NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
यूपी में लगातार दूसरे साल भी गन्ना मूल्य में इज़ाफ़ा नहीं,  किसान आंदोलित
पेराई सत्र 2019-20 में गन्ने का दाम बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को लगातार दूसरे साल भी मायूसी हाथ लगी है। आपको बता दें कि 1999 से अपने 6 साल के अब तक कार्यकाल में बीजेपी ने गन्ना मूल्य में कुल 20 रुपये की बढ़ोतरी की है। इसके ख़िलाफ़ किसान पूरे प्रदेश में आंदोलन कर रहे हैं और राजधानी लखनऊ मेें भी विधानसभा का घेराव करने पहुंचे हैं।
पीयूष शर्मा
11 Dec 2019
gannna kisan
प्रतीकात्मक तस्वीर

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश सरकार ने गन्ने के राज्य समर्थित मूल्य में दूसरे साल भी कोई बढ़ोतरी नहीं करते हुए इसे यथावत रखा है। किसानों की मानें तो बिजली से लेकर खाद तक के दाम बढ़ने की वजह से खेती की लागत बेतहाशा बढ़ी है लेकिन सरकार ने चीनी उद्योग लॉबी के दबाव में लगातार दूसरे साल गन्ने की कीमत नहीं बढ़ाई है।

आपको बता दें कि गन्ना किसान 400 रुपये प्रति क्विंटल दाम दिए जाने की मांग कर रहे थे। लेकिन प्रदेश सरकार ने गन्ने के राज्य समर्थित मूल्य में दूसरे साल यानी 2019-20 में भी कोई बढ़ोतरी नहीं करते हुए इसे यथावत रखा है। राज्य समर्थित मूल्य सामान्य गन्ना प्रजाति के लिए 315 रुपये और अर्ली प्रजाति के लिए 325 रुपये प्रति कुंतल ही है।

गौरतलब है कि चीनी उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश टॉप पर है और प्रदेश में 35 लाख से अधिक किसान परिवार गन्ने की खेती से जुड़े हुए है। इस वर्ष 2019-20 में 26.79 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती हो रही है और प्रदेश में वर्तमान पेराई सत्र में 117 चीनी मिल संचालित हैं। प्रदेश में चीनी उद्योग करीब 40 हजार करोड़ रुपयों का है।

राज्य में गन्ने की खरीद के मूल्य में बढ़ोतरी नहीं करने का योगी सरकार का यह दूसरा साल है, अपने कार्यकाल के पहले साल यानी पेराई सत्र 2017-18 में योगी सरकार ने मात्र 10 रुपये की मामूली बढ़ोतरी की थी।

पिछले काफी समय से किसान और किसान संगठन गन्ने की खेती में लगने वाली लागत बढ़ने के कारण खरीद मूल्य में 400 रुपयों से अधिक की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ सालों में डीजल, बिजली, मजदूरी और खाद के दामों में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है।

आपको बता दें कि राज्य में संचालित कुल चीनी मिलों में निजी मिल की संख्या करीब 94 है। इन निजी मिलों ने वर्तमान में जो गन्ने का खरीद मूल्य उसी को देने में अपनी असमर्थता राज्य सरकार के सामने रखी, जिसके दबाव में आकर योगी सरकार ने गन्ने की खरीद मूल्य में कोई बढ़ोतरी नहीं की है।

छह साल के कार्यकाल में बीजेपी सरकार ने बढ़ाए कुल 20 रुपये

उत्तर प्रदेश में पिछले 20 साल में गन्ने का भाव किस सरकार में कितना रहा यह तुलना करने पर हम पाते हैं कि 1999 से अब तक भाजपा ने छह साल के कार्यकाल में मात्र 20 रुपये की वृद्धि की है। सपा ने 8 साल के कार्यकाल में 95 रुपये की वृद्धि की तथा बसपा ने 7 साल के कार्यकाल में 120 रुपये की वृद्धि की है।

 Gann Price last 20 Years.jpg

गन्ने के दाम में इजाफा न किए जाने पर अखिल भारतीय किसान सभा के पश्चिम उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष रामपाल सिंह ने कहा, 'भाजपा सरकार प्रदेश में केवल चीनी मालिक और कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने के लिए है। पिछले दो सालों में एक रुपया भी न बढ़ाना यह दर्शाता है कि यह भाजपा सरकार पूरी तरह किसान विरोधी है। किसान की लागत का सरकार कोई ध्यान नहीं रख रही है। इसके उलट चीनी मालिकों को भरपूर सब्सिडी दी जा रही है। किसानों को न तो सही मूल्य दिया जा रहा है और न ही समय पर भुगतान किया जा रहा है।'

उन्होंने कहा, 'प्रदेश में किसान इस बार गन्ने के दामों में बढ़ोतरी की आस लगाए बैठे थे। लेकिन सरकार ने गन्ने के दामों में फूटी कौड़ी की भी वृद्धि नहीं की है।'

गौरतलब है कि किसानों का अभी मिलों पर पिछले भुगतान का तीन हजार करोड़ से अधिक का बकाया है। ऐसे एक तरफ तो गन्ने के फसल के दाम नहीं बढ़ रहे है और दूसरी ओर उनकी पुरानी फसलों का भुगतान नहीं मिल रहा है।

