NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
उत्तराखंड में भाजपा को पूर्ण बहुमत के बीच कुछ ज़रूरी सवाल
"बेरोजगारी यहां बड़ा मुद्दा था। पर्वतीय क्षेत्रों का विकास भी बड़ा मुद्दा था। भू-कानून, पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली बड़ा मुद्दा था। पलायन बड़ा मुद्दा था। लेकिन नतीजे तो यही कहते हैं कि सभी क्षेत्रीय मुद्दे हाशिए पर चले गए।"
वर्षा सिंह
11 Mar 2022
uttarakhand

उत्तराखंड की 70 में से 47 सीटें भाजपा को सौंपकर जनता ने अपना फ़ैसला सुना दिया है। भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में अधिक सीटें और बेहतर वोट प्रतिशत हासिल करने के बावजूद कांग्रेस को इन नतीजों से कई सबक लेने हैं। भाजपा-कांग्रेस, दोनों ही दलों ने जिनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा वे अपनी सीट नहीं बचा पाए। पुष्कर सिंह धामी और हरीश रावत दोनों को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा की जीत ये भी तय करती नज़र आती है कि लोगों ने अपने क्षेत्रीय नुमाइंदों से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट दिए।

उत्तराखंड में भाजपा का वोट शेयर 44.33% और कांग्रेस का वोट शेयर 37.91% रहा। स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग

नतीजे

2017 की तुलना में 2022 में भाजपा की 10 सीटें कम हुई हैं और ये आंकड़ा 57 से 47 पर आ गया है। वोट शेयर भी 46.51% से 44.33% हुआ है। लेकिन बहुमत स्पष्ट है।

कांग्रेस ने 2017 के 11 सीटों की तुलना में इस बार 19 सीट पर जीत दर्ज की है। वोट शेयर भी 33.49% की तुलना में 37.91% हुआ है। लेकिन पार्टी अपने खुद के 38-40 सीट के आकलन से भी बहुत दूर है। सत्ता से उसकी राह बहुत दूर हुई है।

उत्तराखंड अलग राज्य बनने के बाद से ही कांग्रेस और भाजपा को अदल-बदल कर सत्ता हस्तांतरित करता रहा है। इस बार राज्य का ये मिथक भी टूटा है।

वहीं बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश की एक सीट तुलना में उत्तराखंड में 2 सीटें जीती हैं।

उत्तराखंड क्रांति दल लगातार दो विधानसभा चुनाव (2017 और 2022) में अपना खाता नहीं खोल पायी और जनाधार गंवा दिया है।

दो निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है।

पंजाब में जीत का जश्न मना रही आम आदमी पार्टी शून्य पर रही।

चुनाव जीते, नेतृत्व हारे

भाजपा के पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट पर करीब 7 हज़ार वोटों के अंतर से हारे हैं। कांग्रेस की चुनाव कमान संभाल रहे हरीश रावत करीब 14 हज़ार वोटों से हारे हैं। आम आदमी पार्टी का प्रमुख चेहरा कर्नल अजय कोठियाल गंगोत्री सीट पर सिर्फ 10 % वोट मिले।

राजनीतिक विश्लेषक योगेश भट्ट कहते हैं कि राज्य में जिन चेहरों पर चुनाव लड़े गए, जो चेहरे टीवी स्क्रीन और अखबारों में कई महीनों से छाए हुए थे, उन्हें जनता ने नकार दिया। पहाड़ में मोदी मैजिक चला। ये समझ  आता है कि लोगों ने मोदी के नाम पर वोट दिए। राज्य की राजनीति नेतृत्व विहीन राजनीति हो गई है। राज्य की लीडरशिप खत्म हो गई है। उत्तराखंड के लिए ये स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती है।

मुद्दे हाशिए पर

योगेश भट्ट कहते हैं “बेरोजगारी यहां बड़ा मुद्दा था। पर्वतीय क्षेत्रों का विकास भी बड़ा मुद्दा था। भू-कानून, पहाड़ में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली बड़ा मुद्दा था। पलायन बड़ा मुद्दा था। लेकिन नतीजे तो यही कहते हैं कि सभी क्षेत्रीय मुद्दे हाशिए पर चले गए।"

उनका आकलन है कि लाभार्थी वाली योजनाएं शायद पहाड़ पर कारगर रही हैं। किसानों के खाते में सीधे पैसे आना, गैस सिलिंडर की सब्सिडी खाते में आना, मुफ्त में अनाज मिलना और आयुष्मान कार्ड जैसी योजनाएं वोटर को भा रही हैं।

