NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
...लो जी, फिर नई तारीख़
जब तारीख़ ही देनी है तो एक बार में ही अगली सारी तारीख़ें दे दो। सरकार को अगली सारी की सारी तारीख़ें एकमुश्त ही दे देनी चाहिएं। उन्नीस के बाद फिर बाईस को, बाईस के बाद अट्ठाइस को।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
17 Jan 2021
cartoon

लो जी, कर लो बात। सरकार जी ने किसानों को फिर से तारीख़ दे दी। यह 9वीं मुलाकात भी पिछली मुलाकातों की तरह अगली तारीख़ में ही बदल गयी। एक तरफ तो सरकार किसानों को बातचीत के लिए बुलाती है और फिर अगली तारीख़ दे देती है। जब तारीख़ ही देनी है तो एक बार में ही अगली सारी तारीख़ें दे दो, आठ के बाद अगली तारीख़ पंद्रह को दी गई थी। और उसके बाद उन्नीस को। सरकार को अगली सारी की सारी तारीख़ें एकमुश्त ही दे देनी चाहिएं। उन्नीस के बाद फिर बाईस को, बाईस के बाद अट्ठाइस को। इसी तरह से आगे भी। सरकार क्यों इस तरह से बेकार में ही किसान नेताओं को तारीख़ देने के लिए ही बार बार बुला कर, तारीख़ पे तारीख़ दे रही है। 

आप कहेंगे, तारीख़ पे तारीख़ से, इन बार बार की मीटिंग से समय तो मंत्रियों का भी खराब होता है। अजी कहाँ, पीएमओ की कृपा से मंत्री लोग तो इन दिनों बिल्कुल ही खाली बैठे हैं। वैसे भी हमें पता ही है कि सरकार जी सारा काम स्वंय ही करते हैं। सरकार जी ने मंत्री लोग तो तनख्वाह और पर्क्स पाने के लिए ही रखे हुए हैं। इसके अलावा कभी कभार सरकार जी थोड़ा बहुत काम पकड़ा देते हैं। अब जैसे इस किसान आंदोलन के समय किसान सम्मेलन करने का काम पकड़ाया हुआ था। 

हाल फिलहाल मंत्री लोग खाली हैं। अब क्योंकि किसान सम्मेलनों से कोई बात नहीं बन रही तो है तो अब ये सम्मेलन भी स्थगित हैं और, कुछ और काम भी नहीं हो रहा है। आजकल तो कहीं चुनाव भी नहीं हैं कि मंत्री लोग उन्हीं में व्यस्त हों। इस ठंड में मंत्री तो खाली समय में हीटर के आगे बैठे गर्म कमरों में हाथ सेंक रहे हैं। किसानों से मीटिंग के लिए बस अपने बंद गर्म कमरे से उठ कर विज्ञान भवन के गर्म हॉल में आ जाते हैं। उनकी बला से ये मीटिंगें गर्मियों तक भी चलें। तब हीटर की बजाय एसी इस्तेमाल कर लेंगे। मरेंगे पिसेंगे तो किसान ही न! आज सर्द हवाओं में बाहर धरने पर बैठे हैं, तब लू में बैठ लेंगे।

अब सरकार किसानों को तारीख़ पे तारीख़ दिये जा रही है। लगता है कृषि मंत्री तोमर जी बात-चीत करने के लिए नहीं बल्कि यह निर्देश लेकर ही आते हैं कि अगली तारीख़ कौन सी दी जायेगी। उन्हें निर्देश होता है कि उन्हें बात सुलझानी नहीं, बात बनानी और बढ़ानी है। नई तारीख़ दे कर आनी है। तो कृषि मंत्री जी मीटिंग में आ कर किसानों को नई तारीख़ दे देते हैं। 

यह तारीख़ पे तारीख़ कोई नई बात नहीं है। अदालतों में तो यह सदियों से चली आ रही है। कभी इसलिए तारीख़ कि जज साहेब नहीं आये हैं तो कभी इसलिए कि वकील साहेब नदारद हैं। कभी इस लिए तारीख़ कि वादी नहीं आया तो कभी प्रतिवादी ही उपस्थित नहीं हुआ। सब लोग आ भी गये तो गवाह गायब। सब आ भी जायें तो बहस पूरी नहीं हुई होती और आगे की बहस अगली तारीख़ पर टाल दी जाती है। यानी अदालतों में तो तारीख़ पे तारीख़ पड़ने के सैकड़ों कारण हैं। 

