NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अयोध्या : कोर्ट के आख़िरी फ़ैसले से पहले की बेचैनी
लंबे समय से चली आ रही ‘मंदिर-मस्जिद’ की राजनीति से पस्त दोनों समुदाय पहले से ही कगार पर खड़े हैं और अब कोर्ट का फ़ैसला आने की ख़बर से उत्तर प्रदेश का मंदिरों का यह शहर एक आभासी क़िले में तब्दील हो गया है।
सौरभ शर्मा
18 Oct 2019
Translated by महेश कुमार
ayodhya

मंदिर-मस्जिद भूमि विवाद पर लंबे समय से चले आ रहे मुक़दमे की सुनवाई बुधवार को समाप्त हो गई है जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश के इस मंदिरों के शहर अयोध्या में एक बेचैनी सी पैदा हो गई है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को 'शांतिपूर्ण' क़रार दिया है।

अयोध्या उत्तर भारत का एक छोटा सा शहर है लेकिन इसने देश के इतिहास में सबसे बड़ी और लंबी क़ानूनी लड़ाई लड़ी है, इसने राजनीति के लिए चारा पेश किया है, इसके द्वारा फैलाई गई धार्मिक घृणा से 1,000 से अधिक लोगों का नरसंहार हुआ है और इस सबके साथ सांप्रदायिक सौहार्द की दिल को छू लेने वाली कहानियां भी यहीं से निकली हैं।

अयोध्या राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली से लगभग 700 किलोमीटर की दूरी पर है, अयोध्या यानी विवादित ढांचे का शहर, दक्षिणपंथी राजनीति का एक केंद्र रहा है, जिसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राष्ट्रीय राजनीति में दाख़िल होने में मदद की और 2014 में यह सत्ता में आ गई। 1992 में हज़ारों संघ परिवार कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर दिया था क्योंकि वे यहां राम मंदिर बनाने के चुनावी वादे पर सवार थे।

अब चूंकि देश इस विवादित भूमि के मसले पर अदालत के फ़ैसले का इंतजार कर रहा है, तो अयोध्या एक आभासी क़िले में बदल गई है, इसलिए वहाँ अधिक से अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है।

ayodhya 2.PNG

इस शहर के लिए तो यह हमेशा का क़िस्सा है। तीर्थयात्रियों को अक्सर हनुमान गढ़ी मंदिर तक जाने के बाद और फिर पवित्र नदी सरयू में स्नान करने के बाद राम मंदिर तक जाते हुए देखा जा सकता है। लगभग सभी दुकानें खुली हैं और उनके मालिक और श्रमिक ग्राहकों को लुभाने की कोशिश करते नज़र आते हैं। लेकिन अगले महीने अदालत के फ़ैसले से दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव से सब चिंतित हैं।

विवादित स्थल से कुछ ही दूरी पर रहने वाले इलाक़े के निवासी 58 वर्षीय मियां अज़ीम का कहना है कि वह इस मामले में फ़ैसले का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।

अज़ीम ने कहा, "राम मंदिर के पक्ष में फ़ैसला आना चाहिए। मैं अपने धर्म के ख़िलाफ़ नहीं हूँ और मैं सच्चा मुसलामान हूं, लेकिन मैं चाहता हूं कि यह फ़ैसला अयोध्या में शांति बहाल करने के लिए मंदिर के पक्ष में हो, जिस शांति और अमन को 1992 से मंदिर-मस्जिद की राजनीति के कारण छीन लिया गया है।" अज़ीम अयोध्या शहर के कपड़ा व्यापारी हैं।

एक मुस्लिम निवासी जिनकी आँखों के सामने 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ था: कहते हैं “ठीक है, और मैं अपने हिंदू भाइयों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे तथ्यों से सहमत हूं कि मस्जिद ग़ुलामी का प्रतीक थी, इसे मुग़ल आक्रमणकारियों ने मंदिर को ध्वस्त करके बनाया था, लेकिन लोग उस ढांचे के नीचे प्रार्थना कर रहे थे। हम जानते हैं कि अल्लाह की शान में नमाज़ अदा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट हमें कुछ ज़मीन ज़रूर देगा। हमें भारतीय क़ानून पर पूरा भरोसा है।"

अदालत के फ़ैसले की पृष्ठभूमि में कोई भी हिंसक हालात बदलने की संभावना को देखते हुए, अज़ीम ने मांग की कि प्रशासन को अयोध्या में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि 1992 के दंगों जैसी स्थिति न हो।

