NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तरी बंगाल में चाय मज़दूरों का संघर्ष जीत की राह पर
लम्बे अरसे से चल रहे इस आंदोलन की मुख्य माँगों को सरकार मान सकती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Sep 2018
WB Tea Gardens
Image Courtesy: Indiatimes.com

उत्तरी बंगाल के दार्जलिंग में पिछले चार साल से चल रहे खेत मज़दूरों के आंदोलन में अब उम्मीद की किरण दिखने लगी है। बताया जा रहा है कि लम्बे अरसे से चल रहे इस आंदोलन की मुख्य माँगों को सरकार मान सकती है। 2014 से उत्तर बंगाल के चाय बागानों के मज़दूर न्यूनतम वेतन की माँग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। पिछले महीने 7 से 9 अगस्त तक इसी माँग को लेकर लाखों मज़दूरों हड़ताल पर थे। इसका नतीजा यह हुआ कि अब सरकार उनकी माँगों को 25  सितम्बर को  लिखित में मानने के लिए तैयार हो सकती है। 

बता दें कि इस इलाके में करीब 278 बड़े चाय बागान हैं और 50000 के करीब छोटे खेत हैं। इस इलाके में मज़दूरों की संख्या करीब 4 लाख 50000 है और इसमें 90% महिलाएं हैं और ज़्यादातर लोग आदिवासी समाज के हैं। सूत्र बताते हैं चाय मज़दूर बहुत ही गरीब हैं और इस बात का अंदाज़ा इस तरह लगाया जा सकता है कि इस इलाके में औसत उम्र सिर्फ 46 साल है, जबकि देश की औसत उम्र 2015 में 68 वर्ष थी। इस बात का अंदाज़ा ऐसे भी लगाया जा सकता है कि इन मज़दूरों को सिर्फ 159 रुपये प्रति दिन की आय  गुज़ारा  करना पड़ता है। 

2014 में मज़दूरों की प्रति दिन आय सिर्फ 132 .50 रुपये थी। इसी साल मज़दूरों की 29 यूनियनों ने मिलकर एक जॉइंट फोरम बनाया और संघर्ष शुरू किया। जॉइंट फोरम ने माँग की कि न्यूनतम वेतन कानून के तहत चाय मज़दूरों को भी न्यूनतम वेतन मिले। इसी माँग को लेकर 2017 में मज़दूरों ने बागान मालिकों के साथ 3 साल के अनुबंध पर दस्तखत करने से मना कर दिया। इसके बाद  इस साल सरकार ने मज़दूरों का वेतन अंतरिम तौर पर बढ़ाकर 150 कर दिया और 9 रुपये राशन के देने लगी। लेकिन मज़दूरों ने इसके खिलाफ 23 से 25 जुलाई तक की हड़ताल करने का एलान किया। लेकिन सरकार ने इससे पहले 17 जुलाई को बैठक बुलाकर इस हड़ताल को रद्द कर दिया गया। सरकार ने एक कमिटी बनायी जिसने मज़दूरों के लिए न्यूनतम वेतन को तय करने के लिए 6 अगस्त को बैठक की। 

सरकार ने इस बैठक में मज़दूरों के लिए  प्रति दिन आय 172 रुपये तय की। लेकिन मज़दूरों को यह मंज़ूर न था। चाय बंगानों के को संगठित कर रहे CITU के दार्जलिंग सहायक सचिव सुदीप ने बताया कि अगर 4 लोगों का राशन ,स्वास्थ्य ,बच्चों की शिक्षा,बिजली और इंसानी जीवन के लिए ज़रूरी बाकी चीज़ों को ध्यान में रखा जाए , तो मज़दूरों को राशन के लिए 240 रुपये और बाकी खर्च मिलकर कमसे कम 400 रुपये चाहिए। यही माँग चाय बागान के मज़दूर भी कर रहे हैं। यही वजह थी कि 7 से 9 अगस्त तक लाखों चाय मज़दूर हड़ताल पर रहे और हज़ारों मज़दूरों ने सड़क जाम कर दी।  तीन दिनों की इस हड़ताल से बागान  मालकों को काफी नुक्सान झेलना पड़ा , लेकिन यह मज़दूरों के रोज़ के संघर्ष के सामने कुछ नहीं था। 

मज़दूर संघर्ष के इस दबाव में सरकार ने कहा है कि वह उनकी माँगे 25 सितम्बर को होने वाली बैठक में मान लेंगे। मज़दूर संगठनों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि लड़ाई जीत की तरफ जा रही है लेकिन आगे न्यूनतम वेतन की लड़ाई जारी रहेगी।  साथ ही इससे जुड़ा भूमिहीन आदिवासियों के मुद्दे पर भी संघर्ष तेज़ किया जायेगा। 

tea garden workers
workers' rights
West Bengal

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

प. बंगाल : अब राज्यपाल नहीं मुख्यमंत्री होंगे विश्वविद्यालयों के कुलपति

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

मछली पालन करने वालों के सामने पश्चिम बंगाल में आजीविका छिनने का डर - AIFFWF

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान

बढ़ती हिंसा और सीबीआई के हस्तक्षेप के चलते मुश्किल में ममता और तृणमूल कांग्रेस

बलात्कार को लेकर राजनेताओं में संवेदनशीलता कब नज़र आएगी?

टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है

बंगाल हिंसा मामला : न्याय की मांग करते हुए वाम मोर्चा ने निकाली रैली

बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    सुधा भारद्वाज को SC से राहत, यूपी के aspirant शिक्षक तेज़ करेंगे आंदोलन और अन्य ख़बरें
    07 Dec 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी सुधा भारद्वाज को SC से मिली राहत, यूपी शिक्षक भर्ती आंदोलन और अन्य ख़बरों पर।
  • bhasha
    न्यूज़क्लिक टीम
    पांच राज्यों में मोदी की नीतियों पर गुस्सा परिणाम में दिखेगाः मनोज कुमार झा
    07 Dec 2021
    वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा से संसद के भीतर विपक्ष पर हो रहे हमले से लेकर पांच विधानसभा चुनावों के राजनीतिक समीकरण पर बातचीत की। मनोज कुमार झा ने…
  • chunav
    अजय कुमार
    बिहार के दो पंचायत क्षेत्रों के चुनावी दांवपेच और भावुकता की कहानी
    07 Dec 2021
    संसद और विधायकी के चुनावी माहौल पर बहुत ज्यादा बहस होती है लेकिन पंचायती चुनाव के माहौल पर बहुत कम। तो चलिए बिहार के दो पंचायत क्षेत्रों के चुनावी माहौल को भांपने की कोशिश करते हैं।
  • Medical staff
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच सभी छुट्टियां रद्द होने के चलते नाराज़ मेडिकल स्टाफ़
    07 Dec 2021
    बिहार में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का ख़तरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है। विदेश से लौटे कुछ लोग कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं। इसको लेकर राज्य में चिंता बढ़ गई है।
  • MGNREGA
    प्रभात पटनायक
    क्यों घोंटा जा रहा है मनरेगा का गला! 
    07 Dec 2021
    यूपीए-2 के दौरान ही मनरेगा से पीछे खिसकने की शुरूआत हो चुकी थी। कई साल तक इसके लिए बजट आवंटन 60,000 करोड़ रुपए के करीब ही बनाए रखा गया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License