इन नतीजों में महिलाओं की बड़ी भूमिका रही है। 9 पर्वतीय जिलों की 34 सीटों में से 33 पर पुरुषों के मुकाबले ज्यादा महिलाओं ने वोट डाले। सिर्फ उत्तरकाशी की पुरोला सीट पर महिलाओं की तुलना में अधिक पुरुष वोट पड़े। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 34 पर्वतीय सीट पर 53% पुरुष मतदाता ने और 64% महिला मतदाता ने वोट किया। तो इन आंकड़ों के मुताबिक पहाड़ में महिलाएं निर्णायक भूमिका में रहीं।

सामाजिक कार्यकर्ता और पहाड़ के मुद्दों पर काम करने वाली गीता गैरोला कहती हैं “महिलाओं और बुजुर्गों के बीच नरेंद्र मोदी की जो छवि तैयार की गई है, उस छवि ने ही शायद काम किया है। गीता कहती हैं कि नतीजों से पहले बातचीत में कुछ और ही तस्वीर निकलकर सामने आ रही थी लेकिन नतीजे बेहद अप्रत्याशित लग रहे हैं। ऐसा लगता है कि लोगों को अब मुद्दों की जरूरत नहीं रह गई है। दो महीने के राशन-पानी पर वे विश्वास करते हैं। चुनाव से पहले पहाड़ के गांवों में खूब राशन-पानी बंटा।"

पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए

धामी बनेंगे मुख्यमंत्री?

भाजपा के खेमे में जश्न का माहौल है और अब अगली हलचल इस बात पर है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा? पार्टी में मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है। सतपाल महाराज, मदन कौशिक, डॉ धन सिंह रावत से लेकर गणेश जोशी जैसे नामों तक पर चर्चा है। त्रिवेंद्र सिंह रावत को जब मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था तो सतपाल महाराज प्रमुख दावेदारों में से एक थे। इसके अलावा डॉ रमेश पोखरियाल निशंक और अनिल बलूनी के नाम भी उछाले जा रहे हैं। लेकिन यहां के सियासी गलियारों में हवा अब भी पुष्कर सिंह धामी के पक्ष में ही बह रही है। चंपावत में भाजपा से जीते कैलाश गहतोड़ी ने धामी के लिए सीट छोड़ने की बात कही। फ्लावर नहीं फायर है और धाकड़ धामी से जुमलों से नवाजे गए पुष्कर सिंह धामी मैच जीतने वाली टीम के हारे हुए कप्तान बन गए हैं।

इस चुनाव के कुछ और ज़रूरी नोट्स

चुनाव से पहले कांग्रेस लगातार आंतरिक कलह से जूझ रही थी। एक तरफ हरीश रावत खेमा रहा और दूसरी तरफ प्रीतम सिंह व अन्य। चुनाव के ऐन पहले हरीश रावत ने खुद को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की मांग को लेकर पार्टी में काफी उथल-पुथल भी मचाई।

उत्तराखंडियत की पहचान रखने वाले हरीश रावत ने अपनी हार विनम्रता से स्वीकार कर ली है और ‘चूक कहां हुई’ इस पर कुछ समय देने की बात कही है। 2017 में दो विधानसभा सीटों से हार, 2019 में लोकसभा चुनाव में हार और 2022 विधानसभा चुनाव में सीट बदलने के बाद (पहले रामनगर, फिर लालकुआं सीट चुनी) हार का सामना करने के बाद हरीश रावत का राज्य की राजनीति में करियर अब किस दिशा में जाएगा?

बहू अनुकृति गुंसाई के लिए बागी हुए हरक सिंह रावत कम से कम 5 वर्ष के लिए राज्य की राजनीति से दूर हो गए हैं। भाजपा से बागी होकर वे कांग्रेस में शामिल हुए। उन्हें टिकट नहीं मिला लेकिन उनकी बहू को लैंसडाउन से टिकट मिला। ये चुनाव अनुकृति हार गई हैं।

उत्तराखंड विधानसभा में अब तक 5 से ज्यादा महिलाएं एक साथ चुनकर नहीं आईं लेकिन पांचवी विधानसभा में 7 महिलाएं जीत के साथ पहुंची हैं। इनमें से दो नाम ऋतु खंडूड़ी और अनुपमा रावत के हैं। ऋतु खंडूड़ी की इस बार सीट बदल दी गई थी। वहीं अनुपमा रावत, हरीश रावत की बेटी हैं। पिता चुनाव हार गए लेकिन बेटी जीत गई।

