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भारत
राजनीति
क्यूबा के प्रति अमेरिका की बीमार मनोग्रंथि 
क्यूबावासियों ने तो इतिहास से सीखा है, लेकिन वाशिंगटन ने कोई सबक नहीं सीखा है। 
रोजा मिरियम एलिजाल्डे
01 Nov 2021
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अमेरिकी राष्ट्रपति जोए बाइडेन। छवि सौजन्य: एएफपी 

गुल्लक फिर तोड़ा गया। सितंबर 2021 में, यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) ने क्यूबा में "सत्ता परिवर्तन" के उद्देश्य से चलाई जा रही परियोजनाओं के अनुदान मद में $ 6,669,000 अरब डॉलर दिए थे, जो दरअसल "एक विदेशी शक्ति द्वारा किसी दूसरे देश में सीधे दखल" कहने से बचने का एक आवरण भर है। संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्तमान डेमोक्रेटिक प्रशासन ने विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय रिपब्लिकन संस्थान (IRI) को द्विदलीय दरियादिली के साथ समर्थन दिया है, जो डोनाल्ड ट्रम्प ने नहीं किया था। मियामी, वाशिंगटन और मैड्रिड के अन्य समूह, जिन्हें यह अनुकंपा राशि मिली है, वे क्यूबाई द्वीप के हमलावरों में से हैं। ये समूह अगले साल अधिक से अधिक धन झटकने के लिए हवाना में विनाश का एक पैनोरमा पेश करेंगे। 

लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में कास्त्रो विरोधी उद्मम-उपक्रम के लिए सार्वजनिक धन का प्रवाह अब भी अटूट बना हुआ है। पिछले वर्ष, क्यूबा को ध्यान में रख कर अमेरिकी विदेश मंत्रालय से नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (एनईडी) और यूएसएआईडी कार्यक्रमों के लिए कम से कम 54 संगठनों को लाभ पहुंचाया गया है। इस एजेंसी ने पिछले 20 वर्षों में क्रिएटिव एसोसिएट्स इंटरनेशनल को, जो सीआइए का ही एक मुखौटा फ्रंट है, उसे क्यूबा में जासूसी करने, अमेरिकी हितों-विचारधाराओं के प्रचार-प्रसार करने और द्वीप में "परिवर्तन" के एजेंटों की भर्ती के लिए $1.8 बिलियन डॉलर से अधिक धन दिया है।

इसकी सबसे प्रसिद्ध परियोजनाओं में से एक, तथाकथित "क्यूबन ट्विटर" या ज़ुनज़ुनेओ, की शानदार विफलता ने भ्रष्टाचार की साजिश और अमेरिकी कानून के प्रमुख उल्लंघनों का पर्दाफाश कर दिया था। ज़ुनज़ुनेओ के चलते यूएसएआइडी निदेशक अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी, लेकिन क्रिएटिव एसोसिएट्स इंटरनेशनल ने परोक्ष रूप से अपना काम आगे भी जारी रखा।

अमेरिकी शोधकर्ता ट्रेसी ईटन वर्षों से इन फंडों की आवाजाही और उनके उपयोग के मामले पर गहरी नजर रखती रही हैं। उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि क्यूबा में "शासन परिवर्तन" के लिए अमेरिका के कई वित्तपोषण कार्यक्रम इतने गुप्त हैं कि हम शायद कभी नहीं जान पाएंगे कि ये धन पाने वाले कौन हैं या इस मद के तहत कितना धन बांटा जा रहा है। प्रकट रूप से मिलियन डॉलर को देखते हुए इतना अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह धन इससे भी कहीं ज्यादा मात्रा में होगा। 

अमेरिका का विदेश मंत्रालय और यूएसएआइडी के पत्रों के अनुसार, जो ईटन को प्राप्त हुए हैं, "लोकतंत्र-निर्माण" रणनीतियों को एक "व्यापार रहस्य" माना जाता है और यूएस फ्रीडम ऑफ इंफॉर्मेशन एक्ट के तहत इसे गुप्त रखने की छूट दी गई है। क्यूबा की स्थानीय राजनीति और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में रूसी, चीनी या इस्लामी की कथित घुसपैठ के संकेत पर संयुक्त राज्य अमेरिका आगबबूला हो जाता है। हालांकि, वह खुद क्यूबा में कठोर हस्तक्षेप करने में एक मिनट के लिए भी संकोच नहीं करता है। डिजिटल दैनिक मिंटप्रेस न्यूज ने साक्ष्यों के साथ किए गए अपने खुलासे में इस बात के सबूत दिए कि निजी फेसबुक समूहों ने 11 जुलाई को क्यूबा के कई शहरों में किस तरह दंगों के लिए लोगों को उकसाया। मिंटप्रेस का कहना है, "क्यूबा के घरेलू मामलों में विदेशी नागरिकों की भागीदारी की परिकल्पना से ही अमेरिका आशंकित हो उठता है।" यह खुलासा किया कि “जिन लोगों ने 11 जुलाई को विरोध प्रदर्शन किए थे, वे अक्टूबर और नवंबर में भी इसे दोहराने की योजना बना रहे हैं।” 

