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उन्नाव बलात्कार मामला : पीड़िता की हालत स्थिर; न्यायालय के मीडिया को कड़े निर्देश
पीड़िता को इलाज के लिये लखनऊ स्थित केजी मेडिकल कालेज से दिल्ली के एम्स में स्थानांतरित कराने का निर्णय शुक्रवार को उसके परिवार पर छोड़ दिया गया है। इसके अलावा न्यायालय ने कड़ा और संवेदनशील रुख अपनाते हुए कहा है कि कोई भी मीडिया हाउस प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष तौर पर अथवा किसी भी तरीके से उन्नाव बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर नहीं करेगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Aug 2019
Unnao rape case

शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को इस मामले में कड़ा रूख अपनाते हुये बलात्कार की घटना सहित इससे संबंधित सारे पांच मामले उन्नाव की अदालत से बाहर दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित कर दिये थे। न्यायालय ने दिल्ली की अदालत को इन मुकदमों में सुनवाई शुरू होने की तारीख से 45 दिन के भीतर इसे पूरा करने का भी आदेश दिया है।

इसके अलावा, न्यायालय ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो को भी रायबरेली के निकट ट्रक-कार की टक्कर की घटना की जांच एक सप्ताह के भीतर पूरा करने का निदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि असाधारण परिस्थितियों में ही जांच ब्यूरो इस मामले की जांच की अवधि सात दिन और बढ़ाने का अनुरोध कर सकता है।

पिछले रविवार को ट्रक और कार की इस भिड़ंत में पीड़ित के दो परिजनों की मृत्यु हो गयी थी और वह तथा उसका वकील बुरी तरह जख्मी हो गये थे।

इसके अलावा न्यायालय ने बलात्कार पीड़िता की कार को ट्रक की टक्कर से संबंधित मामला रायबरेली से दिल्ली स्थानांतरित करने के बारे में अपना आदेश विलंबित रखा क्योंकि इसकी जांच अभी पूरी नहीं हुई है।

पीड़िता को इलाज के लिये लखनऊ स्थित केजी मेडिकल कालेज से दिल्ली के एम्स में स्थानांतरित कराने का निर्णय शुक्रवार को उसके परिवार पर छोड़ दिया गया है।

पिछले रविवार को रायबरेली के निकट इस महिला की कार को एक ट्रक द्वारा टक्कर मारे जाने की घटना में वह बुरी तरह जख्मी हो गयी है।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ ने इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि के इस बयान का संज्ञान लिया कि पीड़ित अभी अचेत है और वेंटीलेटर पर है। उन्होंने कहा कि महिला के परिजनों की राय है कि फिलहाल लखनऊ के अस्पताल में ही उसका इलाज होने दिया जाये।

पीठ ने गिरि के इस सुझाव को स्वीकार कर लिया और कहा कि पीड़ित के परिजन उसे लखनऊ से दिल्ली स्थित एम्स में स्थानांतरित करने के बारे में निर्णय लेने के लिये स्वतंत्र हैं।

पीठ ने बलात्कार पीड़ित के चाचा महेश सिंह को रायबरेली जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल स्थानांतरित करने का भी आदेश दिया है।

पीड़िता और वकील की हालत स्थिर

सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई पीड़िता और उसके वकील की हालत शुक्रवार को छठे दिन स्थिर बनी हुई है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के मीडिया प्रभारी डॉ. संदीप तिवारी ने शुक्रवार को बताया कि पीड़िता अब भी वेंटिलेटर पर है और उसे बुखार है लेकिन उसकी हालत स्थिर बनी हुई है। पीड़िता के वकील को अब वेंटिलेटर से हटा लिया गया है

डॉ. तिवारी ने बताया कि जब कोई भी मरीज चार दिन से ज्यादा वेंटिलेटर पर रहता है तो उसे ऑक्सीजन देने के लिये ट्रैकियोस्टोमी विधि का इस्तेमाल किया जाता है। इससे मरीज को पर्याप्त ऑक्सीजन भी मिलती रहती है और फेंफड़ों आदि की सफाई करने में भी आसानी होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम पीड़िता और उसके वकील का इलाज करने में पूरी तरह से समर्थ है और केजीएमयू के सबसे अच्छे डाक्टरों की टीम दोनों का इलाज कर रही है।’’

इसके अलावा न्यायालय ने कड़ा और संवेदनशील रुख अपनाते हुए कहा है कि कोई भी मीडिया हाउस प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष तौर पर अथवा किसी भी तरीके से उन्नाव बलात्कार पीड़िता की पहचान उजागर नहीं करेगा।

उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई सोमवार तक स्थगित की और पीड़िता के चाचा को रायबरेली जेल से तिहाड़ स्थानांतरित करने के आदेश दिए हैं।

 

(भाषा से इनपुट के साथ)

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