NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
भारत
राजनीति
आगरा: भूख और बीमारी से बच्ची की मौत मामले में NHRC का योगी सरकार को नोटिस, विपक्ष ने भी मांगा जवाब
लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के 15 करोड़ गरीबों को भोजन उपलब्ध कराने के दावे पर पांच साल की मासूम बच्ची की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सोनिया यादव
24 Aug 2020
Image Courtesy:  The Logical Indian
Image Courtesy: The Logical Indian

'मैं उसे खाना नहीं दे पा रही थी, वह कमजोर हो रही थी। उसे तीन दिनों से बुखार था और अब मैंने उसे खो दिया है।'

ये दुख उस मां का है, जिन्होंने हाल ही में कथित भुखमरी के चलते अपनी पांच साल की मासूम बेटी खो दी। ताज नगरी आगरा में रहने वाली शीला देवी का आरोप है कि लॉकडाउन के चलते पहले उनके पति की नौकरी चली गई और फिर घर में भुखमरी जैसे हालात पैदा हो गए। शीला देवी के अनुसार हफ्तेभर से परिवार के पास खाने को कुछ भी नहीं था, जिसके चलते आखिरकार उनकी बेटी की जान चली गई।

बता दें कि इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया में छपी खबरों के आधार पर स्वत: संज्ञान लेते हुए रविवार, 23 अगस्त को उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब- तलब किया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे नोटिस में चार हफ्ते में प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार के पुनर्वास और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के मामले में रिपोर्ट देने को कहा है।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना आगरा के बरोली अहिर ब्लॉक के नगला विधिचंद गांव की है। बच्ची यहां अपने माता-पिता और बहन के साथ रहती थी। लॉकडाउन के चलते परिवार के पास कोई काम नहीं था, जिससे परिवार का गुजर-बसर मुश्किल हो गया। बीते कुछ हफ्तों से घर में खाने के भी लाले पड़ गए थे।

स्थानीय पत्रकार विकास सिंह ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में बताया कि बच्ची के घर की स्थिति दयनीय है। उसके पिता भी लगातार बीमार चल रहे हैं और मां को अभी भी यही डर है कि कहीं उसकी बच्ची की तरह ही उसके पति की भी भुखमरी से जान न चली जाए।

विकास कहते हैं, “लॉकडाउन से पहले बच्ची के पिता जूता कारीगर थे लेकिन बाद में काम बंद हो गया और उनकी तबीयत खराब रहने लगी। जैसे-तैसे शीला देवी मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पाल रहीं थी लेकिन कामबंदी के चलते शीला देवी को भी काम मिलना बंद हो गया। जिसके बाद घर की स्थिति दिनों-दिन खराब होने लगी, कुछ दिन आस-पड़ोस वालों ने कुछ मदद की लेकिन बाद में वो भी बंद हो गई। परिवार का कहना है कि सरकारी मदद उन तक नहीं पहुंची है। कई लोग जानकारी दे रहे हैं कि इलाके में कई परिवारों को पास राशन कार्ड भी नहीं है।

मालूम हो कि बच्ची का मौत शुक्रवार, 21 अगस्त हो हुई थी। जिसके बाद शनिवार, 22 अगस्त को जिला प्रशासन ने इस मामले पर संज्ञान लिया और तहसीलदार सदर प्रेमपाल के नेतृत्व में बच्ची की मौत की जांच के आदेश दिए गए।

प्रशासन क्या कह रहा है?

आगरा के डीएम प्रभु एन सिंह ने इस मामले में मीडिया तो बताया कि उन्होंने तहसीलदार सदर प्रेमपाल सिंह को बच्ची की मौत की जांच करने के लिए प्रतिनियुक्त किया था। प्रेमपाल सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लड़की की मौत भूख से नहीं हुई, बल्कि डायरिया से हुई है। हालांकि, मृत लड़की के परिवार को अन्य वस्तुओं में 50 किलोग्राम आटा, 40 किलोग्राम चावल दे दिया गया है। परिवार को राशन कार्ड भी दिया जाएगा।

14918_Untitled-11.jpg

एनएचआरसी ने अपने नोटिस में क्या कहा?

