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उत्तर प्रदेशः छात्रों के बीच झगड़े में छह मुस्लिम छात्रों को भेजा गया जेल
एक पुजारी द्वारा एक वीडियो रिकॉर्ड किया गया जिसमें दिखाया गया है कि बेलथरा स्थित स्कूल में कथित रूप से 'भारत माता की जय' बोलने की इजाज़त नहीं है। ये वीडियो 5 अक्टूबर को वायरल हो गया जिसके बाद 8 अक्टूबर को यहां झगड़ा हुआ।
अब्दुल अलीम जाफ़री
17 Oct 2018
UP clashes among students

उत्तर प्रदेश के बेलथरा रोड स्थित गांधी मोहम्मद अली इंटर कॉलेज के छह नाबालिग मुस्लिम छात्रों को एक झगड़े में शामिल होने के चलते जेल भेज दिया गया है। छात्रों के बीच झगड़ा तब हुआ जब मानस मंदिर के एक पुजारी द्वारा स्कूल का एक वीडियो बनाया किया गया जिसमें छात्रों को'वंदे मातरम्' गाने की अनुमति नहीं दी गई। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऐसा करके, पुजारी 'भारत माता की जय' बोलने को लेकर कथित रूप से पीटे गए एक छात्र का पांच साल पुराना मुद्दा उखाड़ रहे थे।

पुजारी द्वारा ये वीडियो 5 अक्टूबर को रिकॉर्ड किया गया था और यह घटना तीन दिन बाद यानी 8 अक्टूबर को उस समय हुई थी जब स्कूल के कुछ छात्रों ने 'वंदे मातरम्' और 'भारत माता की जय' का नारा लगाना करना शुरू कर दिया था। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि कुछ मुस्लिम छात्रों ने 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' का नारा लगाना शुरू कर दिया और प्रतिक्रिया में उन पर हमला किया लेकिन इसके कोई सबूत या वीडियो नहीं है। ये बात बलिया पुलिस ने ट्विटर पर कहा।

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जेल भेजे गए छह छात्रों में मुहम्मद कैफ, तंजिल सिद्दीकी, मुहम्मद फ़ैज़ान, मुहम्मद चांद, अख़लाक़, फ़िरोज़ और बुची हैं। इन सभी के ख़िलाफ़ भारत दंड संहिता (आईपीसी) धारा 147 (दंगा करने के लिए दंड), 148 (दंगा भड़काने, घातक हथियार), 149, 323, 506 (आपराधिक धमकी) और3 (1) (डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मुस्लिम नाम के चलते स्कूल को निशाना बनाया गया

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए बलिया ख़बर के लिए इस स्टोरी को कवर करने वाले कौसर उस्मान ने कहा, "बेलथरा रोड स्थित गांधी मोहम्मद अली मेमोरियल इंटर कॉलेज क़रीब सौ साल पुराना है और तब से अब तक कोई सांप्रदायिक संघर्ष नहीं हुआ है। इस स्कूल में मुस्लिम छात्रों की तुलना में हिंदू छात्रों की संख्या अधिक है। इस स्कूल को निशाना बनाने का कारण यह है कि यह एक अल्पसंख्यक स्कूल है जिसका मुस्लिम नाम है। यह बेलथरा के मुसलमानों को बदनाम करने की भी एक चाल है। पुजारी शिव कुमार जिन्होंने इसे रिकॉर्ड किया सांप्रदायिक शत्रुता को प्रोत्साहित करने के लिए इस वीडियो को बनाया है। पुजारी पर सांप्रदायिक संघर्ष का आरोप है जो साल 2013 में हुआ था जिसे स्थानीय मीडिया द्वारा प्रकाशित किया गया था।"

उस्मान ने आगे कहा, "स्कूल से अनुमति लिए बिना पुजारी ने एक शिक्षक से स्कूल से बाहर आने के लिए कहा। इसके बाद स्कूल में अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले संजय कुमार पांडे बाहर आए और दोनों ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया जिसमे दिखाया गया है स्कूल में कथित तौर पर वंदे मातरम् गाने की अनुमति नहीं दी जाती है। ये वीडियो वायरल हो गया। लेकिन दुख की बात यह है कि सभी स्थानीय मीडिया ने बिना किसी जांच के घटना को प्रकाशित कर दिया और बाद में मुख्यधारा की मीडिया ने इस खबर को प्रकाशित कर दिया। अगर संजय को कोई समस्या थी कि स्कूल छात्रों को'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम्' बोलने की इजाज़त नहीं देता है, तो उन्हें 'पुजारी' को वीडियो साक्षात्कार देने की बजाय स्कूल के प्रिंसिपल से शिकायत करनी चाहिए थी। छह नाबालिग़ छात्र जिन्हें कथित रूप से पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने के लिए गिरफ्तार किया गया वह पूरी तरह बेबुनियाद है, उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है और फ़र्जी़ तरीक़े रचा गया है।"

स्कूल के शिक्षक संजय कुमार पांडे ने न्यूज़क्लिक को बताया, "यह 2014-15 का मामला है जब एक छात्र को भारत माता की जय और वंदे मातरम् बोलने के लिए स्कूल शिक्षक द्वारा पीटा गया था। हाल में मंदिर के पुजारी और कुछ स्थानीय पत्रकार स्कूल के बाहर मुख्य द्वारा पर इकट्ठा हुए। जब मैं स्कूल में प्रवेश कर रहा था तब उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या स्कूल अभी भी छात्रों को ऐसे नारे और राष्ट्रीय गान गाने की इजाज़त नहीं देता है, जिस पर मैंने जवाब दिया कि कभी-कभी होता है। वीडियो वायरल हो जाने के बाद कुछ छात्र स्कूल के हिंदू छात्र को मारने में शामिल थे लेकिन मैंने उनको पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते कभी नहीं सुना। लेकिन छात्रों के खून बह रहे थे।" उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल में कभी भी राष्ट्र गान नहीं गया जाता है और प्रार्थना के बाद भी नहीं होता है, छात्र भारत माता की जय के नारे नहीं लगाते हैं। हालांकि, पूछने पर कि उन्होंने इस मामले को अपने प्रिंसिपल के सामने क्यों नहीं उठाया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि यह कभी-कभी होता है।

स्कूल के प्रिंसिपल ने कथित दावे से किया इंकार

न्यूज़़क्लिक से स्कूल के प्रिंसिपल मजीद नासीर ने कहा, "मुझे यहां रहते हुए 31 साल हो चुके हैं और छात्र राष्ट्रीय गान गाते हैं। हमने कभी किसी को नहीं रोका है। पांडे का आरोप कि हम कभी-कभी रोकते हैं तो यह पूरी तरह से ग़लत है। जहां तक भारत माता की जय नारे लगाने को लेकर छात्रों को पीटे जाने की बात है तो मैंने बाद में एक बयान जारी किया था कि वह उस समय कक्षा छह का छात्र था और ऐसी कोई घटना नहीं थी। साथ ही, उस घटना पर विचार करें कि क्या वास्तव में यह हुआ तो उसके परिवार ने शिकायत क्यों नहीं की? हमने धर्म के आधार पर अपने छात्रों से कभी भेदभाव नहीं किया है। आप छात्रों से भी पूछ सकते हैं कि हमने राष्ट्रीय गान गाने से उन्हें कभी नहीं रोका है।"

न्यूज़क्लिक ने बलिया ज़िला मजिस्ट्रेट भवानी सिंह और पुलिस अधीक्षक श्रीपर्णा गांगुली से बात करने की कोशिश की लेकिन बैठक में होने के चलते उनसे बात नहीं हो पाई।

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