NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
क्यों झारखंड का आदिवासी समाज राम मंदिर का विरोध कर रहा है ?
राम जंगल गए ठीक है, वे आदिवासी भाई-बहनों के साथ रहे ठीक है, लेकिन इससे यह कैसे स्थापित हो जाता है कि हम आदिवासी अपना धर्म बदल लिए हैं ? कई युवा आदिवासियों के पोस्टों में आदिवासियों को वानर शब्द से परिभाषित करने की भी व्यापक निंदा करते हुए कहा जा रहा है कि हम आदिकाल से ही आदिवासी थे और आज भी आदिवासी हैं, हम वानर नहीं हैं।  
अनिल अंशुमन
04 Aug 2020
झारखंड
फोटो साभार : सोशल मीडिया

राम मंदिर निर्माण में झारखण्ड के आदिवासियों के पारंपरिक अराध्य स्थल ‘सरना' से मिटटी ले जाने और उसका विरोध कर रहे आदिवासी संगठनों का विरोध प्रकरण अब प्रदेश के राजनीतिक पटल पर भी स्वरुप लेना अपना शुरू कर दिया है।  

3 अगस्त को राजधानी रांची स्थित मोरहाबादी में प्रदेश आदिवासी समाज के विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की हुई बैठक ने 2 अगस्त को भाजपा नेता व राज्य के पूर्व प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी द्वारा आदिवासियों के सरना के सनातन से जुड़े होने तथा आदिवासियों का राम से गहरा नाता बताये जाने के बयान का एकस्वर से ज़ोरदार विरोध किया है।  

बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ शिक्षाविद और आदिवासी अधिकारों के सामाजिक नेता डॉक्टर करमा उराँव ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि – आज आदिवासी जब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहें हैं और विहिप के साथ धर्मयुद्ध में हैं . ऐसे में बाबूलाल मरांडी , जिनका अभी तक तो हमलोग काफी सम्मान करते रहें हैं , पर उन्होंने स्वीकार किया है कि वे विहिप के संगठन मंत्री रहें हैं,ऐसे में हम उनसे और क्या उम्मीद कर सकते हैं ? आदिवासियों और सरना को सनातनी घोषित कर दिखला दिया है कि वे किस तरह से आरएसएस की ही भाषा बोल रहें हैं।  

वैसे आदिवासी संगठनों की ओर से करमा उरावं जी का विरोध कथन उस समय आया है जब सरना की मिटटी मंदिर निर्माण हेतु ले जाने के विरोध प्रकरण में पूर्व भाजपा विधायिका व पार्टी की प्रदेश महिला मोर्चे की नेता व राजधानी की मेयर समेत कई अन्य भाजपा आदिवासी नेताओं के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की जा चुकी है . साथ ही उनके खिलाफ मुकदमे भी किये गए हैं।              

आदिवासी समाज के बढ़ते चौतरफा विरोध से हो रही सुरक्षात्मक स्थिति को आक्रामक बनाने के लिए ही प्रदेश भाजपा ने सीधे अपने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी जी को मैदान में उतारा है। जिनकी ओर से मीडिया में प्रमुखता से साक्षात्कार छपवाकर कहलवाया जा रहा है कि आज आदिवासी समाज भी मानता है कि राम से उसके गहरे सम्बन्ध हैं, तो समाज में ग़लतफ़हमी फैलाकर राजनीती करने की कोशिश की जा रही है। कोरोना काल के ठीक होते ही मैं खुद अयोध्या जाउंगा। बाबरी मस्जिद ध्वंस के समय भी मैं वहाँ झारखण्ड के आदिवासियों की टीम लेकर गया था और वहाँ के आंदोलनों में शामिल हुआ था।  

दूसरी ओरपार्टी से जुड़े कतिपय भाजपा आदिवासी पाहनों के अयोध्या जाने सम्बन्धी उनके बयानों का ऐसा व्यापक प्रचार कराया जा रहा है मानो व्यापक आदिवासी समाज मंदिर निर्माण का प्रबल हिमायती है।  साथ ही यह भी स्थापित कराया जा रहा है कि सरना की मिटटी मंदिर निर्माण हेतु ले जाना , दरअसल आदिवासियों का ही सम्मान है।              

