NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश: निजीकरण के ख़िलाफ़ 27 जिलों में सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन 
आंदोलन करने वाले कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण के आदेश को वापस नहीं लिया गया तो वह सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के घरों का घेराव करेंगे।

न्यूजक्लिक रिपोर्ट
12 Jul 2019
मेरठ में सफाई कर्मचारियों का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के 27 जिलों में शुक्रवार को सफाई कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध और दूसरी मांगों को लेकर मार्च निकाला है। उत्तर प्रदेश म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन में निजीकरण के खिलाफ सफाई कर्मचारियों के इस आंदोलन का नेतृत्व अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ और भीम आर्मी ने किया।

गौरतलब है कि म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन के इस कदम से सैकड़ों की संख्या में सफाई कर्मचारी बेरोजगार हैं। प्रदर्शन के दौरान सफाई कर्मचारियों ने निजीकरण के आदेश को वापस लेने की मांग की। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग बैनर और पोस्टर लेकर नारे लगाते नजर आए। 

आपको बता दें कि सफाई कर्मचारियों के साथ बीएसएनएल और भारतीय रेलवे के कर्मचारियों ने भी अपने अपने क्षेत्र में निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने उचित वेतन मिलने समेत दूसरे तमाम समस्याओं से निजात दिलाए जाने की मांग की। 

आंदोलन करने वाले कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण के आदेश को वापस नहीं लिया गया तो वह सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के घरों का घेराव करेंगे। अगर इसके बाद भी उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह विधानसभा भवन का घेराव करेंगे और भवन में सफाई का काम स्थगित कर देंगे। 

safai 1.jpg

मेरठ में सफाई कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता सुशील गौतम ने न्यूज़क्लिक को बताया,'राज्य सरकार पूरे प्रदेश में सफाई कर्मचारियों को ठेके पर रखने का काम कर रही है। निजीकरण की इस व्यवस्था के खिलाफ सिर्फ सफाई कर्मचारी ही नहीं बल्कि रेलवे और बीएसएनएल के कर्मचारियों ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया है। उत्तर प्रदेश में सफाई कर्मचारी 6000 रुपये के अनुबंध पर रखे जा रहे हैं। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित राशि से बहुत कम है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित राशि 18 हजार रुपये हैं लेकिन राज्य सरकार को सफाई कर्मचारियों की परवाह नहीं है।' 

सुशील गौतम ने आगे बताया, 'हाल ही में मुजफ्फरनगर जिले में एक प्राइवेट कंपनी आरके कांट्रैक्टर द्वारा दलित समुदाय की 310 महिलाएं अनुबंध पर रखी गईं। तीन महीने बाद कांट्रैक्टर सभी का पैसा लेकर भाग गया। सफाई कर्मचारियों को 48 लाख से ज्यादा रुपये वेतन का बकाया है। जब सफाई कर्मचारी जिले के डीएम से मिलने गए तो उन्होंने कहा कि आपको प्राइवेट कंपनी में काम की सलाह किसने दी। जबकि सफाई का सारा ठेका प्राइवेट कंपनियों को दिया जा रहा है।'

गौतम कहते हैं कि ठेके पर रखे गए कर्मचारियों को सुरक्षा के सारे उपकरण भी मुहैया नहीं कराए जाते हैं। जब सेना का जवान सरहद की सुरक्षा करते हुए मर जाता है तो उसे शहीद का दर्जा मिलता है लेकिन नाले की सफाई करते वक्त अगर कोई सफाई कर्मचारी मर जाता है तो उसको कोई पूछता नहीं है। 

 

Sanitation Workers
Privatisation of Sanitation Workers
Privatisation of Railways
Privatisation of BSNL
meerut
Safai Karamchari
Bhim Army

Related Stories

दिल्ली सरकार के विश्वविद्यालय के सफ़ाई कर्मचारियों ने कपड़े उतार कर मुख्यमंत्री आवास पर किया प्रदर्शन!

चौथे दिन भी बिहार के सफ़ाई कर्मियों की हड़ताल जारी, बढ़ते जा रहे कूड़े के ढेर

निजीकरण के खिलाफ उतरेंगे बीएसएनएल के कर्मचारी, दिल्ली में देंगे 3 दिन का धरना

उत्तराखंड में स्वच्छता के सिपाही सड़कों पर, सफाई व्यवस्था चौपट; भाजपा मांगों से छुड़ा रही पीछा

तमिलनाडु: अगर पग़ार में देरी का मसला हल नहीं हुआ तो प्रदर्शन जारी रखेंगे सफ़ाईकर्मी

इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वीमेन में सफ़ाई कर्मचारियों का आंदोलन जारी

सीएए-एनआरसी-एनपीआर के खिलाफ बहुजन-वंचित संगठनों का 'दिल्ली चलो' आंदोलन

सक्रिय राजनीति में कितना सफल होंगे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर?

भारत बंद से पहले चंद्रशेखर का विरोध मार्च, कहा-किसी को आरक्षण ख़त्म नहीं करने देंगे

भीम आर्मी के प्रमुख ने 23 फरवरी को भारत बंद का आह्वान किया


बाकी खबरें

  • loksabha
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संसद में चर्चा होना देशहित में- मोदी, लेकिन कृषि क़ानून निरस्त करने का बिल बिना चर्चा के ही पास!
    29 Nov 2021
    सरकार की कथनी-करनी का फ़र्क़ एक बार फिर तुरंत देश के सामने आ गया। आज सुबह संसद सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से कहा कि संसद में चर्चा होना देशहित में है और सरकार हर सवाल का जवाब…
  • TN
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु इस सप्ताह: राज्य सरकार ने सस्ते दामों पर बेचे टमाटर, श्रमिकों ने किसानों के प्रति दिखाई एकजुटता 
    29 Nov 2021
    इस सप्ताह, तमिलनाडु ने 52,549 करोड़ रूपये की 82 औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सभी क्षेत्रों के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये। इसके साथ ही सरकार ने थूथुकड़ी, नागापट्टिनम और…
  • alok dhanwa
    अनिल अंशुमन
    ‘जनता का आदमी’ के नाम ‘जनकवि नागार्जुन स्मृति सम्मान’: नए तेवर के कवि आलोक धन्वा हुए सम्मानित
    29 Nov 2021
    यह सम्मान 2020 में ही दिल्ली में नागार्जुन जी के स्मृति दिवस पर दिया जाना था। लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह संभव नहीं हो सका। इसलिए महामारी प्रकोप के कम होते ही यह सम्मान आलोक धन्वा के प्रिय शहर…
  • Assam
    संदीपन तालुकदार
    असम: नागांव ज़िले में स्वास्थ्य ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद कोविड मरीज़ों को स्थानांतरित किया गया
    29 Nov 2021
    महामारी ने स्वास्थ्य सुविधा संकट की परतें खोलकर रख दी हैं और बताया कि कैसे एम्स की सुविधा होने पर नागांव बेहतर तरीक़े से महामारी का सामना कर सकता था।
  • Bahgul River
    तारिक़ अनवर
    यूपी के इस गाँव के लोग हर साल बांध बना कर तोड़ते हैं, जानिए क्यों?
    29 Nov 2021
    हालांकि सरकार ने पिछले साल एक स्थायी जलाशय बनाने के लिए 57.46 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी, लेकिन इस परियोजना को अभी तक अमल में नहीं लाया गया है और इस साल भी मिट्टी से बांध बनाने की प्रक्रिया…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License