NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
इराक में किसी ‘दबंग इंसान’ की वापसी की साज़िश रच रहा है अमेरिका
मौजूदा खालीपन के हालात में इराक के कुर्द क्षेत्रीय सरकार के नेता नेचिरवन बरज़ानी के बारे में यह मशहूर है कि वे अमेरिकियों के लिए खुद को सबसे काम का साबित करने में जुटे हुए हैं।
एम. के. भद्रकुमार
24 Jan 2020
Protest in Iran
सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने बगदाद शहर के मध्य वाले इलाके में आगजनी और तोड़फोड़ को अंजाम दिया है (फाइल फोटो)

इराक में पूर्व क़ुद्स बल के कमांडर कासिम सोलेमानी की विदाई को अब महसूस किया जाने लगा है। विश्व आर्थिक मंच में भाग लेने के साथ ही बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इराक के कुर्द क्षेत्रीय सरकार के नेता नेचिरवन बरजानी और इराक के राष्ट्रपति बारहेम सालेह के साथ दो बैठकें की हैं। इस बैठक का मकसद इराक में ईरानी प्रभाव को कम करने के वाशिंगटन के एजेंडा को आगे ले जाने के लिए किये जाने की संभावना है।

नई परिस्थितियों में बरज़ानी की भूमिका वाशिंगटन के लिए एक प्रमुख वार्ताकार की हो जाती है, जिसकी मुख्य भूमिका उत्तरी सीरिया में कुर्द क्षेत्रों की स्वायत्तता को और मजबूती प्रदान करने में होने जा रही है। वास्तव में यदि वाशिंगटन के दृष्टिकोण से देखें तो इराकी हिस्से वाला कुर्दिस्तान अभी भी स्थिरता का नायाब नमूना बना हुआ है और इस क्षेत्र में खुली अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के लिए एक मजबूत चट्टान की भूमिका अदा करने वाली हो सकती है। इराकी कुर्दिस्तान के माध्यम से पूर्वी सीरिया से तेल निकासी भी कहीं अधिक उपयोगी हो सकती है।

हाल-फिलहाल के लिए कार्यवाहक प्रधान मंत्री के पद पर अब्दुल-महदी के बने रहने से बग़दाद की स्थिति बदहाल बनी हुई है, और वह इस हालत में नहीं है कि उत्तरी कुर्दिस्तान क्षेत्र पर अपना किसी प्रकार का दबाव डाल सके। इसके अलावा सालेह भी, जो खुद एक जनजातीय कुर्द हैं, के बारे में मशहूर है कि वर्तमान राजनीतिक शून्यता को देखते हुए अमेरिकियों के प्रति स्वंय को उपयोगी साबित करने को लेकर वे बेहद उत्सुक हैं।

शिया दलों के बीच कुल मिलकर चल रही इस अव्यवस्था और उनमें से कईयों के साथ अमेरिकी डीलिंग को देखते हुए, शिया समुदाय के सामने कोई ऐसा केंद्र बिंदु नजर नहीं आ रहा है, जिसके माध्यम से जो अव्यक्त अमेरिका विरोधी भावनाओं को एकजुट किया जा सके। यहीं पर सोलेमानी की कमी को बेहद शिद्दत से महसूस किया जा रहा है। उसने पूरे क्षेत्रों में तमाम जातीय समूहों की बाधाओं को परे हटाकर अपना वृहद जाल बुना था और अपने इराकी सहयोगियों के भरोसे और विश्वास को जीतने में कामयाबी हासिल की थी। और कुछ हो न हो लेकिन जो भरोसा टूट चुका है उसे एक बार फिर से जोड़ने में समय लगने वाला है।

बहुत कुछ शुक्रवार को बगदाद में "मिलियन स्ट्रांग मार्च" की सफलता पर निर्भर करेगा। इस मार्च का आह्वान मौलाना अल-सदर की ओर किया गया है, जो वैसे तो राष्ट्रवादी हैं लेकिन हाल ही में उन्होंने खुद को ईरान के साथ और अधिक करीब से जोड़ लिया है। रैली का उद्द्येश्य हाल के महीनों में अमेरिका-समर्थित विरोध प्रदर्शनों को कमतर करने और हाशिए पर धकेल देने के लिए किया गया है, जिसका उद्देश्य इराक में ईरान के प्रभाव को कम करना रहा था।

