NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
छठा चरण—पूर्वांचल में रण: इस बार योगी आदित्यनाथ के सामने चुनौतियों का ढेर
यूपी चुनावों के छठे चरण की एक-एक सीट बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस बार ख़ुद योगी आदित्यनाथ विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि माहौल पिछली बार से थोड़ा अलग है, ऐसे में भाजपा के लिए विपक्षियों से पार पाना आसान नहीं होगा।
रवि शंकर दुबे
02 Mar 2022
up election

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की सुईं पश्चिम और अवध से होते हुए अब पूर्वांचल पर पहुंच गई है, सभी राजनीतिक दलों ने इसे जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इस चरण में 10 ज़िलों की 57 सीटों पर मतदान किया जाएगा। जिसमें 2.14 करोड़ मतदाता 676 उम्मीदवारों का भविष्य तय करेंगे। खास बात ये है कि इन 676 उम्मीदवारों में ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम भी शामिल है, तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। फिलहाल साल 2014 के बाद से पूर्वांचल की ज्यादातार सीटों पर भाजपा का दबदबा रहा है। यही कारण है कि 2017 विधानसभा के चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया था। फिलहाल इस बार हालात बदल चुके हैं।

10 ज़िले—57 विधानसभा सीटें

  • बलरामपुर ज़िला- तुलसीपुर, गैसड़ी, उतरौला, बलरामपुर (एससी)
  • सिद्धार्थनगर ज़िला- शोहरतगढ़, कपिलवस्तु (एससी), बांसी, इटवा, डुमरियागंज
  • महाराजगंज ज़िला- फरेंदा, नौतनवा, सिसवा, महराजगंज (एससी)
  • कुशीनगर ज़िला- खड्डा, पडरौना, तमकुहीराज, फाजिलनगर, कुशीनगर, हाटा, रामकोला (एससी)
  • बस्ती ज़िला- हरैया, कप्तानगंज, रुधौली, बस्ती सदर, महादेवा (एससी)
  • संत कबीर नगर ज़िला- मेहदावल, खलीलाबाद, धनघटा(एससी),
  • अम्बेडकर नगर ज़िला- कटेहरी, टांडा, आलापुर (एससी), जलालपुर, अकबरपुर
  • गोरखपुर ज़िला- कैम्पियारगंज, पिपराइच, गोरखपुर शहर, गोरखपुर ग्रामीण, सहजनवा, खजनी (एससी), चौरी-चौरा, बांसगांव (एससी), चिल्लूमपार
  • देवरिया ज़िला- रुद्रपुर, देवरिया, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, भाटपार रानी, सलेमपुर (एससी), बरहज
  • बलिया ज़िला- बेल्थरा रोड (एससी), रसड़ा, सिकंदरपुर, फेफना, बलिया नगर, बांसडीह, बैरिया

2017 के नतीजे

साल 2022, पूर्वांचल के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि 2017 के विधानसभा चुनावों में विपक्ष पूर्वांचल में पूरी तरह से साफ हो गया था, हालांकि इस बार बदले हुए सियासी समीकरणों ने भाजपा की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। दरअसल ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा ने इस बार भाजपा से नाता तोड़कर अखिलेश का हाथ पकड़ लिया है, स्वामी प्रसाद मोर्य भी साइकिल पर सवार हो गए हैं, तो भाजपा ने निषाद पार्टी को अपनी ओर मिला लिया है। पिछले चुनावों में भाजपा ने 57 में 46 सीटें जीत ली थीं।

