NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तराखंड : पुलवामा की आड़ में कश्मीरी छात्रों के खिलाफ अभियान
देहरादून की एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि उनके पास सिर्फ तीन छात्रों के फोन आए, जिन्होंने कहा कि वे वापस कश्मीर जाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से ज्यादातर शैक्षिक संस्थानों में पुलिस बल की तैनाती की गई है। कश्मीरी छात्रों को पूरी सुरक्षा मुहैया करायी जा रही है।
वर्षा सिंह
16 Feb 2019
protest in dehradun
देहरादून में प्रदर्शन। फोटो साभार : अमर उजाला

“हमें किक-आउट किया जा रहा है। कोई रेंट पर रह रहा है। कोई हॉस्टल में रह रहा है। उन्हें 24 घंटे में कमरा खाली कर वापस लौटने की चेतावनी दी जा रही है। इसका कुछ सल्यूशन होना चाहिए। बातचीत होनी चाहिए। ये जम्मू-कश्मीर का नुकसान है। यहां भी हमारे भाई मरते हैं। वहां भी हमारे भाई मरते हैं। खून-खराबा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। हमारा कॉलेज बहुत अच्छा है। देहरादून बिल्कुल सेफ़ जगह है। हम ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहते हैं।”

ये कहना है देहरादून के उत्तरांचल कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नॉलजी के एक कश्मीरी छात्र का। बात करते हुए वे कुछ हिचकिचाये हुए, डरे हुए लगते हैं (इसलिए हम यहां उनका नाम नहीं दे रहे हैं)। उन्होंने कहा कि देहरादून में कश्मीरी छात्रों के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन की घटनाओं के बाद बहुत सारे छात्रों ने मदद मांगी है। यहां पढ़ने वाले कश्मीर के छात्र बेहद डरे हुए हैं और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

देहरादून के सुभारती मेडिकल कॉलेज के एक छात्र ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद व्हाट्सएप पर एक आपत्ति जनक पोस्ट लिखी। छात्र द्वारा गुरुवार रात लिखी गई इस पोस्ट का स्क्रीन शॉट थोड़ी ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

शुक्रवार सुबह कॉलेज के बाहर बड़ी संख्या में बजरंगदल-एबीवीपी समेत अन्य हिंदूवादी संगठनों के लोग कॉलेज कैंपस में इकट्ठा हो गए। नारेबाजी शुरू हो गई। पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाये जाने लगे। प्रदर्शनकारियों ने कैंपस में एक छात्र को बुरी तरह पीटा। लेकिन बताया गया कि वो छात्र हिंदू था। पोस्ट लिखने के बाद मामला बढ़ता देख वह छात्र सामने नहीं आया। हालांकि उसने फेसबुक पर माफ़ीनामा जरूर लिखा। फेसबुक पर अपनी पोस्ट में उसने लिखा कि – हर इंसान से गलती हो जाती है। उससे भी गलती हो गई। इसके लिए वो माफी चाहता है। वो भारत को तहे दिल से प्यार करता है। जय हिंद कहकर उसने अपनी बात समाप्त की।

इस घटना के बाद सुभारती कॉलेज प्रबंधन ने छात्र को कॉलेज से निलंबित कर दिया और कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कैंपस में पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है।

लेकिन तब तक उसके इस मैसेज ने देहरादून में पढ़ रह अन्य कश्मीरी छात्र-छात्राओं के लिए भी मुश्किल खड़ी कर दी। सुभारती के साथ ही राजधानी के दूसरे शैक्षिक संस्थानों पर भी हिंदूवादी संगठनों के लोग जमा होने लगे और कश्मीरी छात्रों को निकालने की बात करने लगे।

शुक्रवार को दून के बाबा फरीदुद्दीन इंस्टीट्यूट ऑप टेक्नॉलजी (बीएफआईटी) के बाहर करीब सौ-डेढ़ सौ की संख्या में बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद समेत अन्य हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता जमा हो गए। जबकि इस कॉलेज में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी कैंपस में घुस आए। नाम न देने की शर्त पर कॉलेज के एक अस्सिटेंट प्रोफेसर ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज प्रबंधन से ये लिखवाया कि वे आगे से कभी किसी कश्मीरी छात्र-छात्रा को दाखिला नहीं देंगे। प्रदर्शनकारियों के कहने पर कॉलेज प्रबंधन ने ये लिखकर दिया, हालांकि ये भी कहा कि फिलहाल जो कश्मीरी छात्र यहां पढ़ रहे हैं, उन्हें कोई दिक्कत नहीं आएगी। घटना की खबर लगते ही यहां भी बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंच गई। इसके बाद प्रदर्शनकारी कॉलेज के गेट पर धरने पर बैठ गए।

राजधानी के ही मिनर्वा कॉलेज का एक वीडियो भी दिखाया जा रहा है। जिसमें भीड़ एक लड़के को पीट रही है। पुलिस भी वहां मौजूद है। देहरादून की एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि सुभारती मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद सोशल मीडिया पर भ्रामक पोस्ट की भरमार हो गई है। कुछ पुराने वीडियो भी वायरल किये जा रहे हैं। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर ज्यादा हंगामा है, फील्ड में नहीं।