सबसे बड़ा सवाल तो उस अर्धसैनिक बल पर बना हुआ है, जिसकी कमान अभी तक शक्तिशाली शिया मिलिशिया नेता अबू महदी अल-मुहन्दिस (जो उसी अमेरिकी हमले में मारा गया था, जिसमें सोलेमानी को निशाना बनाया गया था) के हाथ में थी। पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस (पीएमएफ) के नाम से मशहूर इस अर्धसैनिक बल में 100000 की संख्या में मजबूत सैन्य बल है, जिसमें कुछ पचास अलग-अलग मिलिशिया सम्बद्ध हैं, जिनमें से सभी तो नहीं लेकिन अधिकतर शिया लड़ाके हैं। जिसके भीतर वास्तव में ईरान-गुटों की संख्या अल्पसंख्यक वाली स्थिति में होने की संभावना है। पीएमएफ के इन प्रतिस्पर्धी गुटों के बीच में एक-दूसरे के खिलाफ संघर्ष का इतिहास रहा है जो कई प्रकार की निष्ठाओं के प्रति सामंती वचनबद्धता की वजह से है।

सोलेमानी की प्रत्यक्ष देख-रेख में अल-मुहन्दिस वह प्रमुख कर्ता-धर्ता था जिसने पीएमएफ के निर्माण की आधारशिला रखी थी। ईरान के लिए यह लगभग असंभव सा है कि वह इन दो बेजोड़ हस्तियों के मुकाबले एक बार फिर से इराक में रेजिस्टेंस फ्रंट के लिए नेतृत्व खड़ा कर पाने में समर्थ हो सके। क्या पीएमएफ एक शक्तिशाली राजनीतिक गुट बना रह सकेगा या उसके सामने भविष्य के गर्त में हिंसक ताकतों के शिकार बन जाने का खतरा है? एक प्रभावशाली केंद्रीय कमांड की गैरमौजूदगी में, ईरान समर्थक पीएमएफ के भीतर और अल-सद्र हिस्सों के बीच विवादास्पद उत्तराधिकार की लड़ाई भी फूट सकती है।

इराक में जिस प्रकार की अराजकतापूर्ण स्थिति पैदा होती जा रही है, उससे ऐसा लगता है कि इराकी राजनीति के लिए यथास्थिति की ओर लौटना अब नामुमिकन हो चुका है। ऐसा भी जान पड़ता है कि अमेरिका की भी यही मंशा रही है। अमेरिका द्वारा समर्थित प्रदर्शनकारियों ने प्रधान मंत्री पद के नए उम्मीदवारों के नामों को खारिज कर दिया है और वे संप्रदायों के आधार पर विभाजित, भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था के खात्मे की मांग कर रहे हैं। इसने एक नए प्रधान मंत्री के चयन को अनंतकाल के लिए जटिल बना दिया है। यह गतिरोध अमेरिका के मनमुताफिक है क्योंकि वर्तमान में जो राजनीतिक व्यवस्था चल रही है उसमें दबदबा उन बदनाम भ्रष्ट दलों का है जो ईरान समर्थक है। यह दूसरी बात है कि यह ईजाद भी कब्जे की अवधि के दौरान वाशिंगटन के ही खुराफात का कमाल था।

इस बात का जोखिम बढ़ता जा रहा है कि कहीं इराकी राज्य के इस प्रकार से टूटकर बिखर जाने से कहीं एक बार फिर से इतिहास को न दोहरा दिया जाये। उस समय भी इसी प्रकार की अराजकतापूर्ण स्थितियां थीं, जिसने फरवरी 1963 में रमज़ान (रमदान) क्रांति को जन्म दिया था (बाथ पार्टी की इराकी विंग द्वारा सैन्य तख्तापलट), और जिसे कथित तौर पर अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) का समर्थन हासिल था। अगर इस प्रकार कोई परिणाम देखने को मिलते हैं तो निश्चित तौर पर ट्रम्प को ख़ुशी होगी।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

US Plotting Return of ‘Strongman’ in Iraq

Iraq
IRAN
USA
Donald Trump
Iraq-Iran Crisis

Related Stories

युवा श्रमिक स्टारबक्स को कैसे लामबंद कर रहे हैं

बढ़ती बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ इराक़ में विरोध प्रदर्शन, प्रमुख तेल रिफ़ाइनरी बंद

कट, कॉपी, पेस्ट: राष्ट्रवादी एजेंडे के लिए भारतीय खिलाड़ियों के सोशल मीडिया का इस्तेमाल

ट्रंप की विदाई के अंतिम मुहर के दिन ट्रंप समर्थकों ने किया अमेरिका को शर्मसार!

