NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
नई पुस्तक में दावाः ट्रम्प ने जानबूझकर COVID-19 के ख़तरों को नज़रअंदाज़ किया
इस पुस्तक से पता चलता है कि ट्रम्प को जनवरी में ही नोवेल कोरोनावायरस संक्रमण के घातक स्वरूप के बारे में जानकारी थी लेकिन मार्च महीने तक इसे जानबूझकर सार्वजनिक रूप से नज़रअंदाज़ किया गया था।
पीपल्स डिस्पैच
11 Sep 2020
 ट्रम्प

पत्रकार बॉब वुडवर्ड द्वारा लिखी गई एक नई पुस्तक के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा COVID-19 को 11 मार्च को वैश्विक महामारी घोषित करने से काफी पहले इस नोवेल कोरोनावायरस संक्रमण की घातक स्वरूप के बारे में जानकारी थी। वुडवर्ड के साथ ट्रम्प के साक्षात्कार की ऑडियो रिकॉर्डिंग जो बुधवार 9 सितंबर को वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित हुई थी जिससे पता चलता है कि उन्होंने जानबूझकर सार्वजनिक रूप से इस बीमारी की गंभीरता को नज़रअंदाज़ कर दिया था।

15 सितंबर को विमोचन होने वाली रेज (Rage) शीर्षक की पुस्तक के अनुसार, ट्रम्प को 28 जनवरी को अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से इस बीमारी के घातक स्वरूप के बारे में जानकारी मिली। 7 फरवरी को वुडवर्ड के साथ अपनी टेलीफोनिक बातचीत में ट्रम्प ने स्वीकार किया कि COVID -19 "आपके ख़तरनाक फ्लू से अधिक घातक था।"

इस पुस्तक में दावा किया गया है कि फरवरी महीने में अपनी खुफिया एजेंसियों से बार-बार चेतावनी मिलने के बावजूद ट्रंप ने अफरा तफरी से बचने के लिए सार्वजनिक रूप से इस ख़तरे को नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की।

27 फरवरी को उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि ये वायरस एक दिन ग़ायब होने वाला है। जब संक्रमण और मौतों की संख्या बढ़ रही थी तब ट्रम्प ने राज्यों को अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने और COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन को हटाने के लिए मजबूर करने की कोशिश की थी।

व्यापक रूप से यह माना जाता है कि स्थिति की गंभीरता को जानबूझकर नज़रअंदाज़ करने से अमेरिका में इसके प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक उपायों के कार्यान्वयन में देरी हुई। समय पर इसके प्रकोप को रोकने में विफलता ने अमेरिका को दुनिया में आज सबसे अधिक प्रभावित देश बना दिया, जहां 190,000 से अधिक मौतें हुईं और 6.3 मिलियन से अधिक लोग संक्रमित हैं। प्रभावी क़दम उठाने में देरी ने भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था को उच्च बेरोज़गारी दर और इसके सकल घरेलू उत्पाद में अनुमानित 32% वार्षिक कमी के साथ अभूतपूर्व तरीक़े से प्रभावित किया।

नवंबर महीने में होने वाले चुनावों में राष्ट्रपति पद के लिए ट्रम्प के डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जोए बिडेन ने एक ट्वीट में कहा था कि ट्रम्प ने समय पर काम किया होता तो देश में हज़ारों लोगों की जान बच जाती।

इस बीच, ट्रम्प ने COVID-19 के प्रकोप और इसके चलते स्वास्थ्य और आर्थिक संकट के लिए सारा दोष चीन और डब्ल्यूएचओ पर डालने की कोशिश की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि चीन ने जानबूझकर इस बीमारी की गंभीरता को छिपाया है जिससे दूसरे देशों को निपटने में मुश्किल आई है।

#Trumpknew
Bob Woodward
China
COVID-19 in the US
Donald Trump
Rage
Washington Post
WHO

Related Stories

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

क्या दुनिया डॉलर की ग़ुलाम है?

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

रूस की नए बाज़ारों की तलाश, भारत और चीन को दे सकती  है सबसे अधिक लाभ

WHO की कोविड-19 मृत्यु दर पर भारत की आपत्तियां, कितनी तार्किक हैं? 

चीन और लैटिन अमेरिका के गहरे होते संबंधों पर बनी है अमेरिका की नज़र

बुका हमले के बावजूद रशिया-यूक्रेन के बीच समझौते जारी

काबुल में आगे बढ़ने को लेकर चीन की कूटनीति

जम्मू-कश्मीर : रणनीतिक ज़ोजिला टनल के 2024 तक रक्षा मंत्रालय के इस्तेमाल के लिए तैयार होने की संभावना


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,568 नए मामले, 97 मरीज़ों की मौत 
    15 Mar 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.08 फ़ीसदी यानी 33 हज़ार 917 हो गयी है।
  • tree
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु के चाय बागान श्रमिकों को अच्छी चाय का एक प्याला भी मयस्सर नहीं
    15 Mar 2022
    मामूली वेतन, वन्यजीवों के हमलों, ख़राब स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य कारणों ने बड़ी संख्या में चाय बागान श्रमिकों को काम छोड़ने और मैदानी इलाक़ों में पलायन करने पर मजबूर कर दिया है।
  • नतालिया मार्क्वेस
    अमेरिका में रूस विरोधी उन्माद: किसका हित सध रहा है?
    15 Mar 2022
    संयुक्त राज्य अमेरिका का अपनी कार्रवाइयों के सिलसिले में सहमति बनाने को लेकर युद्ध उन्माद की आड़ में चालू पूर्वाग्रहों को बढ़ाने का एक लंबा इतिहास रहा है।
  • डॉ. राजू पाण्डेय
    डिजिटल फाइनेंस: कैशलेस होती दुनिया में बढ़ते फ़्रॉड, मुश्किलें भी आसानी भी..
    15 Mar 2022
    हर साल 15 मार्च के दिन विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष कंज़्यूमर इंटरनेशनल के 100 देशों में फैले हुए 200 कंज़्यूमर समूहों ने "फेयर डिजिटल फाइनेंस" को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस की थीम…
  •  Scheme Workers
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्यों आंदोलन की राह पर हैं स्कीम वर्कर्स?
    14 Mar 2022
    हज़ारों की संख्या में स्कीम वर्कर्स 15 मार्च यानि कल संसद मार्च करेंगी। आखिर क्यों हैं वे आंदोलनरत ? जानने के लिए न्यूज़क्लिक ने बात की AR Sindhu से।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License