गोरखपुर सीट पर सियासत गर्म है।

छठे चरण को अगर राजनीतिक दिग्गजों के लिए अग्नि परीक्षा का दौर कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा। क्योंकि इस चरण की सभी 57 सीटों पूर्वांचल में आती हैं और पूर्वांचल योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है। जो इस बार ख़ुद योगी आदित्यनाथ के मैदान में उतरने से और ज्यादा दिलचस्प हो गया है। योगी के खिलाफ उतरे दिग्गज चेहरों ने इस सीट का पारा हाई कर दिया है। जिसमें अखिलेश यादव ने भाजपा नेता दिवंगत उपेंद्र दत्त शुक्ला की पत्नी सुभावती शुक्ला को योगी के खिलाफ खड़ा कर दिया है। यह योगी के लिए बड़ी मुश्किल का सबब हो सकता है। वहीं बसपा ने ख्वाजा शमसुद्दीन और भीम आर्मी के चंद्रशेखर आज़ाद भी योगी को उन्ही के गढ़ में उन्हें मात देने का दम भर रहे हैं। जबकि कांग्रेस ने भी यहां ब्राह्मण और महिला की जुगलबंदी का फायदा उठाने की पूरी कोशिश की है, उन्होंने चेतना पांडे को मैदान में उतार दिया है।   

नेता प्रतिपक्ष की साख दांव पर

गोरखपुर शहरी सीट के अलावा... बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, अंबेडकरनगर, देवरिया ज़िलों की करीब तीन दर्जन से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा की हार-जीत योगी आदित्यनाथ की छवि पर असर डालेगी। वहीं भाजपा को, सपा के साथ आए स्वामी प्रसाद मौर्य की भी कड़ी चुनौती मिलने वाली है। मौर्य फाजिलनगर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। मंगलवार को रोड शो के दौरान उनके काफिले पर हमले का भी आरोप है। स्वामी प्रसाद मौर्य और उनकी बेटी और बीजेपी की सांसद संघमित्रा ने इस हमले के लिए सीधे भाजपा को दोषी ठहराया है। हालांकि इस मामले में भाजपा ने मौर्य समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया और  एफआईआर दर्ज कराई है।

इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी, विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, बसपा छोड़ सपा में आए लालजी वर्मा, राम अचल राजभर, राजकिशोर सिंह, और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की साख भी दांव पर होगी।

आधा दर्जन मंत्रियों के लिए प्रतिष्ठा की बात

योगी आदित्यनाथ और राम गोविंद चौधरी के अलावा योगी सरकार के करीब आधा दर्जन मंत्रियों की साख भी दांव पर है, जिसमें मंत्री सतीश द्विवेदी, सूर्य प्रताप शाही, उपेंद्र तिवारी, श्रीराम चौहान, जय प्रताप सिंह, जय प्रकाश निषाद और राम स्वरूप शुक्ला मुख्य नाम हैं।

60 के दशक से कायम है गोरखनाथ पीठ का वर्चस्व

तमाम चीज़ों के साथ गोरखपुर की मुख्य पहचान गीता प्रेस और गोरखनाथ पीठ यानी गोरखनाथ मंदिर का जिक्र करना भी बेहद ज़रूरी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 60 के दशक से ये मंदिर कभी चुनाव नहीं हारा। यानी इस मंदिर या पीठ का जिसको समर्थन रहा, वही जीता। ये सीट हमेशा से ब्राह्मण बाहुल्य रही है। यहां शहरी सीट पर 60-65 हज़ार ब्राह्मण मतदाता हैं जबकि क्षत्रिय यानी जिस समाज से खुद आदित्यनाथ आते हैं, 28-35 हज़ार हैं। वैश्य समाज भी ठीक-ठाक संख्या में हैं, लेकिन लगातार कई बार के विधायक राधा मोहन दास का टिकट कटने से उनमें जो नाराज़गी है इसका ख़ामियाज़ा योगी को भुगतना पड़ सकता है। जबकि चंद्र शेखर आज़ाद, ख्वाज़ा शमसुद्दीन पिछड़े वोटरों में सेध मार सकते हैं। ऐसे में सीधे तौर पर ये कह पाना मुश्किल है कि इस बार भी गोरक्षपीठ का वर्चस्व कायम रहेगा।