उन्होंने कहा, “मैं बड़ी मस्जिद के टूटने के बाद हुई कई सांप्रदायिक मौतों का गवाह हूँ और मैंने देखा है कि कैसे मेरे पड़ोसी को ज़िंदा जला कर मार दिया गया था जिन्हे मैं चचा कहता था, यही नहीं उनके परिवार को उसी भीड़ ने अपमानित किया था जिसने उस पवित्र जगह को ढाह दिया था। अब मैं इस तरह के दूसरे हालात का गवाह नहीं बन सकूंगा।"

अप्रिय यादें

अयोध्या के एक अन्य निवासी 72 वर्षीय मोहम्मद बिलाल, जिनके भाई को 1992 के दंगों में मार दिया गया था, का कहना है कि वह उसी स्थान पर मस्जिद देखना चाहते हैं जहाँ बाबरी मस्जिद खड़ी थी।

उन्होंने ज़ोर दे कर कहा, "हमने कभी यहाँ कोई मंदिर नहीं देखा लेकिन हमने बाबरी मस्जिद देखी है और हमने वहां इबादत की है। वह हमारी जगह थी जिसे हिंदू कट्टरपंथियों ने ज़बरदस्ती हमसे छीन लिया है। मेरे परिवार ने, मेरे बुज़ुर्गों ने मुसलमान होने की क़ीमत चुकाई है, लेकिन मैं आपको बताता हूं कि अगर फ़ैसला हमारे विश्वास के ख़िलाफ़ जाता है, तो मुझे नहीं पता कि मैं क्या करूंगा, लेकिन इतना ज़रूर है कि मैं अल्लाह की शान में अपना पूरा जीवन बलिदान कर दूंगा।"

बिलाल पेशे से दर्ज़ी हैं, वे इस विवाद का जल्द से जल्द ख़ात्मा चाहते हैं क्योंकि इस मुद्दे के कारण उन्हें (मुस्लिम समुदाय को) काफ़ी नुक़सान उठाना पड़ा है।

वो आगे कहते हैं, “हर दिन, एक राजनीतिक नेता या धर्मांधता से भरा कट्टर व्यक्ति यहाँ आता है, नफ़रत भरे भाषण देता है और मुसलमानों को गालियाँ देता है। हमारे धर्म के ख़िलाफ़ भद्दी गालियाँ दी जाती हैं, गंदे नारे गढ़े जाते हैं। यह कितना सही है? क्या हमने इस देश के लिए अपना जीवन क़ुर्बान नहीं किया है? हमें क्यों हर दिन अपनी वफ़ादारी साबित करने की आवश्यकता है?”

आशिक़ अहमद, एक स्नातक छात्र, जो सिविल सेवाओं की तैयारी कर रहे हैं और अयोध्या के निवासी हैं, ने कहा कि दशकों से चली आ रही इस लड़ाई को समाप्त करने का यही सही समय है, इस लड़ाई ने समाज को धार्मिक आधार पर विभाजित कर दिया है।

वो कहते हैं, “हम, सहस्राब्दी वाले समय में जीने वाले लोग, धार्मिक बहसों में ख़ुद को उलझाने की कोई दिलचस्पी नहीं रखते हैं। हम हर दूसरे महीने कर्फ़्यू जैसी स्थिति को देखते हुए बड़े हुए हैं। उस मानसिक आघात की कल्पना करके देखें जब एक नन्हा सा बच्चा अपने चारों ओर बंदूक के साए को देखता है। इस क्षेत्र को बहुत पहले ही अशांत क्षेत्र घोषित कर देना चाहिए था और लोगों को उनकी मानसिक स्थिति को सही रखने के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए थीं, लेकिन दशकों से इस मुद्दे को खींचने के अलावा कुछ नहीं किया गया है।”

उन्होंने कहा कि इस मामले को वर्षों पहले हल किया जाना चाहिए था लेकिन निहित राजनीतिक हित ने इस मुद्दे को जीवित रखा। उन्होंने नफ़रत फैलाने के लिए टीवी समाचार चैनलों को भी दोषी ठहराया, उनसे अपील की कि "ख़ुद भी जियो और अयोध्या को भी जीने दो।" 