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि मुख्य सचिव से उम्मीद की जाती है कि वह सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करेंगे ताकि भविष्य में इस तरह की क्रूर और लापरवाही की घटना दोबारा नहीं हो।

एनडीटीवी की खबर के अनुसार आयोग ने अपने नोटिस में कहा है कि 'NHRC के जानकारी में आया है कि कई केंद्रीय और राज्य सरकारों की योजनाएं चलाए जाने के बावजूद एक पांच साल की बच्ची की भूख और बीमारी से मौत हो गई है।' इसमें कहा गया है कि लॉकडाउन के चलते सरकार ने गरीबों, मजदूरों के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। 'राज्य सरकार ने कई बयान दिए हैं कि वो गरीबों और जरूरतमंदों को खाना, शरण और काम देने को लेकर प्रतिबद्ध हैं और इसके लिए मजदूरों और कामगारों के कानूनों पर काम कर रहे हैं, लेकिन यह दिल दहलाने वाली घटना अलग ही कहानी कह रही है।'

आयोग ने इसे स्थानीय प्रशासन की ओर से मानवाधिकारों को लेकर गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह स्थानीय सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वो इन योजनाओं को सुचारू रूप से लागू करें ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग इसका फायदा उठा पाए, और जाहिर है कि इस मामले में ऐसा नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जून को ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोज़गार अभियान’ कार्यक्रम की शुरुआत में योगी सरकार की पीठ थपथपाते हुए कहा था, “लॉकडाउन के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने 15 करोड़ गरीबों को भोजन उपलब्ध कराया। इतना ही नहीं, राज्य की सवा तीन करोड़ गरीब महिलाओं को जनधन खाते में लगभग 5 हजार करोड़ रुपये भी ट्रांसफर किए गए। आजादी के बाद संभवत: पहली बार किसी सरकार ने इतने बड़े पैमाने पर मदद की है।” हालांकि इन सरकारी दावों पर अब विपक्ष हमलावर है और सरकार से सवाल पूछ रहा है।

विपक्ष क्या कह रहा है?

शनिवार को पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे कांग्रेस के प्रदेश सचिव अमित सिंह ने मीडिया को बताया कि बच्ची के घर में खाद्य सामग्री का एक दाना भी नहीं था। घर पर टोरंट का मीटर तो लगा था लेकिन घर में लाइट ही नहीं है। बकाया होने के कारण टोरंट ने बिजली का कनेक्शन काट दिया। जैसे-तैसे गुजर बसर हो रही है। नोटबंदी के दौरान भी इसी परिवार का एक 8 वर्षीय लड़का खत्म हो चुका है।

कांग्रेस प्रदेश सचिव अमित सिंह ने कहा कि सरकार ऐसे पीड़ित लोगों की मदद का दावा करती है लेकिन असलियत यह घटना है। आर्थिक तंगी के चलते परिवार के बच्चे भूख के कारण दम तोड़ रहे हैं। इतनी स्थिति खराब होने पर भी इस परिवार पर राशन कार्ड नहीं है। अमित सिंह ने कहा कि सरकार को उसकी वास्तविकता दिखने का समय आ गया है कि लॉकडाउन से गरीब तबका कितना प्रभावित है। इस परिवार को सरकार से आर्थिक मदद दिलाने के लिए पार्टी लड़ाई लड़ेगी। इस परिवार के साथ ही अन्य जरूरत मंद लोगों के राशन कार्ड बनवाये जाने की सरकार से मांग करेगी जिससे ऐसे परिवार को खाद्य सामग्री मिल सके और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति ना हो।

समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी मौजूदा बीजेपी सरकार को गरीबों के प्रति संवेदनशील बनने की बात कही। सपा की ओर फेसबुक पोस्ट में कहा गया, “आगरा के विधि चंद गांव में भुखमरी के चलते 5 वर्षीय बच्ची की मृत्यु की खबर हृदयघाती है! बड़े-बड़े दावे करने वाली मिथ्याचारी बीजेपी सरकार की पोलखोल है। लॉकडाउन में छिना रोजगार अब तक नहीं मिला है। शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना! गरीबो के प्रति संवेदनशील बने सरकार।

Priyanka_Gandhi_PTI.jpg

गौरतलब है कि बच्ची की कथित भुखमरी से मौत के मामले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने यूपी की योगी सरकार पर जमकर हमला बोला है। प्रियंका गांधी ने पीड़ित परिवार का वीडियो शेयर करते हुए इसे प्रदेश सरकार के 'माथे पर कलंक' बताया है।

