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भारत
राजनीति
उत्तर प्रदेश : स्वच्छ भारत अभियान के क्रियान्वन में दिखा भ्रष्टाचार
उत्तर प्रदेश में अधिकांश गाँवों को खुले में शौच मुक्त करने की घोषणा करने में सरकार की जल्दबाज़ी से प्रतीत होती है कि भले ही अधिकांश मामलों में या तो शौचालयों का निर्माण नहीं हुआ और या फिर उन्हें खराब सामग्री से बनाया गया है.
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
01 Dec 2017
Translated by महेश कुमार
swacch bharat

मेरठ: चूंकि केंद्र सरकार भ्रष्टाचार पर हमला करने का दवा करती है,  लेकिन स्वच्छ भारत अभियान के तहत हुई गतिविधियों के कार्यान्वयन की जब हम समीक्षा करते हैं तो इनमें स्पष्ट अनियमितताओं का पता चलता है.

स्वच्छ भारत अभियान, जोकि नरेंद्र मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, इसके तहत गाँवों में लोगों के घरों में शौचालयों का निर्माण किया जाना था, वहाँ जहाँ पहले से शौचालय न हो, ताकि उन गांवों को खुले में शौच मुक्त (ओपन डेफ्केशन फ्री) घोषित किया जा सके.

लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कईं जिलों जैसे सहारनपुर, मेरठ, बुलंदशहर और अन्य जिलों के वरिष्ठ जिला स्तर के अधिकारियों की जांच में पता चला कि गांव में प्रमुखों एवं अधिकारियों की गठजोड़ की वजह से शौचालयों के निर्माण से संबंधित परियोजना में भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों सामने आये हैं.

विभिन्न जिलों में विकास अधिकारियों की जांच में यह पता चला है कि मेरठ, सहारनपुर, बुलंदशहर और अन्य जिलों में कई जगह में तो शौचालय केवल पेपर पर ही बनाए हैं. कुछ मामलों में तो, स्थानीय अधिकारियों और गांव के प्रमुखों ने गावों को ओपन डेफकेशन फ्री की घोषणा करने में बहुत ही जल्दबाजी दिखाई है. जबकि इन गावों में शौचालयों का निर्माण पूरा भी नहीं हुआ था. और इन्हें खुले में शौच मुक्त करार दे दिया गया.

सहारनपुर के तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी दीपक मीणा की जांच में पाया गया कि ओ.डी.एफ. परियोजना के कार्यान्वयन में गांव के प्रमुख भी भ्रष्टाचार में शामिल थे. ओ.डी.एफ. परियोजना में जिन जगहों में भ्रष्टाचार पाया गया इनमें छपरेदी, बेहरामपुर, नसरूलगढ़, हाजीपुर, नागला नसीराबाद और ढोला हैदी जैसे गांव शामिल हैं. इन गांवों ने गाँव की जमीन पर किसी भी शौचालय के निर्माण के बिना निर्माण कार्य के लिए धन का दावा पेश कर किया. जिला अधिकारियों ने उनके द्वारा प्राप्त किए गए पैसे की वसूली के लिए गांव के प्रमुखों को वसूली-नोटिस भेज दिए हैं. श्री मीणा की जांच रिपोर्ट ने ओ.डी.एफ. परियोजना के कार्यान्वयन में नियमों का उल्लंघन पाया. कुछ जगहों पर निर्माण कार्य में ख़राब किस्म की सामग्री का इस्तेमाल भी किया गया  और कुछ स्थानों पर तो जमीन पर कोई शौचालय ही अस्तित्व में नहीं आया. हालांकि, सरकारी कार्रवाई के डर के कारण, सी.डी.ओ. रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद कुछ गांवों में शौचालयों का निर्माण किया गया है.

सहारनपुर के जिला जनसंपर्क अधिकारी सतीश कुमार के अनुसार, भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं के लिए इकत्तीस गांवों की जांच हो रही है.

