NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तराखंड में भी सांप्रदायिक हिंसा को भड़काया जा रहा है |
अगस्त्यमुनि में अल्पसंख्यकों पर हमले उत्तराखंड में आगामी स्थानीय चुनावों में मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने का एक प्रयास है।
रवि कौशल
09 Apr 2018
Translated by मुकुंद झा
उत्तराखंड

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के एक विलक्षण शहर अगस्त्यमुनि ने इतिहास में पहली बार सांप्रदायिक हिंसा देखी। सोशल मीडिया पर बलात्कार के फर्जी वीडियो के बाद मुस्लिम व्यापारियों के स्वामित्व वाली दुकानों को संघ परिवार से जुड़े लोगों के एक समूह द्वारा जला दिया गया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया था जिसमें दावा किया गया था कि शहर में मुस्लिम व्यक्ति द्वारा हिंदू लड़की का बलात्कार किया गया था। सांप्रदायिक हमलों में वृद्धि की अटकलों के बीच, पुलिस और जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि दक्षिणपंथी  (राइट विंग) संगठनों द्वारा प्रसारित वीडियो "फर्ज़ी" था और शहर में शांती बनाए रखने की अपील की।

.

फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में,प्रश्न है कि,रुद्रप्रयाग जिला मजिस्ट्रेट मंगेश घिल्डियाल ने कहा कि उन्हें शहर में बलात्कार की कोई शिकायत नहीं मिली है और वीडियो को परिचालित किया जा रहा है | घिल्लियाल ने वीडियो में कहा,"वीडियो में लोगों के चेहरे स्पष्ट नहीं हैं | वीडियो में न तो पुरुष और न ही महिला की पहचान की जा सकी है। इसके अलावा, हमें अगस्त्यमुनि में एक भी बलात्कार की कोई शिकायत नहीं मिली है | हम उन लोगों की तलाश कर रहे हैं,जो सोशल मीडिया पर जबरदस्ती फर्ज़ी बलात्कार की खबरें फैल रहे हैं ... उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी"|

कार्यकर्ता और राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने न्यूजक्लिक को बताया कि हाल ही में हुई घटना आगामी नगरपालिका निकाय चुनावो से पहलें मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है। इसके अलावा, वे कहते हैं कि यदि अपराध में भाग लेने वाले दो अलग-अलग धर्मों से संबंधित  हैं, तो दक्षिणपंथी समूह माहौल को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं |

भारत के कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सचिव उत्तराखंड सचिव राजेंद्र सिंह नेगी ने कहा, "वे किसी भी घटना को सांप्रदायिक कोण देने के हर अवसर की तलाश कर रहे हैं। पिछले साल सतपुली में भी इस प्रवृत्ति को देखा गया था जहां मुस्लिम व्यक्ति की दुकान में आग लगा दी गई थी" ।

 

पूछे जाने पर क्या इन घटनाओं का नगरपालिका के चुनावों से कोई संबंध हैं, नेगी ने कहा कि नगर निगम के चुनावों के अलावा भी, वे अगले साल आम चुनावों में वोटों को ध्रुवीकरण करने के लिए हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।

अन्य पर्यवेक्षकों ने न्यूज़क्लिक को बताया कि पिछले दशकों में लोगों के बड़े पैमाने पर प्रवास के कारण राज्य में श्रमिकों की संख्या में कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश के पड़ोसी इलाकों से श्रम और गरीब मुस्लिम ने श्रमिकों की बढ़ती मांग को भर हैं | वर्षों के जुड़ाव के बाद, मजदूर राज्य के कई हिस्सों में बसने शुरू कर चुके हैं। दक्षिणपंथी संगठन उत्तराखंड के स्थानीय लोगों की भावनाओं को भड़का रहे हैं,और कह रहे हैं कि मुसलमानों को देवरभूमि, देवताओं की भूमि में बसने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि नहीं तो वो भी असम की तरह खतरे में पड़ जाएंगे |

