NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ सड़कों पर उतरा छात्रों का हुज़ूम, कहीं प्रदर्शन तो कहीं निकाला मशाल जुलूस
नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 के विरोध में देशभर के कई विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन और मशाल जुलूस का आयोजन किया गया। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर बनारस के बीएचयू तक इसका असर देखने को मिला।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Dec 2019
CAB

लोकसभा में पास हुए नागरिकता संशोधन बिल-2019 का विरोध देशभर में देखने को मिल रहा है। पूर्वोत्तर राज्यों के विश्वविद्यालयों के आलावा देश के कई अन्य विश्वविद्यालयों में भी इसका असर देखने को मिला है।

9 दिसंबर, सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएब) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर विभिन्न समूहों के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र एकजुट हुए। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी समेत विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

‘यूनाइटेड अगेन्स्ट हेट’ नामक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में ‘रिजेक्ट सीएबी! बॉयकॉट एनआरसी!’ और ‘इंडिया नीड जॉब्स, एजुकेशन एंड हेल्थकेयर, नॉट नेशन वाइड एनआरसी’ के पोस्टर थामे प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

cab_nrc_protest_delhi_jantar_m-770x433.jpeg

प्रदर्शन में शामिल दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा ऋचा सिंह ने न्यूज़क्लिक को बताया, ‘ सरकार धार्मिक आधार पर एक बार फिर से देश को बांटने की गलती दोहराने जा रही है। ये बिल देशविरोधी होने के साथ-साथ गांधी विरोधी भी है। 1906 में भारतीयों को देश से बाहर निकालने के लिए दक्षिण अफ्रीका में भी ऐसा ही 'नागरिकता' कानून लाया गया था। जिसका गांधी जी और सेठ हाजी हबीब ने विरोध किया था और सत्याग्रह की शुरुआत हुई। आज गांधी के अपने देश में सरकार उनके मूल्यों को नज़रअंदाज़ कर रही है।'

इस संबंध में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष एन. साई बालाजी ने कहा, ‘आज, लोगों ने एनआरसी और नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ विरोध का आह्वान किया क्योंकि यह संविधान के खिलाफ, गरीब-विरोधी, अल्पसंख्यक-विरोधी है। इस सरकार ने एनआरसी और नागरिकता संशोधन विधेयक के नाम से नफरत फैलाने का एक तरीका चुना है।’

AMU_protest_1_571_855.jpg

सोमवार देर रात अलिगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के छात्रों ने भी विश्वविद्यालय कैंटीन पर सभा कर बिल की सांकेतिक प्रतियों को फूंक दिया। छात्र नेताओं ने इसे बंटवारा करने वाला और असंवैधानिक बिल बताते हुए इसकी निंदा की।

इस बिल पर एएमयू के पूर्व छात्र तारिक अनवर ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, ‘जिन लोगों ने अखंड भारत का, संवैधानिक समानता का सपना देखा था, बाबा साहेब ने जिस भारत की बुनियाद रखी थी, यह उसके खिलाफ है। राज्यसभा में जो भी विपक्षी पार्टियां हैं, उनसे अपील है कि इसे राज्यसभा में पास नहीं होने दिया जाए। इस बिल के मध्यम से मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाने का षड्यंत्र किया जा रहा है।'

एएमयू के छात्र नेता फैजुल हसन ने मीडिया से कहा कि जो नागरिकता संशोधन बिल अमित शाह ने संसद में प्रस्तुत किया है, वह वैसा ही है जैसे सन 1947 में देश का बंटवारा हुआ था। भाजपा चाहती है कि फिर से हिंदू और मुसलमानों का बंटवारा हो जाए। यह देश का दुर्भाग्य है कि गृहमंत्री अमित शाह मुसलमानों का नाम नहीं लेकर सीधे सीधे अन्य सभी का नाम ले रहे हैं। इससे साफ है कि गृहमंत्री मुसलमानों के खिलाफ हैं। इसलिए इस बिल को अस्वीकार करते हैं।

80385965_2401001916696126_4151387368223408128_n.jpg

इसी कड़ी में 10 दिसंबर, मंगलवार शाम काशी हिंदू विशेवविद्यालय यानी बीएचयू में भी नागरिकता संसोधन बिल-2019 का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। बीएचयू की ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने लंका गेट के सामने इस बिल के विरोध में एक विरोध सभा का आयोजन किया साथ ही बिल को भेदभाव पूर्ण बताते हुए मशाल जुलूस भी निकाला गया। इस दौरान एनआरसी, डॉक्टर फ़िरोज़ और डॉक्टर सालवी पर हमले का मामला भी उठाया गया।

