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आंदोलन
समाज
भारत
"जेल में पुलिस ने हमारे कपड़े उतरवा दिए और हमें रात-दिन टॉर्चर किया"
क्या इस देश में अब गांधी की बात करना, उनके बताए सत्य-अहिंसा के रास्ते पर चलना गुनाह हो गया है? उत्तर प्रदेश के हालात तो यही हैं। पदयात्रा पर निकले सत्याग्रहियों को बार-बार गिरफ़्तार करना इसी बात का संकेत है। सत्याग्रहियों का आरोप है कि फतेहपुर जेल में पुलिस ने उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया है।
सोनिया यादव
11 Mar 2020
नागरिक सत्याग्रह

फतेहपुर में गिरफ्तार सत्याग्रहियों को सोमवार, 9 मार्च की रात पुलिस ने जेल से ज़मानत पर रिहा कर दिया। रिहा होते ही सत्याग्रहियों ने अपने पहले से तय कार्यक्रम अनुसार दोबारा पदयात्रा शुरू करने का ऐलान किया। साथ ही पुलिस पर गिरफ्तारी के दौरान शारिरिक और मानसिक प्रताड़ना का आरोप भी लगाया है। 14 मार्च से इस यात्रा के तीसरे और अंतिम चरण, फ़तेहपुर से राजघाट दिल्ली की शुरुआत होगी।

सत्याग्रह पदयात्रा में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ने बताया, ‘जेल में पुलिस द्वारा हमें प्रताड़ित किया गया, हमारे साथियों को मारा गया, मानसिक प्रताड़ना दी गई। हमारे कपड़े उतरवाकर परेड करवाई गई, हमें घंटों घुटनों के बल खड़ा रखा गया, हमें रात-दिन टॉर्चर किया गया। उन्हें लगा कि शायद ये सब करने से हम टूट जाएंगे लेकिन इन सब से हमारा मनोबल कई गुना ज्यादा बढ़ गया है, अब हम पहले से ज्यादा तैयार हैं। हमने चलना चुना है और हम चलते जाएंगे, जेल जाने से बचने के लिए हम शांति के प्रयास करना नहीं छोड़ेंगे।'

इस मुल्क के लिये जितनी प्रासंगिकता मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा गिरजाघर की है उतनी ही प्रासंगिकता गांधी और उनके अमन,प्रेम के संदेश की है।
अगर प्रशासन गांधी की बात करने को शांतिभंग मानता है तो हम बार बार यह काम करेंगे और इसके बदले जो भी सज़ा मिलेगी उसे सहृदय स्वीकार करते हैं|@ms_yuva pic.twitter.com/m0EBwAAUW7

— Nagrik Satyagrah (@NagrikSatyagrah) March 11, 2020

बता दें कि गिरफ्तार सत्याग्रहियों ने 8 मार्च को जेल से भारतवासियों के नाम एक खुला पत्र लिखा था, जिसमें पद्यात्रियों ने कहा था कि प्रशासन द्वारा उनके सामने शर्त रखी गई है कि वो उस माफीनामे पर हस्ताक्षर करें जिसमें ये लिखा गया था कि 'हमें शांतिभंग के अंदेशे में गिरफ्तार किया गया है और हम वचन देते हैं कि हम आगे से शांतिभंग नहीं करेंगे और अपनी यात्रा शहर से हटकर कानपुर की ओर ले जाएंगे।' लेकिन सभी सत्याग्रहियों ने इस माफीनामे को ये कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि गांधी की बात करना, अमन और भाईचारे की बात करना, अहिंसा के रास्ते पर चलना, कोई गुनाह नहीं है और न ही कहीं से शांतिभंग की स्थिति पैदा करना है। और अगर ये गुनाह है तो हम इसे सहज स्वीकार करते हैं।