अमेरिका एक सैन्य महाशक्ति है, जिसकी क्यूबा की राजनीतिक उठापटक की योजना में संलिप्तता एक शर्मनाक और निंदनीय कार्य है। फिर इस बात का दूर-दूर तक कोई संकेत नहीं है कि वाशिंगटन अब वह सब हासिल कर लेगा, जो वह पिछले 60 वर्षों में करने में विफल रहा है। वास्तव में, क्यूबा के साथ अमेरिकी सरकार की जीर्ण हो चुकी मनोग्रंथि दो सदी पुरानी है, जैसा कि चैपल हिल में उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय के इतिहासकार लुई ए. पेरेज़ ने "क्यूबा एज़ ए ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर"(एक जुनूनी बाध्यकारी विकार के रूप में क्यूबा) नामक एक शानदार निबंध में लिखा है। 

पैरेज लिखते हैं, "क्यूबा तर्कसंगत अधिग्रहण का शायद ही कभी एक विषय रहा हो। यह विषय ऐसा है, जिसकी सरल व्याख्या नहीं की जा सकती, और निश्चित रूप से इस मामले को नीति-गणना के तर्क के दायरे में पूरी तरह से तो क्या मुख्य रूप से भी नहीं समझा जा सकता है, जो कि अन्य अमेरिकी विदेश संबंधों को प्रकट करने का काम करता है, जो ज्यादातर तार्किक नहीं है,”इतिहासकार लिखते हैं। 

क्यूबा के समय में उसकी "वैचारिक अनम्यता" का स्थायित्व मायने रखता है। अर्नेस्टो चे ग्वेरा 1959 की क्रांति के पहले वर्षों में अपने भाषणों में दोहराते थे कि "क्यूबा एक और ग्वाटेमाला नहीं होगा।" दूसरे शब्दों में, अमेरिकी साम्राज्य से इसकी स्वतंत्रता का तिरस्कार पहले मीडिया में दुष्प्रचार की बमबारी, दुष्प्रेरित लामबंदी और सैन्य हमलों से नहीं किया जा सकता। 

स्वतंत्र विकल्पों को उखाड़ फेंकने का अमेरिका का रिवाज काफी पुराना है, और एक भारी सैन्य बल और मीडिया की ताकत से उपजे अहंकार ने उसकी सरकार को अंधा कर दिया है। वह क्यूबा में हुई अपनी लगातार हार का अनुमान नहीं लगा पाई है और न ही उसने “लगभग हमारे तटों की नजर के सामने” विद्रोह में शान से खड़े, जैसा कि जॉन क्विन्सी एडम्स कहते हैं, एक द्वीप से मिले आघात को भुला पाया है। इन सबमें अव्वल तो यह कि "खाड़ी देशों के प्रवेश द्वार और विशाल मिसिसिपी घाटी के बाहर निकलने के बीच एक देश की हम कमी महसूस करते हैं” जबकि क्यूबा को इसके होने में जरा सी भी दिलचस्पी नहीं है।

इन सबमें बड़ा सत्य, जैसा कि लुई ए.पेरेज़ अपने लेख में बुद्धिमत्तापूर्ण टिप्पणी करते हैं, वह यह है कि क्यूबाई लोगों ने तो इतिहास से भरपूर सीखा है, लेकिन वाशिंगटन ने ऐसा कोई सबक नहीं सीखा है।

रोजा मिरियम एलिजाल्डे क्यूबा की पत्रकार हैं और क्यूबडेबेट वेबसाइट की संस्थापक हैं। वे यूनियन ऑफ क्यूबन जर्नलिस्ट्स (UPEC) और लैटिन अमेरिकन फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (FELAP) दोनों की उपाध्यक्ष हैं। 

स्रोत: यह लेख ग्लोबट्रॉटर द्वारा प्रस्तुत किया गया था। 

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें 

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