बाबूलाल मरांडी जी के अलावे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और कई वरिष्ठ भाजपा सासदों,नेताओं के साथ साथ कई स्थानीय भाजपा आदिवासी नेताओं के श्रीमुख से यह तर्क भी खूब प्रसारित कराया जा रहा है कि सरना आदिकाल से ही सनातन से जुड़ा रहा है। जिसका प्रमाण यह है कि जब रामचन्द्र जी वनवास गए थे तो वनवासियों ( वानरों ) के सहयोग से ही उन्होंने रावण ( असुर ) को परस्त किया था।   इसलिए कोई कितना भी प्रयत्न कर ले देश के वनबंधुओं को राम से अलग नहीं किया जा सकता।

प्रतिउत्तर में आदिवासी समाज के बहुसंख्य बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्त्ताओं ने भी सोशल मीडिया में लगातार मोर्चा खोल रखा है।  जिनमें बाबूलाल मरांडी व रघुवर दास समेत भाजपा के तमाम आदिवासी प्रवक्ताओं को आदिवासी अस्मिता व परम्परा का विरोधी करार दिया जा रहा है। उन सबों से यह भी पूछा जा रहा है कि राम जंगल गए ठीक है, वे आदिवासी भाई-बहनों के साथ रहे ठीक है, लेकिन इससे यह कैसे स्थापित हो जाता है कि हम आदिवासी अपना धर्म बदल लिए हैं ? कई युवा आदिवासियों के पोस्टों में आदिवासियों को वानर शब्द से परिभाषित करने की भी व्यापक निंदा करते हुए कहा जा रहा है कि हम आदिकाल से ही आदिवासी थे और आज भी आदिवासी हैं , हम वानर नहीं हैं।  

असुर आदिवासी सामाजिक कार्यकर्त्ता व लेखिका सुषमा असुर ने इससे पहले भी कई मौकों पर दुर्गा पूजा के नाम पर असुरों की ह्त्या उत्सव के नस्ली उत्पीड़न बंद करने की मांग लगातार उठाती रहीं हैं। वे रावण पूजन के लिए भी अपील करती रहीं हैं।  

सनद हो कि झारखण्ड के दिसोम गुरु कहलाने वाले वरिष्ठ आदिवासी नेता व झारखण्ड प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे तथा वर्तमान में राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन जी आज तक रावण- दहन उत्सव को आदिवासी विरोधी करार देकर कभी शामिल नहीं होते हैं।  

आदिवासी भाषा की वरिष्ठ शोधकर्त्ता इंदिरा बिरुवा का साफ़ कहना है कि संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर भारत के सविधान तक में यही मान्यता स्थापित है कि आदिवासियों की अपना स्वतंत्र अस्मिता परम्परा रही है।  ऐसे में इन्हें सनातनी धार्मिक धारा का अंग बताया जाना संयुक्त राष्ट्र संघ व संविधान का उल्लंघन के साथ साथ सरासर अपराध है। जो यकीनन इनके बचे खुचे अस्तित्व को ही नष्ट करने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है।  जिसे आज का आदिवासी समाज कत्तई बर्दास्त नहीं करेगा।                                                

प्रदेश के कोल्हान ( हो आदिवासी क्षेत्र ) और मुंडा व उराँव बाहुल्य इलाकों के अलावे कई इलाकों में लगातार विरोध कार्यक्रमों की सूचनाएं आ रहीं हैं। 2 अगस्त को बोकारो में आदिवासी संगठनों ने विरोध कार्यक्रम करते हुए ऐलान किया कि वे किसी भी हालत में अपने जाहेर थान और सरना की मिटटी नहीं ले जाने देंगे।  

