NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तर बंगाल में विस्थापन के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ 40000 से ज़्यादा आदिवासी
सिक्किम-बंगाल रेलवे कॉरिडोर के बनाये जाने की कार्यवाही में हाल में आयी तेज़ी से 40,000 से ज़्यादा आदिवासियों की 24 बस्तियों पर आपदा आन पड़ी है , ये सभी बस्तियाँ रेलवे रूट पर स्थित हैं I
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Apr 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
bengal

सिक्किम-बंगाल रेलवे कॉरिडोर के बनाये जाने की कार्यवाही में हाल में आयी तेज़ी से 40,000 से ज़्यादा आदिवासियों की 24 बस्तियों पर आपदा आन पड़ी है , ये सभी बस्तियाँ रेलवे रूट पर स्थित हैं I इस पूरे इलाके में करीब 165 बस्तियां हैं जिसमें से 24 इस रूट की ज़द में सीधे तौर पर आयेंगी I

यहाँ रहने वालों के पास ज़मीन के आधिकारिक पट्टे नहीं है क्योंकि इन्हें अधिकारिक तौर पर ये ज़मीन नहीं दी गयी है I ये इसीलिए हुआ है क्योंकि Gorkha Territorial Administration (GTA) और सिक्किम सरकार ने आदिवासियों को जंगल की ज़मीनों के आधिकारिक पट्टे देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है, जबकि इन ज़मीनों पर आदिवासी सैंकड़ों सालों से रह रहे हैं I

Forest Right Act 2006 ने उन लोगों को जंगल की ज़मीन पर रहने और खेती करने का अधिकार दिया है जो 2005 से पहले से वहाँ बसे हुए हैं , ये Act उन्हें ग्राम सभा बनाने का भी हक देते हैं I

सिलिगुडी प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस में कोपिश ‘बोनोबस्ती’ के निवासी लीलाकुमार गुरुंज ने कहा कि इस परियोजना को पहली बार 2009 में परिकल्पित किया गया था पर उस समय की राज्य सरकार ने आदिवासियों के डर पर ध्यान दिया था I पहले के GTA प्रशासन ने इस रेल लाइन को “No Objection” देने से मना कर दिया था I

गुरुंज ने कहा “हम चाहते हैं कि रेलवे लाइन बने पर हमारी ज़मीन और आजीविका की कीमत पर नहीं I”

प्रेस कांफ्रेंस में निवासियों ने अपने डर ज़ाहिर किये और ये चेतावनी दी कि अगर Forest Act 2006 के अंतरगत उन्हें ज़मीन के पट्टे नहीं दिए गए तो इसके घातक परिणाम होंगे I इसी के बाद पुनर्वास के कार्य को शुरू किया जा सकता है और रेलवे पटरियों को बिछाने का कार्य भी शुरू किया जा सकता है I ज़्यादातर आदिवासी ग़रीबी रेखा से नीचे हैं I

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए सिलीगुड़ी के मेयर अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि ‘बोनोबस्तियों’ के निवासियों के पुनर्वास की माँग एक दम जायज़ है और वामपंथी इसका समर्थन करते हैं , उन्होंने ये भी कहा कि आदिवासियों को वहाँ से बिना पुनर्वास के हटाना एक गुनाह है I उन्होंने भी ये कहा कि आदिवासी इस इलाके में अगर सैंकड़ों सालों से नहीं तो कई दशकों से तो रह ही रहे हैं I

उन्होंने कहा “TMC और GJM के द्वारा इस मामले की अनदेखी के कारण उन्हें Forest Act 2006 के अंतर्गत ज़मीन के पट्टे नहीं मिले हैं जो अपने आप में कानन का उल्लंघन है I Railway Project के दिशानिर्देशों के अनुसार ज़मीन को राज्य सरकार के द्वारा लिया जाना है और फिर इसे Railway को दिया जाना है I अगर बोनोबस्ती के निवासियों को ठीक ढंग से पुनर्वासित नहीं किया जाता तो ये राज्य सरकार की गलती होगी I हम ये किसी हाल में नहीं होने देंगे I बोनोबस्ती के निवासियों और वामपंथियों द्वारा आन्दोलन चलाये जायेंगे जिससे हाशिये पर खड़े इन लोगों को ठीक तरीके से पुनर्वासित किया जा सके I”

उन्होंने आगे कहा  “न हम और न ही वहाँ के निवासी बंगाल सिक्किम रेल लिंक के बनाये जाने के खिलाफ हैं , पर ये हज़ारों गरीब परिवारों को बर्बाद किये जाने की कीमत पर नहीं होना चाहिए, जो प्रकृति के साथ  दशकों से समन्वय बनाकर रह रहे हैं I”

ये याद करना होगा कि GTA के पूर्व अध्यक्ष बिमल गुरुंज थे जो कि ममता बेनर्जी के खिलाफ बोलने पर भगोड़े घोषित कर दिए गए हैं I अब इस संस्था के अध्यक्ष अब बिनय तमांग हैं जो ममता के करीबी हैं और GJM के नेता हैं I इन्होने ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की सलाह के बाद ये निर्णय लिया जिससे आदिवासियों को अब प्रशासन , अदालत और मीडिया के पास जाना पड़ रहा है I

West Bengal
Tribal
tribals protest
indian railways

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

प. बंगाल : अब राज्यपाल नहीं मुख्यमंत्री होंगे विश्वविद्यालयों के कुलपति

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

ट्रेन में वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली छूट बहाल करें रेल मंत्री: भाकपा नेता विश्वम

मछली पालन करने वालों के सामने पश्चिम बंगाल में आजीविका छिनने का डर - AIFFWF

केंद्र का विदेशी कोयला खरीद अभियान यानी जनता पर पड़ेगा महंगी बिजली का भार

कोयले की किल्लत और बिजली कटौती : संकट की असल वजह क्या है?

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान

बढ़ती हिंसा और सीबीआई के हस्तक्षेप के चलते मुश्किल में ममता और तृणमूल कांग्रेस

बलात्कार को लेकर राजनेताओं में संवेदनशीलता कब नज़र आएगी?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन
    20 May 2022
    मुंडका, नरेला, झिलमिल, करोल बाग से लेकर बवाना तक हो रहे मज़दूरों के नरसंहार पर रोक लगाओ
  • रवि कौशल
    छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस
    20 May 2022
    प्रचंड गर्मी के कारण पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे गेहूं उत्पादक राज्यों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।
  • Worship Places Act 1991
    न्यूज़क्लिक टीम
    'उपासना स्थल क़ानून 1991' के प्रावधान
    20 May 2022
    ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा विवाद इस समय सुर्खियों में है। यह उछाला गया है कि ज्ञानवापी मस्जिद विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। ज्ञानवापी मस्जिद के भीतर क्या है? अगर मस्जिद के भीतर हिंदू धार्मिक…
  • सोनिया यादव
    भारत में असमानता की स्थिति लोगों को अधिक संवेदनशील और ग़रीब बनाती है : रिपोर्ट
    20 May 2022
    प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद की रिपोर्ट में परिवारों की आय बढ़ाने के लिए एक ऐसी योजना की शुरूआत का सुझाव दिया गया है जिससे उनकी आमदनी बढ़ सके। यह रिपोर्ट स्वास्थ्य, शिक्षा, पारिवारिक विशेषताओं…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना
    20 May 2022
    हिसार के तीन तहसील बालसमंद, आदमपुर तथा खेरी के किसान गत 11 मई से धरना दिए हुए हैं। उनका कहना है कि इन तीन तहसीलों को छोड़कर सरकार ने सभी तहसीलों को मुआवजे का ऐलान किया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License