सत्याग्रहियों का कहना है कि दो ध्रुवों में बटें समाज के बीच चंद युवा पैदल अपने क़दम बढ़ाते हुए शांति और संवाद की रेखा खींच रहे हैं। यह बात उत्तर प्रदेश प्रशासन को नागवार गुज़र रही है इसलिए अलग-अलग जगहों पर शांति भंग के अंदेशों में बिच हमें जेल में डाल दिया जाता है। इस मुल्क के लिये जितनी प्रासंगिकता मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा गिरजाघर की है उतनी ही प्रासंगिकता गांधी और उनके अमन, प्रेम, भाईचारा के संदेश की है। अगर प्रशासन गांधी की बात करने को शांतिभंग मानता है तो हम बार-बार यह काम करेंगे और इसके बदले जो भी सज़ा मिलेगी उसे सहृदय स्वीकार करते हैं, यही हमारा सविनय अवज्ञा है।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के छात्र राज अभिषेक ने न्यूज़क्लिक को बताया, ‘हमारी नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा 2 फरवरी को चौरी चौरा गोरखपुर से शुरू हुई थी। इसका दूसरा चरण फतेहपुर में कल समाप्त हुआ है, अब हम तीसरे चरण में यहीं से राजघाट की ओर बढ़ेंगे। राज्य सरकार हमारी सत्याग्रह यात्रा को रोकने का हर संभव प्रयास कर रही है लेकिन हम गांधी के संदेश को लेकर प्रतिबद्ध हैैं। नफ़रत के इस दौर में हमें पूरा भरोसा है कि हम प्यार से हर दिल को जीत लेंगे। धर्म और जाति में रोज़ बांटे जा रहे समाज और समाज में बढ़ती हिंसा को रोकने का एक ही रास्ता है, एक दूसरे से मिलना, संवाद स्थापित करना। हमें देश के शांतिप्रिय नागरिकों के सहयोग की प्रतीक्षा है, यही हमारा सत्याग्रह है।'

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अभी तक क्या-क्या हुआ

- 2 फरवरी 2020 को नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा की शुरुआत चौरी-चौरा के शहीद स्मारक से हुई थी। यात्रा का प्रथम चरण 16 फरवरी 2020 को बनारस में सम्पन्न होना तय था।

- 11 फरवरी को लगभग 200 किमी की यात्रा करके सत्याग्रही गाजीपुर पहुंचे, यहां पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए 10 सत्याग्रहियोंं को गिरफ्तार कर लिया।

-12 फरवरी को इनकी ज़मानत के लिए एसडीएम ने अजीबो-गरीब शर्तें रखीं। इसके बाद 13 फरवरी से इन सत्याग्रहियों ने जेल में भूख हड़ताल शुरू कर दी, जेल से भारतवासियों के नाम खत लिखा।

-15 फरवरी को इन लोगों के समर्थन में उपवास पर बैठे लोगों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

-16 फरवरी की शाम पुलिस ने सत्याग्रहियों को जेल से ज़मानत पर रिहा कर दिया।

-17 फरवरी की सुबह सत्याग्रहियों ने फिर से यात्रा शुरू की। पुलिस ने इनके समूह के 5-6 लोगों को हिरासत में ले लिया और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए इन्हें गाजीपुर जिले से बाहर बनारस ले जाने लगी।

- 20 फरवरी को 20 दिनों की 287 किमी की पदयात्रा के बाद सत्याग्रहियों का पहला चरण बनारस में समाप्त हुआ।

- 24 फरवरी को इस यात्रा के दूसरे चरण बनारस से कानपुर की शुरुआत हुई।

- 5 मार्च को इन सत्याग्रहियों को पुलिस ने फतेहपुर से दोबारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

- 9 मार्च की रात इन्हें बिना शर्त जेल से रिहा कर दिया गया।

गौरतलब है कि गोरखपुर के चौरीचौरा से दिल्ली के राजघाट तक महात्मा गांधी का शांति संदेश लेकर निकली नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा की टीम पिछले 38 दिनों में 550 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आज़मगढ़, ग़ाज़ीपुर, वाराणसी, भदोहि, इलाहाबाद, कोशांबी जिलों से होते हुए फ़तेहपुर पहुँच गई है। इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन सत्याग्रहियों को दो बार गिरफ्तार किया। पहली बार गा़ज़ीपुर में 6 दिन और दूसरी बार फतेहपुर में 5 दिन की कैद में इन्हें रखा गया। हालांकि सत्याग्रहियों का भी साफ तौर पर कहना है कि चाहे हमें बार-बार जेल जाना पड़े लेकिन हम शांति के प्रयास करना नहीं छोड़ेंगे।

इसे भी पढ़ें: नागरिक सत्याग्रहियों ने माफ़ी मांगने से किया इंकार, देशवासियों के नाम लिखा खुला पत्र

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