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा, 'पिछले दो सालों में गन्ने का रेट न बढ़ाकर प्रदेश सरकार ने यह दिखा दिया है कि वह किसान विरोधी है। खाद, बिजली पानी, डीज़ल, जुताई आदि महंगी होने के बाद भी गन्ने का दाम नहीं बढ़ाना किसानों के साथ अन्याय है।

उन्होंने आगे कहा, 'सरकारी संस्थानों ने भी गन्ने की प्रति कुंतल लागत करीब 300 रुपये आंकी है। लागत पर 50 फीसदी लाभ के हिसाब से गन्ने का रेट 450 रुपये होता है। उन्होंने साथ ही कहा कि हम सरकार के इस किसान विरोधी निर्णय को सहन नहीं करेंगे और इसके लिए आंदोलन करेंगे।

वहीं, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने गन्ना मूल्य में वृद्धि न किए जाने को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह सरकार किसानों को आत्महत्या के रास्ते पर ले जा रही है। पिछले तीन सालों से गन्ना उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है। शाहजहांपुर शुगर केन इंस्टीट्यूट की अपनी लागत भी 300 रुपये कुंतल की है, लेकिन सरकार द्वारा इस वर्ष भी कोई वृद्धि न करके किसान हितों पर कड़ा प्रहार किया है।

उन्होंने आगे कहा, 'शुगर मिल मालिकों को संरक्षित करने के लिए सरकार किसानों का गला घोंट रही है। पिछले 3 वर्षों में गन्ने की रिकवरी साढ़े 8 प्रतिशत से बढ़कर 11:30 प्रतिशत तक हुई है जिसका सारा लाभ मिल मालिकों को मिल रहा है। किसान ने अपने प्रयास से रिकवरी में वृद्धि की है जिसका लाभ किसान को मिलना चाहिए था, लेकिन इसका लाभ भी सरकार द्वारा पूंजीपतियों को दिया जा रहा है। आज गन्ना किसान तमाम समस्याओं से ग्रस्त है किसानों का हाडा घटा दिया गया है, समय से पर्ची नहीं मिल पा रही है और किसानों का बेसिक कोटा भी कम कर दिया गया है। ऐसी स्थिति में किसानों द्वारा गन्ने की फसल को लंबे समय तक कर पाना संभव नहीं है, गन्ने के सिवा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। पशु प्रेमी सरकार द्वारा पशुओं से फसलों के संरक्षण के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है।' 

 

Ganna
farmers
kisan
Sugarcane
Uttar pradesh
Yogi
MSP
minimum support price
Kisan Union
Sugar mill
Agriculture Crises

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

अगर फ़्लाइट, कैब और ट्रेन का किराया डायनामिक हो सकता है, तो फिर खेती की एमएसपी डायनामिक क्यों नहीं हो सकती?

योगी सरकार द्वारा ‘अपात्र लोगों’ को राशन कार्ड वापस करने के आदेश के बाद यूपी के ग्रामीण हिस्से में बढ़ी नाराज़गी

यूपी : 10 लाख मनरेगा श्रमिकों को तीन-चार महीने से नहीं मिली मज़दूरी!

आख़िर किसानों की जायज़ मांगों के आगे झुकी शिवराज सरकार

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?


बाकी खबरें

  • worker
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमपीः रीवा में मज़दूरी मांगने गए दलित मज़दूर का मालिक ने काटा हाथ, आईसीयू में भर्ती
    25 Nov 2021
    पीड़ित अशोक की पत्नी ने कहा गणेश मिश्रा पर लगभग 15,000 रुपये बकाया थे, लेकिन कई महीनों से वे भुगतान नहीं कर रहे थे। हम ग़रीब लोग हैं, अपना पेट पालने के लिए मज़दूरी पर निर्भर हैं।
  • Farmers
    रवि कौशल
    आंशिक जीत के बाद एमएसपी और आपराधिक मुकदमों को ख़ारिज करवाने के लिए किसान कर रहे लंबे संघर्ष की तैयारी
    25 Nov 2021
    कृषि क़ानूनों की वापसी की घोषणा के बावजूद, किसान, अपने संघर्ष की दूसरी मांगों पर अडिग हैं, जिनमें एमएसपी पर गारंटी, प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज केस रद्द किए जाने, केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी की…
  • workers
    विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: देश की सबसे बड़ी कोयला मंडी में छोटी होती जा रही मज़दूरों की ज़िंदगी
    25 Nov 2021
    यूपी के चंदौली जिले में चंधासी, देश की सबसे बड़ी कोयला मंडी है। यह इलाका उस संसदीय क्षेत्र के साथ लगा है, जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुना है। ..."जिस सड़क से पांच मिनट गुजरने में दम निकलता हो…
  • Gandhi ji
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    ख़तो-किताबत: आंदोलनजीवी बापू की चिट्ठी आई है
    25 Nov 2021
    पेशे से चिकित्सक, व्यंग्यकार डॉ. द्रोण कुमार शर्मा ने दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर उनके नाम एक चिट्ठी लिखकर उन्हें देश के हालात से अवगत कराया था। अब उन्होंने इसका जवाब लिखा है। यानी लेखक…
  • farmers
    अजय गुदावर्ती
    कृषि क़ानूनों को निरस्त करने के बाद भाजपा-आरएसएस क्या सीख ले सकते हैं
    25 Nov 2021
    सत्ताधारी पार्टी संकट आने पर हर बार हिंदू-मुस्लिम का बटन नहीं दबा सकती और कामयाब भी नहीं हो सकती। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License