भ्रष्टाचार के इसी तरह के मामले मेरठ में भी सामने आए हैं. मेरठ के डिवीजनल कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने आदेश दिया है कि गांव के प्रमुख सहित, परियोजना के सभी अधिकारियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज की जाएगी, उन्होंने यह आदेश मखरा ब्लॉक के राछौती गांव में शौचालयों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली खराब सामग्री से आहत होकर दिया, उन्होंने ग्राम पंचायत अधिकारी, पंचायत और ब्लॉक विकास अधिकारी के सहायक विकास अधिकारी को पिछले महीने भ्रष्टाचार के आरोपों में लिप्त पाए जाने के बाद ब्लॉक विकास अधिकारी और पंचायत के सहायक विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया.

ग्राम प्रधान ने ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से गठबंधन कर राकौती गांव को ओ.डी.एफ. घोषित कर दिया था. उन्होंने दावा किया था कि 444 शौचालयों का निर्माण किया जा चूका है. लेकिन आधिकारिक जांच में पता चला कि कुल 444 शौचालयों में से  केवल 80 शौचालयों का ही निर्माण किया गया था. और 83 शौचालयों में निर्माण कार्य अभी चल ही रहा था. इसके अलावा, 80 शौचालयों के निर्माण में खराब गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग किया गया था. बाकी बचे 281 शौचालयों में तो अभी काम भी शुरू नहीं हुआ था.

इसी तरह, बुलंदशहर जिले के कई गांवों से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों की सूचना मिली है. जिले के लगभग 192 गांवों को ओ.डी.ए.फ घोषित किया गया है. लेकिन ग्रामीणों द्वारा की गयी शिकायतों के आधार पर पता चला कि बिना कार्य को पूरा किये और मिलीभगत से भ्रष्टाचार के जरिए बड़ी ही जल्दी गावों को ओ.डी.ऍफ़. घोषित कर दिया. उद्धरण के लिए आप सिकंदराबाद उप-डिवीज़न के किशनपुर गांव पर नज़र डाल सकते हैं.

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जब ग्रामीणों के आधे से ज्यादा घरों में शौचालय ही नहीं हैं तो अधिकारियों ने गांव को ओपन डेफकेशन फ्री घोषित कैसे कर दिया. इस भ्रष्टाचार की वजह से गाँव के लोगों को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है जबकि गांव को कागज पर ओ.डी.एफ. घोषित किया जा चुका है. जिला जनसंपर्क अधिकारी अमरजीत सिंह ने न्यूज़क्लिक को बताया कि गांव को ओ.डी.एफ. घोषित करने वाले पंचायत स्तर के अधिकारियों से एक रिपोर्ट मांगी गई है.

सिंह ने कहा, कि अगर "ग्रामीणों के आरोपों सही पाए गए तो निश्चित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी."

इसी तरह चंगरावली गाँव में ग्राम पंचायत अधिकारी शेरपाल सिंह को गाँव वालों की शिकायत के बाद निलंबित कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान परियोजनाओं के कार्यान्वयन में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं के बावजूद चिंग्रावली को ओ.डी.एफ. घोषित कर दिया. जांच से पता चला कि शौचालयों के निर्माण में घटिया सामग्रियों का इस्तेमाल हुआ, और यही नहीं उन्होंने मृतक ग्रामीणों के नाम पर भी पैसा ले लिया. शौचालयों के निर्माण के लिए उन्होंने सरकार से दो बार पैसे भी लिए थे. शेरपाल सिंह के आचरण की जांच के लिए तीन प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम का गठन किया गया है.

इस तरह की घटनाओं की प्रवृत्ति से पता चलता है कि बड़े भ्रष्टाचार का छोटा सा नमूना है क्योंकि सरकार की मशीनरी मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए गावों को जल्दबाजी में ओ.डी.ऍफ़. घोषित करना चाहती है जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि गाँव वाले इन झूठी घोषणाओं के बाद खुले में शौच करने के लिए मजबूर है क्योंकि उनके घरों में शौचालय केवल कागज पर ही बनाए गए हैं

Swachchh Bharat Abhiyan
Narendra modi
Corruption
UP

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