दिनों पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रचार चल रहा है, वहीं, तीन करोड़ आबादी वाला पंजाब जल संकट में है, जिसे सुरक्षित और पीने योग्य पेयजल पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है। इसके बावजूद, पंजाब चुनाव में…
  • education budget
    डॉ. राजू पाण्डेय
    शिक्षा बजट पर खर्च की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? 
    15 Feb 2022
    एक ही सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे बजट एक श्रृंखला का हिस्सा होते हैं इनके माध्यम से उस सरकार के विजन और विकास की प्राथमिकताओं का ज्ञान होता है। किसी बजट को आइसोलेशन में देखना उचित नहीं है। 
  • milk
    न्यूज़क्लिक टीम
    राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ खिलवाड़ क्यों ?
    14 Feb 2022
    इस ख़ास पेशकश में परंजॉय गुहा ठाकुरता बात कर रहे हैं मनु कौशिक से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से सम्बंधित कानूनों में होने वाले बदलावों के बारे में
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License