NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश : स्वच्छ भारत अभियान के क्रियान्वन में दिखा भ्रष्टाचार
उत्तर प्रदेश में अधिकांश गाँवों को खुले में शौच मुक्त करने की घोषणा करने में सरकार की जल्दबाज़ी से प्रतीत होती है कि भले ही अधिकांश मामलों में या तो शौचालयों का निर्माण नहीं हुआ और या फिर उन्हें खराब सामग्री से बनाया गया है.
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Dec 2017
Translated by महेश कुमार
swacch bharat

मेरठ: चूंकि केंद्र सरकार भ्रष्टाचार पर हमला करने का दवा करती है,  लेकिन स्वच्छ भारत अभियान के तहत हुई गतिविधियों के कार्यान्वयन की जब हम समीक्षा करते हैं तो इनमें स्पष्ट अनियमितताओं का पता चलता है.

स्वच्छ भारत अभियान, जोकि नरेंद्र मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, इसके तहत गाँवों में लोगों के घरों में शौचालयों का निर्माण किया जाना था, वहाँ जहाँ पहले से शौचालय न हो, ताकि उन गांवों को खुले में शौच मुक्त (ओपन डेफ्केशन फ्री) घोषित किया जा सके.

लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कईं जिलों जैसे सहारनपुर, मेरठ, बुलंदशहर और अन्य जिलों के वरिष्ठ जिला स्तर के अधिकारियों की जांच में पता चला कि गांव में प्रमुखों एवं अधिकारियों की गठजोड़ की वजह से शौचालयों के निर्माण से संबंधित परियोजना में भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों सामने आये हैं.

विभिन्न जिलों में विकास अधिकारियों की जांच में यह पता चला है कि मेरठ, सहारनपुर, बुलंदशहर और अन्य जिलों में कई जगह में तो शौचालय केवल पेपर पर ही बनाए हैं. कुछ मामलों में तो, स्थानीय अधिकारियों और गांव के प्रमुखों ने गावों को ओपन डेफकेशन फ्री की घोषणा करने में बहुत ही जल्दबाजी दिखाई है. जबकि इन गावों में शौचालयों का निर्माण पूरा भी नहीं हुआ था. और इन्हें खुले में शौच मुक्त करार दे दिया गया.

सहारनपुर के तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी दीपक मीणा की जांच में पाया गया कि ओ.डी.एफ. परियोजना के कार्यान्वयन में गांव के प्रमुख भी भ्रष्टाचार में शामिल थे. ओ.डी.एफ. परियोजना में जिन जगहों में भ्रष्टाचार पाया गया इनमें छपरेदी, बेहरामपुर, नसरूलगढ़, हाजीपुर, नागला नसीराबाद और ढोला हैदी जैसे गांव शामिल हैं. इन गांवों ने गाँव की जमीन पर किसी भी शौचालय के निर्माण के बिना निर्माण कार्य के लिए धन का दावा पेश कर किया. जिला अधिकारियों ने उनके द्वारा प्राप्त किए गए पैसे की वसूली के लिए गांव के प्रमुखों को वसूली-नोटिस भेज दिए हैं. श्री मीणा की जांच रिपोर्ट ने ओ.डी.एफ. परियोजना के कार्यान्वयन में नियमों का उल्लंघन पाया. कुछ जगहों पर निर्माण कार्य में ख़राब किस्म की सामग्री का इस्तेमाल भी किया गया  और कुछ स्थानों पर तो जमीन पर कोई शौचालय ही अस्तित्व में नहीं आया. हालांकि, सरकारी कार्रवाई के डर के कारण, सी.डी.ओ. रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद कुछ गांवों में शौचालयों का निर्माण किया गया है.

सहारनपुर के जिला जनसंपर्क अधिकारी सतीश कुमार के अनुसार, भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं के लिए इकत्तीस गांवों की जांच हो रही है.

भ्रष्टाचार के इसी तरह के मामले मेरठ में भी सामने आए हैं. मेरठ के डिवीजनल कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने आदेश दिया है कि गांव के प्रमुख सहित, परियोजना के सभी अधिकारियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज की जाएगी, उन्होंने यह आदेश मखरा ब्लॉक के राछौती गांव में शौचालयों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली खराब सामग्री से आहत होकर दिया, उन्होंने ग्राम पंचायत अधिकारी, पंचायत और ब्लॉक विकास अधिकारी के सहायक विकास अधिकारी को पिछले महीने भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त पाए जाने के बाद ब्लॉक विकास अधिकारी और पंचायत के सहायक विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया.

ग्राम प्रधान ने ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से गठबंधन कर राकौती गांव को ओ.डी.एफ. घोषित कर दिया था. उन्होंने दावा किया था कि 444 शौचालयों का निर्माण किया जा चूका है. लेकिन आधिकारिक जांच में पता चला कि कुल 444 शौचालयों में से  केवल 80 शौचालयों का ही निर्माण किया गया था. और 83 शौचालयों में निर्माण कार्य अभी चल ही रहा था. इसके अलावा, 80 शौचालयों के निर्माण में खराब गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया गया था. बाकी बचे 281 शौचालयों में तो अभी काम भी शुरू नहीं हुआ था.