हरिद्वार की खानपुर विधानसभा सीट पर पत्रकार और स्टिंग प्रकरण के लिए जाने गए निर्दलीय प्रत्याशी उमेश कुमार ने जीत दर्ज की है। खानपुर सीट कुंवर प्रणब सिंह चैंपियन की सीट रही थी। चैंपियन यहां से चार बार विधायक रहे थे। इस बार उनकी पत्नी कुंवरानी देवयानी प्रत्याशी थीं। वे तीसरे स्थान पर रही। उमेश कुमार 3 महीने से क्षेत्र में बेहद सक्रिय हुए और खूब हेलिकॉप्टर उड़ाए।

जीत-हार

चुनावी आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे एसडीसी फाउंडेशन के अनूप नौटियाल भाजपा की भारी जीत के लिए 5 प्रमुख वजहें गिनाते हैं। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी का मैजिक, महिला मतदाता, डबल इंजन, धामी फैक्टर और चुनावी मुद्दे/ संवाद भाजपा की जीत की वजह बने।

चमोली में राजनीतिक और पर्यावरण कार्यकर्ता अतुल सती चुनाव नतीजों के बाद ट्वीट करते हैं “लंबी है गम की शाम मगर शाम ही तो है”।

(वर्षा सिंह देहरादून स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं)

Uttarakhand Election 2022
BJP
Congress
HARISH RAWAT
Pushkar Singh Dhami

Related Stories

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव परिणाम: हिंदुत्व की लहर या विपक्ष का ढीलापन?

यूपीः किसान आंदोलन और गठबंधन के गढ़ में भी भाजपा को महज़ 18 सीटों का हुआ नुक़सान

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

पंजाब : कांग्रेस की हार और ‘आप’ की जीत के मायने

यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !

जनादेश—2022: वोटों में क्यों नहीं ट्रांसलेट हो पाया जनता का गुस्सा

गोवा में फिर से भाजपा सरकार

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल


बाकी खबरें

  • VK
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड की पॉलिटिकल कॉमेडी/ट्रेजडी!: खूब हंसे हरक और धामी और ‘समंदर में तैरने’ निकले हरीश रावत
    29 Dec 2021
     एक बड़ी सी मेज़ के गार्जियन वाली चेयर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बैठे थे। बगल वाली कुर्सी पर, भाजपा हो या कांग्रेस की सरकार, मंत्री बने रहने वाले डॉ.
  • left
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    संविधान और जनविरोधी रास्ते पर चल रही है शिवराज सरकार : माकपा
    29 Dec 2021
    माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा है कि विधानसभा सभा सत्र में भी साबित हो गया है कि यह सरकार किस प्रकार विधायकों के भी अभिव्यक्ति के अधिकार का हनन कर रही है।
  • (अ)धर्म संसद: “नरम हिंदुत्व की राजनीति के सहारे कांग्रेस नहीं लड़ सकती भाजपा की सांप्रदायिकता से”
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    (अ)धर्म संसद: “नरम हिंदुत्व की राजनीति के सहारे कांग्रेस नहीं लड़ सकती भाजपा की सांप्रदायिकता से”
    29 Dec 2021
    छत्तीसगढ़ माकपा ने कहा कि एक राजनीतिक पार्टी के रूप में अब कांग्रेस को यह समझ लेना चाहिए कि 'नरम हिंदुत्व' की राजनीति का सहारा लेकर, साधु-संतों की आवभगत करके और राम के नाम का जाप करके भाजपा की…
  • नया भारत-नई शिक्षा!: अमित शाह की ABCD के जवाब में अखिलेश की ABCD
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नया भारत-नई शिक्षा!: अमित शाह की ABCD के जवाब में अखिलेश की ABCD
    29 Dec 2021
    यूपी में अमित शाह समाजवादी पार्टी पर प्रहार करते हुए नई ABCD पढ़ा रहे हैं तो अखिलेश यादव भी उन्हीं के अंदाज़ में पलटवार कर रहे हैं। अब बच्चे कन्फ्यूज़ न हों इसलिए आप ही चुनाव में सही फ़ैसला लेकर उनका…
  • JEWER
    मुकुंद झा
    जेवर एयरपोर्टः दूसरे फेज के लिए भूमि अधिग्रहण नहीं होगा आसान, किसानों की चार गुना मुआवज़े की मांग
    29 Dec 2021
    जेवर एयरपोर्ट के निर्माण के दूसरे फेज के लिए छह अन्य गांवों से 1,334 हेक्टेयर और भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसको लेकर किसानों ने विरोध शुरू कर दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License