NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उचित मानदेय के लिए मिड डे मील वर्कर्स का देशव्यापी प्रदर्शन
आपको बता दें कि मिड डे मील वर्कर्स जो सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाती हैं उन्हें केंद्र सरकार 2009 से केवल 1000 रुपये मानदेय देती है। वह भी साल में 10 महीने।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Feb 2019
जंतर-मंतर पर मिड डे मील वर्कर्स का प्रदर्शन

पूर्ण बजट से भी ज़्यादा भव्यता के साथ 2019-20 का अंतरिम बजट भी मोदी सरकार ने पेश कर दिया लेकिन मिड डे मील वर्कर्स को फिर भी कुछ नहीं मिला। इसी से नाराज़ होकर मिड डे मील वर्कर्स ने केंद्र सरकार के खिलाफ शुक्रवार को देश भर में विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और सभा की गई।

आपको बता दें कि मिड डे मील वर्कर्स जो सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाती हैं उन्हें केंद्र सरकार 2009 से केवल 1000 रुपये मानदेय देती है। वह भी साल में 10 महीने। छुट्टी के महीनों का मानदेय भी काट लिया जाता है। इन कर्मचारियों को उम्मीद थी कि भाजपा सरकार अपने अंतिम बजट में उनके मानदेय में कुछ बढ़ोतरी करेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी के विरोध में केंद्रीय श्रमिक संगठनों सीटू, एटक, ऐक्टू, एआईयूटीयूसी आदि से जुड़े मिड डे मील फेडरेशनों के आह्वान पर देश में विरोध कार्यक्रम किए गए।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि मिड डे मील वर्कर्स लंबे समय से न्यूनतम वेतन, मानदेय में बढ़ोतरी, सामाजिक सुरक्षा गारंटी व मिड डे मील योजना को मजबूत बनाने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं लेकिन भाजपा सरकार मिड डे मील वर्कर्स को लगातार नज़रअंदाज़ करती रही है।

वक्ताओं ने कहा कि बजट के नाम पर सरकार ने स्कीम वर्कर्स के साथ मजाक किया है। इस बार के बजट में उनके लिए कोई जगह नहीं है। जबकि देश भर में रसोईया कर्मियों का आंदोलन चल रहा है कि उनको सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिले तथा 18 हज़ार न्यूनतम वेतन मिले। पर मोदी सरकार ने इस बजट में केवल खोखले जुमलों की बरसात की है।

ये सरकार मिड डे मील वर्कर्स के तहत 26 लाख रसोइयां जो 12 लाख स्कूलों में करोड़ों स्कूली बच्चों को दिन का खाना बनाकर उपलब्ध कराते हैं उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज करती रही है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नवंबर 2018 के केंद्रीय श्रमिक संगठनों से जुड़े मिड डे मील कर्मियों के यूनियनों के प्रदर्शन के दौरान आश्वासन दिया था कि इन कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाना सरकार के एजेंडे पर है लेकिन सरकार ने अपने आखिरी बजट मे भी उनकी मांगों को नजरअंदाज करने का ही काम किया है । यहाँ तक पूर्व मे भी सिंतबर, 2018 मे प्रधानमंत्री द्वारा घोषणाओं मे भी जहाँ आशा-आंगनवाड़ी के मानदेय को बहुत थोड़ा सा ही बढ़ाया गया है पर वहाँ पर भी मिड डे मील वर्कर्स को नजरअंदाज किया गया था।
मिड डे मील वर्कर्स के तहत 98% रसोइया कर्मचारी महिलाएं हैं और अधिकतर समाज के पिछड़े समाज से आती हैं इसलिए उनकी मांगों पर कार्रवाई सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
इस मौके पर प्रदर्शनकारियों की ओर से एक मांग पत्र भी जारी किया गया जिसके अनुसार कई मांगें हैं :-

1. मिड डे मील वर्कर्स का वेतन तुरंत बढ़ाया जाए।

2.सभी मिड डे मील वर्कर्स को चौथे दर्जे का सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।

3.      नियमित किए जाने तक सभी वर्कर्स को 12 के 12 महीने न्यूनतम वेतन 18000 रुपये दिया जाए।

4.      45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशोंः ग्रेच्युएटी, पैंशन, प्रोविडेंट फंड, मेडिकल सुविधा सहित तमाम सामाजिक सुरक्षा लाभ, सभी मिड डे मील वर्कर्स को प्रदान किए जाएं।

5.      वर्तमान में कार्यरत किसी भी मिड डे मील वर्कर को काम से न हटाया जाए, हटाई गई वर्कर्स को काम पर बहाल किया जाए व प्रत्येक स्कूल में कम से कम दो वर्करों की नियुक्ति हो।

6.      12वीं कक्षा तक के बच्चों को खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में लाया जाए व इसी अनुसार मिड डे मील योजना का सभी स्कूलो में विस्तार करो।

