NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश: सरकार के फ़रमान से ग़ुस्साए ठेका कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के 32 सरकारी अस्पतालों में ई-हास्पिटल परियोजना के तहत डेटा ऑपरेटर एवं सीनियर सपोर्ट के पद पर 2018 से लगभग 400 कर्मचारी कार्य कर रहें है। उन्हें नोटिस भेजकर कहा गया है कि उनकी सेवाएँ 30 जून से समाप्त की जा रही हैं। इस फ़रमान से ग़ुस्साए कर्मचारियों ने सोमवार से सभी 32 अस्पतालों में विरोध प्रदर्शन किया।
मुकुंद झा
27 Jun 2019
Hospitals

प्रधानमंत्री के डिजिटिल इंडिया कैम्पेन में उत्तर प्रदेश के 32 सरकारी अस्पतालों में ई-हास्पिटल परियोजना के तहत डेटा ऑपरेटर एवं सीनियर सपोर्ट के पद पर 2018 से लगभग 400 कर्मचारी कार्य कर रहें है। यह कर्मचारी अस्पताल की 24 घंटे इमरजेंसी सेवा, ओपीडी में पर्चा बनाने, जांच शुल्क जमा करने, ऑनलाइन भर्ती एवं डिस्चार्ज समेत कई अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी करते हैं।
 
लेकिन अब अचानक उन्हें नोटिस भेजकर कहा गया है कि उनकी सेवाएँ 30 जून से समाप्त की जा रही हैं। इस फ़रमान से ग़ुस्साए कर्मचारियों ने सोमवार से सभी 32 अस्पतालों में विरोध प्रदर्शन किया। कई अस्पतालों में तो कुछ घंटो के लिए कार्य का बहिष्कार भी किया गया था।

इसके आलावा कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री मोदी समेत आलाधिकारियों से ट्विटर और पत्रों के माध्यम से अपनी नौकरी बचाने की गुहार लगाई है। मगर अभी तक कोई स्थाई निर्णय नहीं आया है। हालांकि एनएचएम ने सभी कर्मचारियों को 30 जून को हटाने का आदेश दिया, उस फ़ैसले को बढ़ा कर अब 31 जुलाई कर दिया गया है लेकिन उसके बाद क्या होगा ये किसी को भी नहीं पता है।

सरकार ने कहा है कि मानव संसाधन की जगह चिकित्सालय में तैनात पैरामेडिकल के लोगों सें काम लिया जाए। इस आदेश को लेकर पैरामेडिकल कर्मचारियों में काफ़ी नाराज़गी है। जबकि इन कर्मचारियों ने कहा है कि यह पूरी ज़िम्मेदारी से अपना कार्य कर रहे हैं।

ई-हास्पिटल परियोजना के तहत सिल्वर टच कंपनी के द्वारा ब्लॉक स्तर पर इन ठेका कर्मियों की तैनाती हुई थी। कंपनी के बंद हो जाने के बाद उन्हीं कर्मियों से सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत काम करा रही है। कई माह से इन कर्मियों का मानदेय भुगतान नहीं हुआ है। मानदेय भुगतान व स्थायी नौकरी की मांग को लेकर ठेका कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को लिखा भी है।

@PMOIndia @PMOIndia @drharshvardhan @myogiadityanath #abpnewshindi @Knewsindia @ndtvindia #Ehospitalnhm @amitabh2 @News18UP@Mahabahas @kpmaurya1 @RamNathGovindIN pic.twitter.com/bXWXzc0AYk

— RAHUL Kumar (@RAHULKu06945295) June 27, 2019

राहुल जो इस योजना के तहत 2018 से ही कार्य कर रहे थे उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, "नौकरी जाने से उनके परिवार का गुज़ारा कैसे चलेगा। संविदा कर्मचारियों ने पिछले कई दिनों से लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट कर नौकरी बचाने की गुहार लगा रहे हैं। हमें पीएम के हस्तक्षेप का इंतज़ार है। कर्मचारियों ने लिखा कि डिजिटल इंडिया के तहत प्रधानमंत्री लोगों को रोज़गार देने की बात कहतें है दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के अफ़सर संविदा कर्मचारियों को नौकरी से हटाकर उन्हें बेरोज़गार करने में जुटे है। इस दोहरी नीति से युवाओं का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है।"

ठेका कर्मचारियों का शोषण काफ़ी समय से जारी
 
इन ठेका कर्मियों को महज़ 10 हज़ार रुपये वेतन मिलता है। ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि जब वो लोग कम्पनी के तहत काम करते थे तो उन्हें कभी भी पूरा वेतन नहीं दिया जाता था। इस साल फ़रवरी से जब वे एनएचएम के तहत काम करने लगे तब से उन्हें 10 हज़ार मिलने लगे नहीं तो 6 से 7 हज़ार ही मिलता था।