बीएचयू के छात्र प्रियेश पांडे ने इस संबंध में से न्यूज़क्लिक कहा, ‘मेरी नज़र में ये विधेयक न सिर्फ गैर संवैधानिक और देश की अल्पसंख्यक आबादी के खिलाफ है बल्कि इस विधेयक के सहारे सरकार का स्पष्ट रूप से ये एलान है कि उनके भारत की परिकल्पना में मुसलमान के लिए कोई जगह नहीं है।'

इस संबंध में शोध छात्र अनुपम ने बताया, 'यह बिल देश विरोधी है क्योंकि इस बिल के आ जाने के बाद देश में संप्रदाय-धर्म के आधार पर भेद-भाव को वैधता मिल जाएगी। जिसके कारण देश की एकता और भाईचारा को नुकसान होगा। सरकार यह बिल लाकर सिर्फ अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहती है। इस से न हिन्दुओं का भला हो न किसी अन्य दुसरे मजहब के लोगों को। इसलिए जो भी नागरिक अपने देश और देशवासियों के प्रेम करता है उसको इस बिल का पुरजोर तरीके से विरोध करना चाहिए और इस बिल को रोकने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। मैं एक छात्र होने के नाते इस बिल का विरोध करता रहूँगा।'

78996296_2401002010029450_2428291221152595968_n.jpg

प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद-14 कहता है कि भारत अपने सीमाओं में किसी से धर्म जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा लेकिन नागरिकता संशोधन बिल-2019 भेदभाव-पूर्ण है। ये बिल पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगनिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यक बौद्ध, जैन,हिंदू, पारसी, ईसाई व सिख धर्मावलंबी ग़ैरक़ानूनी प्रवासियों को तो भारतीय नागरिकता देने की बात करता है लेकिन मुसलमानों को नागरिकता प्रदान नहीं कर रहा है। इस प्रकार नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 मानवता व संविधान विरोधी है।

गौरतलब है कि कि नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में उत्तर पूर्व के विभिन्न राज्यों में भी लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहा है। असम के डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के छात्रसंघ तथा कॉटन स्टेट यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ ने मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित सत्तारूढ़ भाजपा, आरएसएस के सदस्यों तथा विधेयक का समर्थन करने वालों को इन दोनों विश्वविद्यालयों के परिसर में प्रवेश पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगा रखा है। असम में ऑल स्टूडेंट्स यूनियन, नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन, वामपंथी संगठनों-एसएफआई, डीवाईएफआई, एडवा, एआईएसएफ और आइसा ने 11 घंटे का बंद भी बुलाया था।

Citizenship Amendment Bill
Delhi University
Jamia Millia Islamia
Banaras Hindu University
Jawaharlal Nehru University
students protest
Modi government
Assam
NRC Assam
Tripura
students against CAB
central university

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 

आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?

SFI ने किया चक्का जाम, अब होगी "सड़क पर कक्षा": एसएफआई

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान


बाकी खबरें

  • Gauri Lankesh pansare
    डॉ मेघा पानसरे
    वे दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी या गौरी लंकेश को ख़ामोश नहीं कर सकते
    17 Feb 2022
    दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और गौरी को चाहे गोलियों से मार दिया गया हो, मगर उनके शब्द और उनके विचारों को कभी ख़ामोश नहीं किया जा सकता।
  • union budget
    टिकेंदर सिंह पंवार
    5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल
    17 Feb 2022
    केंद्र सरकार लोगों को राहत देने की बजाय शहरीकरण के पिछले मॉडल को ही जारी रखना चाहती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 541 मरीज़ों की मौत
    17 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 30,757 नए मामले सामने आए है | देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 27 लाख 54 हज़ार 315 हो गयी है।
  • yogi
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः बिजली बिल माफ़ करने की घोषणा करने वाली BJP का, 5 साल का रिपोर्ट कार्ड कुछ और ही कहता है
    17 Feb 2022
    "पूरे देश में सबसे ज्यादा महंगी बिजली उत्तर प्रदेश की है। पिछले महीने मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) ने 50 प्रतिशत बिजली बिल कम करने का वादा किया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया। ये बीजेपी के चुनावी वादे…
  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव : पुलवामा के बाद भारत-पाक व्यापार के ठप हो जाने के संकट से जूझ रहे सीमावर्ती शहर  
    17 Feb 2022
    स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ व्यापार के ठप पड़ जाने से अमृतसर, गुरदासपुर और तरनतारन जैसे उन शहरों में बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी पैदा हो गयी है, जहां पहले हज़ारों कामगार,बतौर ट्रक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License