दूसरी ओर उक्त प्रकरण को लेकर आदिवासी अधिकारों के लिए सतत सक्रिय रहनेवाले वाल्टर कंडूलना जी का आरोप है कि भाजपा बाबूलाल जी के नेतृत्व में अपने आदिवासी नेताओं के जरिये सरन- सनातन का बहस उठवाकर आदिवासियों का ध्यान भटका रही है।  क्योंकि जब मोदी शासन ने कोयला व अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के खनिज-खनन को निजी कंपनियों के हाथों सौंपने की घोषणा की तो इसके विरोध में झारखण्ड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फैसले को चुनौती दे रखी है। जिस पर बाबूलाल जी ने ही तीखी प्रतिक्रिया के साथ चेतावनी दी थी कि झारखण्ड सरकार निजी कंपनियों के कोयला खनन में  अड़ंगा न डाले।  

साबित करता है कि आदिवासियों के बचे खुचे जंगल-ज़मीन व खनिज को जबरन हथियाने और उसके संभावित आदिवासी विरोध को ही भटकाने के लिए अभी का सरना-सनातन विवाद प्रपंच जोर-शोर से वायरल किया जा रहा है।      

कई झारखंडी जानकारों का भी मानना है कि वाल्टर कन्डूलना जी की आशंका बेबुनियाद नहीं है।  क्योंकि देखा तो यही जा रहा है मोदी शासन लोगों की धार्मिक भावनाओं की कमजोरियों के दोहन- हथियार से ही सबकुछ का ताबड़तोड़ निजीकरण करने में लगी हुई है . 

Jharkhand
aadiwasi
tribal society
Ram Mandir
TRIBAL PROTEST
Religious and Social Organizations

Related Stories

दक्षिणी गुजरात में सिंचाई परियोजना के लिए आदिवासियों का विस्थापन

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

‘मैं कोई मूक दर्शक नहीं हूँ’, फ़ादर स्टैन स्वामी लिखित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

झारखंड: केंद्र सरकार की मज़दूर-विरोधी नीतियों और निजीकरण के ख़िलाफ़ मज़दूर-कर्मचारी सड़कों पर उतरे!

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी

झारखंड: राज्य के युवा मांग रहे स्थानीय नीति और रोज़गार, सियासी दलों को वोट बैंक की दरकार

झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध

कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • russia attack on ukrain
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूक्रेन पर हमला, रूस के बड़े गेम प्लान का हिस्सा, बढ़ाएगा तनाव
    25 Feb 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बात की न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से। यूक्रेन पर रूस हमला, जो सरासर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है, के पीछे पुतिन द्वारा…
  • News Network
    न्यूज़क्लिक टीम
    आख़िर क्यों हुआ 4PM News Network पर अटैक? बता रहे हैं संजय शर्मा
    25 Feb 2022
    4PM News नामक न्यूज़ पोर्टल को हाल ही में कथित तौर पर हैक कर लिया गया। UP की राजधानी लखनऊ का 4PM News योगी सरकार की नीतियों की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। 4PM News का आरोप है कि योगी…
  • Ashok Gehlot
    सोनिया यादव
    राजस्थान : कृषि बजट में योजनाओं का अंबार, लेकिन क़र्ज़माफ़ी न होने से किसान निराश
    25 Feb 2022
    राज्य के बजटीय इतिहास में पहली बार कृषि बजट पेश कर रही गहलोत सरकार जहां इसे किसानों के हित में बता रही है वहीं विपक्ष और किसान नेता इसे खोखला और किसानों के साथ धोखा क़रार दे रहे हैं।
  • ADR Report
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव छठा चरणः 27% दाग़ी, 38% उम्मीदवार करोड़पति
    25 Feb 2022
    एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार छठे चरण में चुनाव लड़ने वाले 27% (182) उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं वहीं 23% (151) उम्मीदवारों पर गंभीर प्रकृति के आपराधिक मामले हैं। इस चरण में 253 (38%) प्रत्याशी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: मोदी सभा में खाली कुर्सियां, योगी पर अखिलेश का तंज़!
    25 Feb 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात करेंगे आवारा पशुओं के बढ़ते हुए मुद्दे की, जो यूपी चुनाव में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकता है। उसके साथ ही अखिलेश यादव द्वारा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License