NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
नए-नए कानून बनाने वालों को भी नववर्ष की शुभकामनाएं!
जबसे वर्तमान सरकार आई है हम व्यंग्य लेखकों की बन आई है। पहले विषय ढूंढे नहीं मिलते थे, अब विषयों की कमी ही नहीं है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
05 Jan 2020
No CAA
फोटो साभार : livemint

वर्ष का पहला रविवार है। साप्ताहिक कॉलम लिखने वालों के लिए नववर्ष की शुभकामनाएं देने का अवसर। मेरी ओर से सारे मित्रों को, पाठकों को नववर्ष की शुभकामनाएं। कानून बनाने वालों को भी नववर्ष की शुभकामनाएं। अभी आये नूतन वर्ष में भी वे नित नये कानून बनायें और जनता को तंग करें।

logo tirchhi nazar_12.PNG

जबसे वर्तमान सरकार आई है हम व्यंग्य लेखकों की बन आई है। पहले विषय ढूंढे नहीं मिलते थे, अब विषयों की कमी ही नहीं है। पहले की सरकारें कुछ करती ही नहीं थीं। व्यंग्यकार ऋतुओं पर, नदी-नालों पर और पता नहीं जाने किन किन विषयों पर व्यंग्य लिखा करते थे। पर अब धीरे धीरे सरकार ऐसे काम करने लगी है कि हम व्यंग्य लिखने वालों के लिए विषयों का कोई टोटा ही नहीं है। उम्मीद है, विषयों के मामले में, नया साल पिछले साल की तरह से ही नहीं, अपितु उससे भी अधिक उर्वरक रहेगा।

व्यंग्य लिखने के लिए जैसा माहौल चाहिए, वर्तमान समय उसके पूरी तरह अनूकूल है। आप व्यंग्य लिखें और आपको गालियां मिलें, उससे अधिक मेहनताना हो ही नहीं सकता है। आजकल ऐसा ही माहौल है। लेखकों को गाली ही नहीं जेल भी मिल सकती है। गाली बंद कराना तो सरकार चाहेगी भी नहीं, आखिर उसे अपने समर्थकों का भी ध्यान रखना है। इस नये वर्ष में सरकार बस लेखकों को, कलाकारों को और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल भेजने से बचाने की नीयत दिखा दे, यही बहुत है।

केवल हम व्यंग्यकारों के लिए ही नहीं, पिछले वर्ष का उत्तरार्ध धरना प्रदर्शनों के लिए भी बहुत ही विशेष रहा। विशेष रूप से छात्रों के धरना प्रदर्शन के लिए। पहले तो छात्रों ने बढ़ती फीस के विरोध में आंदोलन किया और फिर सरकार ने सीएए और एनआरसी का विषय आंदोलनकारियों को दे दिया। पिछले वर्ष में सरकार के पास सिर्फ छह सात महीने थे, आंदोलनकारियों को विषय देने के लिए। मेरी सरकार से सविनय प्रार्थना है कि इस बार पूरा साल है सरकार के पास, वह इस तरह के विधेयक और कानून लाती रहे जिनसे आंदोलनकारियों को पूरे वर्ष आंदोलन चलाने का सुअवसर मिले। सरकार की अतीव कृपा होगी।

पिछले साल प्याज की कीमतें बेइंतेहा बढ़ीं। कुछ शहरों में तो कीमतें दो सौ रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचीं। प्याज की कीमतें तो, अपनी पार्टी के खर्चे पूरे करने के लिए, सारी सरकारें बढ़ाती हैं। पर बीते साल सभी सब्जियों की कीमतें भी बढ़ीं। भाजपा सरकार से गुजारिश है कि वह अपनी पार्टी के खर्चे नये वर्ष में कुछ कुछ कम कर दे जिससे हमें नये साल में भी सारी सब्जियों की बढ़ी कीमत न देनी पड़े। अगर ऐसा हो पाये तो नववर्ष में हमारी कठिनाई सिर्फ प्याज़ की बढ़ी कीमत देने तक ही सीमित रहेगी, बाकी सब्जियों की कीमत जेब पर भारी नहीं पड़ेगी। 

पिछला वर्ष प्रधानमंत्री जी द्वारा अक्षय कुमार को दिये गए साक्षात्कार के लिए भी याद किया जायेगा। और वह साक्षात्कार याद रखा जायेगा अक्षय कुमार द्वारा पत्रकार की भूमिका को बडी़ अच्छी तरह अंजाम देने के लिए। जो स्क्रिप्ट उन्हें दी गई थी, उन्होंने उसे बखूबी निभाया। इसके अलावा उनके द्वारा प्रधानमंत्री जी से पूछा गया प्रश्न कि आप आम कैसे खाते हैं भी याद किया जायेगा।