7.      सभी स्कूलो में किचन शैड, स्टोर, पीने के साफ पानी आदि जरूरी संसाधन उपलब्ध करवाए जाएं। मिड डे मील योजना में कुकिंग गैस की व्यवस्था हो।

8.      सभी मिड डे मील वर्कर्स को सुरक्षा व स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाए। मिड डे मील वर्कर्स को जनश्री बीमा योजना के दायरे में लाया जाए।

9.      वर्कर्स को मृत्यु होने की स्थिति में 5 लाख व घायल होने की अवस्था में 1 लाख रूपये प्रदान किए जाएं।

10.    मिड डे मील वर्करों को वेतन सहित 180 दिन का प्रसूती लाभ दिया जाए।

11.    सभी वर्कर्स को नियुक्ति पत्र व पहचान पत्र जारी किए जाएं। योजना के लिए देशभर में समान सेवा शर्तें तय की जाएं।

12.    मिड डे मील योजना के किसी भी रूप में निजीकरण पर रोक लगे। इस्कान, नंदी फांडेशन आदि गैर सरकारी संगठनों व वेदांता जैसे कॉरपोरेट्स को योजना को देने पर तुरंत रोक लगे।

13.    स्कूलों में बच्चों को ताजा बना भोजन उपलब्ध करवाया जाए। योजना में केन्द्रीय रसोईघर की व्यवस्था पर रोक लगे। राशन व भोजन पकाने के लिए जरूरी आर्थिक संसाधन प्रदान किए जाएं।

14.    मिड डे मील वर्कर्स की समस्याओं के निपटारे के लिए आईसीडीएस की तर्ज पर राज्य व जिला स्तर पर कष्ट निवारण समितियों का गठन किया जाए।

15.    मिड डे मील वर्कर्स को वर्ष में दो ड्रेस व धुलाई भत्ता प्रदान किया जाए।

16.    मिड डे मील योजना के लिए पर्याप्त बजट का आवंटन किया जाए।

mid day meal workers
workers protest
scheme workers
minimum wage
Modi government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

आख़िर फ़ायदे में चल रही कंपनियां भी क्यों बेचना चाहती है सरकार?

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

'KG से लेकर PG तक फ़्री पढ़ाई' : विद्यार्थियों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं की सभा में उठी मांग

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?


बाकी खबरें

  • Asha Usha workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्य प्रदेश : आशा ऊषा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने किया यूनियन नेताओं को गिरफ़्तार
    07 Mar 2022
    मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने शिवराज सरकार की बढ़ती 'तानाशाही' की निंदा करते हुए कहा, "शिवराज सरकार मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनितिक दल के कार्यालय में ही पुलिस को बिना आदेश ही नहीं घुसा रही है,…
  • Syrian refugees
    सोनाली कोल्हटकर
    क्यों हम सभी शरणार्थियों को यूक्रेनी शरणार्थियों की तरह नहीं मानते?
    07 Mar 2022
    अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, सीरिया, सोमालिया, यमन और दूसरी जगह के शरणार्थियों के साथ यूरोप में नस्लीय भेदभाव और दुर्व्यवहार किया जाता रहा है। यूक्रेन का शरणार्थी संकट पश्चिम का दोहरा रवैया प्रदर्शित कर रहा…
  • air pollution
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हवा में ज़हर घोल रहे लखनऊ के दस हॉटस्पॉट, रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तैयार किया एक्शन प्लान
    07 Mar 2022
    वायु गुणवत्ता सूचकांक की बात करें तो उत्तर प्रदेश के ज्यादातर शहर अब भी प्रदूषण के मामले में शीर्ष स्थान पर हैं। इन शहरों में लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद जैसे बड़े शहर प्रमुख हैं।
  • Chaudhary Charan Singh University
    महेश कुमार
    मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भर्ती विज्ञापन में आरक्षण का नहीं कोई ज़िक्र, राज्यपाल ने किया जवाब तलब
    07 Mar 2022
    मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस कोर्स के लिए सहायक शिक्षक और सहआचार्य के 72 पदों पर भर्ती के लिए एक विज्ञापन निकाला था। लेकिन विज्ञापित की गई इन भर्तियों में दलितों, पिछड़ों और…
  • shimla
    टिकेंदर सिंह पंवार
    गैर-स्टार्टर स्मार्ट सिटी में शहरों में शिमला कोई अपवाद नहीं है
    07 Mar 2022
    स्मार्ट सिटी परियोजनाएं एक बड़ी विफलता हैं, और यहां तक कि अब सरकार भी इसे महसूस करने लगी है। इसीलिए कभी खूब जोर-शोर से शुरू की गई इस योजना का नए केंद्रीय बजट में शायद ही कोई उल्लेख किया गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License