कारसेवकपुरम में

बुधवार के विपरीत, गुरुवार को कारसेवकपुरम “जय श्री राम" और "अब तारीख़ बताएँगे, मंदिर हम बानाएंगे" नारों के साथ गूंज रहा था। राम भक्तों का एक बड़ा समूह, विशेष रूप से युवा लड़के, मंदिर के प्रस्तावित मॉडल को देखने के लिए आ रहे थे।

कारसेवकपुरम, कार्यशाला से कुछ मीटर की दूरी पर स्थित क्षेत्र है, जो कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के सदस्यों और नेताओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है।

विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने न्यूज़क्लिक को संक्षिप्त बातचीत में बताया कि  "मंदिर के लिए पत्थर की लालसा (पत्थर पर कलाकारी) का 65 प्रतिशत से अधिक का काम पूरा हो चुका है और अब हमारे पास बहुत सारी ताक़त (कारसेवक) हैं जिन्होंने मंदिर बनाने में मदद के लिए स्वेच्छा से अपनी इच्छा व्यक्त की है।"

ayodhya 3.PNG

फ़ैसले का बेसब्री से इंतज़ार करते हुए, विहिप नेता ने कहा, "अदालत को हिंदुओं के विश्वास पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि वे आशावान भी हैं कि कोर्ट उनके और उनके सहयोगी समूह यानी बजरंग दल आदि के पक्ष में फ़ैसला देगा, जिन्होंने फ़ैसला आने पर शौर्य यात्रा निकालने की तैयारी शुरू कर दी है।

उन्होंने आगे कहा, “मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि क़ानून और व्यवस्था बनी रहे और हम जश्न भी मनाएंगे, लेकिन अपनी हद पार नहीं करेंगे। हम जश्न मनाएंगे, क्योंकि यह विश्वास की जीत होगी और दुनिया भर में रहने वाले करोड़ों हिंदुओं की जीत होगी।"

अंग्रेजी में लिखा मूल लेख आप नीचे लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं। 

Uneasy Calm in Ayodhya Ahead of Final Court Verdict

Ayodhya Case
Supreme Court
Ayodhya verdict
Babri Masjid demolition
ram temple
Mandir-Masjid Politics
Ayodhya Residents

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

अब अजमेर शरीफ निशाने पर! खुदाई कब तक मोदी जी?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बंटवारे का दर्द: जो हो चुका या जो किया जा रहा है!
    14 Aug 2021
    सच कहें तो आज सन् 47 के बंटवारे से भी ज़्यादा सन् 92 में बाबरी मस्जिद गिराकर पैदा किए गए बंटवारे का दर्द गहरा है। फिर 2002 गुजरात दंगों की विभीषिका कौन भूल सकता है। उसके बाद भी 2014 से तो लगातार…
  • तमिलनाडु बजट: कुछ चुनावी वादे ज़रूर किए पूरे, मगर राजस्व शून्य
    नीलाबंरन ए, श्रुति एमडी
    तमिलनाडु बजट: कुछ चुनावी वादे ज़रूर किए पूरे, मगर राजस्व शून्य
    14 Aug 2021
    डीएमके सरकार ने पेट्रोल पर राज्य उत्पाद शुल्क में 3 रुपये की कमी करके अपने चुनावी वादों को पूरा कर दिया है।
  • दलित पूंजीवाद मुक्ति का मार्ग क्यों नहीं है?
    कुशाल चौधरी
    दलित पूंजीवाद मुक्ति का मार्ग क्यों नहीं है?
    14 Aug 2021
    दलितों की मुक्ति जाति को मिटाने की सामूहिक कार्रवाई में निहित है, इसलिए व्यक्तिगत सफलताओं और लाभ की कहानी, मुक्ति की कहानी नहीं बन सकती है।
  • नागा शांति प्रक्रिया में देरी नुक़सानदेह साबित हो सकती है
    अमिताभ रॉय चौधरी
    नागा शांति प्रक्रिया में देरी नुक़सानदेह साबित हो सकती है
    14 Aug 2021
    एनएससीएन (IM) 1997 से ही एक अलग झंडे और संविधान की अपनी मांग पर ज़ोर देता रहा है और उस किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार करता रहा है, जो इन दोनों की गारंटी नहीं देता हो।
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 38,667 नए मामले, 478 मरीज़ों की मौत
    14 Aug 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 38,667 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 1.21 फ़ीसदी यानी 3 लाख 87 हज़ार 673 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License