उत्तराखंड में हाल के वर्षों में घटनाओं को करीब से देखने पर पता चलता है कि हिंसा को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया एक प्रभावी माध्यम बन गया है। सतपुली में हिंसा, पौड़ी गढ़वाल, फेसबुक पर केदारनाथ श्राइन की कथित आक्रामक तस्वीर पोस्ट करने के बाद हुई थी। बजरंग दल द्वारा कि गई हिंसा ने कई दिनों तक प्रशासन को आपने पैरों के निचे रखा था।

एक अन्य घटना में, एक हिंदू आदमी की हत्या को हरिद्वार के निकट मुर्गि फार्म में सांप्रदायिक रंग दिया गया था, क्योंकि यह पाया गया कि वह एक मुस्लिम लड़की के साथ विवाह के बाद भी संबंध में थे। इस घटना ने मुस्लिम परिवारों के जीवन को असहज कर दिया और वे अपने जीवन को बचाने के लिए क्षेत्र से भाग गए।

ये प्रवर्ती और स्पष्ट हो गई जब,  भारत-पाकिस्तान के चैंपियंस ट्रॉफी मैच के बाद अज्ञात लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने के बाद मार्च 2018 तक दक्षिणपंथी  संगठनों द्वारा मुसूरी के कश्मीरी व्यापारियों को अपने कारोबार को बंद करने के लिए कहा गया था।

सांप्रदायिक हिंसा
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ
उत्तराखंड
हिन्दू मुस्लिम

Related Stories

उत्तराखंड चुनाव 2022 : दम तोड़ता अल्मोड़ा का ताम्र उद्योग !

उत्तराखंड: बारिश से भारी संख्या में सड़कों और पुलों का बहना किसका संकेत?

बिहार: मंदिर निर्माण से होगा महिला सशक्तिकरण ?

नीतीश कुमार BJP-RSS के राजनीतिक बंधक हैं : उर्मिलेश

इन दो पिताओं को सुन लें, इससे पहले कि नेता आपको दंगाई बना दे

संघ परिवार साम्प्रदायिकता फैलाने के लिए कर रहा है रामनवमी का इस्तेमाल

जे.एन.यू को बर्बाद करने की संघ की कोशिश जारी

शीर्ष राजनेताओं के दल से इतर विचार

पी डी पी और भाजपा गठबन्धन की गाँठ

साम्प्रदायिकता और सरकार: एक पंथ दो काज का नया उदाहरण


बाकी खबरें

  • kisan andolan
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान आंदोलन बदलेगा उत्तर प्रदेश में राजनीतिक समीकरण
    01 Oct 2021
    उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव बड़े अहम् होने वाले हैं। किसान आंदोलन, सरकारी योजनाएं और जातिगत समीकरण का क्या असर होगा इन चुनावों में, बात कर रहे हैं परंजॉय गुहा ठाकुरता और राधिका रामाशेषन
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोयला विस्तार का प्रभाव, बिहार में महिला कमांडो दस्ता और अन्य ख़बरें
    01 Oct 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी देश के महानगरों पर पड़ेगा कोयला विस्तार का प्रभाव, बिहार में पहला महिला कमांडो दस्ता और अन्य ख़बरों पर।
  • liquor
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः प्रतिबंध के बावजूद पंचायत चुनावों के बीच शराब की तस्करी बढ़ी
    01 Oct 2021
    बिहार में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध है, इसके बावजूद इसकी तस्करी और कारोबार की खबरें अक्सर आती रहती हैं।
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: इस महंगाई के लिए थैंक्यू मोदी जी!
    01 Oct 2021
    अक्टूबर की शुरुआत होते ही एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है, लेकिन राहत की बात यह है कि यह बढ़ोतरी 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में हुई है,…
  • Milwa Mnyaluza
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    दुनिया में अंतर्निहित नस्लवाद और असहिष्णुता के मूल कारणों की पड़ताल
    01 Oct 2021
    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने इसी साल के जुलाई महीने में दुनिया में मौजूद नक्सलवाद और असहिष्णुता के मूल कारणों की पड़ताल के लिए एक कमेटी गठित की।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License