इसी तरह, बुलंदशहर जिले के कई गांवों से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों की सूचना मिली है. जिले के लगभग 192 गांवों को ओ.डी.ए.फ घोषित किया गया है. लेकिन ग्रामीणों द्वारा की गयी शिकायतों के आधार पर पता चला कि बिना कार्य को पूरा किये और मिलीभगत से भ्रष्टाचार के जरिए बड़ी ही जल्दी गावों को ओ.डी.ऍफ़. घोषित कर दिया. उद्धरण के लिए आप सिकंदराबाद उप-डिवीज़न के किशनपुर गांव पर नज़र डाल सकते हैं.

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जब ग्रामीणों के आधे से ज्यादा घरों में शौचालय ही नहीं हैं तो अधिकारियों ने गांव को ओपन डेफकेशन फ्री घोषित कैसे कर दिया. इस भ्रष्टाचार की वजह से गाँव के लोगों को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है जबकि गांव को कागज पर ओ.डी.एफ. घोषित किया जा चुका है. जिला जनसंपर्क अधिकारी अमरजीत सिंह ने न्यूज़क्लिक को बताया कि गांव को ओ.डी.एफ. घोषित करने वाले पंचायत स्तर के अधिकारियों से एक रिपोर्ट मांगी गई है.

सिंह ने कहा, कि अगर "ग्रामीणों के आरोपों सही पाए गए तो निश्चित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी."

इसी तरह चंगरावली गाँव में ग्राम पंचायत अधिकारी शेरपाल सिंह को गाँव वालों की शिकायत के बाद निलंबित कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान परियोजनाओं के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं के बावजूद चिंग्रावली को ओ.डी.एफ. घोषित कर दिया. जांच से पता चला कि शौचालयों के निर्माण में घटिया सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ, और यही नहीं उन्होंने मृतक ग्रामीणों के नाम पर भी पैसा ले लिया. शौचालयों के निर्माण के लिए उन्होंने सरकार से दो बार पैसे भी लिए थे. शेरपाल सिंह के आचरण की जांच के लिए तीन प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम का गठन किया गया है.

इस तरह की घटनाओं की प्रवृत्ति से पता चलता है कि बड़े भ्रष्टाचार का छोटा सा नमूना है क्योंकि सरकार की मशीनरी मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए गावों को जल्दबाजी में ओ.डी.ऍफ़. घोषित करना चाहती है जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि गाँव वाले इन झूठी घोषणाओं के बाद खुले में शौच करने के लिए मजबूर है क्योंकि उनके घरों में शौचालय केवल कागज पर ही बनाए गए हैं

Swachchh Bharat Abhiyan
Narendra modi
Corruption
UP

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी सरकार के 8 साल: सत्ता के अच्छे दिन, लोगोें के बुरे दिन!
    29 May 2022
    देश के सत्ताधारी अपने शासन के आठ सालो को 'गौरवशाली 8 साल' बताकर उत्सव कर रहे हैं. पर आम लोग हर मोर्चे पर बेहाल हैं. हर हलके में तबाही का आलम है. #HafteKiBaat के नये एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार…
  • Kejriwal
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: MCD के बाद क्या ख़त्म हो सकती है दिल्ली विधानसभा?
    29 May 2022
    हर हफ़्ते की तरह इस बार भी सप्ताह की महत्वपूर्ण ख़बरों को लेकर हाज़िर हैं लेखक अनिल जैन…
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!
    29 May 2022
    गोडसे जी के साथ न्याय नहीं हुआ। हम पूछते हैं, अब भी नहीं तो कब। गोडसे जी के अच्छे दिन कब आएंगे! गोडसे जी का नंबर कब आएगा!
  • Raja Ram Mohan Roy
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या राजा राममोहन राय की सीख आज के ध्रुवीकरण की काट है ?
    29 May 2022
    इस साल राजा राममोहन रॉय की 250वी वर्षगांठ है। राजा राम मोहन राय ने ही देश में अंतर धर्म सौहार्द और शान्ति की नींव रखी थी जिसे आज बर्बाद किया जा रहा है। क्या अब वक्त आ गया है उनकी दी हुई सीख को अमल…
  • अरविंद दास
    ओटीटी से जगी थी आशा, लेकिन यह छोटे फिल्मकारों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा: गिरीश कसारावल्ली
    29 May 2022
    प्रख्यात निर्देशक का कहना है कि फिल्मी अवसंरचना, जिसमें प्राथमिक तौर पर थिएटर और वितरण तंत्र शामिल है, वह मुख्यधारा से हटकर बनने वाली समानांतर फिल्मों या गैर फिल्मों की जरूरतों के लिए मुफ़ीद नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License