इसके आलावा कम्पनी ने उनसे पीएफ़ का पैसा तो लिया लेकिन उसे पीएफ़ में जमा नहीं कराया। राहुल ने बताया कि उन्हें कहा गया था कि अब उन लोगों को 14 हज़ार रुपये मासिक दिए जाएंगे लेकिन अब ये फ़रमान सुनकर वो परेशान हैं।
 
कर्मचारियों का कहना है कि मिशन निदेशक द्वारा भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि बजट न मिलने के कारण प्रदेश के 32 चिकित्सालयों में कार्यरत कर्मचारियों को सेवा विस्तार नहीं किया जा सकता।

कर्मचारियों का कहना है कि सरकारों को हम कर्मचारियों को देने के लिए पैसा नहीं है लेकिन योग दिवस और कुंभ पर हज़ारों करोड़ ख़र्च किए जाते हैं। 

उत्तर प्रदेश वही राज्य है जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में 100 से ज़्यादा बच्चों की मौत हुई थी लेकिन लगता है सरकार उससे कुछ सबक लेने को तैयार नहीं है। क्योंकि स्वस्थ्य सेक्टर में जहाँ और कर्मचारियों की ज़रूरत है, सरकार उन्हें वहाँ से निकाल रही है।

Contract Workers
Contractual Worker
Narendra modi
Uttar pradesh
E-Hospitals

Related Stories

बढ़ती नफ़रत के बीच भाईचारे का स्तंभ 'लखनऊ का बड़ा मंगल'

लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

सद्भाव बनाम ध्रुवीकरण : नेहरू और मोदी के चुनाव अभियान का फ़र्क़

एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता

हम भारत के लोगों की असली चुनौती आज़ादी के आंदोलन के सपने को बचाने की है

हम भारत के लोग : इंडिया@75 और देश का बदलता माहौल

हम भारत के लोग : हम कहां-से-कहां पहुंच गये हैं

संविधान पर संकट: भारतीयकरण या ब्राह्मणीकरण

झंझावातों के बीच भारतीय गणतंत्र की यात्रा: एक विहंगम दृष्टि


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    यूपी: दाग़ी उम्मीदवारों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी, लेकिन सच्चाई क्या है?
    19 Jan 2022
    सत्ताधारी बीजेपी खुद को जहां सबसे ज्यादा स्वच्छ और ईमानदार छवि वाली पार्टी तो वहीं विरोधियों को गुंडाराज वाली पार्टी बता रही है। हालांकि अगर आंकड़ों पर नज़र डालें तो इनके दावों से उलट 'हम्माम में सब…
  • Cows
    गौरव गुलमोहर
    यूपी गौशाला पड़ताल: तेज़ ठंड और भूख से तड़प-तड़प कर मर रही हैं गाय
    19 Jan 2022
    झाँसी की घुघुआ गौशाला में पिछले 10 दिन में लगभग 20 से अधिक गायें भूख और ठंड से मर चुकी हैं। रोज 2 से 3 गायें मर रही हैं। ज़िंदा गायों की हालत भी कुछ अच्छी नहीं है।
  • BIHAR IN UP
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: सियासत की पटरी पर आमने-सामने खड़ा हो गया बिहार का डबल इंजन!
    19 Jan 2022
    बिहार के राजनीतिक दिग्गज अब यूपी में दम दिखाने के लिए तैयार हैं, एक ओर जहां जेडीयू ने बीजेपी से अलग बगावती तेवर अपना लिए हैं, वहीं मुकेश साहनी और चिराग पासवान ने भी ताल ठोक दी है।
  • women
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु: महिलाओं के लिए बनाई जा रही नीति पर चर्चा नाकाफ़ी
    19 Jan 2022
    मसौदा नीति में बढ़ते लिंगानुपात को संबोधित किये जाने की आवश्यकता सहित घरेलू कार्यों में लैंगिक विषमता को अनुमानित करने के लिए एक सर्वेक्षण करने, एकल महिला मुखिया एवं वंचित परिवारों के लिए सामाजिक…
  • mayawati
    कृष्ण सिंह
    बसपा के बहुजन आंदोलन के हाशिये पर पहुंचने के मायने?
    19 Jan 2022
    जिस बहुजन आंदोलन और उसकी राजनीति का कांशीराम ने सपना देखा और उसे हक़ीक़त में बदला था, वह आज गहरी निराशा और बिखराव के रास्ते पर है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License