देहरादून में पढ़ने वाले सैयद तुफैल ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि भाउवाला क्षेत्र में रहने वाले उसके कज़िन को मकान मालिक ने घर से निकाल दिया है और कॉलेज प्रबंधन ने मदद से इंकार कर दिया है। सैयद ने लिखा कि उसे अपनी सुरक्षा को लेकर भी डर लग रहा है। उसने मदद की गुहार लगाई। उसकी इस पोस्ट पर भी कुछ धमकियां लिखी गईं, कुछ लोग मदद के लिए भी आगे आए। इसी तरह राजधानी के सुद्धोवाला क्षेत्र में भी किराये के कमरे पर रहने वाले कश्मीरी छात्र ने बताया कि सुबह ही 15-20 लोग उसके दरवाजे पर जमा हो गये और मारने की धमकियां दी जाने लगीं। उसने पीछे के दरवाजे से निकलकर अपनी जान बचायी।

एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि उनके पास सिर्फ तीन छात्रों के फोन आए, जिन्होंने कहा कि वे वापस कश्मीर जाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से ज्यादातर शैक्षिक संस्थानों में पुलिस बल की तैनाती की गई है। कश्मीरी छात्रों को पूरी सुरक्षा मुहैया करायी जा रही है। निवेदिता कुकरेती का कहना है कि किसी भी स्टुडेंड ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं करायी है। उन्होंने बताया कि करीब एक हजार कश्मीरी छात्र-छात्राएं देहरादून में पढ़ते हैं। हालांकि अनाधिकारिक तौर पर ये संख्या अधिक बतायी जा रही है। कश्मीर से आऩे वाले सभी छात्र-छात्राओं का समय से सत्यापन नहीं हो पाता है।

उधर, श्रीनगर में जम्मू-कश्मीर स्टुडेंट ऑर्गनाइज़ेन के प्रवक्ता नासिर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद देहरादून में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्र बेहद डरे हुए हैं। वे आठ-दस के लॉट में कश्मीर वापस लौट रहे हैं। उन्होंने बताया कि 24 घंटे में उनके पास सात सौ से ज्यादा कश्मीरी छात्रों की फोन कॉल्स आईं। उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। कुछ जगहों पर उन्हें पीटा भी गया है। नासिर ने बताया कि उन्होंने भी फोन पर एसएसपी निवेदिता कुकरेती से बात की। उऩका कहना है कि एसएसपी ने कश्मीरी छात्रों को बहुत मदद की है। नासिर का कहना है कि पुलवामा की घटना से गैर-कश्मीरी छात्रों पर गलत असर पड़ा है और वे सभी को दोषी मान रहे हैं।

देहरादून समेत राज्य के अन्य हिस्सों से भी इस तरह की खबरें सामने आईं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्यभर में पुलिस ने अलर्ट जारी कर दिया। पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने आम लोगों से अपील की है कि कानून को हाथ में न लें। देशद्रोही गतिविधियों में संलिप्त लोगों की सूचना पुलिस को दें। पुलिस सख्ती से कार्रवाई करेगी। 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी कहा है कि पुलवामा हमले के बाद आपत्तिजनक पोस्ट के मामले की जांच सुरक्षा एजेसिंयां कर रही हैं।

UTTARAKHAND
Dehradun
Kashmiri Students
Jammu and Kashmir
pulwama attack
CRPF Jawan Killed

Related Stories

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

यासीन मलिक को उम्रक़ैद : कश्मीरियों का अलगाव और बढ़ेगा

आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रक़ैद

उत्तराखंड के ग्राम विकास पर भ्रष्टाचार, सरकारी उदासीनता के बादल

जम्मू में आप ने मचाई हलचल, लेकिन कश्मीर उसके लिए अब भी चुनौती


बाकी खबरें

  • Ayodhya
    रवि शंकर दुबे
    अयोध्या : 10 हज़ार से ज़्यादा मंदिर, मगर एक भी ढंग का अस्पताल नहीं
    24 Jan 2022
    दरअसल अयोध्या को जिस तरह से दुनिया के सामने पेश किया जा रहा है वो सच नहीं है। यहां लोगों के पास ख़ुश होने के लिए मंदिर के अलावा कोई दूसरा ज़रिया नहीं है। अस्पताल से लेकर स्कूल तक सबकी हालत ख़राब है।
  • BHU
    विजय विनीत
    EXCLUSIVE: ‘भूत-विद्या’ के बाद अब ‘हिंदू-स्टडीज़’ कोर्स, फिर सवालों के घेरे में आया बीएचयू
    24 Jan 2022
    किसी भी राष्ट्र को आगे ले जाने के लिए धर्म की नहीं, विज्ञान और संविधान की जरूरत पड़ती है। बेहतर होता बीएचयू में आधुनिक पद्धति के नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाते। हमारा पड़ोसी देश चीन बिजली की मुश्किलों से…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: एक वीरता पुरस्कार तो ग़रीब जनता का भी बनता है
    24 Jan 2022
    बेरोज़गारी, महंगाई और कोविड आदि की मार सहने के बाद भी भारत की आम जनता ज़िंदा है और मुस्कुरा कर पांच राज्यों में फिर मतदान की लाइन में लगने जा रही है, तो एक वीरता पुरस्कार तो उसका भी बनता है...बनता है…
  • genocide
    पार्थ एस घोष
    घर वापसी से नरसंहार तक भारत का सफ़र
    24 Jan 2022
    भारत में अब मुस्लिम विरोधी उन्माद चरम पर है। 2014 में नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से इसमें लगातार वृद्धि हुई है।
  • bulli bai
    डॉ. राजू पाण्डेय
    नफ़रत का डिजिटलीकरण
    24 Jan 2022
    सुल्ली डील्स, बुल्ली बाई, क्लबहाउस और अब ट्रैड्स के ज़रिये अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने का काम लगातार सोशल मीडिया पर हो रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License