मुद्दे दिखने नही देतीं सरकारें

भले ही प्रदेश के ज्यादातर दिग्गज नेता और खुद योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल से आते हों, लेकिन ये भी सच है कि पूर्वांचल की हालत पश्चिम और अवध से ज्यादा ख़राब है। यहां छुट्टा जानवरों का आंतक किसानों की ज़िंदगी पर बुरी तरह से हावी है। दूसरी ओर बेरोज़गारी की मार भी पूर्वांचल के लोगों पर कुछ ज्यादा ही पड़ती है। इसके अलावा कच्चे रास्ते, उफनती नालियां, पानी की कमी, बिजली की दुविधा, शिक्षा में पिछड़ापन और बाहुबलियों की दबंगई भी बहुत प्रमुख कारण हैं जो फिलहाल मुद्दों में गिने नहीं जा रहे हैं।

मैप देखें-- https://electionsviz.newsclick.in/

UP ELections 2022
Purvanchal state
Yogi Adityanath
Ajay Kumar Lallu

Related Stories

सियासत: अखिलेश ने क्यों तय किया सांसद की जगह विधायक रहना!

यूपी चुनाव नतीजे: कई सीटों पर 500 वोटों से भी कम रहा जीत-हार का अंतर

यूपी के नए राजनीतिक परिदृश्य में बसपा की बहुजन राजनीति का हाशिये पर चले जाना

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

यूपी चुनाव: कई दिग्गजों को देखना पड़ा हार का मुंह, डिप्टी सीएम तक नहीं बचा सके अपनी सीट

जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा

जनादेश-2022: यूपी समेत चार राज्यों में बीजेपी की वापसी और पंजाब में आप की जीत के मायने

यूपी चुनाव: प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की वापसी

यूपी चुनाव: रुझानों में कौन कितना आगे?

यूपी चुनाव: इस बार किसकी सरकार?


बाकी खबरें

  • Roberta Metsola
    मरीना स्ट्रॉस
    कौन हैं यूरोपीय संसद की नई अध्यक्ष रॉबर्टा मेट्सोला? उनके बारे में क्या सोचते हैं यूरोपीय नेता? 
    20 Jan 2022
    रोबर्टा मेट्सोला यूरोपीय संसद के अध्यक्ष पद के लिए चुनी जाने वाली तीसरी महिला हैं।
  • rajni
    अनिल अंशुमन
    'सोहराय' उत्सव के दौरान महिलाओं के साथ होने वाली अभद्रता का जिक्र करने पर आदिवासी महिला प्रोफ़ेसर बनीं निशाना 
    20 Jan 2022
    सोगोय करते-करते लड़कियों के इतने करीब आ जाते हैं कि लड़कियों के लिए नाचना बहुत मुश्किल हो जाता है. सुनने को तो ये भी आता है कि अंधेरा हो जाने के बाद सीनियर लड़के कॉलेज में नई आई लड़कियों को झाड़ियों…
  • animal
    संदीपन तालुकदार
    मेसोपोटामिया के कुंगा एक ह्यूमन-इंजिनीयर्ड प्रजाति थे : अध्ययन
    20 Jan 2022
    प्राचीन डीएनए के एक नवीनतम विश्लेषण से पता चला है कि कुंगस मनुष्यों द्वारा किए गए क्रॉस-ब्रीडिंग के परिणामस्वरूप हुआ था। मादा गधे और नर सीरियाई जंगली गधे के बीच एक क्रॉस, कुंगा मानव-इंजीनियर…
  • Republic Day parade
    राज कुमार
    पड़ताल: गणतंत्र दिवस परेड से केरल, प. बंगाल और तमिलनाडु की झाकियां क्यों हुईं बाहर
    20 Jan 2022
    26 जनवरी को दिल्ली के राजपथ पर होने वाली परेड में केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की झांकियां शामिल नहीं होंगी। सवाल उठता है कि आख़िर इन झांकियों में ऐसा क्या था जो इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। केरल की…
  • kashmir
    अनीस ज़रगर
    RSF ने कश्मीर प्रेस क्लब को बंद करने की जम्मू-कश्मीर प्रशासन की कार्रवाई की निंदा की
    20 Jan 2022
    एक तीखे वक्तव्य में रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स ने क्षेत्र में प्रशासन को उस पत्रकार समूह की मदद करने का आरोप लगाया है, जिसने प्रेस क्लब पर “क़ब्ज़ा” किया। कई लोगों ने इसे राज्य समर्थित “तख़्ता-पलट”…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License