प्रियंका गांधी ने कहा, 'योगी सरकार इतनी आत्ममुग्ध हो गयी है कि किसी भी गरीब और असहाय की आवाज़ सुनने के लिए तैयार नहीं है। विफलता का पर्यायवाची बन चुकी वर्तमान सरकार सिर्फ और सिर्फ दिखावा और कागज़ी दावों के माध्यम से काम चला रही है। कुछ खास मीडिया चैनलों के जरिए अपनी पीठ थपथपाने और खोखले सरकारी आदेशों से काम चल रहा है। आत्महत्या और भुखमरी की बढ़ती हुई घटनाएं उत्तर प्रदेश की सच्चाई है।'

प्रियंका गांधी ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए आगे कहा, 'इस भयानक आर्थिक तंगी के दौर में सरकार कोई ठोस समाधान नहीं निकाल रही है। आगरा जिले की बच्ची का इस तरह भुखमरी से मर जाना सरकार के माथे पर कलंक है। बच्ची का पूरा परिवार दुखी है। उत्तर प्रदेश सरकार ये बताए कि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिये क्या कदम उठाए जा रहें हैं?'

UttarPradesh
Yogi Adityanath
agra
NHRC
BJP
COVID-19
India Lockdown
Jobless growth
Congress
SP

Related Stories

कर्नाटक पाठ्यपुस्तक संशोधन और कुवेम्पु के अपमान के विरोध में लेखकों का इस्तीफ़ा

मनोज मुंतशिर ने फिर उगला मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर, ट्विटर पर पोस्ट किया 'भाषण'

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट : डाडा जलालपुर में अभी भी तनाव, कई मुस्लिम परिवारों ने किया पलायन

जहांगीरपुरी हिंसा में अभी तक एकतरफ़ा कार्रवाई: 14 लोग गिरफ़्तार

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

उर्दू पत्रकारिता : 200 सालों का सफ़र और चुनौतियां

सद्भाव बनाम ध्रुवीकरण : नेहरू और मोदी के चुनाव अभियान का फ़र्क़

यूपी चुनाव: पूर्वी क्षेत्र में विकल्पों की तलाश में दलित


बाकी खबरें

  • प्रियंका शंकर
    रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच, नॉर्वे में नाटो का सैन्य अभ्यास कितना महत्वपूर्ण?
    19 Mar 2022
    हालांकि यूक्रेन में युद्ध जारी है, और नाटो ने नॉर्वे में बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है, जो अभ्यास ठंडे इलाके में नाटो सैनिकों के युद्ध कौशल और नॉर्वे के सैन्य सुदृढीकरण के प्रबंधन की जांच करने के…
  • हर्षवर्धन
    क्रांतिदूत अज़ीमुल्ला जिन्होंने 'मादरे वतन भारत की जय' का नारा बुलंद किया था
    19 Mar 2022
    अज़ीमुल्ला ख़ान की 1857 के विद्रोह में भूमिका मात्र सैन्य और राजनीतिक मामलों तक ही सिमित नहीं थी, वो उस विद्रोह के एक महत्वपूर्ण विचारक भी थे।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: महंगाई-बेरोजगारी पर भारी पड़ी ‘नमक पॉलिटिक्स’
    19 Mar 2022
    तारा को महंगाई परेशान कर रही है तो बेरोजगारी का दर्द भी सता रहा है। वह कहती हैं, "सिर्फ मुफ्त में मिलने वाले सरकारी नमक का हक अदा करने के लिए हमने भाजपा को वोट दिया है। सरकार हमें मुफ्त में चावल-दाल…
  • इंदिरा जयसिंह
    नारीवादी वकालत: स्वतंत्रता आंदोलन का दूसरा पहलू
    19 Mar 2022
    हो सकता है कि भारत में वकालत का पेशा एक ऐसी पितृसत्तात्मक संस्कृति में डूबा हुआ हो, जिसमें महिलाओं को बाहर रखा जाता है, लेकिन संवैधानिक अदालतें एक ऐसी जगह होने की गुंज़ाइश बनाती हैं, जहां क़ानून को…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश विधानसभा निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित, उठे सवाल!
    19 Mar 2022
    मध्यप्रदेश विधानसभा में बजट सत्र निर्धारित समय से नौ दिन पहले स्थगित कर दिया गया। माकपा ने इसके लिए शिवराज सरकार के साथ ही नेता प्रतिपक्ष को भी जिम्मेदार ठहराया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License