यह प्रश्न बाबा रामदेव से पूछा जाता तो अधिक अच्छा रहता। प्रधानमंत्री जी तो आम भी, बाकी सभी खाद्य पदार्थों की तरह से ही, मुख से ही खाते हैं। हो सकता है बाबा रामदेव मुख के अतिरिक्त नाक से या कहीं और से भी खा सकते हों। कुल मिलाकर यह साक्षात्कार मनोरंजक रहा। आशा है नव वर्ष में भी हम प्रधानमंत्री जी के मनोरंजक साक्षात्कार देख सकेंगे।

वैसे तो गतवर्ष हुई बहुत सारी बातें ऐसी हैं, जो व्यंग्य का विषय बनी। पर उनमें प्रधानमंत्री जी द्वारा बार बार झूठ बोलना खास रहा। विशेष बात यह है कि प्रधानमंत्री जी को शायद स्वयं भी यह पता नहीं होता है कि वे झूठ बोल रहे हैं। वे बस लय में आकर झूठ पर झूठ बोलते जाते हैं। वैसे तो झूठ पकडऩे वाली मशीनें पहले से ही मौजूद हैं पर उनके उपयोग के लिए अदालत से आदेश लेना पड़ता है। अब यदि नये वर्ष में कोई वैज्ञानिक झूठ पकडऩे की ऐसी मशीन का आविष्कार कर सके जो माइक पर लगा दी जाये और झूठ बोलते ही बीप करने लगे तो मोदी जी को झूठ बोलने की लत से छुटकारा मिल सकेगा और देश का बहुत ही भला होगा। 

बातें तो बहुत सी हैं। बातों का पिटारा तो कभी समाप्त हो ही नहीं सकता है। इस विश्वास के साथ कि वर्तमान सरकार व्यंग्य लिखने के लिए विषयों की कमी कभी भी होने नहीं देगी और आप हर रविवार 'तिरछी नजर' कॉलम पढ़ते रहेंगे, आप सबको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। सरकार इसी तरह से नये वर्ष में भी नित नए कानून बना सबको परेशान करती रहे और हम सब परेशान हो कर भी खुश रहें, यही कामना है। भले ही चाहे कुछ भी होता रहे, नववर्ष आप सबके जीवन में ढेरों खुशियां लेकर आये।

(लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

tirchi nazar
CAA
Satire
Political satire
CAA Protest
NRC
NPR
Inflation
Rising inflation
Narendra modi
BJP
modi sarkar

Related Stories

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

उर्दू पत्रकारिता : 200 सालों का सफ़र और चुनौतियां

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला


बाकी खबरें

  • omicron
    भाषा
    दिल्ली में कोविड-19 की तीसरी लहर आ गई है : स्वास्थ्य मंत्री
    05 Jan 2022
    ‘‘ दिल्ली में 10 हजार के करीब नए मामले आ सकते हैं और संक्रमण दर 10 प्रतिशत पर पहुंच सकती है.... शहर में तीसरी लहर शुरू हो चुकी है।’’
  • mob lynching
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: बेसराजारा कांड के बहाने मीडिया ने साधा आदिवासी समुदाय के ‘खुंटकट्टी व्यवस्था’ पर निशाना
    05 Jan 2022
    निस्संदेह यह घटना हर लिहाज से अमानवीय और निंदनीय है, जिसके दोषियों को सज़ा दी जानी चाहिए। लेकिन इस प्रकरण में आदिवासियों के अपने परम्परागत ‘स्वशासन व्यवस्था’ को खलनायक बनाकर घसीटा जाना कहीं से भी…
  • TMC
    राज कुमार
    गोवा चुनावः क्या तृणमूल के लिये धर्मनिरपेक्षता मात्र एक दिखावा है?
    05 Jan 2022
    ममता बनर्जी धार्मिक उन्माद के खिलाफ भाजपा और नरेंद्र मोदी को घेरती रही हैं। लेकिन गोवा में महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी के साथ गठबंधन करती हैं। जिससे उनकी धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर सवाल खड़े हो…
  • सोनिया यादव
    यूपी: चुनावी समर में प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री का महिला सुरक्षा का दावा कितना सही?
    05 Jan 2022
    सीएम योगी के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी भी आए दिन अपनी रैलियों में महिला सुरक्षा के कसीदे पढ़ते नज़र आ रहे हैं। हालांकि ज़मीनी हक़ीक़त की बात करें तो आज भी महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के मामले में उत्तर…
  • मुंबईः दो साल से वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मी ने ज़हर खाकर दी जान
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुंबईः दो साल से वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मी ने ज़हर खाकर दी जान
    05 Jan 2022
    “बीएमसी के अधिकारियों ने उन्हें परेशान किया, उनके साथ बुरा व्यवहार किया। वेतन मांगने पर भी वे उस पर चिल्लाते थे।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License