अमेरिकी नागरिक समाज समूह ने "प्रोटेक्ट द रिज़ल्ट" के लिए देशव्यापी प्रदर्शन की योजना बनाई

इराक़ः विरोध की सालगिरह के मौक़े पर हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे

अमेरिका में नस्लवाद-विरोध तेज़ होने के साथ प्रदर्शनकारियों पर हिंसा बढ़ी

अमेरिका को जो चिंगारी जला रही है उसका बारूद सदियों से तैयार होते आ रहा है

Black Lives Matter और अन्य अधिकार  संगठनों ने प्रदर्शनकारियों पर हमले के लिए ट्रंप पर मुक़दमा दायर किया

जॉर्ज फ़्लॉयड हत्या मामला : चारों आरोपी पुलिस अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज


बाकी खबरें

  • अन्न महोत्सव: मुफ़लिसी का मंगलगान, सरकारी खर्च पर हिंदुत्व प्रचार
    असद रिज़वी
    अन्न महोत्सव: मुफ़लिसी का मंगलगान, सरकारी खर्च पर हिंदुत्व प्रचार
    29 Aug 2021
    “उतना ही खाद्यान्न मुफ़्त मिला जितना पहले मिलता आ रहा था। मुफ़्त सिर्फ़ एक थैला मिला है, जो पहले नहीं मिला था। थैला देने के बदले सरकार अगर मुफ़्त खाद्यान्न बढ़ा कर देती तो ज़्यादा अच्छा होता।”
  • डेंगू की चपेट में बनारस, इलाज के लिए नहीं मिल रहे बिस्तर
    विजय विनीत
    डेंगू की चपेट में बनारस, इलाज के लिए नहीं मिल रहे बिस्तर
    29 Aug 2021
    बनारस में डेंगू लोगों की जिंदगियां लील रहा है। जान गंवाने वाले प्रमुख लोगों में पुलिस इंस्पेक्टर राम विलास यादव, भोजपुरी कलाकार बबलू रिमिक्स और बनारसी इश्क संगठन के सदस्य सुमंत कुमार साहनी शामिल हैं।
  • इतिहास-भूगोल से 'खेलती' भाजपा और सेल्फ़-गोल एक्सपर्ट कांग्रेस
    न्यूज़क्लिक टीम
    इतिहास-भूगोल से 'खेलती' भाजपा और सेल्फ़-गोल एक्सपर्ट कांग्रेस
    28 Aug 2021
    केंद्र की मौजूदा भाजपा सरकार और संघ-शिक्षित दर्जनों संगठनों की देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से चिढ़ और नफ़रत किसी से छुपी नहीं है
  • खोज ख़बरः किसान का सिर फोड़कर, ख़ून बहाकर, ख़ुश हुई ‘सरकार’
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बरः किसान का सिर फोड़कर, ख़ून बहाकर, ख़ुश हुई ‘सरकार’
    28 Aug 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने हरियाणा के करनाल में पुलिसिया बर्बर लाठीचार्ज से लहूलुहान हुए भारत भाग्यविधाता की बात की। जिस तरह से करनाल के एक अधिकारी का वीडियो सामने आया है, जिसमें वह…
  • कटाक्ष: ये बेच दिया, वो बेच दिया का शोर क्यों है, भाई!
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: ये बेच दिया, वो बेच दिया का शोर क्यों है, भाई!
    28 Aug 2021
    और कुछ नहीं मिला तो विपक्षी बेचारे मुद्रीकरण के पीछे पड़ गए। कह रहे हैं कि यह कोई मुद्रीकरण-वुद्रीकरण नहीं है। बस मोदी जी ने सेल का नाम बदल दिया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License