अदालतें न्याय करती हैं और मीठा न्याय ही करती हैं क्योंकि सब्र का फल मीठा होता है। अदालतें तारीख़ पे तारीख़ इसलिए भी देती जाती हैं जिससे वे वादी और प्रतिवादी, दोनों के सब्र का इम्तिहान ले सकें। जिसका सब्र साथ न दे, या फिर जो दूसरे जहान में चला जाये, वह भारत की अदालतों द्वारा किये जा रहे इस मीठे न्याय से महरूम रह जाता है। अभी ऐसी व्यवस्था कहाँ कि यहाँ की अदालतें वहाँ भी इंसाफ़ दिला सकें। 

लगता तो यह है कि सरकार जी भी किसानों के सब्र का इम्तिहान ले रहे हैं। तारीख़ पे तारीख़ देते जा रहे हैं। सरकार जी चाहते तो यही हैं कि किसानों के ही सब्र का बांध टूटे और सरकार जी कुछ भी करने को स्वतंत्र हो जाएं। ये तीनों कानून जस के तस बने रहें। सरकार जी चाहते हैं कि उनकी ईगो बची रहे, बाकी सब कुछ जाये भाड़ में। उनके सब कुछ में देश भी शामिल है। 

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
Satire
Political satire
farmers protest
Farm Bills
Modi government

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 

आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है

रेलवे भर्ती मामला: बर्बर पुलिसया हमलों के ख़िलाफ़ देशभर में आंदोलनकारी छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने कोचिंग संचालकों पर कसा शिकंजा


बाकी खबरें

  • एपी
    क्रिस रॉक को थप्पड़ मारने को लेकर ऑस्कर ने विल स्मिथ पर 10 साल का प्रतिबंध लगाया
    09 Apr 2022
    स्मिथ की हरकत पर अकादमी के ‘बोर्ड ऑफ गवर्नर्स’ की बैठक के बाद यह फैसला किया गया है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें भविष्य में इन पुरस्कारों के लिए नामित किया जाएगा या नहीं।
  • kashmiri student
    नासीर ख़ुएहामी
    घोर ग़रीबी के चलते ज़मानत नहीं करा पाने के कारण कश्मीरी छात्र आगरा जेल में रहने के लिए मजबूर
    09 Apr 2022
    विश्वास की कमी और वित्तीय दबाव उन परिवारों के रास्ते में आड़े आ रहे हैं, जिनके बच्चों को क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तान के हाथों भारत की शिकस्त के बाद जेल में डाल दिया गया था, हालांकि उन्हें ज़मानत…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फरीदाबाद : आवास के मामले में सैकड़ों मजदूर परिवारों को हाईकोर्ट से मिली राहत
    09 Apr 2022
    पिछले कुछ सालों में दिल्ली एनसीआर और उसके पास के क्षेत्रों में सरकारों ने बड़ी तेज़ी से मज़दूर बस्तियों को उजाड़ना शुरू किया। ख़ासकर कोरोना काल में सरकार ने बड़े ही चुपचाप तरीके से अपने इस अभियान को चलाया…
  • गुरसिमरन बख्शी
    मांस खाने का राजनीतिकरण करना क्या संवैधानिक रूप से सही है?
    09 Apr 2022
    मांस पर प्रतिबंध लगाना, किसी भी किस्म के व्यापार करने के मामले में मौलिक अधिकार का उल्लंघन कहलाता है और किसी वैधानिक क़ानून के समर्थन के अभाव में, यह संवैधानिक जनादेश के मामले में कम प्रभावी हो जाता…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 1,150 नए मामले, 83 मरीज़ों की मौत
    09 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 98.76 फ़ीसदी यानी 4 करोड़ 25 लाख 1 हजार 196 मरीज़ों को ठीक किया जा चुका है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License